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Bhojpuri: नहान, दान क पवित्र माघ महीना शुरू, जानीं खासियत

Bhojpuri: नहान, दान क पवित्र माघ महीना शुरू, जानीं खासियत

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हिंदू धरम में माघ महीना बहुत पवित्र मानल जाला. पूरे महीना में धरम, करम, नहान, दान, व्रत, उपवास, सत्संग क विधान हौ. भारतीय संवत्सर क 11वां चंद्रमास अउर 10वां सौरमास माघ कहाला. मघा नखत वाली पूर्णिमा के नाते महीना क नाव माघ पड़ल हौ. माघ महीना क सीधा संबंध माधव यानी भगवान श्रीहरि से हौ. एह के नाते शुरू में इ महीना माध कहाय. माघ 18 जनवरी मंगलवार के शुरू होइ के 16 फरवरी के माघी पूर्णिमा के नहान के साथ समाप्त होई.

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माघ मास नहान क अनंत महातम समेटले हौ, खास कइके प्रयागराज में संगम नहाए क. संगम न होय त गंगा, गोदावरी, कावेरी, कृष्णा, क्षिप्रा, नर्मदा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र आदि नदिन में भी डुबकी लगइले से आदमी क कुल पाप कटि जाला अउर बैकुंठ क दरवाजा खुलि जाला. स्कंध पुराण के रेवाखंड में माघ नहान क एक ठे कथा हौ -प्राचीन काल में नर्मदा के किनारे शुभव्रत नावे क एक ठे बाभन रहत रहल. शुभव्रत वेद-शास्त्र क ज्ञानी रहल. लेकिन ओकर जादा ध्यान धन जुटावय में लगि गयल. पूरी जिनगी उ खूब धन जुटइलस. बुढ़ाई आइल त रोग जकड़ि लेहलस. तब ओहके चटकना लगल कि हम पूरी जिनगी धन कमाए में लगाइ दिहे, अब परलोक सुधारय बदे कुछ करय के चाही. अचानक ओहके पदम पुराण क उ श्लोक याद आयल, जवने में माघ नहान के फल के बारे में बतावल गइल रहल –
माघे निमग्ना सलिले सुशीते,
विमुक्तपापास्त्रिदिवं प्रयांति.

एही श्लोक के अधार पर उ माघ नहाए क संकल्प लेहलस, अउर नर्मदा में नहाए लगल. शुभव्रत नौ दिन सबेरयं नर्मदा में नहइलस अउर 10वें दिना नहइले के बाद शरीर त्यागि देहलस.

शुभव्रत पूरी जिनगी भले ही कवनो अच्छा काम नाहीं कइले रहल. लेकिन अंतिम समय में ओहके पश्चाताप भइल अउर माघ महीना में नर्मदा में नहइलस, जवने के नाते ओकर मन पवित्र होइ गयल. ओहके बैकुंठ में जगह मिलल. त माघ महीना क महत्व एह कथा से समझल जाइ सकयला. पदम पुराण में भी माघ महीना क वर्णन कयल गयल हौ. कहल गयल हौ कि भगवान श्रीहरि पूजा कइले से ओतना प्रसन्न नाहीं होतन, जेतना माघ में पवित्र नदी में नहइले से होलन. भगवान क प्रेम अउर कृपा पावय बदे आदमी के चाही कि माघ जरूर से नहाय.
प्रीतये वासुदेवस्य सर्वपापानुत्तये,
माघ स्नानं प्रकुर्वीत स्वर्गलाभाय मानवः.

माघ महीना में ठंढा पानी में डुबकी लगावय क महातम हौ. एह महीना में गरम पानी में न नहाए के चाही. माघ में सबेरय नहाइ के ब्रह्मवैवर्तपुराण क दान कइले से सीधे ब्रह्मलोक प्राप्त होला. माघ में ब्रह्मवैवर्तपुराण क कथा भी सुनय के चाही. अगर इ न होइ पावय त कम से कम माघ महात्म्य त जरूर से सुनय. कथा, प्रबचन, सत्संग, नहान, दान, उपवास, अउर भगवान माधव क पूजा माघ क मूल करम हौ. एह महीना में भोजन कम करय के चाही. एक बेला सात्विक भोजन करय त सबसे बढ़ियां. माघ में कल्पवास क विधान एही कुल के नाते हौ.

पूरे माघ भर प्रयागराज में कल्पवास कइले से तन-मन शुद्ध होइ जाला. जिनगी भरे क पाप कटि जाला. माघ क समापन पूर्णिमा के नहान से होला. इ सबसे महत्वपूर्ण नहान होला. एह साल माघी पूर्णिमा के शनि अउर गुरु क अद्भुत संयोग बनत हौ, सूर्य अउर गुरु क भी संयोग रही. जवने के नाते पूर्णिमा के नहाइ के दान कइले से चंद्रदोष खतम होइ जाई, अउर बाकी ग्रहन क भी बढ़िया प्रभाव पड़ी. माघ में तीन बार प्रयागराज नहइले से जवन फल मिलयला, उ फल धरती पर 10 हजार अश्वमेध यज्ञ कइले से भी नाहीं मिलि पावत.
प्रयागे माघमासे तुत्र्यहं स्नानस्य यद्रवेत्.
दशाश्वमेधसहस्त्रेण तत्फलं लभते भुवि..

एही के नाते माघ में प्रयागराज में कल्पवास करय वालन क मेला उमड़ि पड़यला. मान्यता हौ कि 33 करोड़ देवी-देवता भी मनुष्य क रूप धइके माघ में प्रयागराज कल्पवास बदे आवयलन, जप-तप अउर दान करयलन. श्री रामचरित्र मानस के बालकांड में तुलसीदास लिखले हउअन-
माघ मकर गति रवि जब होई,
तीरथपतिहि आव सब कोई.

यानी माघ महीना में जब सुरुज मकर राशि में पहुंचयलन, तब तीरथराज प्रयाग में संगम के पवित्र तट पर सब लोगन क यानी देवी-देवतन अउर मनुष्यन क कल्पवास बदे जुटान होला. तमाम साधु-सन्यासी इहां हर साल माघ में कल्पवास करयलन. त्रेतायुग में भगवान राम, द्वापर युग में भगवान कृष्ण अउर युधिष्ठिर भी प्रयागराज में कल्पवास कइले रहलन. पुराण के अनुसार, भगवान ब्रह्मा प्रयाग में ही संगम तट पर दशाश्वमेध यज्ञ कइ के सृष्टि क रचना कइले रहलन. भगवान शिव इहां कई रूप में मौजूद हयन. भगवान विष्णु त्रिवेणी में साक्षात वास करयलन. एही के नाते प्रयागराज के तीरथन क राजा कहल जाला.

प्रयागराज के अलावा हरिद्वार, कुरुक्षेत्र, उज्जैन, काशी, नासिक जइसन तीर्थस्थलन पर भी माघ नहान क महत्व हौ. महाभारत में माघ मास के बारे में कहल गयल हौ कि एह पवित्र महीना में तपस्वी लोगन के तिल क दान कइले से नरक क मुंह नाहीं देखय के पड़त. माघ के द्वादसी तिथि के उपवास कइ के भगवान विष्णु क पूजा कइले से राजसूय यज्ञ के बराबर पुन्य मिलयला.

(सरोज कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Bhojpuri Articles, Bhojpuri News

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