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Bhojpuri Spl: धर्म में निहित प्रेम, सेवा आ क्षमा तत्व बतावत रहले ह महात्मा गांधी

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के लेके बहुत सारा लोग में मतभेद बा. कए लोग आज भी उनका के अच्छा से ना समझ पाइल. लेकिन जब विस्तार से उनका बारे में पढ़ब त पाइब कि गांधी जी क्षमा, सेवा, प्रेम के माने वाला इंसान रहीं.

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महात्मा गांधी आ रूसी लेखक लियो टालस्टाय के बीच 1909 में जौन पत्राचार भइल रहे ओकरा के पढ़ला पर ई दूनो महान लोगन के अथाह गहराई के पता चलता। ओह घरी गांधी जी दक्षिण अफ्रीका में रहले। अगिले साल सन 1910 में 82 साल के उमिर में टालस्टाय के मृत्यु हो गइल। महात्मा गांधी जब टालस्टाय के रचना- “द किंगडम आफ गॉड इजविदिन यू” (“भगवान के साम्राज्य रउवा भितरे बा”) पढ़ले त उनुका के एगो प्रशंसात्मक चिट्ठी लिखले। टालस्टाय ओकरा जबाब में लिखले कि अहिंसा आ प्रेम एक ही सिक्का के दूगो पहलू ह।  लिखले कि आपसी संबंध में सहनशीलता आ प्रेम एक दूसरा के पूरक हउवन स। अइसहूं कई लोग कहेला कि गांधी जी पर टालस्टाय के प्रभाव रहे। टालस्टाय, भारत के महात्मा गांधी के माध्यम से ढेर जनले।

लियो टालस्टाय, उमिर में गांधी जी से बड़ रहले। गांधी जी के जनम 2 अक्तूबर 1869 में भइल रहे त टालस्टाय के जनम 9 सितंबर 1828 के भइल रहे। त दूनो महान लोगन में 41 साल के छोटाई- बड़ाई रहे। एमें कौनो दू राय नइखे कि टालस्टाय, गांधी जी के प्रिय लेखक रहले। गांधी जी वैष्णव परिवार में जनम लेले रहले आ ओही परिवेश में जवान भइले। उनुकर प्रिय भजन- वैष्णव जन ते तेने कहिए जे, पीर पराई जाने रे.. आजु ले मशहूर बा। एही से गांधी दर्शन में क्षमा आ तितिक्षा के तत्व ओत- प्रोत बा। जालियांवाला बाग के नरसंहार करे वाला दुष्टतम अंग्रेज जनरल डायर के महात्मा गांधी क्षमा क दिहले। कहले कि अपराधी से ना अपराध से लड़े के चाहीं। जब जनरल डायर अपना जीवन के अंतिम समय में लकवा से गंभीर रूप से बेराम हो गइले त एगो गांधी भक्त उनुका के चिट्ठी लिखलसि कि ई बेमारी जनरल डायर के एसे भइल बिया काहें से कि उ कर्म के फल भोगत बा। त महात्मागांधी ओकरा के जबाब दिहले कि हम नइखीं मानत। हमरो अपेंडिसाइटिस, पेचिश आ लकवा केहल्का असर भइल रहे। त हम कौना कर्म के फल भोगतानी।

गांधी जी कहले- जनरल डायर से पापी के हो सकेला? बाकिर तबो जालियांवाला बाग कांग्रेस इनक्वायरी कमेटी हमरा कहला से जनरल डायर के सजा ना देबे के फैसला कइलस। हम जनरल डायर से खुदे मिले के चाहत रहनीं ताकि उनुकर हृदय परिवर्तन क सकीं। बाकिर एह जीवन में ई संभव ना भइल। त एह घटना से गांधी जी के क्षमा भाव के अंदाज लगावल जा सकेला। हालांकि जनरल डायर के अपना एह दुष्कर्म पर अंत तक ले अफसोस ना भइल। जनरल डायर जालियांवाला बाग कांड के कुछ पीड़ित परिवारन खातिर अपना लग से कुछ रुपया देले रहे। बाकिर ऊ अपना के मानवीय देखावे खातिर। भीतर से ऊ अंत तक दुष्टे रहे। गांधी जी त जनरल डायर के माफ क दिहले बाकिर देश के अनेक लोग गांधी जी से सहमत ना रहल लोग। विरोध के स्वर तेज भइल रहे। बाकिर गांधी जी नियर विराट व्यक्तित्व के सामने केहू के ना चलल। हम ई नइखीं कहत कि हत्यारा के सजा ना देबे के चाहीं, बाकिर गांधी जी के बारे में जब चर्चा होईत उनुका क्षमा तत्व के महत्व देबहीं के परी।

आजु ना गांधी जी अइसन लोग बा, आ नाघुटना तक एगो धोती पहिर के उघारे देहे देश सेवा के केहू ब्रत ली। गांधी जी विरल व्यक्ति रहले, महान रहले। एही से उनुका के महात्मा कहल जात रहे। गांधी जी के विचारधारा के मूल में रहे सत्याग्रह आ अहिंसा। ए दूनो के जदि क्षमा से जोड़ि के देखीं त चिंतन धारा के सर्किल पूरा हो जाई। बड़े- बड़े अपराध केगांधी जी क्षमा क दिहले। एही से उनुका क्षमाशील विचारधारा के गांधी मार्ग भी कहल जाला। सन 1914 में जब गांधी जी भारत लौटले त साबरमती में सेवाग्राम आश्रम में रहले आ ध्यान, प्रार्थना, उपवास, ब्रह्मचर्य आ “राम” मंत्र के जाप के प्रमुखता दिहले। सन 1920 तक हिंदू धर्म के विशिष्ट व्याख्याता के रूप में उनुका के देखल जाए लागल। गांधी जी के दृढ़ विश्वास रहे कि ध्यान आ जप के बिना ब्रिटिश साम्राज्य से लड़ाई मुश्किल हो जाई। गांधी जी कहले कि जदि हमनी का आंख का बदले आंख आ दांत का बदला दांत लेबे लागीं जा त पूरादु निया आन्हर आ बे दांत के हो जाई। क्षमा पर कहले कि कमजोर आदमी क्षमा ना क सकेला, क्षमा त ऊहे क सकेला, जे ताकतवर होखे।

त चिंतक लोगन के एगो विचारधारा कहेला कि गांधी दर्शन के मूल स्रोत वैदिक दर्शन ह जेकर महान प्रणेता रहले- आदि शंकराचार्य। मानेअद्वैतवाद। महात्मा गांधी के सबसे बड़ देन ई ह कि ऊ भारतीयता के केंद्र में राखत रहले ह, उनकर सोच धर्म पर आधारित समाज रचना पर केंद्रित रहल ह। महात्मा गांधी भारत के एह असली शक्ति के चिन्हेवाला प्रमुख नेता रहले। ऊ साफे कहत रहले ह- “मुझे धर्म प्यारा है, इसलिए मुझे पहला दुख तो यह है कि हिंदुस्तान धर्मभ्रष्ट होता जा रहा है। धर्म का अर्थ मैं हिंदू, मुस्लिम या अन्य। लेकिन इन सब धर्मों के अंदर जो धर्म है, वह हिंदुस्तान से जा रहा है, हम ईश्वर से विमुख होते जा रहे हैं।“ महात्मा गांधी के धर्म ईश्वरोन्मुखी रहल ह- माने मानवता केंद्र में रहलि ह। सद्भाव, प्रेम, सहयोग आ क्षमा। गांधी जी से पूछल गइल कि ईश्वर के हउवन? त उनुकर जबाब रहे- ईश्वर “सत्य” हउवन।  गांधी जी के ई बिचार भगवद्गीता के दूसरा अध्यायके श्लोक- नासतो विद्यते भावो नाभावो विद्यते सतः।

उभयोरपिदृष्टोऽन्तस्त्वनयोस्तत्त्वदर्शिभिः।।2.16।।
( अर्थ- असत् वस्तु के त अस्तित्व नइखे आ सत् के कभीअभाव नइखे रहल। एह तरे ई दूनों के तत्त्व,  तत्त्वदर्शीज्ञानी पुरुष लोग देखि चुकल बा।)।

चिंतक लोगन के एगो धारा कहेला कि गांधी जी पतंजलि योग दर्शन के अष्टांग योग के समर्थक रहले ह- जौना के प्रारंभ होता- यम, नियम से। त गांधी जी के बारे में विभिन्न लोग अपना- अपना तरीका से देखेला। बाकिर गांधी जी के उनुके दर्शन के माध्यम से हमनी का ठीक से जानि पाइब जा। गांधी जीशूद्र जाति के “हरिजन”कहले। काहें से कि एह जाति के अछूत मानल जात रहे। गांधी जी एहतरे के कौनो भेदभाव के खिलाफ रहले। आखिर छुआछूत के खिलाफ आंदोलन कइले हरिजन जाति के मुख्यधारा से जोड़िके एह जाति के उत्थान खातिर हरिजन सेवक संघ के स्थापना कइले। हरिजन नांव के एगो अखबार निकलले। छुआछूत के खिलाफ आंदोलन कइले। हरिजन लोगन के प्रति अंग्रेज सरकार केअन्याय के खिलाफ गांधी जी भूख हड़ताल कइले, जवना से उनुकर हालत खराब भइल। केहू तरे उनुका के बचावल गइल। आजु ई जाति के लोग हर गरिमापूर्ण पद पर बा। एक हाली उनुका आश्रम में मदद खातिर कुछ कोढ़ रोग से ग्रस्त कुछ लोग आइल। गांधी जी ओह लोगन के कोढ़ पर अपना हाथ से दवाई लगवले, मलहम पट्टी कइले। खूब सेवा आ आदर कइले। जौना आर्थिक मदद खातिर आइल रहे लोग, मदद कइले। कोढ़ से ग्रस्त लोगन खातिर उनुका काम केआज भी सराहना कइल जाला। गांधी जी के एह पक्ष से सीख लेबे के परी।

दोसरा विश्वयुद्ध के अंत में ब्रिटेन में चर्चिल के पार्टी हारि गइल आ लेबर पार्टी के प्रधानमंत्री मिस्टर एटली (Mr. Atlee) भइले। चर्चिल त भारत के आजाद करहीं के ना चाहत रहले। बाकिर चुनाव हारि गइला का बाद उनुका लागल कि ब्रिटिश जनता उनुका के नापसंद करतिया। मिस्टर एटली भारत के आजादी के घोषणा कइले आ अपना प्रिय लोगन के बीच महात्मा गांधी के उल्लेख कइले। एही बीच भारत के वायसराय 2 सितंबर 1946 के भारतीय लोगन के द्वारा भारत के अंतरिम सरकार बनवा दिहले। मुहम्मद अल्ली जिन्ना के नेतृत्व में मुसलिम लीग अलग देश चाहत रहे। बंगाल में ओकर बर्चस्व रहे। मुसलमान लोगन के अलग देश ना मिलला से मुसलिम लीग बंगाल में दंगा क दिहलसि। भयंकर मारकाट आ तबाही भइल। करीब 5 हजार लोग मारल गइले आ करीब 15 हजार लोग जख्मी भइले।

एकरा बाद मुसलिम लीग नोआखाली में सांप्रदायिक दंगा क दिहलसि। लूट, मार, हत्या आ हिंसा के नंगा नाच शुरू भइल। बंगाल में जब दंगाफसाद सुरू भइल त गांधी जी ओहिजा पहुंचि गइले आ कहले कि भले दंगाई हमार हत्या क दसन। बाकिर जबले शांति ना होखी हम एइजा से ना जाइब। एगो मुसलिम औरत अमतस सलाम गांधीजी के अंध अनुयायी रहे। ओकरा के गांधी जी नोआखाली भेजले। अमतस सलाम नोआखाली जाकेभूख हड़ताल क दिहली। जब दंगा शांत भइल त अमतस सलाम गांधी जी के हाथ से फल के रसपीके आपन भूख हड़ताल खतम कइली। दंगा का घरी गांधी जी ई भजन गावत फिरसु- ईश्वरअल्ला तेरे नाम सबको सन्मति दे भगवान। मुसलिम लीग के तरफ से दंगा फइलावे  वाला जब उनकरा सामने आपन अपराध कबूल कइलस तगांधी जी ओकरा के तुरंते माफ क दिहले।

आखिरकार मार्च 1947 मेंलार्ड माउंटबेटन भारत के वायसराय नियुक्त भइलन। माउंटबेटन 3 जून 1947 के भारतविभाजन के घोषणा क दिहलन। तबो गांधी जी जवाहर लाल नेहरू से पुछले- देश बंटवारा केअलावा का अउरी कौनो उपाय नइखे। जवाहर लाल नेहरू कहले- ना बापू जी, अउरी कौनो उपायनइखे। दंगा त मुसलिम लीग फइलवलस बाकिर मुसलमान लोगन के भी बहुते नोकसान भइल। काहेंसे कि हिंदू समुदाय भी प्रतिक्रिया बचाव खातिर उग्र आ भयंकर हिंसक हो गइल। एही सेकहल जाला कि सांप्रदायिक हिंसा बहुते खराब चीज ह। एमें दूनों पक्ष के भारी नुकसानहोला। बड़ा गहिर घाव हो जाला जवना के भरे में बहुत दिन लागेला। कतने लइका अनाथ होजाले सन, कतने मेहरारू विधवा हो जाली सन। आखिर नोकसान त राष्ट्र के होला। गांधी जीएसे जनरल डायर आ दंगा करे वाला बदमाश के माफ क दिहले कि शायद एसे अपराधी सुधरि जासन। बाकिर उनुकरा बिचार के केहू महत्व ना दिहल। गांधी जी के ग्राम स्वराज के भीमहत्व ना दिहल गइल। आ कांग्रेस त गांधी जी के विचारधारा के दरकिनार क दिहलस।

कांग्रेस के राज में दलाली, कमीशनखोरी आ आम आदमी के हाशिया पर, एकदम निचला स्तर पर लेआदिहलस। नात आजादी के 74 साल बादो देश में नौजवान नोकरी खातिर काहें छिछियइते सन,महंगाई काहें चरम सीमा पर पहुंचित। कांग्रेस के राज में आम आदमी कुकिंग गैस खतमभइला पर भरल गैस सिलिंडर लेबे खातिर परेशान हो जाउ। फुटकर पइसा कमीशन लेके मिले।आम आदमी के प्रति कौनो सरोकार ना रहे। हं कांग्रेस के नेता लोग खुशहाल आ सुविधासंपन्न रहे लोग। आम आदमी त बैंक के कर्जा खातिर छिछियात रहे आ सत्ता से नजदीक रहेवाला पूंजीपति करोड़न रुपया कर्ज लेके डकार जा सन। देश के पइसा एही तरे डूबत गइल आकांग्रेस के कौनो फरके ना परे। एही से आजादी के बाद गांधी जी कहले रहले कि अबकांग्रेस के मकसद पूरा हो गइल, एकरा के अब खतम क देबे के चाहीं। आजादी के बादकांग्रेस के योगदान के मूल्यांकन जरूरी बा। देश के लोग जानल चाही।     त गांधी जी के दर्शन आविचारधारा हिंदू धर्म के तत्व लेके चलत रहल ह। एही से ऊ घृणा, द्वेष, हिंसा, लोभ आबदला के खिलाफ रहले ह। उनुका दर्शन में प्रेम, क्षमा, अहिंसा, सत्याग्रह (सत्य केप्रति आग्रह) आ आपसी सौहार्द्र खातिर सहनशीलता के प्राधान्य बा। गांधी जी के नयासंदर्भ में बार- बार पढ़ला के जरूरत बा। बहुत कुछ सीखे के जरूरत बा। (लेखक विनय बिहारी सिंह जी वरिष्ठ स्तंभकार हैं.)

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