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Bhojpuri Spl: भोजपुरी के पहिलका महाकाव्य 'अपूर्व रामायण' के रचयिता महेंदर मिसिर

महेन्दर मिसिर के जनम दिन ह आज (Mahendra Mishra Birth Anniversary), 16 मार्च के. महेन्दर बाबा (Mahendra Mishra) के हम सबसे पहिले जननी अपना गुरु आचार्य पांडेय कपिल जी के उपन्यास 'फुलसूंघी' से. आहा…ढेलाबाई, केसरबाई, गुलजारी बाई, ललकी कोठी, उजरकी कोठी, हलिवंत सहाय, रिवेल साहेब, पलटुआ, जिरिया ..एकहऽ गो किरदार आंख के सामने नाचऽता.

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महेंदर मिसिर जयंती विशेष (जन्मतिथि- 16 मार्च, 1886 | पुण्यतिथि- 26 अक्टूबर, 1946)
पूर्वी के बेताज बादशाह आ भिखारी ठाकुर के गुरु रहल महेन्दर मिसिर के जनम दिन ह आज, 16 मार्च के. महेन्दर बाबा के हम सबसे पहिले जननी अपना गुरु आचार्य पांडेय कपिल जी के उपन्यास 'फुलसूंघी' से. आहा…ढेलाबाई, केसरबाई, गुलजारी बाई, ललकी कोठी, उजरकी कोठी, हलिवंत सहाय, रिवेल साहेब, पलटुआ, जिरिया ..एकहऽ गो किरदार आंख के सामने नाचऽता. एही 'फुलसूंघी' के अंग्रेजी अनुवाद कइले बाड़न प्रोफ़ेसर गौतम चौबे. पेंग्विन से प्रकशित भइल बा ई अनुवाद. ख़ूब चर्चा होता पहिला बार भइल कवनो भोजपुरी उपन्यास के अंग्रेजी अनुवाद के. अभिनेता मनोज बाजपेई तक तारीफ़ करत बाड़न. ना खाली तारीफ़ बलुक जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में नैरेट भी कइलें. दरअसल एह उपन्यास के भाषा पोएटिक बा. कहानी फ़िल्मी बा.

संवेदना आ टर्न एंड ट्विस्ट कूट-कूट के भरल बा. चार पन्ना जे पढ़लस, ओकरा उपन्यास ख़तम करहीं के बा. अइसन लासा बा एह में. 24 साल पहिले हम एकर नाट्य रूपांतरण कइले रहनी. तब एकर पन्ना-पन्ना हमरा दिमाग में छपल रहे. एकर भाषा बहुत प्रभावित कइले रहे हमरा के. हमार मन रहे कि एह पर फिल्म बने. हम 2002 में फिल्म निर्देशक अनुभव सिन्हा आ 2017 में टेलीविजन पर्सोनाल्टी अनिरुद्ध पाठक के ई किताब एह निहोरा के साथे देले रहनी कि ई पर्दा पर आवे बाकिर अभी ले ना आइल. हमार इच्छा रहे कि हमार गुरु आचार्य पाण्डेय कपिल अपना एह ऐतिहासिक कृति के फ़िल्मी पर्दा पर जीवंत देखीं बाकिर अइसन ना हो सकल. अब त उहाँ के भी दुनिया छोड़ देनी.

'फुलसूंघी' पढ़ला के बाद महेंदर मिसिर में दिलचस्पी जागल त उनका पर अउर कई गो किताब पढनी. 'फुलसूंघी' में महेन्दर मिसिर के जवन किरदार गढ़ाइल बा, ओकरा से इतर बा भोजपुरी के पहिला उपन्यासकार रामनाथ पांडेय के उपन्यास ' महेन्दर मिसिर' में महेन्दर मिसिर के किरदार. एह में उनकर स्वतंत्रता सेनानी वाला रूप ज्यादा मुखर बा. बाद में त महेन्दर मिसिर पऽ कई गो किताब पढ़नी. भगवती प्रसाद द्विवेदी जी के मिसिर जी पऽ मोनोग्राफ आइल. जौहर जी के 'पूर्वी के धाह' देखनी. रवीन्द्र भारती के हिंदी नाटक 'कंपनी उस्ताद' देखनी. एकरा अलावा 1998 में जब हम टेलीविजन पऽ भोजपुरी के पहिला धारावाहिक 'सांची पिरितिया' में काम करत रहीं, ओही समय मॉरिशस से एगो सीरियल आइल, 'महकेला माटी भोजपुरिया'. उहो महेन्दर मिसिर पऽ केंद्रित रहे. डॉ. सुरेश कुमार मिश्र जी अपना किताब 'कविवर महेन्दर मिसिर के गीत-संसार' में महेन्दर मिसिर के गीतन के संकलन कइले बानी.
महेंद्र मिसिर के सबसे लोकप्रिय गीत बा - अंगुरी में डंसले बिया नगिनिया. ई पूर्वी ह. बहुत गायक लोग गवले बा. गीत देखीं -

अंगुरी में डंसले बिया नगिनिया रे, ए ननदी, दियरा जरा द
दियरा जरा द, अपना भईया के बोला द
पोरे-पोरे उठेला लहरिया रे, ए ननदी, अपना भइया के बुला द,
अंगुरी में डंसले बिया...

पुरुब गइनी रामा, पछिम गइनी
कतहूं ना मिलल शहरिया रे, ए ननदी, दियरा जरा द...
अंगुरी में डंसले बिया...

तड़पेला देहिया जइसे, जल बिन मछरिया
रेगनीं के कांट भइल, बिजुरिया रे, ए ननदी, दियरा जरा द...
अंगुरी में डंसले बिया...

झूठ भइल ओझवा के, झार-फूंक-मंतर,
अब त जीयब जब, उहे दिहें जन्तर
बान्हि लिहे हमरी नजरिया रे, ए ननदी, दियरा जरा द...
अंगुरी में डंसले बिया, दियरा जरा द...

एह गीत से रउरा बुझा गइल होई कि नारी मन के विशेषज्ञ रहलें महेंदर मिसिर. एगो उनकर अउर लोकप्रिय पूर्वी देखल जाय -

सासु मोरा मारे रामा, बांस के छिंऊकिया
ए ननदिया मोरी रे, सुसुकत पनिया के जाय

हाथवा में लिहली ननदो, सोने के घइलवा
ए ननदिया मोरी रे चलि भइली जमुना किनार

गंगा रे जमुनवां के चिकनी डगरिया
ए ननदिया मोरी रे पउआं, धरत बिछलाय

छोटे-मोटे पातर पियवा, हंसि के ना बोले
ए ननदिया मोरी रे से हो पियवा, कहीं चली जाय

छोटे-मोटे जामुन गछिया, फरे ना फुलाय
ए ननदिया मोरी रे से हो गछिया सूखियो ना जाय
गावत महेन्दर मिसिर इहो रे पुरूबिया
ए ननदिया मोरी रे पिया बिनु, रहलो ना जाय
बिहार, छपरा के काहीं-मिश्रवलिया गांव में 16 मार्च, 1886 के माता गायत्री देवी आ पिता शिवशंकर मिसिर किहाँ जनमल महेन्दर मिसिर के भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर आपन गुरु मानत रहलन.
मिसिर जी पहलवान रहनी. कसल देह रहे. धोती-कुर्ता पहिनी. गरदन में सोना के सिकड़ी आ मुंह में पान चबात रहीं. महेन्दर मिसिर के पत्नी के नाम परेखा देवी रहे. परेखा जी कुरूप रहली. त उनका से विमुख होके गीत-संगीत में आपन दुःख उतारे लगलें महेन्दर मिसिर. हिकायत मिसिर एकलौता बेटा रहलें मिसिर जी के.
जमींदार हलिवंत सहाय से महेंदर मिसिर के नजदीकी बढ़ल त उ जनलें कि मुजफ्फरपुर के कोठावाली के बेटी ढेलाबाई पर हलिवंत सहाय फ़िदा बाड़न. महेंदर मिसिर ढेलाबाई के अपहरण कऽ के सहायजी के सऊँपि दिहलन. बाद में उनका एकर पछतवो भइल आ सहायजी के मउवत का बाद ढेलाबाई के हक दियवावे में ऊ उनका साथे खाड़ रहलन.
बंगाल के संन्यासी आन्दोलन के प्रभाव रहे मिसिर जी पर. उनका देशभक्ति के धुन सवार हो गइल आ ऊ अंगरेजन के उखाड़ फेंके खातिर आ क्रन्तिकारियन के मदद खातिर जाली नोट छापल शुरू कर दिहलें. अंगरेजन के कान खड़ा हो गइल. उ खुफिया तंत्र के जाल बिछा देलन स. सीआइडी के जटाधारी प्रसाद आ सुरेन्द्र नाथ घोष के अगुवाई में खुफिया तौर-तरीका से छानबीन चलल. जटाधारी प्रसाद त गोपीचंद बनि के तीन बरिस ले मिसिरजी के संघतिया आ नोकर रहले आ भरोसा जीति के घात कर देलें. 16 अप्रैल, 1924 के रात में नोटे छापत में नोट के गड्डी आ मशीन का साथे महेन्दर मिसिर आ उनका चारो भाई के गिरफ्तार करवा देलें.
गोपीचंद के दगाबाजी पर महेंदर मिसिर के भीतर से मरमभेदी गीत गूंजल रहे-
पाकल-पाकल पानवां खिवले गोपीचनवा
पिरितिया लगा के ना
मोहे भेजले जेहलखनवां रे
पिरितिया लगा के ना!

हाजिरजवाबी गोपीचंद यानी कि जटाधारी प्रसाद जबाब में बोलल रहलें -

'नोटवा जे छापि-छापि गिनिया भजवलऽ ए महेन्दर मिसिर
ब्रिटिश के कइलऽ हलकान, ए महेन्दर मिसिर
सगरे जहनवां में कइलऽ बड़ा नाम, ए महेन्दर मिसिर
पड़ल बा पुलिसवा से काम, ए महेन्दर मिसिर!

बाकिर महेंदर मिसिर अइसन काहे कइलन. अपना गीत में बतावत बाड़न -

'हमरा नीको ना लागे राम, गोरन के करनी
रुपया ले गइले, पइसा ले गइले, ले गइले सब गिन्नी
ओकरा बदला में त दे गइले ढल्ली के दुअन्नी
हमरा नीको ना लागे राम, गोरन के करनी

मिसिर जी के दस साल खातिर बक्सर जेल में बंदी बनाके भेजि दिहल गइल बाकिर उनका मिलनसार व्यवहार से तीन साल सजा कम हो गइल. जेले के ऊ सात खण्ड में 'अपूर्व रामायण' के रचना कइले जवना के भोजपुरी के पहिलका महाकाव्य मानल जाला. अध्यात्म पर जबरदस्त पकड़ रहे महेंदर मिसिर के –

माया के नगरिया में लागल बा बजरिया ए सोहागिन सुनऽ
चीझवा बिकाला अनमोल ए सोहगिन सुनऽ

कवनो सखी घूमि-फिरि मारेली नजरिया ए सोहागिन सुनऽ
कवनो सखी रोवे मनवां मार ए सोहागिन सुनऽ

अइसे त महेंदर मिसिर महेन्द्र मंजरी, विनोद, महेन्द्र मयंक, भीष्म प्रतिज्ञा, कृष्ण गीतावली, महेन्द्र प्रभाकर रत्नावली, महेन्द्र चंद्रिका, महेन्द्र कवितावली वगैरह के अलावा तीन गो नाटक आ अनगिनत फुटकर गीतन के रचना कइलें बाकिर उनका प्रसिद्धि पूर्वी गीतन से हीं मिलल.
उनकर एगो अउर लोकप्रिय गीत बा –

आधी-आधी रतिया, कुहूके कोयलिया, राम बैरनिया भइली ना
मोरा अंखिया के निनिया, राम बैरनिया भइली ना.

पिया परदेशिया ना, पतिया पेठवलन
राम मनरिया भइलें ना, मोरा छतिया के कोरिया, राम मनरिया भइलें ना

पुरुब के देशवा गइलें, मतिया मराई गइलें
निरमोहिया भइलें ना, हमके दरद देई के गइलें
निरमोहिया भइलें ना...

कहत महेन्दर मिसिर, कवन हमसे चूक भइल राम
अन्हरीया लागे ना, मोरा घरवा दुअरवा, राम, अन्हरीया लागे ना

मोरा अंखिया के निनिया.....

ढेलाबाई के कोठी में बनल शिव-मंदिर में 26 अक्टूबर,1946 के महेन्दर मिसिर एह दुनिया के अलविदा कह देलें बाकिर लोकमन से विदा भइल संभव बा का ? पूर्वी के अमर गीतन में हमेशा गूँजत रहिहें महेंदर मिसिर. (लेखक मनोज भावुक सुप्रसिद्ध कवि और भोजपुरी साहित्य व सिनेमा के मर्मज्ञ हैं. )

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