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Bhojpuri में पढ़ें- घरे बनाइं पापड़, कड़की के लगाइं झापड़!

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गजब के चीज होला पापड़. जीभ पे पड़ते पूरा खाना के स्वाद बदल के रख देला. चायो साथे चले ला, चूड़ा-मूढ़ी के साथे भी आ दाल भात के साथे त पापड़ चहबे करी. पापड़ के इ सब बात में रऊंवा खातिर शायद कौनो नया बात ना होखे लेकिन इ बात जरूर नया हो सके ला कि जौन पापड़ राऊर थारी के शोभा बढ़ावे ला, उहे पापड़ राऊर पॉकेट के भी शोभा बढ़ा सके ला. इ ऑर्टिकल में रऊंवा के डिटेल से बतावल लगइल बा कि कइंसे रऊंवा पापड़ के बिजनेस कइके आपन कमाई बढ़ा सकेनी.

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सबसे पहिले बात पापड़ के प्रोडक्शन के. पापड़ भोजपुरिया बेल्ट के घर घर में बने ला. इ नयका जेनरेशन भले दुकान से पापड़ खरीद के लावत होई लेकिन पुरनका जेनरेशन त पापड़ बनावे के मास्टर बा. त अगर रऊंवा पापड़ के बिजनेस शुरू कइल चाहत बानी त सबसे पहिले आपन माई, चाची, मइया, नानी से पापड़ बनावे के देसी गुर सीख लीही. उ लोग के हाथ के बनावल पापड़ के स्वाद कौनो मशीन से बनावल पापड़ में ना आ सकेला. हं अगर रऊंवा पापड़ के करोड़ों-अरबों में बिजनेस कइल चाहत बानी तब त खैर रऊंवा मशीन के सहारे लेबहीं के पड़ी लेकिन अगर रऊंवा स्माल स्केल पर, आपन घर में पापड़ के बिजनेस कइल चाहत बानी त पुरनिया लोग के पापड़ से बढ़िया कुछु और ना हो सकेला.

पापड़ के बिजनेस बहुत कम पूंजी से शुरू हो सके ला. दाल, मसाला, हींग, मरीचा, नमक, पैकेट जइसन चीज एकर शुरूआती जरूरत होला. पूंजी के कमी होखे त रऊंवा सरकार के मुद्रा लोन स्कीम से लोन ले सकत बानी. पापड़ के बिजनेस में टाइमो बहुत कम लागे ला. खाली टाइम में दू तीन घंटा घर के लोग पापड़ बनावे में लाग जाइ त लोकल मार्केट के जरूरत भर के पापड़ आराम से तैयार हो जाइ. पापड़ के साथे अच्छा बात इहो बा कि एकरा के रउंवा मेन बिजनेस के तौर पर भी कइ सकत बानी, साइडो बिजनस के तौर पर.

पापड़ के बिजनेस में लोकल लेवल पर मार्केटिंग में कौनो जादा झंझट ना होला. रऊंवा आपन घर में पापड़ बनाइं, लोकल व्यापारी कुल राऊर घरे से माल उठा ले जहिइन. रऊंवा खुद भी दुकानदार लोग से संपर्क कइ के आपन माल बेच सकत बानी. पापड़ के बिजनेस में असल बात होला राऊर पापड़ के स्वाद. अगर राऊर पापड़ के स्वाद लोग के जीभ पर चढ़ गइल त उ लोग खुदे राऊर बनावल पापड़ के डिमांड करे लगहींए.

पापड़ के धंधा में ब्रांड के भी बहुत महत्व होला. लोग बाग बिना ब्रांड के पापड़ खरीदल ना पसंद करे ला. दोसर उ लोग ब्रांडे देख के पता करे ला कि पापड़ के स्वाद का होई. राऊर पापड़ के ब्रांड होई त पब्लिक ओकरा देख के समझ जाई कि इ पापड़ राऊर बनावल पापड़ ह. पापड़ बनावे समय साफ सफाई के खास ख्याल रखब. अगर राऊर प्रोडक्ट में एको बार गंदगी के नामो निशान दिख गइल त भले ही राऊर पापड़ केतनो टेस्टी काहे ना होखे, लोग ओकरा करीबो ना जहिएं.

एक बार राऊर छोटा स्केल पर पापड़ के बिजनेस जम जाए त फेन रऊंवा तनि बड़ लेवल पर बिजनेस शुरू कइ सकत बानी. सरकार के संस्था एनएसआईसी के मानी त पापड़ के 30 हजार किलो हर साल के प्रोडक्शन खातिर करीब 6 लाख पूंजी के जरूरत होइ. 3 लाख पापड़ बनावे के मशीन आ ओकर रॉ मैटेरियल में खर्चा होइ, बाकी तीन लाख बिजनेस के रन करावे में लागी. बड़ लेवल पर बिजनेस खातिर रऊंवा सरकारी लाइसेंस भी चाहीं.

पापड़ से कमाई के एगो मोटा मोटी अनुमान ह कि पूंजी के 30 से 40 परसेंट एकरा में प्रॉफिट हो जाला. माने अगर रऊंवा लाख रूपया के पूंजी से पापड़ बिजनेस शुरू करत बानी त रऊंवा एक लाख तीस हजार से एक लाख चालीस हजार तक कमा सकत बानी. अब इ हिसाब से जेतना पूंजी बढ़ाइब, उहे हिसाब से कमाई बढ़ी. वइसे अगर रऊंवा नया नया इ धंधा में आवत बानी त पहिले छोट लेवल पर कइल जादे अच्छा होई. एकबार धंधा जम जाए तब बड़ लेवल पर बिजनेस शुरू कइ देब.

(शशिकांत मिश्र स्वतंत्र पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Article in Bhojpuri, Bhojpuri

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