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Bhojpuri में पढ़ें- ‘राम’ से जीतन ‘राम’ के एतना नफरत काहें, जानी ऊ का कहले

Bhojpuri में पढ़ें- ‘राम’ से जीतन ‘राम’ के एतना नफरत काहें, जानी ऊ का कहले

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जीतन राम मांझी कहले बाड़े कि जब दलित लोग के संगे मंदिर में खराब बेवहार होला, तब धरम के ठीका लेबे वाला लोग कहां रहेला। उनकर खीस अचानक नइखे। अबले जवन देखत-सुनत आइल बाड़े, ओही से खिसिया के अकबका गइले आ राम जी के बारे में अइसन कहले कि उनकर कवनो अस्तिव नइखे

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  • News18Hindi
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पांव लागीं मलिकार। होश संभारते राम के नाम जवन जेहन में समाइल, आज एह उमिर ले बनल रह गइल। राम नवमी के मेला लरिकाईं में माई के संगे हम खूब घूमले बानी। केहू से केहू के भेंट भइला पर राम-राम काका भा राम-राम भाई जी लोग के कहत सुनले बानी। सोहर त बिना राम जी के नाम लिहले सोहइबे ना करे। मुअलो पर इहे कहाला कि राम नाम सत्त है। राम मन में एह गंतिया समाइल बाड़े कि ऊ असली होखस भा नकली, लोग के काम राम के बिना चलबे ना करी। हमार इया त रोजे भिनसारे भजन गावस- राम ही राम रटन लागे जियरा हो। असहूं लोग कहेला- हे राम। राम ना बिगड़िहें जेकर, ओकर के बिगाड़ी जी त रउरा सुनलहीं होखब। राम के बारे में तुलसी बाबा जेतना बतवले, ओकरा पहिले से लोग राम के नाम जपत आइल बा। आज पांड़े बाबा एगो खबर सुनवनी हां त मन खउंजिया गइल हा। रउरे बताईं मलिकार, जवना राम के बूढ़-पुरनिया आज ले मानत आइल, केतने लोग अपना बाल-बच्चा के नाम राम राख के खुश होला, केतने कथा-परतोख-मुहावरा राम के लेके बनल बा- राम मिलाई जोड़ी, एक आन्हर एक कोढ़ी त रउरो बात-बात में कही ले, अब ओही राम पर एक जने सवाल उठा दिहले बाड़े। अजरज के बात त ई बा मलिकार कि उनहू के माई-बाप उनका नाम में राम लगवले बा लोग।

पांड़े बाबा बतावत रहुवीं कि बिहार के कबो मुखमंतरी रहले जीतन राम मांझी। ऊ कहले बाड़े कि राम जी असली ना रहले। राम जी के बारे में सगरी कहानी बनावटी ह। जवन आदमी जनकपुर में जा के सीता माई के मंदिर में पूजा कइलस, उहे अब कहता कि राम बनावटी हउवन। ऊ बाद में एकरा पर सफाई दिहले आ ई कहले कि अबे राम के बारे में ऊ जवन कहत बाड़े, ओकर खीस दोसर बा। कवनो मंदिर में जब दलित जात के आदमी जाला त ओकरा के मारल-पीटल जाला, डांड़ लगावल जाला, मंदिर धोअल जाला। एही से खिसिया के ऊ ई बात कहले बाड़े। एही के कहल जाला मलिकार- सौती के खीस कठौती पर।

कुच-कुच अन्हरिया होखे भा टहटह अंजोरिया, जवन सांच बा, ओकरा के कबूल करे के चाहीं। जीतन राम मांझी कहले बाड़े कि जब दलित लोग के संगे मंदिर में खराब बेवहार होला, तब धरम के ठीका लेबे वाला लोग कहां रहेला। उनकर खीस अचानक नइखे। अबले जवन देखत-सुनत आइल बाड़े, ओही से खिसिया के अकबका गइले आ राम जी के बारे में अइसन कहले कि उनकर कवनो अस्तिव नइखे। राम बनावटी हउवन।

एकरा के लेके बिहार में घमसान मचल बा। राम जी के सबसे बड़ सपोटर फूल छाप पाटी ह, ई त रउरा जनबे करीले। राम जी के नाम पर अबहीं ले ई पाटी बढ़त आइल बिया। राम जी के अयोध्या में मंदिर बनावे खातिर आडवानी जी रथ निकलले रहनी। फेर ईंटा के दाम दियाइल। अब त घरे घर से चंदा वसूली भइल हा। मांझी जी के बतकही पर ई पाटी खिसिया गइल बिया। एह पाटी के एक जने एमएलए हरिभूषन पाठक त इहां ले कह दिहले कि जीतन राम मांझी के राम से एतना नफरत बा त आपन नाम जीतन राक्षस मांझी काहें नइखन राख लेत।

पांड़े बाबा कहत रहुवीं कि मांझी जी के अलबल बतकही कवनो नया नइखे। कई बेर ऊ ऊटपटांग बोल जाले। पांड़े बाबा इहो बतावत रहुवीं कि एक बेर नीतीश जी उनका के मुखमंतरी बना के अपने पाटी के काम करे लगले त ऊ कुरसी से अइसन सट गइले कि उनका के हटावे में नीतीश जी के पसेना छूट गइल रहे। ओकरा बाद रिसिया के ऊ आपन पाटी बना लिहले। कबो लालू जी के संगे सटले त कबो फूल छाप पाटी के संगे रहले। बेपेनी के लोटा अइसन ढिमलात रहे ले आ सनकाह अइसन अलबल बोलत रहे ले। एक बेर त ऊ अल्लाह के बारे में अइसने उटपटांग बोल गइल रहले। कहीं भाषन देत में ऊ कहले रहले कि करम सबसे बड़ चीज ह। मंदिर-मसजिद में घंटी बजवला भा अल्ला हो अकबर चिलइला से कुछ ना होखे। अल्लाह हो अकबर त लोग मसिजद में अइसन चिलाला, बुझाला अल्लाह बहिर हो गइल बाड़े। ई कुल सुन के हमरा जेतने खींस बरत रहुवे, ओतने मांझी जी के अलबलई पर हंसी आवत रहुवे। सचहूं ऊ सनकाह हउवन का मलिकार।

पांड़े बाबा बतावत रहुवीं कि मध्य परदेश में सरकार फैसला कइले बिया कि कालेज में राम चरित मानस पढ़ावल जाई। एही पर मांझी जी बिदकल बाड़े। फूल छाप वाली पाटी का सामने अबे छह गो राज के चुनाव बा। अइसन ऊटपटांग बतकही से ओकरा नुकसान हो सकेला। एही से फूल छाप पाटी के लोग मांझी जी के एह बतकही पर खिसियाइल बा। मांझी जी नीतीश जी के तीर छाप आ मोदी जी के फूल छाप वाली पाटी के संगे बाड़े। तबो अइसन बतकही ऊ करत बाड़े, एकर माने त इहे बा नू मलिकार कि उनका बोले के कवनो हब खब नइखे।

आपन मुलुको गजबे ह मलिकार। वोट खातिर कइसन-कइसन बतकही सुने में आवेला। अबहीं ले हम इहे जानत रहनी हां कि सिख लोग के एके गो जात होला। अब सुने में आवता कि ओहू लोग में दलित, पिछड़ा आ फारवड लोग होला। कप्तान साहेब के हटा के कवनो चानी साहेब पंजाब के मुखमंतरी बनल बाड़े। उनका के लोग दलित जात के बता रहल बा। पांड़े बाबा कहत रहुवीं कि मोदी जी के सरकार जवनी गंतिया दलित-पिछड़ल लोग के मंतरी बना के भा रिजवेशन (मलिकाइन रिजर्वेशन के रिजवेशन लिखले बाड़ी) देके आगे बढ़ावे के काम कर रहल बिया, ओकरे देखादेखी हाथ छाप पाटी पंजाब के मुखमंतरी दलित के बनवलस हिया। सुने में आइल कि पांचे महीना बाद ओइजा वोट होखे वाला बा।

जात-जमात से आपन मुलुक कबो मुक्ति पाई, मलिकार। बिहार में कबो अशोक के जात खोजाला त अब यूपी में राजा मिहिर के जात खातिर मारामारी मचल बा। राजपूत लोग कहता कि राजा मिहिर ओही लोग के जात के हउवन आ गुर्जर लोग कहत बा कि मिहिर ओह लोगन के जात के रहले। जाये वाला चल गइल। जाये के पहिले ओइसन लोग एतना नीमन काम कइल कि आज लोग आपन माने-बतावे खातिर मारामारी करत बा। जात के बेमारी एह मुलुक से ना ओराई मलिकार।

बरखा नकिअवले बा। दिनभर में दू-तीन बेर बरिस जाता। असों कबले बरखा होत रही, बुझाते नइखे। रसोइया घर के छत चूअता मलिकार। अबकी आईं त ओकरा के बनवा लीं। पानी गिरला से डेहरी के सगरी गेहूं खराब हो गइल। रउरा त देखलिहें होखब, काकी चार मन के डेहरी बनवले रहली। काकी के मुअला चालीस बरिस हो गइल, बाकिर उनकर बनावल माटी के डेहरी अबहीं ले चलता। थोड़ा लिखना, बेसी समझना। बाकी अगिला पाती में।
राउरे, मलिकाइन

(ओमप्रकाश अश्क वरिष्ठ पत्रकार हैं। आलेख में व्यक्त विचार उनके निजी हैं)

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