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Bhojpuri में पढ़ें मलिकाइन के पाती- पीएम मटेरियल का कहाला मलिकार?

Bhojpuri में पढ़ें मलिकाइन के पाती- पीएम मटेरियल का कहाला मलिकार?

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पांव लागी मलिकार। ई पीएम मटेरियल का कहाला ए मलिकार। पांड़े बाबा के दुआरे आज भोरहरिया जब लोगन के जुटान भउवे त उहां के कहत रहुवीं कि केहू पीएम मटेरियल बनत बा, केहू कबो पीएम इन वेटिंग रहे, बाकिर जेकरा भाग में पीएम बने के रहे, ऊ बन गइल। एही तरे, जेकरा बने के होई, बन जाई।

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  • News18Hindi
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मोदी जी का बारे में त केहू सपनो में ना सोचले रहे। ओह टाइम में पीएम इन वेटिंग के नांव चले, आडवानी जी के। अब त लोग अपना पाटी में एकरा खातिर एह तरे के प्रस्ताव के पास करवावत बा कि फलनवा पीएम मटेरियल हैं। एही के कहल जाला- लालचे लार टपकवला से परलोक के नाश हो जाला। पांड़े बाबा के ई बतकही त पहिले हमरा भेजा में ढुकबे ना कउवे, बाकिर बड़ी देर तक माथा मारत-मारत आ पांड़े बाबा के बतकही के तार जोरत-जोरत अखिरिया में असलियत समझ में अउवे कि पांड़े बाबा केकर बतकही करत बानी।

पांड़े बाबा कहत रहुवीं कि का जाने एह मुलुक में कइसन हवा चलल बा कि अटल जी के सरकार गिरला के बाद आडवानी जी के लोग पीएम इन वेटिंग कहे लागल। एकर बतकही एतना सजोर रहे कि सचहूं लोग के बुझाये लागल कि फूल छाप पाटी के सरकार बनी त पक्का आडवानी जी परधान मंतरी बनिहें। हमरा त बुझाता मलिकार कि ई सुन के आडवानी जी भी मने मन जरूर लड्डू फोरत होइहें। बाकिर कहल जाला नू मलिकार कि समय से पहिले आ भाग से बेसी केहू के कबो कुछ ना मिले। आडवानी जी ताकते रह गइले आ मोदी जी कहवां से टपक गइले। एतने ले ना, ऊ जीत-जिता के परधान मंतरी बन गइले।

काल्ह पांड़े बाबा बतावत रहुवीं कि आडवानी जी के लोग त मुंहामुंहीं पीएम इन वेटिंग कहत रहे, अबे त एगो नया तमाशा खाड़ हो गइल बा। अब सुने में आवत बा कि तीर छाप के नेता नीतीश जी खातिर उनकर पाटी एगो प्रस्ताव पास कइले बिया कि नीतीश जी पीएम मटेरियल हउअन। एकरा के साबति करे खातिर उनका पाटी के सगरी बड़का नेता लोग हौआहेल मचवले बा। एगो नेता कवनो रामचंदर सिंह बाड़े। रेडियो बजा के पांड़े बाबा सुनावत-बतावत रहुवीं कि ऊ का कहले बाड़े। ऊ कहकत रहुवन कि नीतीश जी हमार, नीतीश जी अइसन त नीतीश जी वइसन। पांड़े बाबा त कहत रहुवीं कि एके बतकही खातिर जेतने जने हुंड़रहो मचवले रहल हा लोग, ओकरा से एगो डेग बढ़ा के रामचंदर सिंह, पांड़े बाबा उनकर कउन दुनी नाम धरत धरत रहुवीं, हां- आरसीपी ओह भितरिया मीटिंग के आपन भाषन खुलेआम लोग के बतवले बाड़े। उहां के का दुनी लोग के देखा के सुनावतो रहुवीं। ओइमें हम कान पात के सुनुवीं त शूरू में जय नीतीश जी से लेके अखिरिया में भी जय नीतीश जी- रहुवे। हमरा ए कुली में बेसी मन ना लागे मलिकार। रउरे कहले रहनी कि राजनीति के बतकही में ना परे के। ई अइसन जगहा ह कि जे जवना पत्तल में खाला, ओही में छेद करेला। हम त एह बात के पहिलहीं से जानत-बूझत बानी। हमरा खातिर ई कवनो नया बात नइखे।

पांड़े बाबा कहत रहुवीं कि जवन फूल छाप पाटी आपन 74 गो एमएलए के बादो अपना जबान पर कायम रहते हुए 43 सीट वाली तीर छाप वाली पाटी के नेता नीतीश जी के बिहार के मुखिया बनवलस, ओकरे संगे ऊ कपटिया खेल में लागल बाड़े। अपना मुंह से बोले के त पाबलिक के सामने उनकर हिमते नइखे। एह से अब ऊ अपना 43 गो एमएलए आउर 16 गो एमपी से कहवावत बाड़े कि नीतीश जी त पीएम बने लायक बाड़े। अबहीं ले मलिकार, हम इहे जानत रहनी हां कि नीतीश जी खुड़पेचिया ना हउवन, बाकिर उनका पाटी के नेता लोग के एतना लमतरानी सुन के अब बुझाये लागल बा कि हमरा समझे में जरूर कवनो गड़बड़ी रहल बा। जानत बानी मलिकार, ई बात काहें हम कहत बानी, एक बेर नीतीश जी कहले रहले कि ई उनकर अखिरिया चुनाव ह। एकरा बाद ऊ चुनाव ना लड़िहें। बेसी दिन ना बीतल होई, अब ऊ अपना नेता लोग से ई कहवावे में लागल बाड़े कि नीतीश जी पीएम मटेरियल हउवन। हमरा त ई बुझाता कि मलिकार कि नीतीश जी के मन-मिजजाज साफ रहित त ऊ तपाक से सबका सोझा कह दीते कि पाटी उनका बारे में जवन सोचत बिया, ओकरा के माथा पर रखला के बादो उनकर विचार का बा। बाकिर अबहीं ले घटसुन अइसन चुप बाड़े।

पांड़े बाबा बतावत रहुवीं कि कुरसी खातिर नीतीश जी भलहीं फूल छाप पाटी तके संगे सटल बाड़े, बाकिर ऊ अपना हाथ में दू गो लड्डू के आनंद लेबे के चक्कर में बाड़े। पुतवो नीक आ भतरो नीक उनका मन में समा गइल बा। उनका बुझाता कि फूल छाप वाली पाटी के टक्कर देबे वाली हाथ छाप वाली पाटी में नेता खातिर मारामारी मचल बा। महंगाई आ रोजगार जइसन कई गो सवाल पर विपक्ष के बुझाता कि एक संगे भइला पर मोदी जी के चुटकी में उधिया दीहल जाई। संघतिया बने खातिर त सभे तैयार बा, बाकिर एकर नेता के होई, एई पर अबे ले कवनो पक्का राय नइखे बनल। ममता दीदी पर जेकर सबसे बेसी भरोसा बा, उहो उनका तुनुकमिजी से खफा बा। ऊ त एह बात के समझ गइल बाड़ी आ कहियो दिहले बाड़ी कि पीएम के कंडिडॆट केहू होखो, ओकरा के उनकर समरथन रही। एह बीचे नीतीश जी आपन नांव चमकावे खातिर नया तरीका खोज लिहले बाड़े। पाटी के सीढ़ी पर चढ़ के ऊ बतावे के कोशिश में बाड़े कि केहू के बारे में सोचला के दरकार नइखे।

हम कबो कहले रहनी मलिकार कि सब कुकुर काशी जइहें त हांड़ी के ढूंढ़ी। हमरा अबे ले दू गो बात समझ में ना आइल। रउरा समझा पायेब त समझा देब। पहिलका बात ई कि इयारी में बेसी होशियारी चलेला का का। दुसरका बात ई कि जेकरा के औकात में छोट रहला के बादो केहू साथ दीहल, ओकरा संगे धोखाबाजी के बाद, का कहल जाई। एकरे के नू नेकी में बदी कहल जाला। इहे नू कहाई मलिकार कि अब दुनिया में केहू पर केहू के भरोसा के कवनो मतलब नइखे। अब त अपना देह के रोआं पर भी भरोसा ना हो सकेला।

पांड़े बाबा के बतकही जेतना सुनुवीं मलिकार, ओई पर कई गो बतकही करे के मन रहल हा। बाकिर एही बीचे खेन्हर साह आ के कहले हां- ए बहुरिया, लीलगाय (नीलगाय) त बगइचा के मकई के खेत पर टूट परल बाड़ी सन। मकई के मोचा नोच ले तारी सन। एह से पाती एही जा रोकत बानी। बड़का के बगइचा के खेत में भेजे जा तानी। फेर बतियावल जाई।
राउरे, मलिकाइन
(ओमप्रकाश अश्क वरिष्ठ पत्रकार हैं। आलेख में व्यक्त विचार उनके निजी हैं)

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