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Bhojpuri- अरे रामा मारेले नैन कटारी मदन मुरारी ए रामा जइसन कजरी सचहूं मन-मिजाज के तर क देला

Bhojpuri- अरे रामा मारेले नैन कटारी मदन मुरारी ए रामा जइसन कजरी सचहूं मन-मिजाज के तर क देला

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बरखा के मउसम आवते धनरोपनी के गीत आ कजरी पहिले गांवागांई गूंजत रहल हा. अदरा में पूड़ी-रसियाव, बीया गिरावे के दिने समहुत आ बनगड़ी के दिने छनुआ-तरुआ बजका के आनंद आवत रहल हा. एही में जब कहीं कजरी के बोल- अरे रामा मारेले नैन कटारी मदन मुरारी ए रामा- सुना जाई त मन आनंद से भर जाई.

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पांव लागीं मलिकार ! काल्ह संझिया खान केहू का घरे रेडियो पर कवनो चंदन तिवारी के कजरी सुने के मिलुवे. गीतिया त एतना पुरान ह कि लरिकाईं से हम सुनत आइल बानी. हमार इआ सुते के बेरा रेघा-रेघा के एतना नीमन गइहें कि सुनते-सुनते हमनी चारू बहिन के नीन आ जाई. उहे गीतिया काल्ह सुने के मिलुवे-
अपनी अंखिया में कजरा लगवले
माथे बिंदिया खूब सजवले हो रामा !
अरे रामा मारेले नैन कटारी
मदन पुरारी ए रामा !
अरे रामा बनले मरद से नारी
कृष्ण मुरारी ए रामा !

काल्ह के दिन बड़ा नीक रहल बा मलिकार. सांझे ई गीत सुने के मिलुवे आ दिने धान के बीया गिरववले रहनी हां त हमहू देखे तनी चल गउवीं. सोचुवीं कि तनी छोटो होई त दस कट्ठा कवनो उपरवार खेत में रोपवा लेब. चंवर में त कब पानी भर जाई आ रोपा गल जाई, कहल मुसकिल बा. जेकरा जरी बोरिंग के साधन रहल हा, ऊ त पहिलहीं बीया गिरवा दिहले रहल हा. ओह लोगन के खेत में रोपनी लागल रहुवे. पांड़े बाबा के बकुलहर वाला खेतवा में रोपनी होत रहुवे. उहां के बड़की बेटी आइल बाड़ी. ऊ जाना लोग खातिर पनपियाव लेके जात रहुवी त हमहूं घूघ काढ़ के संगे चल गउवीं. सोचुवीं कि बीयवो देख लेब.

परसों रात भर पानी भइल. एही से जेकर बीयहन तैयार हो गइल रहल हा, ऊ आपन खेत पहिलके पानी में रोपवा लिहल हा. पांड़े बाबा के खेत में तीन टोला के तेरह गो जनाना रोपनी में लागल रहुवी सन. ठेहुना पर ले लुंगी अइसन साड़ी मोरले निहुर के टप-टप रोपत रहुवी सन. फीली भर पानी खेत में रहुवे. ऊपर से भीतरघाम से दिन अउसियाइल रहुवे. एकरा बादो ओकनी पर कवनो फरक ना परत रहुवे. उलटे ऊ मस्ती में धनरोपनी के गीत गावत रहुवी सन. डंड़ेर पर दुनो जनी हमनी बइठ के गीत सुने लगुवीं सन. सइयां, सेजरिया, रिमझिम बुनिया, नैहरवा, कान्हा, गोपी, हरियरी जइसन बात बेर-बेर ओह गीत में आवत रहुवे. सगरी गीतिया त इयाद नइखे परत, बाकिर एके गो लइनिया इयाद परता- तनी संगे सूतल छोड़ के जगइहो हो पिया…देहिया दबइयो हो पिया. मत पूछीं मलिकार, केतना दरद रहुवे वोह गीत में कि थोर देर ले हम कहवां चल गउवीं, मालूमे ना भउवे. पांड़े बाबा के बेटी बतावत रहुवी कि एह गीत के चनन तिवारी बड़ा नीक गवले बाड़ी. मालिनी अवसथी, सारदा सिनहा आ कवनो सीमा भी अइसन रोपनी गीत आ कजरी खूब गावेला लोग.

आज भोरे पांड़े बाबा के दुआर पर लोग के जुटान भउवे त रोपनिए के बतकही होत रहुवे. एही में करपूरा के कन्हाई कहे लगुवन कि धनरोपनी सब जगहा चालू हो गइल बा. जे पहिले बीया गिरा दिहले रहल हा, ओकर चानी बा. बरखा के उमेद में ढेरे लोग अब बीया गिरावता. एतने में रोहरा के रमेसर सिंह कहे लगुवन कि पहिले बीया से लेके रोपा ले बुझात रहल हा कि कवनो जग होता. जहिया बीया गिरी मने समहुत होई, ओह दिन दलभरुई पूड़ी, रसियाव आ आलू दम त पकिया बनी. बनगड़ी के दिने कढ़ी-बरी आ बजका बनबे करी. अबो ई रेवाज बा, बाकिर वोइसन मजा अब नइखे आवत. रोपनी में मजूरा लोग रोपनी के अइसन गीत गाई कि बुझाई के करेजा काढ़ के लोग ध दिहलस. अब त नया नचर जनाना रोपा खातिर आवतारी सन आ ओकनी के ई कुल्ह जानते नइखी सन. तबो पुरनका लोग अबहियो नइखे मानत. ऊ गइबे करेला. नवकी ओही में रेघारी भरेली सन.

एही बतकही में कजरी के बात अउवे त हमरा काल्ह रेडियवा पर सुनलका गीतिया इयाद पर गउवे. सियाड़ी के सकल बतावे लगुवन कि कजरी बरखा के मउसम के गीत ह. हमनी इहां हर मउसम के गीत गावे के चलन रहल बा. बारहमासा जे सुनले होई, ओकरा ठीक से बुझाई कि मउसम के बदलत रंग नीयर गंवई मन मिजाज बदलत रहेला. कजरी के छोड़ियो दीं त अइसहूं बरखा के लेके बनल गीत- असरेसवा में चूएला हमार बंगला आ सावन ए सखी बहुते सोहावन केतना नीक लागेला.

रउरा त जाते होखब मलिकार कि सकल बनारस में ढेर दिन ले रहले आ ओही जा गीत-गवनई के टरेनिंग लिहले. गांवे अइले त नाच पाटी बनवले. बड़कू बाबू के बियाह में उनकर नाच बन्हाइल रहे. लोग बतावेला कि उनकर नाच देखे खातिर बाईस टोला कइल के लोग जुटल रहे. सांझे नाच सुरू भिल त बिहान हो गइल. केहू उठे के नांवे ना लेव. बाद में उनका हाथ जोरे के पर गइल.

सकल खाली गइबे-बजइबे ना करस. उनका गवनई-बजनई के सवख अबहियो बा. ऊ कजरी के बारे में बतावे लगुवन. कहत रहुवन कि मिरजापुर, गाजीपुर, आजमगढ़, बलिया के इलाका में कजरी के जनम भइल. ई ओइजा के खास गीत मानल जाला. मिरजापुर जोगी जी के उपी में गंगा जी के कछार पर बसल बा. ई खाली बरखा के मउसमे में गावल जाला. बेसी ई सावन में गावल जाला. कजरी में गोपी-कान्हा के रासलीला आ विरहिनी के कलपला के के गीत रहेला. एइमें खाली सिंगारे-सोहाग के बात रहेला. देवी गीत से कजरी के सुरुआता होला. कहल जाला कि मिरजापुर के सटले बिंधवासनी देवी के मंदिर बा. एही से ओइजा के कवनो गीत-गवनई के सुरुआत माई के गीत के बिना ना होला. कजरियो में ई लउकेला. इहो बतावल जाला कि एगो कवनो राजा कानतित रहले. उनका बेटी के नांव कजरी रहे. ऊ अपना मरद के बेसी चाहे. कवनो कारने ओकरा मरद से अलगा होखे के परल. ऊ अपना मरद के इयाद में जवन गीत गावे, ऊ लोग के एतना पसन परल कि गीतियो के नांव कजरी पर गइल आ बिरहिनी के गीत में ई गवाये-गिनाये लागल. कुछ लोग त इहो कहेला कि सावन में बादर के रंग करिया होला आ ओह टाइम पर गावल गीत के एही से कजरी कहल जाला. कजरिये के एगो रूप ठुमरी होला.

एगो बात कहीं मलिकार, सचहूं बरखा-बूनी के दिन में का जाने काहें अपना आदमी के बेसी इयाद आवेला. हम अपने से एकरा के बूझत बानी. रउरा नइखीं हमरा जरी, बाकिर जब बूनी के टपटप सुनाला त मन करेला कि रउरा रहतीं त रात भर अंकवार में ध के सुतल रहतीं. हमरो नितरी में तनिको लाज नइखे. बड़-सेयान अब लइका भइले सन आ हम कइसन बतकही करतानी. बाकिर मन के बात रउरा से ना करेब त केकरा से करेब मलिकार. आंख भर आइल मलिकार. बाकी अगिला पाती में. अब हमार हाथ साथ नइखे देत. आपन धेयान राखेब. कबो बहरी निकलेब त छाता संगे राखेब. बरखा-बूनी के कवनो ठीक ना ह. माथा पर तनिको पानी परल त सर्दी-बोखार होखे के खतरा रहेला. हमरा बुझाता मलिकार कि रथ जतरा के दिने जगरनाथ भगवान मउसी के घरे जाले त उनका सरदी हो जाला. उनका ओही जा हप्ता भर रहे के पर जाला. करोनवो में इहे नू होता मलिकार. जेकरा तनीमनी सरदी-बोखार भइल, ओकरा घरे में हप्ता-दस दिन रहे के पर जाता.
राउर, मलिकाइन
(ओमप्रकाश अश्क स्वतंत्र पत्रकार हैं. आलेख में व्यक्त विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Article in Bhojpuri, Bhojpuri

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