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Bhojpuri में पढ़ें मलिकाइन के पाती-दारूबंदी पर नीतीश कुमार के जिद, ठेंगा देखावत पियक्कड़ आ विपक्ष के छीछालेदर

Bhojpuri में पढ़ें मलिकाइन के पाती-दारूबंदी पर नीतीश कुमार के जिद, ठेंगा देखावत पियक्कड़ आ विपक्ष के छीछालेदर

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नीतीश कुमार बिहार में दारूबंदी कानून के कड़ाई से लागू करे के जिद ठनले बाड़े. एकर कमान ऊ कड़क अफसर केके पाठक के सउंपले त लोग का भरोसा जागल कि अब दारू पीये-बेचे वाला लोग पर आफत आ जाई. बाकिर असेंबली एरिया में दारू के खाली बोतल मिलला से ई बात साफ हो गइल बा कि पियक्कड़न के कंटरउल कइल आसान नइखे. एकरा पर विपक्षी दल घमसान मचवले बाड़े सन.

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पांव लागीं मलिकार ! एह घरी गांवागाईं खाली दारुए के बतकही होता. केहू कहता कि नीतीश जी खूब टाइट कइले बाड़े. केहू कहता कि कवनो फरक नइखे परल. पांड़े बाबा के दुअरवा एही के आज बतकही होत रहल हा. गवंदरी के गेयानी साह आइल रहुवन. ऊ बतावत रहुवन कि नीतीश केतनो कड़ाई करस, कीने-बेचे वाला पर कवनो फरक नइखे परे के. जवन दारू पांच सौ में तीन गो मिलत रहल हा, ऊ अब छह सौ में तीन गो मिल रहल बा. इहे त फरक आइल बा. पांड़े बाबा खबर कागज पढ़ के सुनावत रहुवीं कि असेमली के चहारदिवारी के भीतर दारू के खलिया बोतल मिलल बाड़ी सन. एकरा के लेके ललटेन छाप के नेता आ लालू जादो के बेटा तेजस्वी जादो काल्ह असेमली में खूब हल्ला कइले. नीतीश जी त ई जान-सुन के एतना खिसिअइले कि तुरंते जांच करावे लगले. रउकरे बताईं मलिकार कि दारूबंदी के कानून 2016 में लागू भइल. एने जब सख्ती भइल हा त ठीक ओही टाइम पर असेमली में दारू के खलिहा बोतल कइसे पहुंच गइल. हमरा त बुझाता मलिकार कि नीतीश के बदनाम करे आ घेरे खातिर ई जोजना बना के काम भइल बा. जवन होखे मलिकार, बाकिर हमार मानल त इहे बा कि दारू कवनो नीमन चीज ना ह. पइसा त घर से जाते बा, देहो के नुकसान होता. घर में कुफुत अलगा बा.

पांड़े बाबा बतावत रहुवीं मलिकार कि नीतीश कुमार के सरकार अकेले दारूबंदी के कानून ना बनवलस. सगरी पाटी ओह बेरा उनका हां में हां कहली सन. ओह बेरा त ललटेन छाप उनहीं का संगे सरकार में शामिल रहे. बाकिर एकरा के लेके सबसे बेसी खींस ललटेन छाप के नेतवे लोग के बरत बा. असेमली में दारू के खलिहा बोतल मिलली सन त तेजसवी जादो नीतीश से इस्तीफा मांगे लगले. असन अड़ गइले कि बुझाव कि नीतीशे कुमार दारू पीके बोतल फेंकले बाड़े. तेजस्वी के कहनाम रहे कि नीतीश कुमार दारू बेचे वाला गिरोह से मिलल बाड़े. ओकनी के संगे फोटो खिंचवावत बाड़े. उनका मंतरी लोग के अपराध करे के छूट मिलल बा. अइसनो हो सकेला का मलिकार.

हं, एगो बात तेजस्वी के जरूर जायज बा. जब से दारूबंदी कानून बिहार में लागू भइल, तब से लुका-छिपा के दारू बेचे के धंधा गांवांगाईं जरूर शुरू हो गइल. एह काम में जवन लागल रहले हां सन, ओकनी के साल भर में कोठी अमारी बना लिहले सन. शहर में जमीन कीन लिहले सन. बड़की बड़की गाड़ी कीन के हवा खा तारे सन. एढ़ा-डेढ़ा दाम दे के पीये वाला लोग ओकनी से कीनत रहल हा. अब कवनो केके पाठक आइल बाड़े त ओकनी का तनी डेराइल बाड़े सन. पहिले त पुलिसवे बेचवावत रहले हां सन. चकुदार से लेके दरोगा ले, सगरी लोग के मालूम रहल हा कि कवन-कवन बेचत बाड़े सन. ओकनी से पइसा वसूली करिहें सन. चकुदरवे वसूली करवावात रहले हां सन. अब सुने में आवता कि दारू पकड़इला पर सबसे पहिले चकुदार लोग के छुट्टी होई.
पांड़े बाबा बतावत रहुवीं कि अब नीतीश कुमार जिला-जिला घूमे के जोजना बनवले बाड़े. ऊ औरतन के समझइहें कि घर के मरदाना के दारू पीये से कइसे रोक सकेली सन. बेचे वाला के कइसे धरवा-पकड़वा सकेली सन. सांच कहीं त दारू पियला से घर में जवन हुरदुंग होला, ओइमें सबसे बेसी तबाह घर के औरते होली सन. पनरह तारीख ले पंचाइत के वोट खतम हो जाई. ओकरा बाद नीतीश जी सगरी बिहार घूमिहें. पांड़े बाबा कहत रहुवीं कि नीतीश जी लइकिन के साइकिल दिहले, पोशाक दिहले, पंचाइत आ नोकरी में औरतन खातिर रिजवेसन दिहले बाड़े. अब दारू के नांव पर औरतन के ऊ अपना पख में करे चाहत बाड़े. अइसन हो जाई त औरत उनका ओर हो जइहें सन आ वोट में उनका एकर फायदा मिली. उनकर जोजना इहे बा.

पांड़े बाबा बतावत रहुवीं कि दारू पीयल कवनो नीमन बात ना ह. चालीस-पचास साल पहिले गांव में केहुए एक-दू आदमी होखे, जे दारू पीये. उहो लुका-चोरा के. गांव के लोग ओह लोगन से एतना नफरत करे कि केहू ओह लोगन से जल्दी बोले-बतिआवे ना. ओइसन पियक्कड़ लोग भी सांझ भइला के बादे पीये. बाद में त ई फैसन हो गइल रहल हा. घरे-घर नवछेड़िहा पीयला के फैसन बूझ गइल रहले हां सन. दारूबंदी के बादो ऊ बेसी पइसा देके पीयत रहले हां सन. दिन-दुपहर के कवनो हिसाबे ना रहल हा. ओकनी के ई गेयान तनिको नइखे कि दारू देह खातिर केतना खराब ह. बिहार में त दारूबंदी बा. तबो एइजा अबे 15.5 परसेंट लोग दारू पी रहल बा. देस में सबसे बेसी पियक्कड़ अरुनाचल परदेश में बाड़े. पांड़े बाबा ई बात कवनो नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के खबर पढ़ के बतावत रहुवीं.

उहां के बतावत रहुवीं कि हाले में सर्वे के ई रिपोट आइल बा. सर्वे में मालूम भइल कि खाली मरदाना ना, औरतो दारू पीयेली सन. देस में 18.8 परसेंट मरदाना आ 1.3 परसेंट औरत शराब पीये के बात कबूल कइली सन. आबादी का हिसाब से सबसे बेसी दारू अरुनाचल परदेस में लोग पीयेला. सबसे अचरज के बात त उहां के ई बतावत रहुवीं कि बिहार आ गुजरात में दारूबंदी बा. एकरा बादो बिहार में 15.5 परसेंट आ गुजरात में 5.8 परसेंट मरदाना अबहियो शराब पीयत बाड़े. अरुनाचल में त सबसे बेसी 52.7 परसेंट मरदाना और 24.2 परसेंट मेहरारू दारू पीयेली सन. कवनो तेलंगाना बा. ओइजा 43.3 परसेंट मरद आ 6.7 परसेंट मेहरारू दारू पीयेली सन. तिसरका नंबर प सिक्किम बा, जहवां दारू पीये वाला मरद 39.8 परसेंट बाड़े आ औरत 16.2 परसेंट बाड़ी सन.

पांड़े बाबा बतावत रहुवीं कि गवंदरी के एगो बड़का पियक्कड़ बिहार में दारूबंदी भइला के बाद छटपटा के रह गइल. दू दिन दारू बिना बीतल त सोचलस कि जब मिलते नइखे त छोड़ले में फायदा बा. सात दिन, दस दिन आ जब पनरह दिन बीतल गइल त ओकरा एकर फायदा बुझाये लागल. देखलस कि घर में सभे बड़ा खुश बा. पइसो खरच नइखे होखत. ओकरा बाद त ऊ साफे छोड़ दिहलस. घर ओकर एह घरी बड़ा खुशहाल बा. सांच कहीं त ई मन के बात बा. मन के केहू मना लेव त कुछऊ छूट सकेला.
पांड़े बाबा करनाटक के एगो मुखमंतरी के कहानी सुनावत रहुवीं. उनकर कहनाम रहे कि जवन चीज देह आ देस खातिर खराब होखे, ओकरा के छोड़िए दिहल बढ़िया होला. 1997 में करनाटक के मुखमंतरी रहले जे.एच. पटेल. ऊ पहिले खूब दारू पीयस. उनकर हाल ई रहे कि सांझ के बेरा दारू ना मिले त बेचैन हो जास. कहस कि सांझ खानि दारू ना मिले त बड़ा खराब लागेला. बाकिर उनकर मन अइसन बदल कि दारू से तोबा क लिहले. कहले कि ‘जवन चीज आदमी के देह भा देस खातिर खराब होखे, ओकरा के छोड़िए देबे के चाहीं. ऊ अपना इंटभिऊ में कहले रहले कि ‘हमार सेहत नीमन रहल जरूरी बा, पीयल ना. ऊ इहो कहले रहले कि ‘बच्चू’ (करनाटक में दारू के कवनो नाम ह) के बिना सांझ खराब हो जाला’. ऊ रोज पीये वाला रहले. मन बदलल त छोड़ दिहले. पटेल साहेब 1996 से 1999 ले करनाटक के मुखमंतरी रहले.

हमहूं गजबे हईं मलिकार. कहां ले हाल-समाचार पाती में लिखे के चाहीं त दारू पुरान लेके बइठ गइनी. उपरवार खेत त फरहर हो गइली सन, बाकिर चंवर में अबहियों पानी लागल बा. बुझाता असों चंवर में गेहूं ना बोआ पाई. दस कठा तोरी बलुअवा पर बोआ दिहनी हां. बोअनी ले तीन बेर टेक्टर से खेत जोतवावे के परल हा. तोड़ा के बीआ बाजार से मंगवा लिहनी. जोताई, बिया आ खाद मिला के अबे ले चार हजार खरच हो गइल. पटवनी के खरच बाकी बा. जानतानी कि ओतना के तोड़ी ना निकली, बाकिर खेतवा त आबाद काखहीं के परी नू मलिकार. लगन एतना बा मलिकार कि मन नकिया गइल बा. घरे केहू मरद-मानुस त हइए नइखे. गंउवां में केहू कीहां नेवता आवेला त बड़का चल जाला. पहुनाईं के नेवता हजाम से भेजवा दीले. हजमो के फुरसत कहां बा. आज के नेवता काल्ह आ काल्ह के परसों पहुंचावेला. ठंडा बढ़ल जाता मलिकार. एही में करोना के कवनो नया बेमारी के बड़ा हल्ला सुनाता. बच के रहेब. रउरे एने-ओने आवत-जात रहीले. बाकी अगिला पाती में.
राउर, मलिकाइन
(ओमप्रकाश अश्क स्वतंत्र पत्रकार हैं. आलेख में व्यक्त विचार उनके निजी हैं)

Tags: Bhojpuri Articles, Bhojpuri News, Bihar News

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