होम /न्यूज /bhojpuri-news /

Bhojpuri में पढ़ें मलिकाइन के पाती- नया रूप ध के फेर आइल बा करोना, बुढ़ऊ लोग पर आफत

Bhojpuri में पढ़ें मलिकाइन के पाती- नया रूप ध के फेर आइल बा करोना, बुढ़ऊ लोग पर आफत

.

.

करोना कवनो नया रूप ध के अबकी आइल बा. ओमीकरोन नांव बा ओकर. ई एतना खतरनाक बा कि करोना से पंचगुना तेजी से पसरता. ई अपना इहां त अबे कम बा, बाकिर परदेस में बेसी तबाही मचवले बा.

पांव लागीं मलिकार! हमार माई सुनावेले अपना माई के मौसी के सास के कहल एगो कवित. जब जाड़ के सीजन शुरू होखेला त माई ओह कवित के अबहियो सुनावे ले. जाड़वा कहेला- लइकन के त छूएब ना, जवनका हमर भाई, बुढ़ऊ लोग के छोडेब ना केतनो ओढ़िहें रजाई. पहिले के जमाना में सोरहनिया ई सांच बात रहल हा मलिकार, बाकिर जब से करोना के हवा चलल बा, सब केहू एके बरोबर हो गइल बा. लइकनो के सरदी-खोंखी भा जर-बोखार धरता त मन डेरा जाता. बुढ़ऊ लोग खातिर त ई बलाय बन के आइल बा. जवनको लोगवा जवनी गंतिया एकरा जद में आवे लागल हा, ओकरा बाद त ई कहाउत-कवित के कवनो माने-मतलब ना रह गइल हा. फेर एह जाड़ में करोनवा जोर मारे लागल बा. पांड़े बाबा आज कहत रहुवीं कि करोना कवनो नया रूप ध के अबकी आइल बा.

कवन दुना ओकर नांव उहां के बतावत रहुवीं. हं इयाद पर गइल. ओमीकरोन नांव बा ओकर. ई एतना खतरनाक बा कि करोना से पंचगुना तेजी से पसरता. ई अपना इहां त अबे कम बा, बाकिर परदेस में बेसी तबाही मचवले बा. पांड़े बाबा त इहो कहत रहुवीं कि फेर लोकडाउन लाग सकेला. अपना इहां अबे एकर शुरुआत भइल बा. हप्ता-दस दिन में एकर मरीज जवना तेजी से बढ़ल बाड़े, ओह से डागदर लोग अंदाज लगावता कि फागुन चढ़त ई बेमारी चढ़ंती पर होई. अबकी कवनो घर नइखे बांचे वाला.

हमरा त बुझाता मलिकार कि लइकन के पुरनका जमाना अइसन गांती जनि बान्हे के पर जाव. हम त गोहरा-गोइंठा धरीछन राउत के घर से मंगा लिहले बानी. बोरसी रोजे सुनगाई ले. अब गोहरा-गोइंठा भा चिपरी मिलल मुसकिल बा मलिकार. पहिले घरे-घरे माल-गोरू रहत रहले हां सन. जब से टायटर (मलिकाइन ट्रैक्टर के टायटर कहेली) आ गइल, तब से माल-गोरू राखल लोग बंद क दिहल. सवा सौ घर वाला अपने गांव के देखीं ना, मुसकिल से दस-बारह घरे गाय-भइंस बाड़ी सन. बैल त अब केहू राखते नइखे. हर-फार, हरिस-हेंगी के टायटर खा-पचा गइल. एतने ले ना मलिकार, अब त कटनी-दवनी भी टायटरे से हो जाता. दुआरे-दुआरे टायटर घुमा के धान कुटाता भा गेहूं पिसा जाता. जब से गैस के चूल्हा घर में आइल, ओकरा बाद से उसिना चाउर भा सुरका के चिउरा दुलम हो गइल. ओखर-मूसर त अब सगरी गांव घूम आयेब त साइते केहू के घरे कोना-कगरी धराइल-फेंकाइल लउकी.

हमरा इयाद बा मलिकार साठी धान के उसिना चाउर बने. ओकर माड़ एतना गार्ह होखे कि बिना कवनो तियना के माड़-भात खा के मन अघा जाव. सुरका के चिउरा आ नवका मीठा त आदमी हीक भर चबा लेव. रबी के सीजन में सरेह से साग खोंटे लड़िकी झुंड बना के जा सन. एक संगे परिवार के सब लोग रहत रहे त घरे-घरे कई गो लड़िकी होखअ सन. बहिना-फुआ लोग आवे त महीना-दू महीना रहे. ऊ लोग साग खोंट के ले आवे. अब त केहू के साग खाये के मन करतो बा त बाजारे से कीन के ले आवे के परता. पांड़े बाबा काल्ह बाजार से सोआ साग कीन के ले अउवीं त उहां का पतोह लोग के बुझाते ना रहुवे कि ई कवन साग ह आ कइसे बनी. उहां के छोटकी पतोहिया घसेटउवा फोन में सुन के बनउवे. ए मलिकार, ई फोनवा कइसे खाना बनावे के बता देला? पतोहिया किसिम के बीजन फोनवे से सुन के बना देले.

पांड़े बाबा बतावत रहुवीं मलिकार कि अबकी जाड़ा बेसी बा. रेगिस्तान में बरफ जम जाता. एही में ओमीकरोना आ गइल बा. बांच-बचा के रहे के परी. मुंहजाबी अब बुझाता, जिनिगी भर पहिरे के परी. बड़का मोदी जी मीटिंग पर मीटिंग करतारे. दवाई, अस्पताल के तैयारी अबे से शुरू हो गइल बा. बुढ़ऊ लोग के तीसरा भेक्सिन लागी. बड़का लइकनो के अब भेक्सिन दिआई. एही से लागता कि अबकी खतरा बेसी बा. कई जगहा त नवका करोना के केसो बढ़ल जाता. पुरनका करोना भी फेर बढ़े लागल बा. तबो लोगवा मानत नइखे. मुंहजाबी पहिरल त फैसन के खिलाफ बूझत बा लोग.

बुढ़ऊ लोग पर बेसी खतरा बा. एक त जाड़ आ दोसरे बेमारी. हमरा त बुझाता मलिकार कि इहे हाल रही त बुढ़ऊ लोग झार के ओरा जाई. देखीं ना, पनरह दिन पहिले ले लगन जोतले रहल हा आ अब मुआरी के दनादन नेवता आवे लागल बा. कवनो गांव नइखे, जहां अबे ले एह जाड़ में दू-तीन आदमी खरचा ना भइल होखस.

मछागर वाला मामा के बड़कू बेटा डागदर हउवन. ऊ परसों आइल रहले. बतावत रहले कि घाम उगे के पहिले बूढ़ लोग के घर से बाहर ना निकले के चाहीं. ओइसन लोग के त अउरी ना, जेकरा परेसर भा चीनिया बेमारी बा. गांती अइसन सगरी देह कपड़ा-चदरा से ढंकाइल रहे के चाहीं. माथा ढांक के आ कान बान्ह के राखे के चाहीं. ई सुन के हमरा बड़ा डर लागे लागल बा. पांड़े बाबा के भी उमिर ढेरे हो गइल. रउरो त अब साठ से ऊपर बानी त बूढ़े नू कहायेब. जाड़ भर बच के रहेब. अबे ले डीह बाबा के किरपा से सब ठीक बा, काली माई आगे सब ठीक राखस.
राउर, मलिकाइन
(लेखक ओमप्रकाश अश्क स्वतंत्र पत्रकार हैं. आलेख में व्यक्त विचार उनके निजी हैं)

Tags: Bhojpuri Articles, Bhojpuri News, Coronavirus

अगली ख़बर