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Bhojpuriमें पढ़ें मलिकाइन के पाती- गजर बजर लइका-लइकिन से भरलs घर भगेलू, कबले चालू रखबs भइया ई उद्योग घरेलू!

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दुनिया के आबादी 800 करोड़ हो गइल बा. अपना मुलुक भारत के बात कइल जाव त इहो तूफाने जोतले बा. अबहिये एइजा के आबादी एक सौ अड़तीस करोड़ से बेसी बतावल जाता. दस साल बाद ई बढ़ के डेढ़ सौ करोड़ ले पहुंचे वाला बा. धरती त बढ़े के नइखे आ मूड़ी बेहिसाब बढ़ल जाता. ढेर दिन ना लागी, जब दुनिया में सबसे बेसी आबादी भारत के हो जाई.

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पांव लागीं मलिकार! इसकूल में पढ़त रहनी त कविताई करे वाला लोग के एगो जुटान भइल रहे. ओइमें एक जने आपन कविता सुनावत रहले- गजर बजर लइका-लइकिन से भरलs घर भगेलू, कबले चालू रखबs भइया ई उद्योग घरेलू ! ओह बेरा त एकर माने ना बुझाइल, बाकिर अब बुझाये लागल बा. आज पांड़े बाबा के बतकही सुन के गेयान अउरी बढ़ गइल हा. पांड़े बाबा बतावत रहुवीं कि दुनिया के आबादी आठ सौ करोड़ हो गइल बा. अपना मुलुक भारत के बात कइल जाव त इहो तूफाने जोतले बा. अबहिये एइजा के आबादी एक सौ तीस करोड़ बतावल जाता. दस साल बाद ई बढ़ के डेढ़ सौ करोड़ ले पहुंचे वाला बा.
धरती त बढ़े के नइखे आ मूड़ी बेहिसाब बढ़ल जाता. ढेर दिन ना लागी, जब दुनिया में सबसे बेसी आबादी भारत के हो जाई. जब एतना लोग हो जाई मलिकार त कइसे रही आ कहां से एतना मुंह के खोराकी आई, हमरा त इहे समझ में नइखे आवत. एतना पढ़ाई-लिखाई के बादो गांव के लोग का हड़बड़ी रहता कि बेटा जल्दी बियहा जाइत त दुगो रोटी बनावे के आराम मिल जाइत. एही हड़बड़ी में लोग कमे उमिर में बेटा बियह देता. बियाह होखते देवता-पितर के गोहरावे लागता कि एगो नान्बेह-बार हो जाइत त पोता खेला लीतीं. पोती हो गइल त पोता के इंतजार में कई गो बेटी हो जातारी सन. बेटी त अबहियो लोग के माथा के बोझा बनल रहतारी सन. कइसे कवना खूंटा ओकनी के बान्ह दिहल जाव आ माथा के बोझा हलुक हो जाव, लोग एही बतकही में लागल रहता. लोग इहो नइखे देखत कि आज के बेटी कवनो बेटा से तनिको कम नइखी सन. साइकिल, फटफटिया त फुर्र-फुर्र चलावते बाड़ी सन, अब त सुने में आवता कि आसमान में मर्दाना अइसन जहाजो उड़ावे लागल बाड़ी सन. सेना-पुलिस में भरती हो तारी सन. बेटा-बेटी में कवनो फरक अब नइखे रह गइल. एकरा बादो लोग का माथा में गोबर घोरा गइल बा.

नोकरी खातिर लोग हुरदुंग मचवले बा. जवना हिसाब से लोग बढ़ल जाता, ओह हिसाब से केकरा भीतर एतना बूता होई, जे सभका के नोकरी दे दी. अपना इहां एगो बड़ बेमारी ई ह मलिकार कि कपरबत्थी भइला पर केहू ओह रोग के कारन ना जाने के चाहे. फटाक से दवाई के दोकान पर जाके एगो गोटी कीन ली आ फांक के आराम पा जाई. ई कबो जाने के कोसिस ना करी कि कपरबत्थी खराई से भइल बा, तेलउंस खइला से भइल बा कि ढेर देर घाम भा ठंडा में रहला से भइल बा. आबादी बढ़ल जाता आ केहू एह पर सोचे के तेयार नइखे. हरिहरपुर के हरना के त रउरा चीन्हते होखेब मलिकार, अपना इहां हरवाही उहे केतने साल ले कइलस. जवना घरी ओकर उमिर पच्चीस-तीस बरिस के रहे, ओही बेरा नौ गो लइका-लइकी जनमा दिहले रहे. एक बेर हम टोकबो कइनी त कहलस ए बहुरिया, भगवान जेकरा के देबे के चहिहें, ओकरा के केहू रोक ना नू पाई. केतने लोग त अइसन बा, जे सगरी अधावत कइल, बाकिर एगो मूस ले कोख में ना आइल.

पांड़े बाबा के आज के बात सुनला के बाद हमरा इहे बुझउवे कि हरना अइसन लोग के कमी अबहियो नइखे. एही पर इसकुलवा में सुनलका कवितवा हमरा इयाद पर गउवे. भगेलू के जगहा हरना के नांव ध दिहल जाव त ओकरा पर सोरहनिया ई कवितवा फिट बइठ जाई. बुझाता कि लइका जनमावे के जनाना मसीन हई सन, हरना अइसन आदमी कारखाना के मसीन अस ओकरा के चलावत रहेला आ लइकन के पैदा करत रहेला. हरना के जरी दस धुर में बनल पलानी के घर रहे आ ओही में नौ गो लइका-लइकी आ दू परानी ओकनी का रहत रहले सन. कमाये वाला एगो आदमी आ खाये वाला एगारह जन. एह घरी के नइखे मालूम कि ओकर का हाल बा, बाकिर पहिले के हाल इयाद कइला पर सोचीले कि ओकनी के फरका घर बनावे के चाहत होइहें सन त दस धुर में नौ जगे नू बखरा लागी. आदमी बढ़ी, बाकिर जमीन त ओतने नू रही. ऊ कवनो रबड़ त ना ह जे लमरा दिहल जाव आ लोग ओई पर पसर जाव.

जानतानी मलिकार, लोगवा काहें एतना तेजी से बढ़ल जाता. हम जवन अबले समझले बानी, ऊ बता दे तानी. लोग का बुझाला कि जेतने बेसी लइका होइहें सन, घर में ओतने कमासुत बढ़ी. ढेर लोग त इहे कहेला कि लइका फइका भगवान के देन ह. कुछ लोग त बेटा के चक्कर में आपन कुनबा बढ़ावत चल जाला. ओइसन लोग के मन में ई बात बइठल रहेला कि बेटा खानदान के दीया होला. माथा के बोझा हलुक करे खातिर केतने लोग लइकिन के बियाह खेले-कूदे के उमिरे में क देला. एहू से बेसी बच्चा जनमे ले सन. अनपढ़-जाहिल लोग जबले रही, ई बेमारी ओराये वाला नइखे.

पांड़े बाबा कवनो बतिया बड़ा नीमन से समझा के कहीले. उहां के बतावत रहुवीं कि सन 1987 में दुनिया के आबादी करीब 5 अरब रहे. ई आंकड़ा 11 जुलाई 1987 के जारी भइल रहे. ओही साल आ ओही तारीख से जनसंख्या दिवस मनावे के शुरुआत भइल. दुनिया एह बात से फिकिर में तबे से पर गइल कि कइसे आबादी के कंटरउल कइल जाव. अबे के बात कइल जाव त दुनिया में 7.9 अरब से भी बेसी लोग हो गइल बा. सोझ कहल जाव त ई आंकड़ा 8 अरब बा. आपन मुलुक मने भारत के बात कइल जाव त आबादी पर नजर राखे वाली एगो कवनो वेबसाइड वरडोमीटर (वर्ल्डोमीटर) 2021 में भारत के आबादी 139 करोड़ बतवले रहे. संजुक्त राष्ट्र जनसंख्या के रिपोट में भारत के आबादी सन 2011 में 121 करोड़ रहे आ 138000385 हो गइल बा. इहो बतावल जाला कि दुनिया के सौ लोग में 18 आदमी के घर भारते में बा.

पांड़े बाबा कहत रहुवीं कि बढ़त आबादी आवे वाला टाइम में केतना तबाही मचावे वाला बा, ई अबे से ना सोचल गइल त भारी फेरा हो जाई. खाये पर त आफत अइबे करी, लोग का नोकरी ना मिली. परदूसन बढ़ी. खाये पर त अइसन आफत आई कि लोग खलिहे पेट सूते पर मजबूर हो जाई. हाले में एगो खबर आइल रहल हा कि दुनिया में रोज सैकड़न लोग भुखमरी से जूझत बा. भर पेट भोजन ना मिलला से असमय लोग मुअत बा. भारत में 22 करोड़ लोग के भरपेट खाना नसीब नइखे होत त दुनिया के एक चौथाई कुपोसित लोग भारते में बा. एतने ले ना, इहे हाल रही त पीये के पानी ले ना मिली. हवा बेयार एतना गंदा हो जाई कि किसिम किसिम के बेमारी बिना बोलवले आ जइहें सन.

एतना सुनला के बाद माथा घूम गउवे मलिकार. रउरा पतियाईं भा ना, बाकिर हम देखले बानी, पांड़े बाबा जवन कहीले, ऊ सांच हो जाला. उहां के कवनो बात बड़ा सोच-विचार आ जांच-परख के बोलीले. रउरा त पढ़ल-लिखल आदमी बानी मलिकार, एकरा बारे में लोग के समझावे-बुझावे के चाहीं. हमनी त आपन जिनिगी निबाह लिहनी सन, बाकिर आगे के पीढ़ई खातिर हमनिये के नू राह देखावे के परी. एइजा सब कुल्ह ठीक बा, आपन धेयान राखेब.
राउर, मलिकाइन
(ओमप्रकाश अश्क स्वतंत्र पत्रकार हैं. आलेख में व्यक्त विचार उनके निजी हैं.)

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