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Bhojpuri में पढ़ें मलिकाइन के पाती- झारखंड में फेर शुरू भइल खतियान के खतरनाक खेल

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झारखंड बाईस साल के गभरू जवान हो गइल बा. बचपन से लेके अब ले केकरा के झारखंडी कहल जाव आ केकरा के बाहरी, एकर लफड़ा अबे ले ...अधिक पढ़ें

पांव लागी मलिकार ! झारखंड में त एह घरी खूबे हौवाहेल मचल बा मलिकार. पांड़े बाबा बतावत रहनी हां कि उहवां के सरकार असली झारखंडी आ बाहरी के पहचान खातिर 1932 के खतियान के आधार बनाई. एकर माने इहे नू भइल मलिकार कि 1932 के बाद जे झारखंड में होई, ऊ अब झारखंडी ना कहाई ! पांड़े बाबा बतावत रहुवीं कि झारखंड बनले  बाईस साल हो गइल. अब झारखंड गभरू जवान हो गइल बा. झारखंड सन 2000 में बनल रहे. तब से लेके अब ले केकरा के झारखंडी कहल जाव आ केकरा के बाहरी, एकर लफड़ा ना फरियाइल. पहिलहूं तीन बेर एकरा खातिर पवलीसी बनल रहे, बाकिर फेल हो गइल. पहिलका बेर त खूबे मार-काट मचल रहे. वोह बेरा छह लोग के जान चल गइल रहे. ममिला बड़की कचहरी ले चहुंपल आ हाईकोर्ट ओकरा के खारिज क दिहलस.

अबकी बेर फेर वोही आधार पर झारखंडी के परिभासा रचाये वाला बा. हमरा पांड़े बाबा के एही साल चइत भा बैसाख में बतावल बात इयाद पर गउवे. झारखंड के मुखमंतरी हेमंत सोरेन साफ कहले रहले कि 1932 के खतियान के आधार बना के डोमिसाइल पावलीसी बनावल आसान नइखे. बनबो करी त कोट में ई टूट जाई. ई कहला के बादो सरकार झारखंडी पहचान खातिर अब 1932 के आधार पर पवलीसी बनावे जात बिया. एतने ले ना, पांड़े बाबा इहो बतावत रहुवीं कि अब झारखंड में ओबीसी के 27 परतीसत रिजरवेसन दीहल जाई. झारखंड में सगरी रिजरब सीट जोड़ दिहल जाव त ई 77 परतीसत हो जाई. एकर मतलब ई भइल कि ओबीसी, एससी, एसटी जइसन सगरी रिजरवेसन के बाद 23 परसेंट जनरल जात खातिर बांची.

पांड़े बाबा कहत रहुवीं कि मोटामोटी सवा तीन करोड़ झारखंड के आबादी बा. 1932 के खतियान झारखंडी खातिर लागू भइल त दू-सवा दू करोड़ अइसहीं छंटा जइहें. अइसहूं ई पवलीसी फेरू फेल हो जाव त कवनो अचरज ना होखे के चाहीं. जहवां ले रिजरवेसन के बात बा त दिल्ली वाली बड़की कचहरी साफ क दिहले रहे कि केहू के केतनो रिजरवेसन दीहल जाव, बाकिर सब मिला के 50 परतीसत से बेसी ना होखे के चाहीं. ई सगरी बात हेमंत जानत बाड़े. एकरा बादो ऊ अइसन कइले हां त एकर मतलब साफ बा. लोग के बीच में सनेसा त चलिये गइल कि सरकार झारखंडी लोग खातिर चिंता करतिया.

पांड़े बाबा एकर असली राज बतावत रहुवीं. हेमंत सोरेन पर फूल छाप पाटी के नेता लोग आरोप लगावल कि ऊ मुखमंतरी होके अपना नांव से खदान ले लिहले बाड़े. उनकर भाई बसंत सोरेन भी कवनो खदान कंपनी के बोड में बाड़े. गवरनर साहेब के जरी जब शिकायत पहुंचल त ऊ ओकरा के चुनाव आयोग के भेज दिहले आ राय मंगले कि का करे के चाहीं. चुनाव आयोग 25 अगस्त के आपन राय गवरनर साहेब के भेज दिहलस, बाकिर अबे ले ऊ आपन फैसला सुनवले नइखन. एने हल्ला भइल कि हेमंत के विधायकी गइल. तीन हप्ता बीत गइल, अबे ले गवरनर साहेब के फैसला नइखे आइल. एह बीचे हेमंत आपन जमीन बरियार करे खातिर कई गो काम करत जा तारे.

हेमंत एने कई गो काम अइसन कइले बाड़े, जवना से उनकर खूब वाहवाही होता. सरकारी करमचारी लोग के पुरनका हिसाबे पेनसन देबे के ऐलान हाले में कइले हां. एकरा से झारखंड के सवा लाख करमचारी लोग के बल्ले बल्ले हो गइल बा. पुलिस वाला लोग के साल में एक महीना के छुट्टी देबे के ऐलान कइले बाड़े. मने वोह लोगन के अब बारह महीना के डिउटी कइला पर एक महीना के अलगा से छुट्टी मिली. एह से 70 हजार पुलिस वाला के फायदा होई. पारा मास्टर लोग के दरमाहा हेमंत सरकार बढ़ा दिहलस. एकरा से 65 हजार मास्टर लोग खूबे खुश बा. आंगनबाड़ी में सेविका-सहायिका लोग के दरमाहा भी हेमंत बढ़ा दिहले बाड़े. एकर फायदा 38 हजार सेविका-सहायिका लोग के मिली.

अब ओबीसी के रिजरवेसन आ खतियानी झारखंडी के कानून पास करावे के हेमंत ठनले बाड़े. ऊ अइसन तीर चलवले बाड़े कि विरोधी लोग एकदमे ठंढा गइल बा. बाकिर सबसे बड़ पेंच एकरा के लागू करावे में फंसे के चानस बा. पेंच एह से कि पहिलका बेर एही तरे बाबूलाल मरांडी कानून बनवावे चलले त मार-काट मच गइल. हाईकोट ओकरा के खारिजो क दिहलस. ओकरा बाद अर्जुन मुंडा खाली कमीटी बना के रह गइले. रघुवर दास एगो नया पवलीसी बनवले, जवन उनका टाइम में त चलल, बाकिर हेमंत के राज आवते ओकरा के बदले के बतकही बीच-बीच में होखे लागल. हेमंत के तीर छाप पाटी एही नांव पर वोट मंगले रहे. उनका पाटी के एगो एमएलए लोबिन साहेब एकरा खातिर खिसियाइल रहले हां. जब हेमंत का अपना कुरसी पर खतरा बुझाये लाग हा त ऊ दन देना 1932 के खतियान के आधार बनावे के बात अपना मंतरी लोग से पास करा लिहले. अब ई असेमली से पास होई त कानून बन जाई.

हेमंत के एह ऐलान से झारखंडी लोग खूबे अगराइल बा. बाकिर सांच बात ई बा कि झारखंड में एक संगे सगरो सरवे निखे भइल. 1911 से शुरू सरवे के काम 1931, 1932, 1964, 1975, 1993 आ 2005 ले भइल बा. अब 1932 के खतियान के आधार बनावल जाई त बाकी सरवे के कवनो माने मतलब ना रह जाई. पांड़े बाबा इहो बतावत रहुवीं कि हाथ छाप पाटी एकरा खातिर पहिले कबो तैयार नइखे भइल. अबकी ऊ हेमंत के संगे सरकार में सामिल बिया. देखल जाव, आगे का होता. असली इंतहान त असेमली में होई. ओकरा बाद गवरनर साहेब के राय जरूरी होई. एह से हमरा बुझाता मलिकार कि ई खाली झुनझुना साबित होई. अखिरिया में एकरा अंटकला के बेसी चानस बा. एह से कि पहिले एकरा के हाईकोट खारिज क चुकल बा.

राउर, मलिकाइन

(ओमप्रकाश अश्क स्वतंत्र पत्रकार हैं. आलेख में व्यक्त विचार उनके निजी हैं.)

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