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Bhojpuri में पढ़ें मलिकाइन के पाती- दिलदार बनल रहीं, दिल दुखाई त दुख अपने आप आफत आ जाई

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दिल मिलल बा त दिलदार बनल रहीं. दिल के दुख देब त अपने आप बेमारी के आफत आ जाई. देस-दुनिया के दिल के रोग जवनी गंतिया जकड़ल ...अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
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पांव लागीं मलिकार ! पहिले आ अब के जुग-जमाना में केतना फरक आ गइल बा मलिकार. तब आ अब में कवनो तालेमेल नइखे. पहिले बेमारी के नांव पर आदमी छोट बेमारी में जर-बोखार के नांव सुनत रहे आ अब त जर-बोखार के एतना किसिम हो गइल बाड़ी सन कि कहल मुसकिल बा. रउरे देखीं ना, एगो बोखार के अबे केतना नांव हो गइल बा. करोना के बोखार, काला जार, दिमागी बोखार, मलेरिया के बोखार आ डेंगू के जर. बड़ बेमारी में टीबी के बेमारी पहिले कहीं कहीं सुना जाई. अब त टीबी कमे सुनाता, बाकिर घरे घरे बलड परेसर आ चीनिया बेमारी के रोगी हो गइल बाड़े. सुने में आवता कि ई दुनो बेमारी दिल के बेमारी के जनम देला. पहिले तनी उमिर चढ़ला पर हाट के बेमारी कहीं कहीं सुनाई, अब त पचीसे-तीस बरिस के उमिर में हाट के बेमारी होखे लागल बा. पांड़े बाबा के बतकही आज नया-नया किसिम के बेमारी के बारे में होत रहल हा. उहां का हाट के बेमारी के जनम देबे वाला परेसर आ चीनिया बेमारी पर बेसी बतकही करत रहुवीं.

पांड़े बाबा बतावत रहुवीं मलिकार कि एह घरी डेंगू के बेमारी खूबे जोर चलल बा. दिल्ली में त ई करोना अस खतरनाक भइल जाता. जेने देखीं, केहू ना केहू बोखरियाइल मिल जाई. जांच करवला पर बेसी ममिला में डेंगू निकल जाता. बंगाल में बरखा-बूनी के एह सीजन में अबे ले दू हजार आदमी डेंगू के चपेट में आ चुकल बाड़े. तीन-चार आदमी के मुअलो के खबर बा. पांड़े बाबा इहो बतावत रहुवीं कि मच्छर के कटला से मलेरिया आ डेंगू दुनो होला. डेंगू के मच्छर साफ पानी पर आपन खानदान बढ़ावेले सन. गांव-शहर में एतना मकान बनत बाड़ी सन कि जेने-तेने पानी जमल रहता. इहे पानी डेंगू के मच्छर के ठेकाना बनता. पांड़े बाबा इहो बतावत रहुवीं कि जहवां गंदगी रहेला, मच्छर ओहीजा रहेले सन आ आपन खानदान बढ़ावत रहेले सन. रोज जेतना कूड़ा करकट घर से निकलेला, ओइमें बारह आना के सफाई त रोज हो जाला, बाकिर चार आना सड़के पर पसरल-छिंटाइल रह जाला. बरसात में ई कूड़ा करकट सर गल के मच्छर के अड्डा बन जाला.

परियार साल के बात हमरा इयाद पर गउवे मलिकार. मुखड़ेरा वाली मउसी के बड़की बेटी के सास के डेंगुए भइल रहे. केतना दवा-दारू कइल लोग, नाहिंए बांच पवली. सिहोरवां के सतघरवा के नरेस काका कोइलरी में काम करत रहले. उनका के डेंगू अइसन धइलस कि देहिए टूट गइल. आज ले उनका देह पर हेरा ना चढ़ल. बेमारी के टाइम में डागदर बतवले रहे पपीता के पतई के रस आ बकरी के दूध पीए के. बकरी के दूध जवार में कहीं ना मिलल त तीरबिरवां के बकरटोल से एगो दढ़ियल बकरी कीन के खदेरन ले अइले. रोज दूनू बेरा मिला के ऊ सेर भर दूध देव. उहे पीके नरेस नीरोग भइले. उनकर देह अइसन टूटल कि ओकरा बाद नोकरी करे ऊ नाहिंए गइले. कहले कि अब देह में ओतना बूता नइखे बुझात, जेतना बेमारी के पहिले रहे.

खतरनाक भइल जाता दिल के बेमारी
पांड़े बाबा बतावत रहुवीं कि जवना झारखंड में रउरा रहीले, ओइजा के हालत दिन पर दिन खराब भइल जाता. कवनो एमसीसीडी बा, जवन हर साल मउअत के कारन बतावेला. ओकर दू साल पहिले के एगो रिपोट आइल रहे. जवना झारखंड के लोग मोटहन अनाज खाला आ हाड़ तूर के मेहनत करेला, उहवां हाट के बेमारी उपरा गइल बा आ लोग के जान लेता. पहिले झारखंड में सबसे बेसी मउवत के कारन भर पेट भोजन ना मिलल, दस्त, टीबी, मलेरिया, सेपटीसीमिया मानल जात रहे. अब दिल के बेमारी मउअत के सबसे बड़ कारन हो गइल बा. रिपोट के बात अगर सांच बा त साल 2020 में 61.3% मउअत हाट के रोग से भइल, जवन देस भर के औसत से 29% बेसी रहे. झारखंड में 7313 लोग अलगा-अलगा बेमारी से मुअल रहे, जवना में से 4481 लोग हाट के बेमारी से मरल रहे. ओकरा तीन साल पहिले मने 2018 में हाट के बेमारी से 596 लोग मुअल रहे. एकर माने ईहे नू भइल कि दुइए साल में हाट के बेमारी से सात गुना से बेसी लोग के जान गइल. हालत एही से समझल जा सकेला कि तीन साल में हाट के बेमारी से मरनी में झारखंड में 652% बढ़ती भइल. एही टाइम में देस में इस मुए वाला के तैदाद 21% बढ़ल.

तीन साल में हाट के बेमारी से मुए वाला 86 से 4101
झारखंड में साल 2018 में हाट के बेमारी से खाली 86 आदमी मुअल रहले. साल 2019 में ई तैदाद 262 हो गइल आ 2020 आवत-आवत हाट के बेमारी 4101 आदमी के जान ले लिहलस. एकर माने ई कि तीन साल में हाट के बेमारी से मुए वाला 652 परतीसत बढ़ गइले. अचरज एह बात के बा कि ओही समय में देस में हाट के बेमारी से मउअत में 21 परतीसत के बढ़ती भइल रहे. देस में साल 2018 में 478924 आ 2020 में 580751 लोग हाट के बेमारी से मुअल रहे. इहो सुन के लोग का अचरज होई कि करोना अइसन खतरनाक बेमारी के झारखंड के लोग धकिया दिहल, बाकिर हाट के बेमारी बढ़त देख के लोग थहरा गइल बा. झारखंड में करोना से 557 लोग मुअल रहे. एकरा से आठ गुना बेसी लोग हाट के बेमारी से मुअल.

खान-पान आ रहन-सहन बनता हाट के बेमारी के कारन
पांड़े बाबा बतावत रहुवीं कि पहिले दिल के बेमारी एतना ना सुनात रहल हा. अब त घरे घरे एकर डेरा हो गइल बा. केहू के बीपी त केहू का सुगर के बेमारी धइले बा. इहे दुनू बेमारी होली सन, जवना से हाट के बेमारी के जनम होला. ई बेमारी खान-पान आ रहन-सहन बिगड़ला से बढ़ेला. एक त निछाक कवनो चीज अब मिलत नइखे. मिलावट त गोलमरीच अइसन मसाला से लेके खाये-पीये के सगरी सामान में हो गइल बा. गोलमरीच में पपीता के बीया मिला के बेचत बाड़े सन. पीसल हरदी कीनेब त ओइमें पीयरका रंग मिलावल मिली. नकली घीव, नकली दूध आ खोआ-मलाई वाला मिठाई त अरी मिलावटी. हर साल देवराई में छापा परेला आ नकली घीव-मिठाई जगहा जगहा धराये के खबर आवेला. एकरा बादो मिलावट रुकत नइखे. लोग के अब ना सुते के कवनो टाइम रह गइल बा आ ना जागे के. खाये-पीये के कवनो धरान नइखे. बाजार से तेलही चीज कीन के लोग खात रहता. पहिले लोग मास-मछरी साल में जगे-परोजन भा फगुआ में खाई. अब त रोजे लोग खाता. चबीस घंटा एने-ओने के बतकही आ तीन-तेरह के फेर में लोग के दिमाग रहता. बेमारी बढ़े के इहे कारन बा. मेहनत त अब लोग करहीं के नइखे चाहत. पैदल चलल त फैसन के खिलाफ भइल जाता. खेतीबारी केहू करते नइखे. हर-कुदारी केहू चलावते नइखे. देहज मेहनत के कवनो काम केहू के नइखे सोहात अब. एही से जवन बेमारी पचास-साठ के उमिर में लोग के होत रहल हा, अब पचीसे-तीस बरिस के उमिर में होखे लागल बा. दारू आ बीड़ी-सिगरेट पीये में त लोग के अब छोट-बड़ के लाज-हाया नइखे रह गइल.
राउर, मलिकाइन
(ओमप्रकाश अश्क स्वतंत्र पत्रकार हैं. आलेख में व्यक्त विचार उनके निजी हैं.)

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