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Bhojpuri में पढ़ें मलिकाइन के पाती- सतुआ के बारे में जानीं- शीतल प्रसाद, राम रस, लंका, भोजन करहु छाड़ि सब शंका

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आज के जमाना में पिज्जा-बर्गर पर लोग के जोर बेसी हो गइल बा. पहिले सतुआ के तुरंता भोजन कहल जाव. एकर विध आ फायदा बतावल गइल बा- शीतल प्रसाद, राम रस, लंका, भोजन करहु छाड़ि सब शंका. मने सतुआ के संगे नून आ मरिचा काफी बा. एकरा के खइला से बेमारी के खतरा त कवनो रहबे ना करेला, उलटे बेमारी में कई बेर ई दवाई के काम करेला.

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पांव लागीं मलिकार ! आज पांड़े बाबा के दुआर पर सतुआ पुरान खूब भइल हा. रामचनरापुर के रमेसर एकर बखान शुरू कउवन कि सतुआ त सालो भर खाइल जाला, बाकिर गरमी में एकर सेवन रामबाण बा. सतुआ सबेरहीं खा लीं आ भर दिन पानी पीयत रहीं. गरमी से होखे वाली बेमारी नियरा आवे के नावें ना ली. अब त भंसार ओरा गइली सन, ना त पहिले घर-घर से मकई, जौ, बूंट, मटर आ केराव भुजाये खातिर जाव. घरे में जांत पर पीस के सतुआ तैयार होखे. केहू सब किसिम के सतुआ मिला के खाव त केहू एके किसिम से काम चला लेब. नियम से गांव के लोग के एक टाइम भोजन सतुआ होत रहे. ना लवना के चिंता आ ना कवनो टाइम लागेला. एही से एकरा के तुरंता भोजन कहल जाला.

सतुआ, नून आ हरियर मरिचा से काम चल जाला. ढेर भइल त लोग घर में बनल आम आ ललका मरिचा के अंचार के संगे एक-दू टुकी पियाज ले लेला. अइसहूं कहल जाला कि गरमी में हरियर मरिचा खइला से पेट खराब ना होखे आ पियाज खइला से लूह ना लागे. सतुआ खूबे पानी सोखेला. एह से गरमी में सतुआ खइला के बाद आदमी एतना पानी पी लेला कि देह में पानी के कमी तनिको ना होखे. पुरनिया लोग एही से गरमी में रोज दुपहरिया सतुआ खाये के नियम बना दिहले रहे.

पियाज का बारे में ई सुन के हमरो इयाद पर गउवे मलिकार. लरिकाईं में जब इसकूल मवरनिंग हो जाव त लवटे के बेरा कड़कड़ात घाम होखे. जूता-चप्पल त ओह बेरा केहू का गोड़ में रहबे ना करे, छाता के चलन भी एतना ना रहे. लूह से बचे खातिर हमार माई के मउसी सिखवले रहली. घामा में कबो निकले के होखे त कांख में पियाज दाब लीह लोगिन. एह से लूह ना लागेला. हम रोज एगो पियाज ढेरी में से निकाल के सबेरहीं से कांख में दाब लिहल करीं. लवटला के बाद ओकरा के फेंक दीं. सगरी लइका-लइकी इहे करs सन. कबो केहू भुला जाव त राह में केहू के खेत से एगो पियाज कोड़ के निकाल लेव आ कांख में दाब लेव.

जवना बेरा सतुआ पर ई बतकही होत रहुवे, ओही बेरा मछागर वाला मामा के बेटा डागदर साहेब आ गउवन. रउरा त संजे (संजय) बाबू के जानते होखब. उहों का सतुआ के बतकही में शामिल हो गउवीम. उहां का अपना डागदरी के हिसाब से बतावे लगुवीं. उहां का कहत रहुवीं कि एह घरी परेसर आ सुगर के बेमारी महमारी अइसन बढ़ल जाता. ए दुनू बेमारी के मरीज खातिर सतुआ रामबाण होला. एकरा से देह में ना कोलेसटरोल बढ़े के खतरा रहेला आ ना देह में सुगर बढ़े के कवनो डर रहेला. एकरा छिलका में जवन रेसा होला, ऊ पेट खातिर कवनो दवाई से कम ना ह. ओह से पेट साफ रहेला आ गैस के बेमारी कबो ना होखे. सतुआ खइला के बाद पानी पीयत रहे के चाहीं. एह से कि ई खूब पानी सोखेला. गरमी में पसेना निकलेला त देह के पानी के कमी हो जाला. पानी पियावे के भी काम करेला सतुआ.

एही पर पांड़े बाबा पुरनका जमाना के बतकही सुनावे लगुवीं. पहिले लोग के बरियात जाई त बैल गाड़ी पर दू गो चीज पहिले लदा जाई- सतुआ आ चिउरा. जब गांव के जरी बरियात पहुंची त कवनो इस्कूल भा अइसन जगहा लोग देख के रुक जाई, जहवां पानी होखे. फेर सभे सतुआ निकाली आ गमछी पर सान के हीक भर भकोस ली. फेर गमछा धो के सुखा ली. सांझ होते बरियात बेटिहा के दुआरे लाग जाई. ई काम एह से लोग करी कि पहिले बियाह गरमी के मउसम में रोपात रहनी सन. रात में बरियाती के भोजन करे में देरी होखे भा कबो-कबो अइसनो नौबत आ जाव कि कुछ लोग खाये के बाकी रहे, तबे खायक ओरा जाव. जब ई बात पता चल जाव त बेटिहा के इज्जत जोगावे खातिर बेटहा का ओर से कहा जाव कि सभे खा लिहले बा. एह से परेसान भइला के दरकार नइखे. एने सतुआ सना जाव आ लोग खा के पेट भर लेव. बेटिहा का घर से जलपान आवे में देरी होखे त चिउरा फांक के लोग जलपान क लेत रहे.

एही पर लुधियाना से करोना में पर साल घरे लवटल गजाधर कहे लगुवन कि सतुआ खाली अपने इहां ले अब नइखे रह गइल. लुधियाना में उनका भेंटा जात रहल हा. सबेरे डिउटी पर जाये के पहिले ऊ सतुआ घोर के दू गिलास पी लेत रहले. अब पाकिट में किसिम-किसिम के चालानी सतुआ आ गइल बा. एगो सतुआ के बारे में डागदरो बबुआ बतावत रहुवीं. पटना में बूंट के कवनो अइसन सतुआ अब बिकाये लागल बा, जवना में नून आ नेमू मिलल रहता. खाली ओकरा में पानी डालीं, घोरीं आ पी लीं. गांव में सतुआ पहिले गरीब के भोजन कहात रहे, बाकिर अब त बड़-बड़ घर ले ई ढूक गइल बा. केहू डागदर के कहला पर सातुआ खात-पीयत बा त केहू एकर गुन पढ़-सुन के खाये लागल बा.

आन्हीं-पानी आ बजर परला से ढेरे नोकसान हो गइल बा

जानतानी मलिकार, दू दिन आन्हीं-पानी आ बजर अइसन तूफान मचवलस हा कि मोटीमोटी चार दरजन लोग के जान ले लिहलस. एके दिने त 33 आदमी मर गइले. केतने घर उड़िया गइली सन. सरकार मुअलका लोग के मोहावजा त दिहले बीया, बाकिर ओह से का होखे के बा. घर के आदमी त चल गइल. बिजली त अइसन कड़के मलिकार कि बुझाव कि आसमान टूट के धरती पर आ जाई. रउरा बतवले रहनी कि जब आन्हीं-पानी आवे त घर से बाहर ना जाये के चाहीं. एह से कि बजर परला के खतरा रहेला. हम त तबे से एतना डेराइल रहीले कि बिजली तनिको चमकल भा कड़कल त घर में से आंगना ले ना निकली ले. पांड़े बाबा बतावत रहुवीं कि बेसी लोग बजर परला से मरल बा.
राउर, मलिकाइन
(ओमप्रकाश अश्क स्वतंत्र पत्रकार हैं. आलेख में व्यक्त विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Article in Bhojpuri, Bhojpuri

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