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Bhojpuri में पढ़ें मलिकाइन के पाती- बुढ़ौती में जीप चलवले लालू आ हो गइल कर्पूरी ठाकुर के चरचा

Bhojpuri में पढ़ें मलिकाइन के पाती- बुढ़ौती में जीप चलवले लालू आ हो गइल कर्पूरी ठाकुर के चरचा

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लालू जादो बेमार बाड़े. बूढ़ हो गइल बाड़े. बाकिर चारा घोटाला में पेसी खातिर अइले पटना त आपन पुरनका जीप निकाल के हांके लगले. लालू जीप त हंकबे कइले, ऊ एही बहाने कर्पूरी ठाकुर पर चर्चा के लर जोर दिहले. लालू कहले कि एही जीप से हम कर्पूरी ठाकुर के घुमावत रहनी. ओकरा बाद त एकरा पर घमसान शुरू हो गइल बा.

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पांव लागीं मलिकार ! रउरा त मालूमे होई मलिकार कि लालू जादो महीना भर में दुसरका बेर पटना आइल रहले हां. उनकर नौटंकी त रउरा जनबे करीले. पहिलका बेर अइले त ललटेन छाप के संघतिया दल हाथ छाप के एगो नेता भगत चरन दास के भकचोन्हर दास आ नीतीश के सरकार के विसर्जन के बात कह के खूबे चरचा में रहले. अबकी चारा घोटाला में कोट में हाजिर होखे अइले त सन सतहत्तर में कीनल आपन जीप हांके लगले. ऊ इहो कह दिहले कि एही जीप से ऊ करपूरी ठाकुर के घुमावल करस. एकरा बाद त उनकर जवन छीछालेदर भइल हा मलिकार कि पूछीं मत. विरोधी लोग उनका पर मधुमाछी नियर टूट परल हा. लोग ओह जमाना के कागज खोज-हींड़ के निकालल हा, जब कबो करपूरी जी उनका से जीप मंगले रहले आ ऊ ई कह के देबे से इनकार क दिहले रहले कि जे मुखमंतरी रह चुकल बा, ऊ एगो कार काहे नइखे कीन लेत. हमरा गाड़ी में तेल नइखे, कह के ऊ उनका के जीप देबे से मना क दिहले.

रउरा त जनबे करीले मलिकार कि पांड़े बाबा के दुअरा रोजे खाली गांवे के लोग ना जुटेला, टोला टपरी के लोग के भी जुटान होला. एही में काल्ह गवंदरी के गेना मिसिर आइल रहुवीं. उहां के जल्दी बोलीं ना, बाकिर जब बोली ले त उहां के मुंह से बड़ा तिरपिछाह बोली निकलेला. पांड़े बाबा जब ई खबर सुनावत रहुवीं त गेना मिसिर से ना खेपउवे. ऊ कहुवन- ऊंट के रूप आ गदहा अइसन बोल एही के कहल जाला.

लालू के त शुरुए से आदत आपन घर भरे के रहल बा. उनकरा का बुझाई कि केतना तेयाग से करपूरी जी पोलटिक्स में जिनिगी बितवले. जे दू-दू बेर मुखमंतरी रहल, विपक्ष के नेता रहल, ऊ अपना खातिर एगो कार ले ना कीन पावल. आपन घर ले ना बना पावल. अपना कुल खानदान से केहू के जीयत भर में पोलटिक्स त छोड़ दीं, सरकारी नोकरी ले ना लगावल, ओकरा बारे में लालू का बतिअइहें. शुरुए से ऊ आपन सोचले. कइसे लंगी मार के ऊ मुखमंतरी बनले, लोग उहो जानता. ओकरा बाद उनकर कइल-धइल के नइखे देखले. पूरा खानदान उनकर पोलटिक्स में ललटेन छाप के मालिक बनल बा. धन-संपत के त पूछहीं के नइखे, ऊ त अइसन झलकत बा, जइसे गोड़ भा हाथ के झलका में भरल पानी लउकेला. ओही के फल अबे भोगत बाड़े. ऊ नवटंकी करत रहस. उहें का बतावत रहुवीं कि 40 महीना बाद लालू पटना अइले त लवटते किरनी (किडनी) खराब होखे के हल्ला मच गइल. अबकी जीप हंकले हां त सुनाता कि भाग के दिल्ली के अस्पताल में फेर भरती होखे के परल हा.

गेना मिसिर के बतकही सुनला के बाद पांड़े बाबा के माथा के पुरनका पोथी खुल गउवे. उहां के करपूरी ठाकुर के बारे में एगो बात अइसन बतउवीं कि मन पसीज गउवे, ई सोच के अइसनो लोग नू पोलटिक्स में रहल बा. पांड़े बाबा बतावत रहुवीं कि करपूरी जी दू बेर बिहार के सीएम रहले, बाकिर कार ना कीन पवले. जिनिगी के अखिरिया समय में एगो पुरान कार जरूर किनाइल, बाकिर लोग बतावेला कि उहो चंदा से किनाइल रहे, कवनो घूस के पइसा से ना. जेतना साफ उनकर सुभाव रहे, ओतने सादा उनकर जिनिगी. गेना मिसिर के बात के उहां के आगे अउरी साफ कउवीं.

कहवीं कि अस्सी के दसक ले करपूरी ठाकुर के जरी आपन कार ना रहे. एक बेर असेंबली के स्पीकर के जरिये ऊ लालू से जब कुछ देर खातिर जीप मंगले त कागज पर लिख के लालू उनका के जवाब भेजववले कि ‘कर्पूरी ठाकुर दू बार मुखमंत्री रहल बाड़े, कार काहें नइखन कीन लेत.’ इहे बतिया ए घरी उपटल बा, जब लालू ई कहले कि ऊ अपना जीप पर करपूरी जी के घुमावत रहले. अपना अखिरिया जिनिगी में करपूरी जी सकेंड हेंड कार कीन पवले. ई कवनो करपूरी के देखावा ना रहे. सांच बात ई रहे कि ऊ अपना जायज आमदनी से कार कीने के हैसियत में ना रहले. इहो बतावल जाला कि ऊ सेकेंड हेंड कार करपूरी जी चंदा के पइसा से कीनले, कवनो घूस के पइसा से ना. पांड़े बाबा बतावत रहुवीं कि 1972 में एमएलए के तनखाह तीन सौ रुपया रहे. एतना में घर चलावल उनका खातिर मुसकिल रहे.

लोहिया जी के विचारधारा वाला रहले कर्पूरी जी. लोहिया जी के कहनाम रहे कि उनका पाटी के एमएलए लोग आपन जीवन साधारण राखो. 12 जून 1954 के एगो पाती लोहिया जी लिखले रहले समाजवादी एमएलए लोग के नांव से. ओही में एह बात कि जिकिर रहे. 1954 में करपूरी ठाकुर ओही पाटी के एमएमलए रहले. 1977 में ऊ बिहार के मुखमंतरी बनले. लोहिया जी एमपी बन गइल रहले, तबो उनका जरी कार ना रहे. का ओह बेरा ऊ लोग कार ना कीन पाइत ? एह से ना कीनल कि ओह लोगन के तब पोलटिक्स के सिद्धांत होखे.

पांड़े बाबा कर्पूरी जी के बारे में एगो अउरी बात बतउवीं. उहां के कहत रहुवीं कि कर्पूरी जी हरदम फाटल कुर्ता आ फटही धोती पहिरस. सवख से ना, मजबूरी रहे. घर-परिवार के खरच रहे. अपना फुटानी पर ऊ कइसे बेसी खरच क पइते. एक बेर पटना में जयप्रकास नारायण के जनमदिन पर बड़का नेता लोग के जुटान भइल. चंदरसेखर, रामकिसन हेगड़े आ नानाजी देसमुख आइल रहे लोग. एही में केहू कर्पूरी जी के कुरता पर मजाक कइल. फेर चंदरसेखर जी कहले कि चल भाई, करपूरी जी खातिर एगो कुरता फंड बनावल जाव. ऊ खड़ा भइले आ सभका से चंदा मांगे लगले. सौ रुपिया ले जमा हो गइल. करपूरी जी के दिआइल कि ल, अब नया कुरता-धोती कीन ल. करपूरी जी पइसा त ले लिहले, बाकिर कहले कि पइसा ऊ बाढ़ से तबाह लोग खातिर बनल फंड में जमा क दीहें. अइसन-अइसन तेयागी नेता लोग नू रहल बा मलिकार अपना देस में ! अब त एमएलए-एमपी बनते लोग के आमदनी करोड़न में साल दर साल बढ़े लागत बा.
राउर, मलिकाइन

(ओमप्रकाश अश्क स्वतंत्र पत्रकार हैं. आलेख में व्यक्त विचार उनके निजी हैं)

Tags: Bhojpuri Articles, Bhojpuri News, Bihar News

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