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malikayin ke pati who report medical doctor should be on per 10000 population bhojpuri omprakash ashk

Bhojpuri में पढ़ें मलिकाइन के पाती- ए डागदर बाबू बताईं दवाई, बरिस भर में एक दिन राउर गुन गाईं!

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अबे देस में करीब 13 लाख डागदर बाड़े. एइमें 10.41 लाख डागदर रोगी देखेले भा इलाज करेले. बाकी बूढ़-बेमार बाड़े भा मर-ओरा गइले. केतने त बेसी कमाई खातिर दोसर देस ध लीहले.

पांव लागीं मलिकार ! पहिले ना एतना रकम के रोग रहल हा आ ना एतना डागदर-दवाई के जरूरत रहल हा. अब त घरे-घरे बेमार के भरमार हो गइल बा. केहू का परेसर के बेमारी बा त केहू के चीनिया रोग धइले बा. कई जने के दुनू बेमारी एके संगे बा. पांड़े बाबा का दुअरा पड़रौना वाला पहलवान चौधुरी कबो-कबो आवल करेले. जहिया ऊ आवेले त चाह पीये के पहिले पानी मांग के दू किसिम के दवाई फांकेले. पांड़े बाबा एक दिन टोकनी त बतावे लगले कि एगो चीनिया बेमारी के दवाई, एगो परेसर के आ एगो गैस खातिर रोज सबेरे खाये के परेला. फेर दुपहरिया आ रात खानि खाये के पहिले एकहे गो गोली लीले के परेला. मार मुंधइला के, पहिले केहू परेसर आ चीनिया बेमारी के नांव एतना सुनत-जानत रहे मलिकार !

पहलवान चौधुरी खाली नांवे के पहलवान बाड़े, देह त सिरगिटिया हो गइल बा. देह पर कपड़ा बुझाला कि खेत में चिरई हुलकावे वाला कवनो सिरखाड़ पुतला के पहिरावल बा. एक दिन एही पर बतकही शुरू भइल त ऊ बतावे लगले. कहत रहले कि पहिले नब्बे किलो वोजन रहे उनकर, बाकिर चीनिया बेमारी देह गला दिहलस. एक दिन हाले में जोखववले रहले त वोजन पैंतालीस किलो मसीन बतवलस. अबले हम ना जानत रहनी हां कि ई एतना खरनाक बेमारी मलिकार ! ऊ इहो बतावत रहुवन कि ई बेमारी कंटरउल ना राखल जाई त किरनी खराब हो जाई, हाड के बेमारी ध ली.

पांड़े बाबा आज बतावत रहुवीं कि जवना हिसाब से लोग बढ़ल जाता, ओतने तेजी से बेमारी पैदा हो तारी सन. रोगी के आगे डागदर कम पड़ जा तारे. उहां का कवनो हू (WHO) के कहला के हिसाब से बतावत रहुवीं कि हजार आदमी पर एगो डागदर होखे के चाहीं. अबे देस में 13 लाख डागदर बाड़े. एइमें 10.41 लाख डागदर रोगी देखेले भा इलाज करेले. बाकी बूढ़-बेमार बाड़े भा मर-ओरा गइले. केतने त बेसी कमाई खातिर दोसर देस ध लीहले. पर साल करोना के बेमारी में बिहारे में मोटामोटी सौ गो डाक्टर के जान चल गइल. ई आंकड़ा डागदर लोग के कवनो एसोसिएसन आईएमए बा, उहे बतवले रहे. कुछ डाकदर त जान-बूझ के रोगी ना देखस. एही पर हमरा इयाद परुवे मलिकार अपना इहां के एगो डागदर के कहानी. एगो नेता जी अपना बेटा के बड़ी सरधा से डागदरी पढ़वले, बाकिर ऊ रोगी के इलाज का जगहा साधु हो गइले. लोग उनका के भाईसिरी कहेला. तमकुही राज के मालिको डागदर रहले. ऊ रोगी ना देखस. सवखिया कबो केहू के देख लेस. एह से कि उनका ओकर जरूरते ना रहे. अइसने अउरियो लोग त होइए नू सकेला मलिकार !

पांड़े बाबा बिहारे के बतकही करत कहुवीं कि बारह करोड़ से बेसी लोग के एइजा आबादी बा. बाकिर बिहार में 28 हजार आदमी के इलाज खातिर एगो डागदर बाड़े. बिहार से अलगा होके झारखंड बनल बा. झारखंड के आबादी करीब 4 करोड़ के बा. ओइजा बिहार से हालत तनी ठीक बा, बाकिर तबो डागदर-मरीज में कवनो नीमन तालमेल नइखे. झारखंड में साढ़े अठारह हजार आबादी पर एगो डागदर बाड़े. अढ़ाई हजार आबादी खातिर अस्पताल में एगो सीट बा. करोना के टाइम में डागदर आ असपताल के कीमत समझ में आइल मलिकार. परसौनी वाली पियरिया फुआ के करोना धइलस त अस्पताल में सीट खातिर घर भर के लोग केतना छिछियाइल. असपताले खोजे में दू दिन बीत गइल. एही बीचे बिना कवनो दवा-बीरो के बेचारी चल बसली. डागदर, अस्पताल आ सीट बिना केतने लोग मरल, ओकर गिनती कइल मुसकिल बा.

पांड़े बाबा बतावत रहुवीं कि डागदरी के पढ़ाई के सबसे बेसी कवलेज अपने देस में बा, बाकिर इलाज का ममिला में सबसे खराब हालत एहीजा बा. देस में 595 गो मेडिकल कवलेज बा. एइमें 271 गो सरकारी आ 324 गो पराइवेट कवलेज बाड़े सन. सरकारी कवलेज में हर साल 44555 लइका डागदरी पढ़े खातिर नांव लिखावे ले सन. एकरा बादो देस में 12 लाख 89 हजार डागदर इलाज करे खातिर आपन नांव सरकारी खाता में लिखववले बाड़े, बाकिर इलाज के काम में 10 लाख 31 हजार डागदर लागल बाड़े. देस के आबादी अबहिये 130 करोड़ हो गइल बा. हर साल ई सुरसा के मुंह नियर बढ़ले जाता. सरकार 58 गो नया मेडिकल कवलेज खोलले बिया. एकरा से हर साल एमबीबीएस के 5800 सीट बढ़ जाई. मने हर साल अब 89395 लोग डागदरी के पढ़ाई करी. बाकिर एहू से फरियाये वाला नइखे. आबादी के हिसाब से अबे अउरी कवलेज आ डागदर के जरूरत बा. मान लीहल जाव कि हर साल एतना लोगन में सैकड़ा 80 आदमी पास क ले तारे आ ओइमें से अबे के जवन हिसाब-किताब बा, ओकरा मोताबिक सैकड़ा पचहत्तर इलाज में लागतारे, तबो साल में पांच-सात सौ से बेसी डागदर ना बढ़िहें.

देस के आबादी हर साल एक परतिसत से तनी कम मने 0.92 परतिसत के हिसाब से बढ़ल जाता. अंदाज लगावल गइल बा कि दस बरिस बाद मने साल 2032 ले देस के आबादी 152 करोड़ हो जाई. एतना आबादी के इलाज खातिर अबे अउरी मेडिकल कवलेज के जरूरत होई. अबे के हिसाब से 2032 ले 6 लाख अउरी डागदर देस में हो जइहें. मने दस बरिस बाद देस में इलाज करे वाला डाकदर साढ़े एगारह लाख हो जाये के अंदाज बा. अब एही से समझल जा सकेला कि दस-एगारह लाख डागदर के भरोसे देस के 152 करोड़ आबादी के इलाज के जिमवारी होई. तबो हजार आदमी पर पौना डाकदर के हिसाब बइठत बा. हू के बतकही मानल जाव त अबहिये बेमारी के हिसाब से हजार आदमी पर एगो डागदर होखे के चाहीं.

हमरा पहिले ई ना बुझउवे कि जब एतना डागदर पढ़ के निकलत बाड़े त ओइमें चार-पांच आना डागदर कहां बिला जा तारे. मुअल-बेमार भा सवखिया डागदरी ना करे के केहू ठान लेव त ओकरा के छोड़ियो दिहल जाव, तबो बकियवा काहां बिला जा तारे. पांड़े बाबा हमरा मन के संका के अपना बतकही से साफ क दिहुवीं. उहां के बतावत रहुवीं कि बेसी पइसा के लालच में इहां से पढ़-लिख के केतने डागदर दोसरा देस में चल जाले. जे जाला, ऊ फेर लवट के ना आवे. उहां के बतावे लगुवीं कि एह देस में डागदर लोग के खाता में नांव लिखाये के जब सुरुआत भइल त बंबई के एगो डागदर के नांव पहिलका नंबर पर रहे. बाकिर ऊ विदेस चल गइले. अब उनकर गिनती रखला के कवनो माने मतलब रह जाता का.

डागदर लोग के साल में एगो दिन राखल बा. लोग डागदर के धरती के भगवान मानेला. बाकिर अब त डागदरी नीमन धंधा हो गइल बा मलिकार. फटाक से लोग असपताल खोल लेता आ मरीज से मनमरजी पइसा अइंठे लागता. केतने लोग त कहेला कि मुअलो आदमी के नाक में हवा भर के हुटुकी चलावत रहेले सन आ सीसा से घर वाला के देखा के रोज चार-पांच हजार रुपया अइंठत रहेले सन. ओकनी के दलालो रखले बाड़े सन. आज चानसी डागदर बंगाली दादा आवे वाला बाड़े. उहे पांड़े बाबा के फोन कइले रहुवन कि डागदर लोग के दिन ह. आवतानी आ आज फीरी में जेकरा जवन जांच-इलाज करावे के होखे, करा लेव. हमहूं सोचले बानी मलिकार एगो बेमारी के दवाई पूछे के. रोज रतिया खानि गोड़ खूबे टटाता. अइहें त पूछेब- ए डागदर बाबू, दवाई बताईं, बरिस भर में एक दिन राउर दिन हम मनाईं.

राउर, मलिकाइन

(ओमप्रकाश अश्क स्वतंत्र पत्रकार हैं. आलेख में व्यक्त विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Article in Bhojpuri, Bhojpuri

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