Bhojpuri: वास्तुशास्त्र के माने वाला बा बहुते लोग, पढ़ीं एकर दिलचस्प प्रसंग

एह संसार के कुल चीज नश्वर बा. काहें से कि ई मृत्यु लोक ह. भौतिक जगत, वस्तु जगत. त घर के डिजाइन कइसन होखे के चाहीं आ ओमें सामान कहां आ कइसे रही, एकरे ज्ञान के नांव वास्तु शास्त्र ह. आईं शुरू से देखल जाउ. उत्तर, दक्खिन, पूरब आ पच्छिम ई चार गो मूल दिशा बाड़ी सन.

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आई आजु वास्तु शास्त्र के अवलोकन कइल जाउ. बहुत लोग वास्तु शास्त्र के मानेला आ बहुत लोग मनबे ना करे. बाकिर तबो एकरा भीतर झांकला पर का लउकता, एकर प्रयास कइला में कौनो बेजांय नइखे. “वास्तु” शब्द के उत्पत्ति “वस्तु” शब्द से भइल बा. एह संसार के कुल चीज नश्वर बा. काहें से कि ई मृत्यु लोक ह. भौतिक जगत, वस्तु जगत. त घर के डिजाइन कइसन होखे के चाहीं आ ओमें सामान कहां आ कइसे रही, एकरे ज्ञान के नांव वास्तु शास्त्र ह. आईं शुरू से देखल जाउ. उत्तर, दक्खिन, पूरब आ पच्छिम ई चार गो मूल दिशा बाड़ी सन. वास्तु शास्त्र में एह चार दिशा के अलावा विदिशा बतावल गइल बा. आकाश आ पाताल के भी दिशा मानि के एमें शामिल कइल गइल बा. त एकरा अनुसार चार दिशा, चार विदिशा आ आकाश पाताल के जोड़िके कुल दिशा भइली सन दस गो. विदिशा- मूल दिशा (पूरब, पच्छिम, उत्तर, दक्खिन) के कोना ईशान, आग्नेय, नैऋत्य आ वायव्य के विदिशा कहल जाला.

प्रकृति में विविध प्रकार के एनर्जी भा ऊर्जा बाड़ी सन. पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु आ आकाश तत्व के स्पंदन के बड़ा महत्व बा. एह तत्वन में ओंकार के ध्वनि भी बदल जाला. एह ऊर्जा रूपी स्पंदन के बीच परस्पर क्रिया होला, जौना के व्यापक प्रभाव एह पृथ्वी पर रहे वाला हर प्राणी पर परेला. वास्तु शास्त्र कहता कि जदि एकर ज्ञान होखे कि घर में कौन चीज कहां राखे के चाहीं त आदमी अपना जीवन में बहुते उन्नति करी. फली- फूली आ सुखी रही. त कुल मिला के ईहे समझ में आइल कि वास्तु शास्त्र भूमि, दिशा आ ऊर्जा के सिद्धांत पर केंद्रित बा. भूमि एसे कि जमीने ना रही त मकान कहां बनी. अब रउरा मन में सवाल उठत होई कि फ्लैट त एक संगे बनेले सन. ओमें वास्तु के कइसे ख्याल राखल जाई. बिल्डर जेतरे सुविधाजनक बा बना दिहलस. एकरा पर कई गो वास्तु विज्ञानी कहेला लोग कि फ्लैट में जतना संभव बा वास्तु के नियम के पालन करीं. बाकी भगवान पर छोड़ दीं. हं, रउरा जमीन खरीद के घर बनवावतानी त वास्तु के नियम पालन करब त सुख- समृद्धि बढ़ी. विश्वकर्मा जी के आदि वास्तुशास्त्री मानल जाला. विश्वकर्मा भगवान वास्तु शास्त्र के उत्पत्ति कइले. कई गो विद्वान कहेला लोग कि वास्तु के उद्भव वेद से भइल बा. त सरकार सार तत्व ई बा कि एह ब्रह्मांड में अनेक चुंबकीय शक्ति बाड़ी सन ओकर ख्याल राखि के मनुष्य जीवनयापन करी त सुखी रही. गेस्ट रूम ईशान कोण में बनावल शुभ मानल जाला.

आईं अब देखल जाउ कि ईशान कोण के महत्व का बा. उत्तर- पूर्व दिशा के ईशान कोण कहल जाला. वास्तु शास्त्र के अनुसार ईशान में कुल देवी- देवता लोगन के वास बा. ईशान दिशा सबसे शुभ मानल जाले. पूजा के स्थान एइजे रहे के चाहीं. घर के ईशान कोण के साफ- सुथरा, पवित्र आ खाली रखे के चाहीं. एही जा जल के स्थान राखे के चाहीं जइसे ट्यूब वेल, पानी के घड़ा, पानी पिए के फिल्टर मशीन वगैरह. एह दिशा में का राखल मना बा? त लिखल बा कि कचरा, स्टोर, बाथरूम भा रसोई घर ना बनावे के चाहीं. घर के एह हिस्सा में लोहा के कौनो भारी सामान ना राखे के चाहीं. अच्छा हं, एह दिशा में सेप्टिक टैंक भी ना राखे के चाहीं. रोज घर के एह हिस्सा में थोड़े देर बइठे के चाहीं. आ पूजा- पाठ के स्थान रहे तो अउरी बढ़िया.

आग्नेय कोण के तरफ मुड़ल जाउ. पूर्व आ दक्खिन के बीच वाला कोण के आग्नेय कोण कहल जाला. दक्खिन आ पच्छिम के बीच वाला कोण के नैऋत्य कहल जाला. एही तरे पच्छिम आ उत्तर के बीच के कोण के वायव्य कोण कहल जाला आ मध्य स्थान के ब्रह्रास्थान के रूप में मानल जाला. वास्तु शास्त्र में घर के आग्नेय कोण, अग्नि देवता के स्थान होला. रउवां जानते बानी कि ई कोण दक्षिण आ पूर्व के कोना पर रहेला. एह कोण के देवता अग्नि देवी के कहल जाला. आग्नेय कोण वाला घर में रसोई घर सबसे अच्छा मानल जाला. पूरब दिशा का ओर मुह कके खाना बनावल बहुते बढ़िया मानल जाला. आग्नेय कोण में बिजली के साजो सामान जइसे- जेनेरेटर, इनवर्टर, बिजली के मीटर वगैरह लगावल अच्छा मानल जाला. कहल बा कि एकरा के वर्गाकार भा आयताकार रखे के चाहीं. एइजा जल स्थान भा बोरिंग ना रहे के चाहीं. आग्नेय कोण में सेप्टिक टैंक भी ना राखे के चाहीं. एइजा स्टोर रूम त एकदमे ना बनावे के चाहीं. जदि आटा, गेहूं, चावल, दाल आदि राखेके बा, त वास्तु शास्त्र कहता कि रसोई घर के दक्षिण- पच्छिम दिशा में राखीं.
अब आईं नैऋत्य कोण का ओर. कहल बा कि एह दिशा में भुलाइयो के रसोई घर माने किचेन ना राखे के चाहीं. त का राखे के चाहीं? ई जल तत्व विरोधी दिशा ह. पूरा घर में हर कमरा के नैऋत्य कोण तुलनात्मक रूप से अधिका भारी राखे के चाहीं. त का राखे के चाहीं? ढेर जानकार लोग कहले बा कि एइजा बेड रूम राखे के चाहीं. एकर स्वामी राहु के मानल जाला. बाकिर विशेषज्ञ लोगन के राय बा कि एइजा एडल्ट लोगन के बेडरूम भा शयन कक्ष रहे के चाहीं. शुभ ह. बाकिर लइकन के बेडरूम ना रहे के चाहीं. एह दिशा में भारी भरकम सीढ़ी बनावे के सुझाव कई गो वास्तुशास्त्री देले बा लोग.

अब वायव्य कोण. उत्तर-पश्चिम कोण (वायव्य) हमनी के दीर्घायु, स्वास्थ्य आ शक्ति देबेले. ई दिशा व्यवहार में परिवर्तन के सूचक ह. वास्तु शास्त्र कहता कि घर में नोकर- चाकर बाड़े सन त एही दिशा में राखे के चाहीं. जौना लड़की के बियाह नइखे होत भा बियाह में देरी होता ओकरा एह दिशा में सूते के चाहीं. जल्दी बियाह हो जाई. शौचालय खातिर वायव्य कोण भा दक्खिन दिशा के मध्य का स्थान उपयुक्त मानल बा. शौचालय में सीट एतरे रहे के चाहीं कि ओकरा पर बइठत का घरी राउर मुंह दक्खिन भा उत्तर का ओर रहे.

त संक्षेप में ईहे ह वास्तु शास्त्र. अंत में एगो निहोरा- एकरा के रउरा अंधविश्वास फइलावे वाला लेख मत मानब. ई बस एगो पुरान शास्त्र के अवलोकन ह. (लेखक विनय बिहारी सिंह वरिष्ठ स्तंभकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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