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Bhojpuri लोकगीतन के सहेज के मॉरिशस बना देले बा यूनेस्को के धरोहर, जानीं कइसे

मॉरीशस के एगो संस्था के लोकगीतन के अकूत धरोहर सहेजे, सँवारे खातिर यूनेस्को विश्व पटल पर अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर में शामिल कs लेहले बा अउरी एह घटना के भी बितले 5 साल भइल.ओह संस्था के नाम ह ‘गीत-गवाई’.

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जहाँ हमनी के भोजपुरी गीत- संगीत में बढ़त अश्लीलता अउरी घटत गुणवत्ता में अझुराइल बानी जा, उहाँ मॉरीशस भोजपुरी गीत संगीत के माथे के मुकुट बना के यूनेस्को ले पहुँचा देले बा. मॉरीशस के एगो संस्था के लोकगीतन के अकूत धरोहर सहेजे, सँवारे खातिर यूनेस्को विश्व पटल पर अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर में शामिल कs लेहले बा अउरी एह घटना के भी बितले 5 साल भइल.ओह संस्था के नाम ह ‘गीत-गवाई’.

भोजपुरी भारत के भाषा ह आ हमनी के भारते में भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता दिआवे खातिर अभियो लड़ाई लड़ रहल बानी जा.ओने इहाँ से भोजपुरी भाषी गिरमिटियन के साथे गइल भोजपुरी आज एतना बड़ ओहदा पर पहुँच गइल बा कि ओकरा के यूनेस्को जइसन संस्था पहचान देहले बा. मॉरीशस भाषा के लेके केतना संवेदनशील बा कि हेती चुकी देश में जहां कईगो भाषा बोलल जाला जइसे क्रिओल, फ्रेंच, अंग्रेजी.उहाँ भोजपुरी खातिर एतना प्रेम, एतना सम्मान.

आज ओही ‘गीत गवाई’ संस्था के बारे में बात होई. एह संस्था के मुखिया रीता धनदेवी जी के बचपने से घर-परिवार में गावे जाये वाला संस्कार गीत में बड़ा दिलचस्पी रहे.धीरे-धीरे ई दिलचस्पी उनके शौक बन गइल अउरी उ लोकगीतन के बारे में खोजे लगली, पढ़े लगली अउरी जाने लगली. बाद में ई जुनून बनल आ इनका साथे अउर भी भोजपुरी संस्कृति प्रेमी महिला लोग जउरीआइल आ बन गइल गीत गवाई संस्था.एह संस्था के नींव साल 2004 में अचके में पड़ल.भइल का कि रीता धनदेवी के सहेली उमा बसगीत उनसे मिले अइली अउरी बाते-बाते लोक गीतन के चर्चा होखे लागल.उनके सखी रीता जी से सोहर, झूमर, बिदाई गीत आदि के बारे में पूछत गइली आ ई अपना जानकारी के हिसाब से उनके बतावत गइली.एही जा आइडिया आइल कि केतना भोजपुरी भाषी होई लोग जेकरा लोकगीतन के एतना जानकारी होई? काहें सभके आपन जड़ छोड़ले त कई पीढ़ी हो गइल.काहें ना एह में रुचि रखे वाला महिला के जोड़ल जाय अउरी एगो टोली बनावल जाय आ गीत गवाय काम्पिटिशन करावल जाय.फेर 4-5 गो गाँव में जाके उहाँ के गीथारिन (भोजपुरिया पृष्ठभूमि वाली महिला) लोग के जोड़ल गइल.धीरे-धीरे 15 गो महिला जुटली आ बाद में ई संख्या 25 हो गइल.ई टोली एगो बियाह में शामिल भइल.उहाँ स्टेज पर जवन एह लोग के रंग जमल आ उहाँ के श्रोता लोग पर जादू चलल.उहे बाद में एह संस्था के आधार बनल.ई एक तरह से गीत गवाई संस्था के स्वीकार्यता रहे.

बाकिर कुछ साल के अंतराल के बाद श्रोता के एतना डिमांड रहे कि 2010 में रीता जी गीत गवाई के दुसरका संस्करण लेके अइली अउरी एह बेरी उ पूरा देश के महिला के शामिल कइली. लोग एह आयोजन के खूब सराहल.फेर अगिला साल 2011 के अक्टूबर में लोक परंपरा गीत काम्पिटिशन के आयोजन भइल.एह प्रोग्राम में तब के मॉरीशस के कला एवं संस्कृति मंत्री आ स्वास्थ्य मंत्री आइल रहलें.उनका साथे एगौ अउरी व्यक्तित्व के उहाँ उपस्थिति रहे जिनका चलते गीत गवाई के एगो नया उड़ान मिलल.भोजपुरी स्पीकिंग यूनियन के अध्यक्ष डॉ.सरिता बुद्धू उहाँ रहली अउरी एह संस्था से एतना प्रभावित भइली कि एहसे जुड़ गइली. डॉ सरिता के चलते ई संस्था के कलाकार बड़-बड़ मंच पर प्रस्तुति देबे लगलें अउरी एह तरे गीत गवाई के लोकप्रियता बढ़े लागल.फेर 2013 में पेटिट रैफरे गाँव में गीत गवाई के पहिला स्कूल खुलल, भोजपुरी स्पीकिंग यूनियन गीत गवाई स्कूल ऑफ पेटिट रैफरे.आ गीत गवाई के लोकप्रियता देखीं कि साते आठ साल में 50 गो स्कूल हो गइल बा देश भर में आ एह संस्था के लक्ष्य बा कि पूरा मॉरीशस में स्कूलन के संख्या और बढ़ावल जाव.कबो कुछ महिला के साथे शुरू भइल गीत गवाई के परिवार आज सैकड़न में पहुँच गइल बा.

‘गीत गवाई’ संस्था लोक गीत, संस्कार गीत अउरी भोजपुरी संस्कृति के परचम खाली मॉरीशस में ना बल्कि देश-विदेश में फहरा रहल बा. 2016 के नवंबर में मॉरीशस सरकार के सहयोग से यूनेस्को गीत गवाई संस्था के मानवता के अमूर्त धरोहर में शामिल कइलस. ई टीम 2017 में मिस्र के राजधानी कैरो में जाके आपन प्रस्तुति देहलस आ एह टीम के अइसन धूम मचल कि 17 गो प्रोग्राम भइल.ई टीम 2018 में भारत भी आइल. एह टीम के गायन के हेड रीता धनदेवी बाड़ी आ भोजपुरी स्पीकिंग यूनियन के अध्यक्ष सरिता बुद्धू एकर निर्देशन करेली.गीत गवाई लोकगीत के कई गो विधा में आपन प्रस्तुति देला बाकिर संस्कार गीत के कार्यक्रम ढेर होला जइसे लग्न गीत, सुमिरन, सांझा-पराती, महादेव गीत, सुहाग गीत, झूमर, सोहर, बिदाई गीत आदि गावेला लोग.एह संस्था के वाद्य यंत्र तनी हटके बा.एकदम देसी वाद्य यंत्र के प्रयोग होला, जइसे पीढ़ा, छीपुलि, थरिया, लोटा बजेला, ओकरा के डंडा से बजावल जाला.जब लोक वाला रॉ आवाज अउरी ई बाजा के धुन मिलेला त अद्भुत संगीत पैदा होला.अगर रउआ कबो सुने के मौका मिले त सुनब, हमार गारंटी बा कि राउर पैर थिरके से नइखे रुक सकत.

बकौल रीता धनदेवी, “हम जब 3-4 साल के रहनी तबे से गीत गवाय हमरा कान में गूँजत रहल बा.जब नानी के साथे तुलसी पूजा करीं त उ गीत गावस.आस पड़ोस में बियाह भा कवनो जग परोजन होखे त उहाँ भी सखियन के साथे जाईं अउरी गीत सुनीं.बचपने से सुनले त खूब रहनी बाकिर ई ना समझ आवे कि ओ गीतन में अइसन का खास बा कि हमरा चित्त में बस गइल बा, उ धुन, उ आवाज हम ना भुला पाईं.तब हम ई गीत गवाय के खोजल शुरू कइनी कि ई कहाँ से आइल, कइसे आइल आ ई का ह? एही खोज में गीत गवाई के नींव रखाइल.” उ आगे बतावली कि गीत गवाई के लोकप्रियता बढ़त जा रहल बा.हमनी के 50 गो स्कूल खोल लेहले बानी जा अउरी खोले के लक्ष्य बा.गीत गवाय अइसन एगो खजाना बा कि एकरा के जेतने खोनब, ओतने एमें से बहुमूल्य रत्न निकली, ओतने एकर मिठास पता लागी.ई मिठासे ह कि यूनेस्को एकरा के धरोहर समझलस आ मान्यता देलस.

( लेखक मनोज भावुक भोजपुरी साहित्य व सिनेमा के जानकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं. )

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