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Bhojpuri: ट्रेजेडी क्वीन के नाम से जानल जात रही मीना कुमारी, जीवन के अंत भी दुखद

जब मीना कुमारी 4 साल के रहली तबे बाल कलाकार के रूप में आपन करियर शुरू कइली अउरी 33 साल के अपना करियर में उ 92 गो फिल्म में काम कइली. मीना कुमारी फिल्मफेयर अवॉर्ड के पहिला विजेता रहली, उनके बैजु बावरा खातिर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के खिताब मिलल.

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‘राह देखा करेगा सदियों तक
छोड़ जाएँगे ये जहाँ तन्हा’

महजबीन बानो उर्फ मीना कुमारी नाज़ उर्फ मीना कुमारी. हिन्दी सिनेमा के एगो दमदार अदाकारा अउरी सुंदर हीरोइन के नाम ह ई. उर्दू भाषा के एगो अदीब शायरा के नाम ह ई. मीना कुमारी के सभे जानत बा. उनके फिलिम भले ना देखले होखे बाकिर उनके नाम से परिचित जरूर होई. 38 साल के छोट उमिर में ही एह दुनिया के अलविदा कह देबे वाली मीना कुमारी, आनंद बाबू के उ बात चरितार्थ कर गइली कि ‘बाबू मोशाय जिंदगी लंबी नहीं बड़ी होनी चाहिए’.

जब उ 4 साल के रहली तबे बाल कलाकार के रूप में आपन करियर शुरू कइली अउरी 33 साल के अपना करियर में उ 92 गो फिल्म में काम कइली. मीना कुमारी फिल्मफेयर अवॉर्ड के पहिला विजेता रहली, उनके बैजु बावरा खातिर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के खिताब मिलल. ओकरा अगिलो साल 1955 में उनके परिणीता खातिर फिल्मफेयर मिलल. एक साल त अइसन भइल कि सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के तीन गो नॉमिनेशन आइल अउरी तीनों मीना कुमारी के ही नामे रहे. ओ साल उ ‘साहब बीवी अउरी गुलाम’ खातिर अवॉर्ड जितली. बहुत लोग कहेला कि मीना कुमारी के जिनगी एह फिलिम लेखां ही रहे.

मीना कुमारी के 1 अगस्त 1933 के भइल. उनके पिता जी अली बक्स पारसी थियेटर के बड़ कलाकार रहलें. उनके माई भी डान्सर अउरी मंच कलाकार रहली. मीना कुमारी के रवींद्र नाथ टैगोर के परिवार से कनेक्शन रहे. मीना कुमारी के नानी टैगोर के कुनबा से रहली. कुछ रिपोर्ट ई भी कहेला कि मीना कुमारी के पिता जी उनके जन्म के बाद अनाथालय छोड़ अइलें. कारण रहे कि उनके बेटा चाहत रहे अउरी मीना कुमारी पैदा हो गइली. बाकिर जब उनके माई रो-रो के बेहाल हो गइली त मीना के घरे उठा लिअइलें. मीना जब छोट रहली तबे उनके धार्मिक कार्यक्रम में देवी के बाल रूप के किरदार खातिर बोलावे जाये लागल. उनके चेहरा बड़ भइला पर भी दैवीय लागे, रउआ फिल्मन में जब उनके देखब त अइसन महसूस होई.

भारतीय सिनेमा के सिंड्रेला के नाम से जानल जाए वाली मीना कुमारी अपना रूप से त दर्शक के मोहबे कइली, अपना भावपूर्ण अदाकारी अउरी दुखान्त फ़िल्मन में काफी रोल कर के ट्रेजेडी क्वीन बन गइली. उनकरे टाइम दिलीप कुमार के ट्रेजेडी किंग के दर्जा मिलल बा. मीना कुमारी के कबो पारंपरिक शिक्षा ना मिल पावल कारण रहे कि घर के रोटी कमाए वाला उ सबसे मुख्य सदस्य रहली. उनके माई-बाउजी थियेटर में रहे लोग बाकिर निर्धनता रहे, आजुए लेखां ओहू बेरा पारंपरिक रंगमंच कलाकार अभावे में रहस. बाकिर मीना कुमारी शूटिंग कइला के दौरान आपन बेसिक शिक्षा पूरा कइली. उ जब सेट पर आवस त खाली टाइम में किताब में घुसल रहस, एहि के चलते उनके सभे ‘रीडिंग महजबीं’ भी कहे.

बेबी मीना कई गो फ़िल्म बाल कलाकार के तौर पर कइली. फेर उनके 1946 में फ़िल्म ‘बच्चों का खेल’ मिलल. ओ बेरा मीना कुमारी 13 साल के रहली आ हीरोइन बन गइली. जब मीना कुमारी बांद्रा के नया घर में शिफ्ट भइली ओकरा तुरन्त बाद बहुत बड़ झटका उनका लागल. उनके माता जी के कैंसर से मउत हो गइल. मीना कुमारी हालांकि फिल्म ने काम जारी रखली. इहे टाइम रहे जब उ खाली फ़िल्मन में रोल ना कइली बाकिर गाना भी गवली. फेर उनके फोकस धार्मिक तथा फंतासी फ़िल्मन की ओर हो गइल. श्री गणेश महिमा, लक्ष्मी नारायण, अलादीन का जादुई चिराग आदि 1950-52 के बीच के फ़िल्म ह. दोसरा भी शैली के फ़िल्म आइली सन बाकिर मीना कुमारी के अभिन ले घर-घर ले ना पहुँचल रहली, फ़िल्म प्रेमी लोग ही उनके जानत रहे. मीना कुमारी मास के हीरोइन तब बनली जब उनके गुरु विजय भट्ट उनके आपन फ़िल्म ‘बैजू बावरा’ (1952) में मुख्य भूमिका देहलें. ई फ़िल्म सुपरहिट भइल आ मीना कुमारी लोकप्रिय बन गइली. एह फ़िल्म में दृश्य रहे कि हीरो हीरोइन डूब के मर जा तारे. जब मीना कुमारी ई सीन फिल्मावत में सांचो के डूब गइली बाकिर उनके समय रहते बचा लिहल गइल. विजय भट्ट ही उनके चार साल के उमिर में लेदरफेस (1939) फ़िल्म देहले रहलें. 1953 में उनके फ़िल्म परिणीता आइल जेकरा खातिर उनका बड़ा नाम अउरी अवार्ड भी मिलल. एकरा बाद उ चांदनी चौक, एक ही रास्ता जइसन सफल फ़िल्म के हिस्सा रहली.

फेर साल 1957 में शारदा फ़िल्म आइल. ई फ़िल्म में नायिका के रोल बड़ा कठिन रहे, ओह बेरा के सब हीरोइन मना कर दिहले रहे लोग, मीना कुमारी हाँ कइली. फ़िल्म में हीरो राजकपूर रहलें आ फ़िल्म के बड़हन सफलता मिलल अउरी मीना कुमारी के फ़िल्म आलोचक के वाहवाही. एकरा बाद उ साहिब बीवी और गुलाम (1962), आरती (1962), दिल एक मंदिर (1963), सांझ और सवेरा (1964), काजल (1965), फूल और पत्थर (1966) में खासकर आपन अदाकारी के जलवा देखवली आ ट्रेजेडी क्वीन के उपाधि पा गइली. 1967 में धर्मेंद्र के साथे उनके फ़िल्म आइल ‘मझली दीदी’. ई फ़िल्म भारत के ओर से ऑस्कर में एंट्री खातिर भेजल गइल. मीना कुमारी के जोड़ी सबसे ढेर अशोक कुमार के साथे ही जमल. उ लोग साथ में 17 गो फ़िल्म कइल लोग. पाकीजा जवन की मीना कुमारी के जीवन के अमर फ़िल्म ह, अशोक कुमार के साथे ही रहे. एह फ़िल्म में राजकुमार के भी मुख्य भूमिका रहे. इहे अशोक कुमार मीना कुमारी के होखे वाला पति मशहूर लेखक-निर्देशक कमाल अमरोही से तमाशा फ़िल्म के सेट पर मिलववले रहलें. कमाल अउरी मीना कुमारी के रिश्ता चल ना पावल. कमाल अमरोही उनका पर बहुत नजर राखस अउरी बड़ा पाबंदी लगवले रहलें. मीना कुमारी कमल अमरोही के दुसरकी मेहरारू रहली अउरी अपना पिता के खिलाफ़ जाके उनसे बियाह कइले रहली. कुछ रिपोर्ट अइसन भी कहेला कि कमाल अमरोही मीना कुमारी के उत्पीड़न भी करस. आखिर ई रिश्ता टूट गइल अउरी उ अपना बहिन के घरे चल अइली. उनके नींद ना आवे के बेमारी ध लेहले रहे जब उ कमाल अमरोही के साथ रिलेशनशिप के शुरुआती दौर में रात रात भर फ़ोन पर बतियवले रहली. उनका से दूर भइली त ई परेशानी देबे लागल. मीना कुमारी के एगो डॉक्टर नींद के गोली के जगह ब्रांडी पिये के सुझवलस. एहि जा से उनके हालत बिगड़ल चालू भइल आ उ दवाई लेखां पियत-पियत शराब के आदी हो गइली. अपना पति कमाल अमरोही के साथे आखिरी आ अपना जीवन के अंतिम फ़िल्म पाकीजा उ बदतर हो तबियत में कइली आ फ़िल्म के रिलीज भइला के 3 हफ्ता बादे 31 मार्च 1972 के एह दुनिया के अलविदा कह देली.

मीना कुमारी कमाल के अभिनेत्री रहली लेकिन हिंदी फिल्म उनके अउर भी अदाकारी के जलवा देखे के चाहत रहे.

( लेखक मनोज भावुक भोजपुरी साहित्य व सिनेमा के जानकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं. )

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