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Bhojpuri: MLA होखे तs अइसन होखे जे जीत लेवे बिरोधी के मन

Bhojpuri: MLA होखे तs अइसन होखे जे जीत लेवे बिरोधी के मन

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“बिहार बिधानसभा परिसर में दू बिधायक के बोल-कुबोल से संसदीय मरजादा के बहुत आघात पहुंचल बा. राजनीतिक बिरोध के स्तर अतना नीचे गिर जाई, केहू सोचले ना रहे. आज नेतागिरी ताकत अउर गुमान के पहचान बन गइल बा. लेकिन एक समय उहो रहे जब गरीब गुरबा परिवार से आवे वला अतिसाधारण अदिमी भी बिधायक चुनल जात रहन.

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न शान न गुमान, बस जनता के सेवा ही ऊ आपन परम धरम मानत रहन. उनकर सादगी अउर ईमानदारी के विरोधी नेता भी सलाम करत रहन. तब अउर अब में केतना फरक आ गइल बा.” मुकुंद माधव आपन बात पूरा कइले तs शंभुदेव सवाल दाग देले, कवना जमाना के बात कर रहल बाड़s ? कवन बिधायक के नेकनामी के परतुक दे रहल बाड़s ?

बेमिसाल नेता, मांगन इंसान

मुकंद माधव कहले, ई बहुत पुरान बात ना हs. लेकिन आज के चमक दमक वला जमाना में ई लोप्रोफाइल बिधायक के शायदे कबो चर्चा होला. इनकर नाम रहे मांगन इंसान. पहिले गरीब परिवार में जनम लेवे वला लइका के अइसने नांव रखात रहे. मांगन जी असल जिंदगी में सीधा सच्चा ‘इंसान’ रहन. जइसन सादा नांव वइसन सादा जीवन. कटिहार जिला के कदवा में जनम भइल. गरीब रहला के बादो दिल से अमीर रहन. टोला-पड़ोस के सुख-दुख में हरमेसा शामिल रहत रहन. 1972 में मुखिया के चुनाव लड़ले तs जीत गइले. ऊ आज के जमाना के मुखिया ना रहन. मुखिया बनला के बादो मांगन इंसान अउर उनकर परिवार के पेट भरे खातिर मेहनत-मजदूरी करे के पड़त रहे. बाद में ऊ होमगार्ड के जवान बन गइले. उनकर सादगी अउर ईमानदारी के गांव जवार में चर्चा होखे लागल. आम जनता के नजर में उनकर बहुत इज्जत रहे. एही बीच 1980 बिहार बिधानसभा चुनाव आ गइल. जनता पाटी के टूट-फूट के बाद बिहार के राजनीत नाया करवट लेत रहे. मांगन इंसान के संगी साथी उनका पs बिधानसभा चुनाव लड़े के दबाव बनावे लगले. इंदिरा गांधी के फेन बोलबाला हो गइल रहे. कांग्रेस के चलती रहे. बड़ बड़ नेता उहां पहिलहीं से मौजूद रहन. खंड –खंड में छितराइल जनता पाटी में जोग्य उम्मीदवार के पूछ ना रहे. तय भइल कि मांगन इंसान निरदलीय चुनाव लड़िहें.

जब बिरोधी सादगी के उड़ावे लगले मजाक

शंभुदेव कहले बिना, पइसा कौड़ी के चुनाव लड़ल तs बहुत रिस्क के बात रहे ! मुकुंद माधव कहले, आज के दौर में इहे तs गौर करे वला बात बा. मांगन इंसान 1980 के चुनाव में कदवा बिधानसभा सीट से निरदलीय पर्चा भर देले. उनकर नांव तनी अजीब रहे. नेता जइसन तs बेलकुले ना लागत रहे. केहू उनका उम्मीदवारी पs धेयान ना देलस. देखे-सुने में इबे बुझाय कि मेन लड़ाई कांग्रेस अउर जनता पाटी सेकुलर में बा. लेकिन भीतरे भीतरे एक असन लगर चलच रहे जवन ऊपर से देखाई ना पड़त रहे. कदवा के गरीब-गुरबा अबकी कुछ अगल ही ठनले रहे. मांगन इंसान के लोग चढ़ा बढ़ा के चुनाव में खाड़ा तs कर देले रहन लेकिन उनका भिरी कवनो संसाधन ना रहे. ना पइसा रहे ना परचार खातिर गाड़ी-घोड़ा. लेकिन ऊ हिम्मत ना हरले. उनका भरोसा रहे कि एक गरीब दोसर गरीब के आवाज जरूर सुनिहें. कबो पैदल, कबो सैकिल से गांव- गांव में जुगडुगी लेके के परचार करे लगले. घरे घरे जा के ऊ भोट भी मांगस अउर दस पइसा, चार आना के मदद भी. ई कवनो गांधी जी के जमाना ना रहे. 1980 के मौडरन मिजाज रहे. मांगन इंसान के चुनावी रंग-ढंग हंसी-ठिठोली के बिषय बन गइल. प्रमुख राजनीतिक दल के लोग उनकर तरह तरह से मजाक उड़ावे लगले.

30 भोट से जीत के बनले MLA

मुकुंद माधव आपन बात तनी रोमांचक अंदाज में कहले. चुनाव भइल. जब भोट के काउंटिग होखे लागल तs हंसी उड़ावे वला लोग के चेहरा पs हवाई उड़े लागल. निर्दलीय मांगन इंसान के कमाल से कांग्रेस कंडिडेट उस्मान गनी के पसेना छूटे लागल. कबो मांगन इंसान आगे. कबो उस्मान गनी आगे. कांटा के लड़ाई रहे. एही बीच काउंटिंग में गड़बड़ी के आरोप लाग गइल. भोट के दोबारा गिनती भइल. आखिरकार मांगन इंसान 30 भोट से चुनाव जीत के तहलका मचा देले. मांगन इंसान के 28149 भोट अउर कांग्रेस के उस्मान गनी के 28119 भोट मिलल रहे. इंदिरा गांधी के वापसी के लहर रहे. कांग्रेस के हरावल हंसी-खेल ना रहे. लेकिन कदवा में एक तरह से खामोश क्रांति हो गइल. पोलटिकल पाटी के नजर में मांगन इंसान के भले कवनो भैलू ना रहे लेकिन जनता के नजर ऊ सबसे सुटेबुल कंडिडेट रहन.

बिधायक होखे तs अइसन होखे

शंभुदेव के सवाल पs मुकुंद उनकर खूबी समझावे लगले. मांगन इंसान कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ के 1980 में बिधायक बनल रहन. 30 भोट से हरला के बादो कांग्रेस के मन में उनका प्रति कवनो रंज ना रहे. उल्टे कांग्रेस उनकर सादगी अउर ईमानदारी से बहुत परभावित रहे. 1985 के बिधानसबा चुनाव आइल तs कांग्रेस मांगन इंसान के अपना पाटी में शामिल कर लेलस. उनका के कटिहार जिले के ही एक दोसर बिधानसभा सीट (प्राणपुर) से उम्मीदवार बनावल गइल. 1985 के चुनाव ऊ कांग्रेस के टिकट पs जीतल रहन. कांग्रेस में अइला के बादो उनकर राजनीतिक अंदाज ना बदलल रहे. गरीब के हक-हुकूक खातिर ऊ दल के सीमा से बाहर भी चल जात रहन. 1988 में जब जननायक कर्पूरी ठाकुर के निधन भइल रहे तs मांगन इंसान उनका के भावपूर्ण श्रद्धांजलि देले रहन. मांगन इंसान मेहनत मजदूरी कइले. होमगार्ड के जवान से बिधायक बनले. लेकिन शान-शौकत के मोह में कबो ना पड़ले. कबो रोब-दाब देखावे के कोशिश ना कइले. बिधायक होके तs असन होखे जे बिरोधी के भी दिल जीत लेवे. अतना बात सुन के शंभुदेव कहले, बर्तमान के इतिहास से जरूर सीख लेवे के चाहीं ताकि भविष्य निमन हो सके.

(अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Bhojpuri Articles, Bhojpuri News

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