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Bhojpuri में पढ़ें- बिहार में NDA के मेल लुका-छिपी के लमहर खेल

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लौडइसपीकर से गीत बाजत रहे, कहे के तs सभ केहू आपन,आपन कहाये वला के बा… सुमेसर चा कहले, गीत के भाव के बेलकुल ठीक बा. आज के समय में के आपन बा ? के पराया ? समझल बहुत मोसकिल बा. घर-परिवार होखे भा राजीनित के संगी साथी, रिस्ता-नाता के कवनो भरोसा नइखे रह गइल.

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अब बिहारे एनडीए के हाल देख लs, कहे के तs मेल बा लेकिन भीतरे भीतरे शह मात के खेल बा. जदयू अउर भाजपा के नेता दोल्हा -पाती के खेल रहल बाड़े. एक टेक ऊपरे तs एक टेक नीचे. थाहे नइखे लागत कि दूनो दल के मन में का चल रहल बा. मधेसर चा कहले, जदयू-भाजपा में खटपट कवनो नाया बात बा ? 2020 में जब बड़ भाई के ओहदा बदल गइल तब्बे से गगरिया तोर कि मोर हो रहल बा. कतनो लड़ाई होखे लेकिन दून्नो के एक दोसरा के बिना गुजारा नइखे. अंदाजीफिकेशनो के भी हद बा. दूनो दल में जब जब रगरा-झगरा होला तब तब लोग-बाग सरकार बनावे- गिरावे के पहड़ा पढ़े लागे ले. दू साल से इहे सुन रहल बानी कि सरकार आज बदल जाई कि काल्ह बदल जायी. लेकिन बिहार में एनडीए सरकार के गाड़ी सरपट भाग रहल बिया. सरकार बनावल-गिरावल का गुरिया-पुतरी के खेल हs!

सांप सीढ़ी के खेल

मधेसर चा माने खातिर तइयारे ना रहन कि इफतार के रफतार से जदयू-भाजपा के गाड़ी पटरी से उतर जाई. उ कहले, गिरीह मंतरी के पटना अइला के बाद सब अफवाह सुखल पतई जइसन हावा में उड़िया गइल. जे भाई लोग नाया सरकार के गुना भाग में मशगूल रहन उनकर तs टोटल कलकुलेशने गड़बडा गइल. राजनीत सांप-सीढ़ी के खेल हs. कबो ऊपर, कबो नीचे. ऊपरे जाये खातिर भाजपा अउर जदयू, दूनो देने से पासा फेंका रहल बा. लेकिन का एकरा से सरकार गिर जाई ? सुमेसर चा तमक के कहले, आच्छा बताव ! राजद के इफतार पाटी में जवन सीन रहे का ऊ एनडीए के सुहाये वला रहे ? जदयू के नेता कह रहल बाड़े कि राजद के नेवता के इज्जत करे के खेयाल से ऊ लोग इफतार पाटी में शामिल भइले. लेकिन चिराग पासवान भी तs रामविलास पासवान के बरसी में नेवता देले रहन, लेकिन जदयू के कवनो नेता ओकरा में शामिल ना भइल रहन. का उनकर नेवता के कवनो इज्जत ना रहे ? सुमेसर चा टेबुल के ठोक के कहले, हमार तs कहनाम बा कि इफतार पाटी के नाम पs खूब राजनीत भइल. जदयू देने से भाजपा के चेतावल गइल कि तीर से तकरार मत करs ना तs तरकश बदलत देर ना लागी . ई सही बात बा कि गिरीह मंतरी के पटना आवे से सीन बदल गइल. लेकिन सिनेमा तs एक्के रील के रहे जे शुक के दिन रीलिज हो के हलचल मचा गइल. अगिला दिन डैमैज कंट्रोल के कोशिश भइल. ई लुकछिपी के खेल से पबलिक के भरमा रहल बाड़े नेता.

लड़ंत-भिड़ंत बस मुंहजबानी बा

सुमेसर चा के बात काट के मधेसर चा कहले, ई सभ केहू जानत बा कि भाजपा के अलग सोच बा अउर जदयू के अलग. दूनो दल के बीच कई मुद्दा पs मतभेद बा. एकरा में जातिगत जनगणना सबसे बड़ अड़चन बा. जदयू नागरिकता संसोधन कानून के समर्थन कइले रहे. लेकिन बिहार में नेशनल सिटीजन रजिस्टर लागू करे से इंकार कर देले रहे. अब समान नागरिक संहिता के सवाल पs दूनों दल के नेता आपस में भिड़ रहल बाड़े. लेकिन एह लड़ाई के अंजाम अभी तक ऊहां नइखे पहुंचल कि सरकार गिर जाई. जरूरत के मोताबिक दूनो दल समय समय पs कम्प्रमाइज भी कर रहल बा. लड़ंत-भिड़त सभ मुंहजबानी बा. चुनाव से पहिले आरपार के नौबत ना आयी. सत्ता के भौकाल केकरा निमन ना लागे ? सरकार रही तब्बे भौकालो रही. गिर जाई तs केकरा का भेंटाई ? अगर जदयू के एह पार दिक्कत बा तs ओह पार एकरो से बेसी दिक्कत बा. 2017 में ऊ एकर नतीजा भोग चुकल बा. का जदयू राजद के साथे फ्रीहैंड काम कर सकेला ? नीतिगत मामला में भले जदयू, राजद के नजदीक हो सकेला लेकिन मन से मन से मेल मोसकिल बा. अगर मन से मन के मेल संभव होइत तs कहिए सत्ता के खेयाली पोलाव पाक गइल रहित. जदयू के भाजपा से ही पटरी बइठी, भले कतनो तकरार होखे. स्पीकर के मुद्दा पs भाजपा-जदयू में केतना गरमा गरमी भइल रहे. सिकाइत दिल्ली तक पहुंच गइल . लेकिन जदयू नरम पड़ गइल अउर मेलमिलाप हो गइल.

लड्डू लड़ी तs बुनिया झरी

सुमेसर चा कहले, का बात कह रहल बाड़s मधेसर ! का मुंहजबानी लड़ाई से नोकसान ना होखे ? मतभेद बढ़त बढ़त एक दिन मनभेद में बदल जाला. बोचहां उपचुनाव में का भइल ? भाजपा कंडिडेट के 36 हजार से भी बेसी भोट से हार भइल. जनकार लोगन के कहनाम बा कि भाजपा के पक्ष में जदयू के भोट ट्रांसफर ना भइल, एह से ओकर करारी हार भइल. भाजपा के सीनियर लीडर अउर सांसद सुशील मोदी भी बोचहां में जदयू- भाजपा के तालमेल पs सवाल उठइले रहन. मंत्री, मुखमंत्री के परचार के बाद भी एनडीए (भाजपा) के हार, संकट के संकेत बा. बिहार विधान परिषद के चुनाव में भी दूनो दल के मेलजोल में कमी रहल. एकरा चलते दस सीट के नोकसान भइल. अगर भाजपा-जदयू के झंझट के इहे हाल रही तs आगे के चुनाव में का होई ? सत्ता मुट्ठी में बंद बालू हs, तनिको ढील भइल कि फिसल जाई. ई लुकाछिपी के खेल एकदिन बंटाधार कर दी. कहल गइल बा कि लड्डू लड़ी तs बुनिया झरी. एह तर्क पs मधेसरा चा चुप हो गइले. ऊ कहले, राजनीति के एक ना अनेक रंग बा. कब कवन रूप बदली, केहू ना बता सके.

(अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Article in Bhojpuri, Bhojpuri, Bihar election

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