भोजपुरी में पढ़ें: मां शारदा के चमत्कारिक शक्ति

बाकिर मां शारदा भी ओतने महान आ चमत्कारिक शक्ति वाला रहली ह.
बाकिर मां शारदा भी ओतने महान आ चमत्कारिक शक्ति वाला रहली ह.

विवेकानंद जी के गुरु रामकृष्ण परमहंस के धर्मपत्नी मां शारदा के बहुत सम्मानित मानल जाला. मां शारदा के आध्यात्मिक शक्ति के बारे में कई गो कथा कहानी प्रचलित बा. रामकृष्ण मठ के पत्रिका उद्बोधन में उनकर कई कहानी छपल बा.

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  • Last Updated: October 1, 2020, 10:03 AM IST
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ढेर लोग रामकृष्ण परमहंस के धर्मपत्नी मां शारदा के चमत्कारिक शक्ति के बारे में ना जाने ला. सब रामकृष्ण परमहंस के महानता के चर्चा करेला. बाकिर मां शारदा भी ओतने महान आ चमत्कारिक शक्ति वाला रहली ह. एगो घटना एकर प्रमान बा. आईं ओह घटना के बारे में जानीं जा. मां शारदा के घर के नांव रहे शारदामणि. उनुकर जनम भइल रहे पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिला के जयरामबाटी गांव में. पिता रहले रामचंद्र मुखोपाध्याय आ महतारी श्यामा सुंदरी देवी. त 22 दिसंबर 1853 के दिने मां शारदा के जनम भइल.

उनुका जनम से पहिले माता श्यामा सुंदरी देवी के सपना में बार- बार देवी- देवता लोगन के दर्शन होखत रहे. त जब मां शारदा पांच साल के भइली तो उनुका पिता के लगे उनुका वियाह खातिर प्रस्ताव लेके तीन मील दूर कामारपुकुर से कुछु लोग अइलन. केकरा संगे बियाह होखी? सवाल पूछल गइल. जबाब आइल- सतरह साल के गदाधर चट्टोपाध्याय (रामकृष्ण परमहंस के घर के नांव) से. अब सुनीं एगो रोचक बात. रामकृष्ण परमहंस 17 साल के उमिर में दिन- रात भजन- कीर्तन, ध्यान आ भक्ति में डूबल रहत रहले.

उनुका खाए- पीए के होस ना रहे. केहू खाए के ना पूछे त खइबो ना करसु. बस एकही सुर- ईश्वर भक्ति. गदाधर यानी रामकृष्ण परमहंस सात बरिस के रहले त उनुका पिता के मृत्यु हो गइल रहे. त महतारी सोचली कि ए लइका के बियाह क दिहल जाउ. का जाने एकर मन घर- गृहस्थी में लागे. लइकी खोजाए लागल. तले रामकृष्ण परमहंस कहले कि तीन मील दूर जयरामबाटी में रामचंद्र मुखोपाध्याय के घरे एगो शारदामणि नांव के लइकी बिया. ऊ हमार पत्नी बने खातिर जनम ले ले बिया. ओहिजा जाईं सभे. त अगुआ लोग गइल जयरामबाटी.



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रामचंद्र मुखोपाध्याय खेती- बारी आ पूजा- पाठ वाला पवित्र ब्राह्मण रहले. उनुका आभास हो गइल कि ई रिस्ता भगवान भेजले बाड़े. बियाह भइल. बाकिर उमिर पांच बरिस रहला के कारन मां शारदा अपना बाप- महतारी के घरहीं रहि गइली. जब मां शारदा अठारह साल के भइली त ऊ अपना पति के लगे अइली. उनुकर पति रामकृष्ण परमहंस ओह घरी दक्षिणेश्वर काली मंदिर में मुख्य पुजारी रहले. मां शारदा पुछली कि बताईं त हम राउर के हईं? त रामकृष्ण परमहंस कहले कि जवन मां काली ओह मूर्ति में बाड़ी उहे मां काली तोहरा भीतर बाड़ी.

त रामकृष्ण परमहंस पुछले कि तूं हमरा लगे हमरा के भक्ति से दूर करे खातिर आइल बाड़ू? मां शारदा कहली कि ना, हम आपके भक्ति आ साधना में मदत करे आइल बानी. रामकृष्ण परमहंस कहले कि आजु से तूं हमार महतारी नियर बाड़ू. ऊ एगो पीढ़ा पर बइठा के मां शारदा के देवी के रूप में विधिवत पूजा कइले. दूनो परानी खाली कहहीं खातिर पति- पत्नी रहल लोग, ओह लोगन में सांसारिक भाव अइबे ना कइल. मां शारदा अलग कमरा में रहसु आ रामकृष्ण परमहंस अलग कमरा में. ओह लोगन के बियाह आध्यात्मिक स्तर के रहे.

अब आईं मा शारदा के चमत्कारिक घटना पर. एह घटना के लिखले बाड़े रामकृष्ण मठ के सन्यासी स्वामी भास्करानंद. ई सन1912 के घटना ह. हमनी का देस में अंग्रेजन के राज रहे. शिमला ओह घरी असम के राजधानी रहे. ओहिजे मां शारदा से दीक्षा लेबे वाला शिष्य के घर रहे. ओकर नांव रहे पंचानन ब्रह्मचारी. एक दिन अचानके अंग्रेस फैसला लिहले सन कि असम के राजधानी कुछ दिन खातिर ढाका रही. ढाका ओहघरी हमनिए के देस में रहे. अब त बांग्लादेश के राजधानी हो गइल बा. त कुछ दिन खातिर असम के राजधानी ढाका हो गइल.

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ओह घरी शिमला में ज्यादातर अंग्रेज के कारिंदा रहत रहले सन. बहुत कमे लोग गैर कर्मचारी रहे. कुल 80-90 गो घर रहले सन. सब लोग ढाका चलि गइल त शिमला में 80-90 गो घरन में से पांच- सात गो घर में आदमी रहे. बाकी घर खाली आ सुनसान. त लोकल आदिवासी लइका आव सन आ बदमाशी में खाली घर में आगि लगा द सन. घर जरि के राखि हो जाउ. शिमला में त जानते बानी एहू घरी काठ के घर बाड़े सन. त ओहू घरी काठे के घर रहले सन. आग धरे में तनिको देरी ना लागे.

पंचानन ब्रह्मचारी अपना घर में तीन गो नेपाली मजदूरन से घर के मरम्मत करावत रहलन. तले देखतारे कि उनुका घर से तीन- चार गो घर छोड़ि के एगो घर में आग लागल बा. ऊ विशाल घर एगो रानी के रहे. ओह घर के दू हिस्सा रहे. एक हिस्सा में छोट घर रहे. दोसरका हिस्सा में बड़हन घर रहे. आगि छोटका घर के छत पर लागल रहे. पंचानन ब्रह्मचारी के बगल वाला घर के सामने पानी से भरल एगो बाल्टी राखल रहे. ऊ बाल्टी उठवले आ दउरि के छत पर लागल आग के बुझावे खातिर सीढ़ी पर चढ़ले.

जब तक ऊ छत पर पहुंचि के पानी डालसु तब तक सात फीट ऊंचा आग उनुका के घेर लिहलसि. पंचानन ब्रह्मचारी चिल्ला के कहले- मां (शारदा) हमरा के बचाईं. अचानके मां शारदा प्रकट भइली. कहली- चिंता मत कर पंचानन. हम एहिजे बानी. अचानके आग बुताए लागल. आधा घंटा आग में रहला का बादो पंचानन  ब्रह्मचारी के कुछु ना बिगड़ल. कपड़ो जस के तस. खाली उनुकर चेहरा करिया हो गइल रहे. आग बुतइला पर मां शारदा फेर गायब हो गइली. ओह घरी मां शारदा कलकत्ता में रहली. नेपाली मजदूर कहले सन कि आधा घंटा तक ले जब आग ना बुताइल त हमनी का बुझलीं जा कि रउवां मरि गइलीं. एतना देर केहू आग में रहि के कइसे बांचि सकेला?

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घर के लोग टोके लागल कि चेहरा खराब लागता. बदसूरत. कौनो डाक्टर से देखावे के चाहीं. शिमला त सुनसान बा. डाक्टर कहां मिली. एक रात पंचानन ब्रह्मचारी रोवे लगले आ मां शारदा के पुकरले. आधा रात के मां शारदा प्रकट भइली. कहली कि तोहरा घर के कुछ दूर पर एगो झरना बहता. बंगाली नया साल के दिने तू ओही में जाके नहा लिह. तोहार चेहरा पहिले नियर सुंदर हो जाई. आखिर बंगाली नया साल आइल. तब तक ले कलकत्ता तक में हल्ला हो गइल रहे कि मां शारदा पंचानन बाबू से कहले बाड़ी कि अमुक दिने झरना में नहइब त तोहार चेहरा ठीक हो जाई.

पंचानन बाबू सोचले कि का जाने हम सपना देखनीं कि सचहूं मां शारदा हमार चेहरा ठीक होखे के कहली. हम झरना में नहाईं आ चेहरा ना ठीक होखे त हमरा गुरु मां शारदा के बदनामी होई. बाकिर जइसे केहू उनुका के जबर्दस्ती झरना के नीचे ले गइल होखे ऊ आटोमेटिक ढंग से झरना में नहाए लगले. खूब तबियत से नहा के जब निकलले त देहि पोंछले आ घरे अइले. घर के लोग अवाक. सचहूं उनुकर चेहरा चमकदार आ सुंदर हो गइल रहे. ई घटना रामकृष्ण मठ के पत्रिका “उद्बोधन” में सन 1939 में छपल रहे. फेर दोबारा 1999 में “ग्लोबल वेदांत” पत्रिका में छपल.
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