Bhojpuri Spl: बंगाल में मुसलिम, मतुआ आ हिन्दीभाषी समाज फरियाई, केकरा माथे मउर-केकरा माथे भउर

जवना मुसलिम वोट खातिर ममता बनर्जी नमाज-फातिया के कार्यक्रम में टोपी पहिरले आ नमाज पढ़े के अंदाज में लउके लगली, ओह से बंगाली हिन्दू वोटर बिदके लगले. एही बीच में सरस्वती पूजा, काली पूजा, दुर्गा पूजा जइसन हिन्दू परब-तेवहार में ममता सरकार के अड़ंगा आग में घीव के काम कइलस. हिन्दू बंगाली समाज के लोग ओही समय से विकल्प के तलाश में जुट गइल.

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  • Last Updated: February 26, 2021, 3:37 PM IST
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कोलकाता. बंगाल विधानसभा चुनाव में केहू केतनो हड़बोंग मचावे, बाकिर केकरा माथे मउर चढ़ी आ केकरा माथे भउर मलाई, एकर फैसला ओइजा के तीन गो तबका पर निर्भर करता. ई तीनों समाज बा- मुसलिम, मतुआ आ हिन्दुस्तानी. हिन्दी पट्टी के लोग बंगाल में हिन्दुस्तानी कहाला. एह तीनों समाज के साधे में केहू कवनो कोर कसर नइखे छोड़त. बीजेपी के नजर बंगाली हिन्दू समाज के संगे-संगे मतुआ समाज आ हिन्दुस्तानी समाज पर बा, त तृणमूल कांग्रेस एह समाज से अपनापन साबित करे के पूरा कोशिश में बा. मुसलिम समाज के बिना ममता बेमानी हो जाली, एह से ऊ बार-बार ई भरोसा देबे में लागल बाड़ी कि उनकरा सरकार से बेसी केहू मुसलिम समाज के मददगार आ शुभचिंतक ना हो सकेला.

अब ई जानल जरूरी बा कि कवना समाज के केतना जोर बंगाल में बा. हर दल के लोग एकर जोड़-घटाव आ गुणा-भाग कइला के बादे आपन तैयारी कर रहल बा. मुसलिम समाज दावा करेला कि बंगाल में 30 फीसद आबादी ओह लोगन के बा. ई आंकड़ा सांच होखे भा झूठ, बाकिर एतना साफ बा कि करीब 100 सीट पर मुसलिम वोटर के फैसला कारगर साबित होला. माने ऊ जेकरा संगे हो जाई, ऊ सीट निकाल ली. मुसलिम समाज मुर्शिदाबाद के 22 सीट, मालदह के 6, उत्तर दिनाजपुर के 6, उत्तर 24 परगना के 20, दक्षिण 24 परगना के 8, कोलकाता के 4, हुगली के 5, हावड़ा के 8, पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर आ झाड़ग्राम के 5, पुरुलिया-बांकुड़ा के 10 आ बीरभूम जिला के 10 सीट पर आपन दबदबा राखेला. कुल जोर दीहल जाव त करीब 100 सीट अइसन बा, जहां मुसिलम वोटर जेकरा संगे जाई, ओकर जीत पक्का मानल जाई. वामपंथी शासन में मुसिलम वोट के ठेकेदार वामपंथी पार्टी रहली सन. बाद में एकर ठेकेदारी ममता बनर्जी के हाथ में आ गइल. ममता एह तबका पर एतना मेहरबान भइली कि उनका से हिन्दू बंगाली वोटर बिदके लगले. सोझ-साफ कहल जाव त आज भाजपा के बंगाल में जवन आधार मजबूत लउकत बा, ऊ ममता के मुसलिम तुष्टीकरण के देन ह.

जवना मुसलिम वोट खातिर ममता बनर्जी नमाज-फातिया के कार्यक्रम में टोपी पहिरले आ नमाज पढ़े के अंदाज में लउके लगली, ओह से बंगाली हिन्दू वोटर बिदके लगले. एही बीच में सरस्वती पूजा, काली पूजा, दुर्गा पूजा जइसन हिन्दू परब-तेवहार में ममता सरकार के अड़ंगा आग में घीव के काम कइलस. हिन्दू बंगाली समाज के लोग ओही समय से विकल्प के तलाश में जुट गइल. अब ममता भले ई कहत फिरस कि सबसे बड़ पुजारी ऊ हउवी. कवनो गलती उनका से भइलो होखे त ओकर प्रायशिचत करे खातिर जनता उनका के फेर मौका देव. बाकिर एकर कवनो असर हो पाई, केहू पक्का तौर पर ना कह सकेला.

एने बंगाल के मुसलिएम समाज दू हिस्सा में बंट गइल बा. एगो समाज ठेठ बंगाली मुसलमान लोग के बा, जवना में बांग्लेदेशी मुसलमान भी काफी संख्या में बाड़े. दोसरका मुसलिम समाज बंगाल से बाहर के सूबा से आइल जमात ह. ठेठ बंगाली समाज के नेता लोग के एगो संगठन फुरुफुरा शरीफ ह, जवना के नेता अब्बास सिद्दिकी हउवन. अब्बास सिद्दिकी एगो नया फ्रंट बनवले बाड़े. उनकर फ्रंट कांग्रेस आ वाम फ्रंट से तालमेल क के चुनाव लड़े के तैयारी में बा. अइसन भइल त ममता बनर्जी से बंगाली मुसलिम समाज के मुंह मोड़ लेबे के खतरा साफ लउकत बा. एने एआईएमआईएम के नेता ओबैदुद्दीन ओवैसी गैर बंगाली मुसलिम समाज के लेके मैदान में उतरे के तैयारी में लाग गइल बाड़े. कुल मिला के अब ई बात साफ हो गइल बा कि जवन मुसलिम समाज के लेके ममता बनर्जी अबहीं ले चुनावी वैतरणी पार होत आइल रहली हा, अब उहे मुसलिम समाज उनकर दुश्मन बन गइल बा.
मतुआ समाज आजादी के टाइम में पूर्वी पाकिस्तान (1971 के बाद बांग्लादेश) से भाग के आइल आ बंगाल में बस गइल. एह समाज के लोग हिन्दू त ना ह, बाकिर हिन्दू समाज से सट के रहे चाहेला. एह लोगन के नाम हिन्दू अइसन रखाला. ई लोग के एगो बड़हन समस्या ई बा कि बंगाल में त ई लोग वोटर बन गइल, बाकिर आज ले भारत के नागरिक ना बन पावल. एही से ई लोग बार-बार सीएए आ एनआरसी के पक्ष में बोलेला. बीजेपी एकर वादा कइलस त मतुआ बहुल इलाका से ओही समाज के आदमी संसद पहुंच गइल. एह समाज के मांग आ भावना देख के गृह मंत्री अमित शाह के फेर ई घोषणा करे के परल हा कि कोरोना वैक्सिन के काम खतम होते सीएए आ एनआरसी के काम शुरू हो जाई. अबहीं ले एह समाज के लोग विकल्प ना रहला से वाम दल भा तृणमूल के साथ देत आइल रहल हा. बाकिर अब साफ हो गइल बा कि बीजेपी एह लोगन के पसंद के पार्टी बा. नदिया, उत्तर आ दक्षिण 24 परगना, राणाघाट जइसन बांग्लादेश से सटल इलाका में एह लोगन के बहुलता आ दबदबा बा. विधानसभा के 40-45 सीट पर एह लोगन के वोट निर्णायक होई.

जहां तक हिन्दुस्तानी माने हिन्दी भाषी समाज के बात बा, तृणमूल कांग्रेस हिन्दी प्रकोष्ठ के नेता राजेश सिन्हा के दावा बा कि विधानसभा के 80 सीट पर हिन्दी भाषी वोटर निर्णायक होइहें. कोलकाता, हावड़ा, हुगली, उत्तर 24 परगना, बांकुड़ा, पुरुलिया के अलावा बर्दवान जिला के सगरी विधानसभा क्षेत्र में हिन्दीभाषी भरल बाड़े. बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के लोग जवना तरह बाहरी-भीतरी के नारा दिहल शुरू कइले बा, ओह से ई बात साफ बा कि हिन्दी भाषी वोट से तृणमूल के मोह भंग हो गइल बा. अइसहूं गैर हिन्दी इलाका में हिन्दी भाषी वोटर के झुकाव राष्ट्रीय पार्टी के ओर रहेला. पहिले कांग्रेस का ओर रहे, त अब बीजेपी का ओर हो गइल बा. हिन्दी भाषी वोटर के पटावे खातिर ममता बनर्जी अपना पार्टी में हिन्दी प्रकोष्ठ बनवली, हिन्दी अकादमी बना के फंड दिहली आ हावड़ा में हिन्दी यूनिवर्सिटी खोले के घोषमा कइली, बाकिर ई उनका केतना कामे आई, ई वोट के बादे पता चली. (लेखक ओमप्रकाश अश्क वरिष्ठ पत्रकार हैं.)


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