Bhojpuri: लोकरंग में नाम-दाम कमाए के जरिया बनल नैरेटिव

पूर्वी उत्तर प्रदेश के पूर्वांचलो कहल जाला. देस के सात गो प्रधानमंत्री देबे वाला ई इलाका आजुओ पिछड़ापन के दर्द झेले के मजबूर बा. एह इलाका में विकास में जमीनी काम करे वालन में तीनिए गो नाम आगे बा- बनारसी पंडित कमलापति त्रिपाठी, मऊ के कल्पनाथ राय आ गोरखपुर के वीर बहादुर सिंह. अइसही मनोज तिवारी, नेहा राठौर अउर गायत्री यादव में भी एगो समानता बा.

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मनोज तिवारी, नेहा सिंह राठौर आ गायत्री यादव में का समानता बा, जब ई सवाल उठी त एह के पहिलका जवाब एकही समझ में आई कि तीनों जने भोजपुरी लोकरंग के गवइया हवन. बाकिर ई लोगन में एगो आउर समानता बा ? तीनों लोग आपना गवनई के सुरूआती दिनन में ओह खास दौर के मसहूर राजनीतिक नैरेटिव आ राजनेता के पक्ष में भावुक गाना गवले रहे लोग.

पूर्वी उत्तर प्रदेश के पूर्वांचलो कहल जाला. देस के सात गो प्रधानमंत्री देबे वाला ई इलाका आजुओ पिछड़ापन के दर्द झेले के मजबूर बा. जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, विश्वनाथ प्रताप सिंह, चंद्रशेखर आ अब नरेंद्र मोदी, सब लोग एही इलाका से चुनि के देस के कमान सम्हालल. शास्त्री जी, वीपी सिंह आ चंद्रशेखर त एही माटी के खांटी सपूत रहे लोग. बाकिर एह इलाका में विकास में जमीनी काम करे वालन में तीनिए गो नाम आगे बा- बनारसी पंडित कमलापति त्रिपाठी, मऊ के कल्पनाथ राय आ गोरखपुर के वीर बहादुर सिंह.

पिछला सदी के आखिरी दशक में पूर्वांचल के विकास के उम्मीद बनि के उभरल रहले समाजवादी पृष्ठभूमि वाला कल्पनाथ राय. बाकिर समय के फेर कहीं भा सत्ता के कमी, पहिले चीनी घोटाला में उनुकर नाम आइल आ फेरू दाऊद के गुर्गा शैलेंद्र ठाकुर के सहयोग के आरोप लागल. एह वजहि से केंद्र के उनुकर मंत्री पद त गइबे कइले, गिरफ्तारियो भइल. 12 फरवरी 1996 के उनुकर गिरफ्तारी के वजहि से पूर्वांचल इलाका में मायूसी रहे. एह वजह से ना कि ऊ दाऊद के सहयोग कइले रहले, एह से कि अब पूर्वांचल में विकास कइसे होई.

ओह घरी मनोज तिवारी गवनई में कोसिस करत रहले. ओही कोसिस में उनुकरा खातिर कल्पनाथ राय की गिरफ्तारी जइसे नया उमेदि बनि गइल. उनुकर जेलयात्रा पर तिवारी लोकरंग में दर्द से भरल एगो भोजपुरी गाना गवले. ऊ कैसेट आ टेप रेकार्डर के जमाना रहे. कैसेट निकलल आ मनोज तिवारी भोजपुरी में छा गइले.
अब त मनोज तिवारी कवनो परिचय के मोहताज नइख. समाजवादी पार्टी के राजनीति में उनुका के अमर सिंह ले अइले आ अब त भाजपा के दुलरूआ बाड़े. कल्पनाथ राय, अमर सिंह से होत उनुकर राजनीतिक यात्रा भाजपा तक पहुंचि गइल.

हमनीं के आपन भोजपुरी संस्कृति के बाड़ा दोहाई देनीं जा. हर मनई के आपन संस्कृति बढ़िया लगबे करेले. बाकिर ईहो हमनीं के माने के चाहीं कि पछिमी उत्तर आधुनिकता वाला विचार में जवन पापुलर कल्चर कहल जाला, हमनीं के भोजपुरिया संस्कृति ओही में डूबे-उतराए में आपन ताकति देखेले. ई हे वजहि बा कि मनोज तिवारी के ओरि दुनिया के ध्यान कल्पनाथ राय के पक्ष में मार्मिक गवनई कइला पर जाला, भले कल्पनाथ राय दाऊद जइसन देसद्रोही के सहयोग के आरोप में काहें ना गिरफ्तार होखसु. एह सोच आ चलन में अबहिंयो कवनो बदलाव नइखे आइल.

12 मई 2021 के जब बिहार के बाहुबली नेता पप्पू यादव के 32 साल पुरान केस में गिरफ्तारी भइल त उनुको समर्थन में लोर के धार बहे लागल. ओह धार में एह घरी उभरल गायत्रियो यादव डूबि गइली. गायत्री यादव के गवनई पर पिछिला साल के लॉकडाउन के दौरान लोगन के ध्यान गइल, जब ऊ गांवां-गाईं पैदले लौटत बहरवासुं लोगन के दर्द के गवली.



गिरफ्तार पप्पू जब बेमार हो गइले त एह मोका पर गायत्री यादव जइसे दर्द में डूबि गइली..उनुकर एगो गाना सोसल मीडिया पर बहुते मसहूर हो गइल..खासकर पप्पू समर्थक लोग त ओके खूबे प्रचारित कइले.ई गीति रहे,

भाग्य विधाता ल न भइया के बचाइ

पप्पू यादव बाड़े हम सभनीं के सहाइ

हमनीं खातिर अड़ि गइले जा के गुजरात में

लड़ले मुजफ्फरपुर के नारी के सम्मान में

कवन कसूर पप्पू भईया जी कइले

आज जेलखनवा नेता जी गइले

हालांकि जब उनुका गवनईं के सर्च सुरू भइल त पाता चलल कि जब चारा घोटाला में जनवरी 2018 में लालू यादव के साढ़े तीन साल के सजा भइल तबो गायत्री यादव उनुका समर्थन में अइसहीं गवले रहली, जइसे पप्पू यादव के समर्थन कइले बाड़ी. ओह गीति के बोली बा, देखी सभें,

निकलिहें जहिया लालू जेल से

बनिहें महाकाल हो...

एही लिस्ट में नया भोजपुरिया नाम नेहा सिंह राठौर के बा. पहिला बेर ऊ चर्चा में अइली कानपुर के विकास दुबे मुठभेड़ पर लोकरंग में गवला के बाद..तब ऊ गवले रहली,

जिनगी से फिसलले दुबे जी जइसन पाठा

फिसलि जाला जइसे यूपी पुलिस के चक्का

एह से लोकप्रियता उनुका के मिले लागल, तब ले बिहार विधानसभा के चुनाव आ गइल. ओह घरी जेएनयू के पढ़ल डॉक्टर सागर के लिखल एगो गाना बहुते मसहूर भइल रहे,

बिहार में का बा..

ओकर पैरोडी में नेहा सिंह राठौर उतरि गइली आ फटाफट गाना गा दिहली,

अरे का बा, बिहार में का बा

15 साल चचा रहलन, 15 साल पप्पा

तबो ना मिल बेरोजगारी के ठप्पा

जब सइंया होले मोर अरब के रवाना

तब-तब जियरा खोजे एहो इहां कारखाना

एह गाना के राष्ट्रीय जनता दल हाथों हाथ ले लिहलसि आ नीतीश-भाजपा सरकार पर हमला बोले के हथियार बना लिहलसि.

एके बाद नेहा के मसहूर होखहिंके रहे.

अब त ऊ भाजपा आ नीतीश के जइसे विरोध के आवाजे बनि गइल बाड़ी.

भोजपुरी के ई तीनि गो उदाहरण बा कि तात्कालिक राजनीति इहवां लोकप्रियता आ पइसा कमाए के साधन बिया. लोकरंग ओह साधन में डूबि के नाम आ दाम दूनों कमाता. बाकिर एह बीच एगो सवाल जरूर उठेला कि भोजपुरिया गायक-गायिका लोगन के आपना जाति-बिरादरी में ही मसीहा लउकेले. तबे कल्पनाथ राय भोजपुरी के तारणहार बनि जाले आ लालू यादव महाकाल. भोजपुरिया गवइयन पर एही वजहि से जातिवाद के आरोपो लागेला. ओइसे अइसन गीति-गवनई तात्कालिक नैरेटिव के फायदा जरूर पहुंचा सकेला, आ ओह से फायदा जरूर ले सकेला..बाकिर लंबा वक्त तक उहे रचना आ गवइया टिकि सकेला, जवना के सुर लोकरंग के व्यापक सामाजिक आ सांस्कृतिक मूल्य से जुड़ल होई. भिखारी ठाकुर, महेंदर मिसिर, शारदा सिन्हा, गिरिजा देवी जइसन लोग एकर उदाहरण बाड़े. (लेखक उमेश चतुर्वेदी वरिष्ठ पत्रकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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