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Bhojpuri Spl: आजाद हिंद फौज के सिपाही नाज़िर हुसैन, जानीं कइसे बनलें भोजपुरी सिनेमा के पितामह?

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नाज़िर हुसैन (Nazir Hussain) के भोजपुरी सिनेमा के पितामह (Father of Bhojpuri Cinema) कहल जाला. उहें के प्रयास रहे कि भोजपुरी सिनेमा कल्पना से हकीकत हो पावल आ भोजपुरी के पहिला फिल्म (First Bhojpuri Movie) बन पावल.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 22, 2021, 5:36 PM IST
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नाज़िर हुसैन के भोजपुरी सिनेमा के पितामह कहल जाला. उहें के प्रयास रहे कि भोजपुरी सिनेमा कल्पना से हकीकत हो पावल आ भोजपुरी के पहिला फिल्म बन पावल. नाज़िर साहेब एतना अच्छा अभिनेता रहनी कि बिमल रॉय अउरी देव आनंद के फिल्मन के अनिवार्य हिस्सा रहनी. गंगा पार कमसार स्थित उसिया गांव में 15 मई 1922 के जनमल नाज़िर साहेब के बारे में बहुत कम लोग जानेला कि उहाँ के पहिले रेलवे में फायरमैन, फेर ब्रिटिश इंडियन आर्मी के तरफ से विश्वयुद्ध द्वितीय लड़े वाला सिपाही भी रहनी. जब ब्रिटेन जापान से युद्ध हार गइल त नाज़िर 60 हज़ार सिपाहियन के साथे बंदी हो गइनी आ जापानी सेना के खूब अत्याचार सहनी. उहें उहाँ के आपन दुःख-दर्द भुलाये खातिर लिखल आ अभिनय कइल शुरू कइनी.

एक बार जब खुदीराम बोस जापान में बंदी सिपाहियन से मिले गइनी त उहाँ के लिखल नाटक ही मंचित भइल आ बोस बहुत प्रभावित भइनी. जब सुभाषचन्द्र बोस आजाद हिन्द फ़ौज के गठन करत रहनी त उहाँ के भी नाज़िर साहेब से मुलाकात कइनी. बोस सिंगापुर रेडियो पर नाज़िर हुसैन साहेब के कार्यक्रम कई बेर सुनले रहनी. नाजिर हुसैन आजाद हिन्द फ़ौज में शामिल भइनी आ ओकरा विघटन के बाद जब भारत अइनी त कलकत्ता में न्यू थिएटर में नाटक करे लगनी. एहीजा उहाँ के मुलाकात बिमल रॉय से भइल आ बिमल रॉय के उहाँ के असिस्टेंट बन गइनी. बिमल रॉय ‘पहला आदमी’ फिल्म बनावत रहनी, नाज़िर जी एह फिल्म में खाली अभिनये ना कइनी बल्कि एकर कहानियो लिखनी, संवादो लिखनी. ई फिल्म उहाँ के स्थापित कर देलस. नाज़िर हुसैन फिल्म ‘मुनीम जी’ में पहिला बार देवानंद के साथे दिखनी. एह फिल्म के उहाँ के पटकथा-संवाद भी लिखले रहनी. देवानंद आ नाज़िर साहेब के दोस्ती एही जी से शुरू भइल आ आजीवन चलल.

भोजपुरी फिल्म बनावे के आईडिया नाज़िर साहेब के डॉ. राजेंद्र प्रसाद देहले रहनी. एक बार राजेन्द्र बाबू फिल्म समारोह में मुंबई अइनी. ओहिजा उहाँ के बगल में बइठल नाज़िर हुसैन से परिचय भइल. जब राजेन्द्र बाबू जननीं कि नाज़िर हुसैन भोजपुरी भाषी हईं त भोजपुरिये में कहनी कि रउआ जइसन भोजपुरी भाषी कलाकार बा तबो भोजपुरी में अभी ले कौनो फिल्म ना बनल. ई बात नाज़िर जी के मथे लागल आ उहाँ के गंगा मईया तोहे पियरी चढ़इबो के स्क्रिप्ट लिखनी आ प्रोड्यूसर के इंतज़ार करे लगनी. संजोग से विश्वनाथ शाहाबादी से उहाँ के मुलाकात भइल आ ऊ पइसा लगावे खातिर तैयार भइनी अउरी एह तरे भोजपुरी के पहिला फिल्म बनल जवन आवते भोजपुरिया क्षेत्र में एगो नया बाज़ार आ श्रोता वर्ग खड़ा कर देलस. नाज़िर हुसैन, पहिला फिल्म के बाद भोजपुरी खातिर समर्पित हो गइनी. उहाँ के लगभग 500 फिल्म हिंदी आ भोजपुरी में कइनी.



उहाँ के भोजपुरी में उल्लेखनीय फिल्मन में हमार संसार, बलम परदेसिया, रूस गइलें सइयां हमार, चुटकी भर सेनुर आदि बा. उहाँ के भोजपुरी फिल्म में भोजपुरिया लोक संस्कृति, ग्रामीण जीवन आ लोक-रंग के प्रभाव सर चढ़ के बोलत रहल. बतौर निर्देशक उहाँ का बलम परदेसिया, रूस गइलें सइयां हमार जइसन सफल फिल्म देहनी. नाज़िर हुसैन के निधन 16 अक्टूबर 1987 के मुंबई में भइल. उहाँ के मुंबई के
मलाड स्थित मस्जिद के कब्रिस्तान में सुपर्दे खाक कइल गइल. नाजिर साहेब के एह बात खातिर हमेशा ईयाद कइल जाई कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित एगो बड़ा कद के अभिनेता भोजपुरी सिनेमा के प्रतिष्ठा के साथे स्थापित कर देलस. दुनिया छोड़े के पहिले उ भोजपुरी के झंडा बढ़िया से गाड़ चुकल रहले.

पहिला भोजपुरी फिल्म ‘गंगा मईया तोहे पियरी चढ़इबो’ के प्रदर्शन के दू साल बाद नाज़िर हुसैन साब के एगो आलेख ‘धर्मयुग’ में छपल रहे, ओकर कुछ अंश हम इहाँ उधृत कइल जरुरी समझत बानी – ‘’ पहली फिल्म बनी. पटना में राजेन्द्र बाबू उसका उद्घाटन करने वाले थे, लेकिन अस्वस्थ हो जाने के कारण वे उपस्थित नहीं हो सके. फिर भी उनके लिए विशेष प्रदर्शन की व्यवस्था की गयी. फिल्म देखने के बाद उन्होंने इतना ही कहा: “ए भाई ! इ अइसन जनाता कि हम कौनो फिलिम ना देखलीं हं. अइसन बुझात रहल ह कि कौनो गांव में बइठल कौनो लीला देखत रहीं।” मैं तब उपस्थित नहीं था, परन्तु जब उनके उद्गार सुने, तो मेरा दिल हर्ष से फूल उठा. एक कलाकार के लिए इससे बढ़कर सम्मान और गर्व कि बात क्या हो सकती है कि उसकी कृति की प्रशंसा इतने निर्मल शब्दों में की जाय.

मुझे खुशी है कि जनता ने इस फिल्म को दिल से पसन्द किया और जिस व्यक्ति ने लाखों रूपये का जोखिम उठाया, उसकी झोली भी भर गयी. ‘भइयों की ज़बान’ कहकर मजाक उड़ाने वाले आज इस क्षेत्र में प्रवेश करने की तैयारी कर रहे हैं और कई तो कर भी चुके हैं. भोजपुरी हिन्दी की एक शाखा है पर यह हमारे गांवों की तरह ही मीठी है. अगर इसकी मिठास को कायम रखते हुए भोजपुरी फिल्मों का निर्माण किया गया, तो वह दिन दूर नहीं कि उत्तर भारत के ग्रामीण देश के किसी भी कोने में जाकर अपने को अजनबी महसूस नहीं करेंगे. फिर, भोजपुरी के प्रसार से हिन्दी का प्रसार भी तो होता ही है.

ध्यान दीं, नाजिर साहेब के बात पर ! हम इहाँ दू गो बात कहे के चाहत बानी –
पहिला- नाजिर साहेब कहनी कि, ‘’ भोजपुरी के प्रसार से हिन्दी का प्रसार भी तो होता ही है.’’ ..ई बात कुछ बुद्धिजीवी लोग के काहे नइखे बुझात. उ काहे हिंदी-भोजपुरी में झगड़ा लगावत बा लोग. काहे कहsता लोग कि भोजपुरी से हिंदी के अहित होई.
दूसर बात– नाज़िर साहेब के यकीन रहे कि भोजपुरी सिनेमा के प्रचार से हमनी के मान-सम्मान बढ़ी आ लोग हीन भावना से ना देखी बाकिर अब त ममले पलट गइल. लोग फिलिमिये देख के हमनी के गरियावता आ एकरो चलते बहुत लोग आपन भोजपुरिया पहचान छुपावsता. त भाई रे, पाई खातिर माई के मत बेचs सन !!!

(लेखक मनोज भावुक भोजपुरी सिनेमा के वरिष्ठ स्तंभकार हैं )
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