भोजपुरी में पढ़ें: नया कृषि कानून पर आखिर एतना हंगामा काहें

कुछु लोगन के आरोप बा कि एह कमीशन एजेंटन के 6 से लेके 12 परसेंट ले कमीशन मिलेला. अब नवका कानून के कारन कमीशन एजेंट के कौनो जरूरते ना रहि जाई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 24, 2020, 1:14 PM IST
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उवां सब जानते बानी कि सरकार हाले में खेती आ खेत से उपजल फल- अनाज, तरकारी आ ई कुल के बाजार के लेके तीन गो कानून बनवले बिया. बाकिर ई केहू नइखे बोलत कि किसान के अनाज वगैरह बेचे के घरी कमीशन एजेंट रहेलन स. ओकनी के एह बेचे- कीने में कमीशन मिलेला.  कुछु लोगन के आरोप बा कि एह कमीशन एजेंटन के 6 से लेके 12 परसेंट ले कमीशन मिलेला. अब नवका कानून के कारन कमीशन एजेंट के कौनो जरूरते ना रहि जाई. ऊ रुपया बांचल, जवन किसान के लगे जाई. हालांकि सरकार मंडी सिस्टम खतम नइखे कइले. एह मंडी सिस्टम खातिर “एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (एपीएमसी)” आजादी का बाद से चलल आवता. ई कमेटी किसान के उपज के खरीद- बिक्री के देखभाल करेले. एही में कमीशन वाला सिस्टम बा. सरकार एपीएमसी के खतम नइखे कइले. बाकिर खुला बाजार प्रणाली में ओकर अहमियत कम हो जाई. अब के जाई कमीशन खियावे.

सब कमीशनखोर घबड़ाइल बाड़े सन. पुरनका प्रणाली के खराबी ईहो बा कि मये चीनी मिल बंद हो गइली सन. किसान के गन्ना के उपज के दाम ठीक टाइम पर ना मिलत रहे. त ऊ चीनी मिल में काहें बेची? ओ घरी त कांग्रेस के सरकार रहे. काहें ऊ चीनी मिल बंद होखे दिहलस? त आईं नवका कृषि कानून के तरफ लवटीं जा. एकरा के समुझल कठिन नइखे.

बारी- बारी से एकरा भीतर झांकीं जा.संसद में पहिला कानून पास भइल ह मूल्य आश्वासन पर जवना के नांव ह “किसान (बंदोबस्ती आ सुरक्षा) समझौता आ कृषि सेवा कानून”.  सरकार दावा करतिया कि ए कानून से ठीका पर खेती करावे के रास्ता साफ हो जाई. एसे किसान के जोखिम कम हो जाई, काहें से कि ओकरा खेत के ठीका लेबे वाला फसल बोए के पहिलही रुपया देदी. अब आन्ही आओ, पानी आओ, किसान से कौनो मतलब नइखे. किसान थोक व्यापारी आ बड़ खुदरा व्यापारी, ईहां तक कि निर्यात करे वाला  व्यापारी के भी अनाज बेचि सकेला. किसान के जानकारी पहुंचावल जाई कि आधुनिक तकनीक से कइसे खेती करे के चाहीं. आ सबसे बड़ बात ई कि ठीका खेती के बढ़ावा दिहल जाई. एमें बड़- बड़ कंपनी कौनो खास उपज खातिर किसान के खेत ठीका पर ली. ठीका के दाम पहिलहीं तय हो जाई. किसान के अच्छा दाम मिली.



अब कुछ किसान संगठन के नेता आ राजनीति में विरोधी दल के कुछ नेता कहता लोग कि एह कानून से किसान अपने खेत में मजदूर नियर बनि जाई. केंद्र सरकार पश्चिमी देशन नियर खेती के माडल बनावे के चाहतिया. आ मंडी के का होई. जब किसान के अधिका दाम मिली त ऊ मंडी में त जइबे ना करी. त आढ़ती लोगन के का होई? त कुलि जिम्मा किसाने लेउ?
दुसरका कानून पास भइल ह “कृषि उपज वाणिज्य एवं व्यापार- संवर्धन एवं सुविधा कानून”. सरकार कहतिया कि एह कानून से किसान अपना सुविधा के हिसाब से खेती के उपज कीनि आ बेचि सकेला. अब “एगो देश, एगो कृषि मार्केट” बनी. केहू कहीं भी आपन अनाज, फल, सब्जी कहीं बेंचि सकेला. एसे अधिका दाम मिले के संभावना बा. एह कानून में पैन कार्ड वाला कौनो आदमी, कंपनी आ चाहे सुपर मार्केट, किसान के माल कौनो जगह खरीद सकेला. कृषि माल के बिक्री, कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) में ही बेचे के शर्त खतम क दिहल बा. मंडी समिति के नियम के कारण किसान ओही मंडी में बेचे के मजबूर रहल ह. मंडी से बाहर खरीद पर कौनो टैक्स ना लागी.

त विरोधी लोग आ मंडी सिस्टम के लोग कहता कि जब मंडी में किसान के माल ना बिकाई त न्यूनतम समर्थन मूल्य किसान कइसे पाई?  न्यूनतम समर्थन मूल्य के गारंटी मिले के चाहीं. जे एह रेट से कम में कीनी ओकरा के जेल में डाले के नियम कइल जाउ. एह नया कानून में एगो अउरी डर प्रगट भइल बा कि किसान आ खरीदे/ खेती करे वाली कंपनी का साथे कौनो विवाद/झमेला भइल त अदालत में ना जाके एसडीएम आ डीएम यानी कलक्टर किहां जाए के नियम बा. त एसडीएम भा डीएम त राज्य सरकार के कर्मचारी ह लोग. ऊ लोग ऊहे करी जवन राज्य सरकार चाही. एमें किसान के फंसे के चांस बा.

सरकार कहतिया कि अइसन अगर होई त केहू किसान आपन जमीन भविष्य में कौनो कंपनी के ना दी. एमें त कंपनिए के घाटा बा. विवाद होखे के चांस बहुते कम बा. व्यापारी कहतारन स कि नया कानून में साफे लिखल बा कि मंडी में किसान आई त मार्केट फीस लागी, आ मंडी में ना आई त मार्केट फीस ना लागी. त किसान अइसहीं फीस देबे का डरे दोसरा जगह आपन माल बेंचि दी. त हमनी के का होई. मंडी सिस्टम के अइसहीं भट्ठा बइठि जाई. सरकार कहतिया कि किसान के लुभावे खातिर मंडी के सुधार लोग. किसान के शोषण काह होखी?

तिसरका कानून “एशेंसियल कमोडिटी एक्ट” में संशोधन क के पास भइल बा. एमें अनाज, खाद्य तेल, तिलहन, दाल, प्याज आ आलू वगैरह के एह एक्ट से बाहर क दिहल बा. माने अब ई कुल उत्पाद केहू कतनो मात्रा में भंडार में राखि सकेला. पहिले एगो सीमा से ज्यादा राखला पर जेल जाएके भी नौबत आ जात रहल ह. विरोधी लोग कहता कि तब त व्यापारी जमाखोरी कइके आ नकली अभाव देखा के अनाज के दाम बढ़ा सकेले सन. जमाखोरी पहिले पाप रहल ह, अब वैध हो गइल. त सरकार कहतिया कि ना, अगर अइसन भइल त पुरानका सिस्टम फेर लागू करा दिहल जाई. कानून बदल दिहल जाई. सरकार जनता के हित के खिलाफ ना जाई.

त मोटा- मोटी ईहे बा नवका कृषि कानून. सरकार कहतिया कि पहिले एह कानून के लागू होखे दीं सभे. अगर किसान के घाटा होई त ऊ खुदे एह सिस्टम से अलग हो जाई. वोट हाथ से चलि जाई तवन अलग. अभी त किसान आत्महत्या करतारे सन. ओकनी के नया रास्ता चाहीं. का जाने ईहे रास्ता ओकनी के राहत दे.
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