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not only medicine human also has an expiry date bhojpuri vinay bihari singh

Bhojpuri में पढ़ें- दवाइए के ना, आदमियों के एक्सपायरी डेट होला

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हर दवाई के एक्सपायरी डेट होला. हर खाए- पीए के सामान के एस्पायरी डेट होला (शराब के छोड़ि के). अउरियो चीज के एक्सपायरी डेट होला. माने एगो निर्धारित तारीख का बाद ओह चीज के ना खाए के चाहीं. खइला पर नोकसान करी. एक्सपायरी डेट प्रिंटेड रहेला. एहीतरे आदमियो के एक्सपायरी डेट होला. बाकिर ऊ कहीं प्रिंटेड ना रहे. अदृश्य रहेला. एकर का मतलब?

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कई आदमी जीयते एक्सपायर हो जाले आ कई आदमी मू के भी एक्सपायर ना होले. कई आदमी जीवन में एकही धक्का में जीयते एक्सपायर हो जाले त कई आदमी जीवन भर धक्का पर धक्का खा के भी एक्सपायर ना होले. संत कबीर, तुलसीदास आ वेदव्यास कबो एक्सपायर हो सकेला लोग? महापुरुष लोग एक्सपायर ना होला. सौ साल बादो उनका के लोग याद करी. उनका पर चर्चा करी. बाकिर साधारण आदमी के एक्सपायरी डेट निश्चित बा. कुछ आदमी त रिटायर होते एतना नर्वस हो जाले कि बेमार परि जाले आ आखिरकार उनकर मृत्यु हो जाला. नोकरी अइसना लोगन के जीए के एगो सहारा रहेला. ऊ ईहे सोचि के परेशान रहेले कि आफिस जाना- आना छूटि जाई त हम कइसे जीयब. आफिस के बिना ऊ खुदे अपना के एक्सपायर मान लेले बाड़े. सुगवा के परान नोकरिए में बसेला. कौनो चीज से अपना के परमानेंट बान्हि लीहल, अपना के ओतने तक सीमित क दिहल, एक्सपायरी के लक्षन ह. जीवन के संभावना अनंत बा. तबो एगो सीमित दायरा तय कके ओही में घुरियाइल एक्सपायर होखल बा. एगो आदमी कौनो प्रतिष्ठित पद पर रहले त उनकर अहंकार आ दुर्व्यवहार हद के सीमा बार- बार पार करत रहे. बाकिर जब रिटायर भइले ह त उनका के केहू पुछते नइखे. काहें से कि उनकर अहंकार बरियार हो चुकल बा. एकरा कारन ऊ घरो के हर आदमी के डांटत- डपटत रहतारे. उनका घर के हर सदस्य से शिकायत बा. नतीजा ई बा कि घरो वाला लोगन के उनका लगे नइखे रहे चाहत. बेचारू अकेला परि गइल बाड़े. त ऊ जीयते एक्सपायर हो गइल बाड़े. ना समाज में केहू से संबंध बा आ ना घरहीं में पूछ बा. निपट अकेला. कुछ आदमी जवानिए में एक्सपायर हो जाले. ऊ जवान बाड़े बाकिर लंबा- लंबा बात करेके अलावा उनकरा में कौनो गुण नइखे. केहू के कामे ना आ सकेले. बाकिर उम्मीद करिहें कि दोसर केहू उनका के मदद करत रहो. भले ऊ केहू के मदद ना करसु. कौनो आमदनी नइखे. व्यक्तित्व में कौनो विशेषता नइखे. आमदनी करेके कोशिशो नइखन करत. दोसरा पर लदाए के आदत बा. बस ईहे सोचत रहतारे कि के मिलो कि ओकरा पर लदाईं. बतियावे के कहि दीं त अइसन बतियइहें कि उनका नियर बुद्धिगर केहू हइए नइखे. जेकरा संगे दू दिन रहिहें ओकरे पर लदा जइहें. अइसने लोगन खातिर कहाउत बनल बा- “काम के न काज के, दुश्मन अनाज के”. त ऊहो एक्सपायरे बाड़े.

हमनी के समाज में दोसरा के दोष पर कुछ लोग घंटन बतियावेले, बाकिर उनका भीतर कौन- कौन दोष बा, एकरा पर ध्यान ना दीहें. पुरनिया लोग कहि के गइल बा कि जौना दोष के लेके केहू दोसरा के कटु आलोचना करता त बूझि लीं कि ऊ दोषवा ओहू आदमी में बा. केहू घटियाई के कटु आलोचना करे में मजा लेता त बूझि लीं कि ओकरो में घटियाई लुकाइल बा. अइसनो लोग बाड़े जे दिन भर दोसरा के अकारण निंदा/कुचराई करतारे. ईहे उनकर नशा बा. ऊ कुचराई ना बतियइहें त उनकर पेटे ना भरी आ रात के ठीक से नींदो ना आई. कुचराई कइल उनकर नशा बा. अइसना लोगन से अधिकांश आदमी कतरा जाले. जब केहू रउरा में खाली दुर्गुणे देखी, त रउरा ओकरा के बचि के रहबे करब. अइसन कुचराई करे वाला लोग निगेटिव एप्रोच वाला होला. ओकरा आधा भरल गिलास ना लउकी, आधा खाली गिलास लउकी. त अइसना आदमी के प्रकारांतर से एक्सपायर कहल जा सकेला. निगेटिव आदमी एक्सपायरे ह. जेकरा जीवन में, कामकाज में आ आचार- व्यवहार में निगेटिविटी के अलावा कुछ हइए नइखे, ऊ एक्सपायर ना कहाई त का कहाई? सिर्फ आ सिर्फ आलोचना, निंदा आ केहू के दुर्गुण पर लंबा- लंबा बातचीत. कुछू सकारात्मक नइखे. हर आदमी में कमी लउकी. बस ऊ अपना के परफेक्ट मनिहें. अइसन कुल लोगन खातिर स्वयं उनका के छोड़ि के, बाकी दुनिया के लोग व्यर्थ बा आ कौनो ना कौनो दुर्गुण से ग्रस्त बा. ई अइसने बा कि केहू हाफ पैंट, टाई आ कोट पहिर लेउ आ फुलपैंट आ कमीज, टाई वाला लोगन के मजाक उड़ावे.

प्रसिद्ध क्रिकेटर कपिलदेव एगो इंटरव्यू में कौनो महापुरुष के एगो उक्ति कहले- ”हर आदमी के अपना जीवन में नकारात्मक चीज/ घटना से कबो ना कबो आमना- सामना करेके परेला, बाकिर ओही नकारात्मक चीज/घटना से सीख लेके आदमी सकारात्मक बन जाला. ऊ नकारात्मकता के सकारात्मकता में रूपांतरित क देला.” साधु संत लोग का कहले बा? कहले बा कि दोसर केहू हमरा संगे कइसन व्यवहार करता ऊ अतना महत्वपूर्ण नइखे, महत्वपूर्ण ई बा कि हम ओकरा के कौना रूप में ग्रहण करतानी. कइसे रिएक्ट करतानी. हमार व्यवहार आ हमार सोच, हमार व्यक्तित्व बनाई. केहू खराब व्यवहार करता त ऊ ओकरा पर्सनालिटी के दोष बा. ओकरा पर रिएक्ट कके हम काहें आपन पर्सनालिटी बिगाड़ीं. हम जतना संभव हो सके संतुलित व्यवहार करब. मनोचिकित्सक लोग कहले बा कि ओवर रिएक्ट कइल बेमारी ह. एही से झगड़ालू आदमी हरदम अशांत रहेला. पहिले के साधु संत लोग समाज सुधारक भी रहल ह.

जदि केहू नोकरी से रिटायर भइला का बाद भी सक्रिय बा आ सकारात्मक भाव से जीवनयापन करता त ऊ मरियो गइला का बाद एक्सपायर ना होई. ढेर लोग बाड़े जे मरियो गइला पर एक्सपायर ना होले आ ढेर लोग अइसनो बाड़े जे जीयते एक्सपायर हो गइल बाड़े. जे समाज के, खुद अपना परिवार के कौनो कामे नइखे आवत ऊ एक्सपायर लोगन के श्रेणी में बा.
कोशिश त कइले जा सकेला कि हमनी का एक्सपायर न होईं जा. कम से कम जीयत का घरी एक्सपायर ना होईं जा.

(विनय बिहारी सिंह भोजपुरी के जानकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Article in Bhojpuri, Bhojpuri

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