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Bhojpuri में पढ़ें- शांति के महासमुद्र कहां बा

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हर आदमी के शांति चाहीं. बाकिर ऊ बा कहां? “शांति” पर हर धर्म में बहुते किताब छप चुकल बाड़ी सन. बहुत प्रवचन दिया चुकल बा. ...अधिक पढ़ें

कतनो शास्त्र पढ़ि लीं. त उपाय का बा? एगो कहानी के माध्यम से समुझल जाउ. ई कहनियां रउरो जानतानी. बाकिर फेर सुन लीं, काहें से कि ओकरा बिना काम ना चली. असल में ई कहानी ईश्वर के समुझावे खातिर संत लोग सुनवले बा. कबीरदास लिखिए देले बाड़े- “कस्तूरी कुंडल बसे, मृग ढूढ़े बन मांहि/ऐसे घट- घट राम हैं, दुनिया देखे नाहि.“ त ईश्वर शांति के पर्यायवाची हउवन एसे ई कहानी सुनीं- आम तौर पर पहाड़ी इलाकन में एगो हिरण भा मृग के नर प्रजाति बा जौना के नाभि में कस्तूरी बनेला. जब कस्तूरी पूरी तरह तैयार हो जाला त ओकर गंध हिरण के मतवाला क देला. मजा ई कि गंध ओही हिरण के मिली जौना के नाभि में बनल बा. हिरण जानेला कि ई गंध कहीं दोसरा जगह से आवता. ऊ पागल नियर जहां- तहां सूंघत- मंहकत बउड़ियात फिरेला. जब कस्तूरी ओकरा भीतर अउरी चरम सुगंध छोड़े लागेला त ऊ पागलपन में आपन सिर कौनो पहाड़ से लड़ा- लड़ा के मरि जाला. कुल साधु- संत, ऋषि- मुनि कहले बा लोग कि अपना भीतर जाए के चाहीं, अपना भीतर शांति के रसायन तैयार करे के परी. कइसे? रउरा सब कहब कि- कहल भा लिखल त बड़ा आसान बा. बाकिर प्रेक्टिकल जीवन में ई का संभव बा? त सरकार, संभव बा. हर मंत्र भा प्रार्थना का बाद हमनी का तीन बार- शांति, शांति, शांति काहें कहेनी जा. भा शांति पाठ काहें बनावल बा-

ऊं द्यौः शांन्तिरन्तरिक्षं शान्तिः,
पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति: .

वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:,
सर्वं शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि ॥
ऊं शान्ति: शान्ति: शान्ति: ॥

(अर्थ- शांति लाइए, प्रभु त्रिभुवन में, जल में, थल में और गगन में, अंतरिक्ष में, अग्नि, पवन में, औषधि, वनस्पति, वन, उपवन में, सकल विश्व में अवचेतन में!
शांति राष्ट्र-निर्माण सृजन, नगर, ग्राम और भवन में जीवमात्र के तन, मन और जगत के हो कण कण में, ऊं शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥)

अब साफ हो गइल कि शांति पाठ एक तरह से प्रतिज्ञापन भी ह. एकर बार- बार पाठ कइला से, एकरा पर ध्यान (मेडिटेशन) कइला पर आ मन में ईश्वर का प्रति पूर्ण श्रद्धा रखला पर शांति आवे लागेला. अब रउरा कहि सकेनी कि जब मन में तनाव के तूफान उठेला त ओह घरी कुछू कामे ना आवेला. एइजे हमनी से गलती हो जाला. रमण महर्षि बड़ा बढ़िया उदाहरण देले बाड़े- केहू ट्रेन पर चढ़ि गइल, सीट पर बइठि गइल बाकिर अपना कपार पर राखल गठरी भा बक्सा कपारे पर लेले बा. त ओकरा ट्रेन पर चढ़ला से का फायदा. आरे भाई कपार से बक्सा उतारु आ सीट का नीचे राखि दे. ट्रेन पर बोझा ढोए खातिर थोरे केहू बइठेला. बाकिर दैनिक जीवन में हमनी का ईहे काम करेनी जा. भगवान से प्रार्थना करेनी जा, उनका से का जाने का का मांगेनी जा, रोएनी जा, बाकिर कपार पर तनाव के बक्सा लेले रहेनी जा. ओकरा के भगवान के चरण पर राखि के समर्पण ना करेनी जा.

त तनाव के बक्सा कपार पर से कइसे उतरी? अभ्यास से. केहू जदि एकाग्र आ शुद्ध मन से भगवान से गहन प्रार्थना करी त ओकर उत्तर मिलबे करी. बस शर्त ई बा कि अनन्य भक्ति चाहीं. अनन्य माने- न अन्य. मन कहीं दोसरा ओर ना जाउ. त उत्तर मिलबे करी. एकर गारंटी भगवान भगवद्गीता में दे देले बाड़े. बाकिर हमनी के मन एतना छटपट करेला, एतना चंचल हो जाला, अधीर हो जाला कि बस अबे जौन मांगतानी तौन मिल जाउ. एही अधीरता के कारन भगवान रूपी ट्रेन पर चढ़ला का बावजूद तनाव के बक्सा अपना कपार पर ढोअत रहेनी जा. कतनो मसाज थिरेपी करा लीं, तनाव बाहरी थोरे ह कि ठीक हो जाई. कौनो तेल तबे फायदा करी जब हमनी के भीतर सब कुछ ठीकठाक बा. डाक्टर लोग बतावेला कि तनाव में जब केहू ढेर समय तक रहि जाई, भा तनाव में रहल जेकर आदत बन जाई ओकरा खून में भारी मात्रा में कार्टिसोल हार्मोन आ जाई. संतुलित मात्रा में कार्टिसोल हमनी के भीतर मूड, डर आ भावना के नियंत्रित करेला. बाकिर एकर जब जरूरत से ज्यादा स्राव होखे लागी त आदमी के नर्वस सिस्टम पर भी एकर प्रभाव परे लागेला. कार्टिसोल के ढेर स्राव से मानसिक आ शारीरिक थकान, अवसाद, चिंता, ढेर क्रोध आइल, हड्डी में कमजोरी, त्वचा पातर हो गइल, चिड़चिड़ापन समेत कई गो लक्षण डाक्टर लोग बतवले बा.

त दवाई खइला ले नीमन बा कि हमनी के दिन में कई बार शांति पाठ करीं जा, ध्यान (मेडिटेशन) करीं जा. हं, जब तनाव बेमारी बनि जाउ त डाक्टर से संपर्क करीं जा. सच्चाई ईहे बा कि संसार में हर तरफ शोर रहबे करी. हर जगह शोर, एकरा ऊपर प्रपंच. हमनी के अपना भीतर शांति कल्टीवेट करे के परी, पैदा करेके परी. एकरा खातिर ईश्वर में अटूट आस्था चाहीं कि ईश्वरे गहन शांति आ सुरक्षा के स्रोत हउवन.

बाकिर आमतौर पर शांतिपाठ, गायत्री मंत्र पाठ आ ध्यान कइला से तनाव से छुटकारा मिलेला आ मन में एगो अजीब गहिर शांति महसूस होला. सरकार, ई हम खाली लिखे खातिर नइखीं लिखत. ई कके आजमा चुकल बानी. एकरा के दिनचर्या में शामिल क लेले बानी. रउरो कके आजमाईं. शांति के महासमुद्र हमनी का भीतरे बा.

(विनय बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

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