• Home
  • »
  • News
  • »
  • bhojpuri-news
  • »
  • Bhojpuri: नवका शिक्षा नीति के एक साल, पढ़ीं का भइल बदलाव

Bhojpuri: नवका शिक्षा नीति के एक साल, पढ़ीं का भइल बदलाव

29 जुलाई 2020 के दिने केंद्रीय मंत्रिमंडल नवका शिक्षा नीति के मंजूरी देले रहले. आज एकर एक साल पूरा हो गइल. नवका शिक्षा नीति में सबसे बड़ काम ई भइल बा कि ऊ अंग्रेजियत पर जोर देबे के बजाय भारतीय भाषावन के अहमियत से मंजूर कइले बिया.

  • Share this:

आजुए के दिने ठीक एक साल पहिले 29 जुलाई 2020 के दिने केंद्रीय मंत्रिमंडल नवका शिक्षा नीति के मंजूरी देले रहले. शिक्षा अइसन विषय ह, जवना में रातोंरात बदलाव ले आइल मुश्किल होला. हां, ई बात आउर बा कि अगर लागू करे वाला अधिकारीन में दम आ इच्छा शक्ति होखे त बदलाव शुरू कइलो जा सकेला. ओइसे कहल जा सकेला कि बीतला साल भर में नवका शिक्षा नीति के हिसाब से कई गो बदलाव के नेंव रखा गइल बा. उमेदि कइल जा सकेला कि बदलाव के ई बयार ओही सोच के हकीकत बनाई, जवना के कल्पना ई नीति कइले बिया.

नवका शिक्षा नीति में सबसे बड़ काम ई भइल बा कि ऊ अंग्रेजियत पर जोर देबे के बजाय भारतीय भाषावन के अहमियत से मंजूर कइले बिया. एह नीति में भारतीय शिक्षण आउर सोच के स्तर पर माई के भाषा के कमी के ना केवल गहराई से महसूस कइल गइल बा, बाकिर भारतीय भाषावन के ताकत देबे आ ओकरा बहाने ज्ञान-विज्ञान के ताकत बढ़ावे के दिसाई में बहुत काम करे के गुंजाइस बनवले बिया. इहे वजहि बा कि पिछला साल भर में अइसन-अइसन काम भइल बा, जवना के ठेठ देसी अंदाज के काम कहल जा सकेला.

आपाना देस में आजादी के पहिलहिं से अइसन सोच विकसित होत चलि गइल, जवना में अंग्रेजी के महत्ता ढेरे मिले लागल. दुनियाभर के शिक्षा शास्त्री माने ले कि बच्चा आपाना माइ के भाषा में जाताना ज्ञान हासिल कइ सकेला, ओतना दोसरा भाषा में ना. एकरा बावजूदो हमनी किहां अंग्रेजी के तवज्जो खूबे मिले लागल. रहल-सहल कसर मिश्रित शिक्षा वेवस्था पूरा कइ दिहलसि. फेरू आजाद भारत में नोकरी के जवन इंतजाम भइल, ओह में अंगरेजी पढ़े वालन के ढेरे मोका मिले लागल. अइसना में अंगरेजी बोले – लिखे सिखावे वाला स्कूलन के बनि आइल. जवन काम मैकाले के शिक्षा नीति उन्नीसवीं सदी में पूरा ना कइ पवलसि, ओह के आजाद भारत में हमनीं के अफसर और नेता लोगन के बनावल नीति पूरा कइ दिहलसि.

जर्मनी, जापान, स्पेन आ स्वीडन के आर्थिक ताकत आ तकनीकी ज्ञान के लोहा पूरा दुनिया माने ला. उहवां पढ़ाई आपाना भाषा में होला. बाकिर भारत में अइसन ना हो सकल. एकरा वजहि से इंजीनियरिंग आ डॉक्टरी के पढ़ाई में कतने लइका जाके पिछड़ि गइले स. काहें कि उहनीं के शुरूआती पढ़ाई आपाना माइ के भाषा में भइल रहे. जबकि मेडिकल आ इंजीनियरिंग के पढ़ाई के समूचा माध्यम अंग्रेजी बा. एह वजहि से जब-तब देसी आ भारतीय भाषावन में एह विषयन के पढ़ाई के मांग होत रहल. जब-जब इंजीनियरिंग आ मेडिकल के पढ़ाई में पिछड़ल लइका आत्महत्या कइले स भा अवसाद में गइले स, तब-तब भारतीय भाषावन में एह के पढ़ाई के मांग उठल, बाकिर एह मांग के हंसी में उड़ा दियाइल.

बाकिर नवका शिक्षा नीति में उच्च शिक्षा आ शोध तक के मातृभाषा में करावे के जोर दियाइल बा. एह पर खुश होखल जा सकेला कि पिछिला एक साल में इंजीनियरिंग के पढ़ाई के रेगुलेट करे वाला अथॉरिटी अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद आ मेडिकल के पढ़ाई के रेगुलेट करे वाला मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया भारतीय भाषा में पढ़ाई करावे खातिर तेयारी शुरू कइ देले बाड़े स. एही जुलाई महीना में दूनों संस्था बड़-बड़ घोषणा कइली सा. तकनीकी शिक्षा परिषद जहवां 11 गो भारतीय भाषा में इंजीनियरिंग के पढ़ाई के मान्यता देबे के घोषणा कइलसि, उहवें मेडिकल के दाखिला परीक्षा भी 13 गो भारतीय भाषा में होखे के एलान भइल बा. भोपाल के अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय त पहिलहीं हिंदी माध्यम से इंजीनियरिंग के पढ़ाई शुरू कइ चुकल बा.

नवका शिक्षा नीति में भारतीय भाषा में पढ़ाई चाहे वाला बच्चन के सहूलियत देबे पर जोर बा. एह वजहि से कई को विश्वविद्यालय अपना इहां अनुवाद के काम शुरू कइ देले बाड़े स. नवका शिक्षा नीति में भारत विद्या पर भी जोर दिहल गइल बा. एह के देखत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय आ सयाजी गायकवाड़ विश्वविद्यालय बड़ोदा जइसन विश्वविद्यालय भारत विद्या में पढ़ाई शुरू कइ दिहले स आ नाया-नाया पाठ्यक्रम बनावतारे स.

1991 के जनगणना के भाषा वाला अध्याय में कहल गइल रहे कि भाषा आत्मा के ऊ खून ह, जवना में विचार प्रवाहित होला आ पनपेला. नवका शिक्षा नीति में एह बात के बहुते धेयान दियाइल बा. एह दिसाईं काम हो रहल बा. शिक्षा मंत्रालय के आदेस पर केंद्रीय संस्थानन में एह दिसाईं काम शुरु हो गइल बा. बाकिर कुछु अड़चनो अबहीं बनल बा. एनसीईआरटी जइसन कुछु संस्थानन में जिम्मेदार लोग ठोस काम करे के जगहि पर 2024 ले एह विषय के टाले के हिसाब से चलि रहल बाड़न स. उहनीं के लागता कि 2024 में सायेद केंद्र सरकार बदलि जाइ त सायेद फेरू ई शिक्षा नीति ना चलि पाई… (उमेश चतुर्वेदी वरिष्ठ पत्रकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज