Bhojpuri: पवन, निरहुआ आ खेसारी के फिल्म जवन देखल जाए के चाहीं, पढ़ीं...

भोजपुरी (Bhojpuri) में कुछ जुनूनी लोग आ अलग करे के कोशिश करे वाला लोग कुछ बढ़िया सिनेमा बनावे के समय समय पर कोशिश कइले बा. अइसन नइखे कि ऊ भोजपुरी फिल्मन (Bhojpuri Movies) में चल रहल सेट फार्मूला के एकदम अनदेखा कर देले होखे बाकिर ओकरा इस्तेमाल के बादो कुछ बढ़िया फिलिम बनल बाड़ी सन. हम पिछला कुछ साल में बनल फिल्मन के जिक्र करsतानी जवना के विषय धारा से हटके बा आ अच्छा प्रयोग बा.

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सिनेमा के समाज के आईना कहल जाला आ जवन सिनेमा समाज के समसामयिक विषयन पर फिल्म बनावेला, उ काफी सराहल आ पसंद कइल जाला. हालांकि सिनेमा के परिपाटी बहुते बड़ बा आ ओकर जौनर भी. ऐतिहासिक विषय पर पीरियड ड्रामा, बड़ शख्सियत पर बायोपिक, प्रेम-मोहब्बत पर रोमांटिक फिल्म, हंसी मज़ाक के विषय पर कॉमेडी फिल्म, सामाजिक विद्रूपता पर डार्क कॉमेडी, देशभक्ति पर पेट्रीऑटिक फिल्म, असल मुद्दा के हूबहू चित्रण पर रियलिस्टिक सिनेमा आदि बनत रहेला. एगो अइसहीं सिनेमा के जौनर जवन अस्सी-नब्बे के दशक में बड़ा लोकप्रिय भइल रहे, उ ह ‘लार्जर दैन लाइफ’ ड्रामा. हालांकि एह जौनर के फिल्म शुरूए से बनत रहल बा बाकिर ओह दू दशक में तेजी से अइसन पिक्चर के निर्माण भइल रहे.

एह जौनर के कहानी में किरदार आ घटना अइसन होला जवन असल जिंदगी में संभव नइखे. एही से एकरा के लार्जर दैन लाइफ कहल जाला. भोजपुरी में त अभियो इहे चलता. हिन्दी सिनेमा त अइसन सब्जेक्ट के बहुत पहिले टाटा कहिके रियलिस्टिक सिनेमा के ओर बढ़ चुकल बा बाकिर भोजपुरी फिल्म उद्योग में उलट धारा बह रहल बा. एगो दौर रहे जब भोजपुरी फिल्मन में गाँव-खेड़ा के कहानी होखे, घर परिवार के कहानी होखे आ ओह में मुद्दा होखे, समाज के कुरीति पर चोट होखे, उत्सव आ उल्लास होखे, समाज के बुरा लोग आ बुरा समय हीं खलनायक होखे.

अब त भोजपुरी में 70 से 90 के दशक के फिल्मन के कॉपी हो रहल बा आ उहो सस्ता कॉपी. अधिकांश फिलिम देखला पर लागेला कि लेखक लोग बइठ के 5 गो हिन्दी फिलिम देखेला आ ओही के घोल-मट्ठा कs के एगो नया फिलिम लिख देला आकि निर्माता-निर्देशक लोग इहे सब लिखवावेला. एगो बात आउर, हालांकि लेखको बेचारा का करे? भोजपुरी सिनेमा के कुल बजट के 60-70 प्रतिशत तथाकथित सुपरस्टार लोग के फीस में चल जाला आ बाँचल रुपया में फिल्म के परिकल्पना से लेके निर्माण, प्रमोशन आ डिस्ट्रब्यूशन में खर्च होला. एह से लेखक के हिस्सा में जवन रुपया आवेला ओकरा के जान-सुन के रउआ सभ के होश उड़ जाई.

इ सब कमी के बादो भोजपुरी में कुछ जुनूनी लोग आ अलग करे के कोशिश करे वाला लोग कुछ बढ़िया सिनेमा बनावे के समय समय पर कोशिश कइले बा. अइसन नइखे कि ऊ भोजपुरी फिल्मन में चल रहल सेट फार्मूला के एकदम अनदेखा कर देले होखे बाकिर ओकरा इस्तेमाल के बादो कुछ बढ़िया फिलिम बनल बाड़ी सन. हम पिछला कुछ साल में बनल फिल्मन के जिक्र करsतानी जवना के विषय धारा से हटके बा आ अच्छा प्रयोग बा. एह लिस्ट में पहिला नाम बा, निरहुआ के 2019 में आइल फिल्म शेर-ए-हिंदुस्तान के. ए फिल्म के लेखक निर्देशक बाड़े मनोज नारायण. फिल्म के कहानी नेपाल भारत के सदियन पुरान राजनीतिक आ सांस्कृतिक रिश्ता के बैकड्रॉप में आधारित बा. पिछला दू तीन साल में भारत आ नेपाल के बीच सीमा विवाद आ चीन-पाकिस्तान के साथे ओकरा सम्बन्ध के चलते खटास आइल बा बाकिर ओकरा के ठीक करे खातिर दूनू ओर से प्रयासो होत रहल बा. शेर-ए-हिंदुस्तान एगो अइसन नायक के कहानी बा जवन नेपाल के रास्ते भारत पर हमला करे के योजना बनावत आतंकवादियन से लोहा लेता आ दुनू देश के बीच रिश्ता बिगड़े से बचावत बा. फिल्म के ट्रीटमेंट आ कहानी में ताजगी बा आ एकर संगीत भी बड़ा सुंदर बा जवन लोकप्रिय भी भइल.
एह लिस्ट में अगिला फिल्म खेसारी लाल यादव के बा- संघर्ष. ई कहानी बा एगो अइसन युवक के जवन एगो रूढ़िवादी सोच वाला अमीर बाप के बेटा बा बाकिर सोच में काफी प्रगतिशील बा. जब ओकरा बेटा के जगह बेटी हो जात बिया त नायक के पिता ओह बेटी के स्वीकार करे से मना कर देत बाड़ें. अतने ना, उ अपना बेटी खातिर घर से निकाल दिहल जाता. जवन इंसान कबो पैदल नइखे चलल रहत उ अपना स्वाभिमान आ मूल्य के रक्षा खातिर बिना चप्पल के जरत दुपहरिया में खलिहा गोड़े माल गाड़ी खींच के अपना परिवार के पेट पालत बा आ अपना बेटी के कलक्टर बना के समाज के संदेश देता. फिल्म के लेखक राजेश त्रिपाठी आ निर्देशक पराग पाटील बाडन.

निरहुआ के ही एगो फिल्म रोमियो राजा कुछ दिन पहिले होली पर रिलीज भइल ह, उहो अलग विषय के लेके बनल बा. एह में शिक्षा क्षेत्र में निजीकरण के चलते ग़रीब लइकन के जिनगी के साथ होत खेलवाड़ आ शिक्षा माफिया के बढ़त प्रकोप पर चोट करत आ संदेश देत कहानी बा. फिल्म के ट्रीटमेंट बढ़िया बा आ स्टोरीटेलिंग भी.

यश कुमार लीक से हटके फिल्म बनावे खातिर जानल जालें. उनके 2019 में फिल्म आइल रहे, बिटिया छठी माई के. एह फिल्म में एगो संदेश रहे कि हर बेरी स्त्रीए बाँझ ना होली, कई बार मरद में भी कमी होला, उहो बांझ हो सकेले. ई फिल्म समाज के आईना देखावे वाला फिल्म रहे. फिल्म के बैकग्राउन्ड छठ पूजा के आस्था पर केंद्रित रहे आ समाज से ई कटु सवाल भी करत रहे कि काहें लोग छठी मईया से बेटे मांगेला, बेटी ना. जबकि छठी मईया खुदे एगो बेटी हई. एगो स्त्री से स्त्री के मनोकामना काहे ना? फिल्म में कहानी से लेके अभिनय सभ जबरदस्त बा. हाल-फिलहाल में यश कुमार के कई गो नया फिल्मन के ट्रेलर लॉन्च भइल बा जवन विषय आ कलेवर में बुझाता कि कुछ नया लेके आई.



अइसहीं पवन सिंह के 2019 में एगो फिल्म आइल रहे क्रेक फाइटर. फिल्म त हालांकि कॉमर्शियल रहे आ ए में खूब सेट फॉर्मूला के इस्तेमाल भइल रहे बाकिर ट्रीटमेंट आ कहानी में थोड़ा ताजगी रहे. फिल्म में पवन एगो भारतीय जासूस के किरदार निभवले रहलें जे एगो सीक्रेट मिशन पर बा आ एगो ड्राइवर के छद्म जीवन बना के रहsता. लेकिन, कुछ आइसन घटना क्रम होता कि ओकरा परिवार के असलियत अंडरवर्ल्ड के पता चल जाता. ओकरा आ ओकरा परिवार पर मुसीबत के पहाड़ टूट जाता. ई फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खूब धमाल मचवले रह.

अउरो कई गो फिल्म बाड़ीसन जवना के एह लघु आलेख में समेटल नइखे जा सकत. आगे फेर कबो. एह लेख के बहाने अन्हरिया से अंजोरिया के ओर ताके-झांके के बस कोशिश भर बा. एहू में कई-कई गो खामी हो सकेला बाकिर तनिको अच्छा कुछ होखे त ओकरा के सराहल आ थपकी देहल हमनिए के जिम्मेदारी बा.

(लेखक मनोज भावुक भोजपुरी साहित्य और सिनेमा के जानकार हैं. )

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