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Bhojpuri Special: एगो कोरोना पीड़ित के मुंह से सुनीं ओकर अनुभव

कोरोना महामारी (Corona Epidemic) से सभे केहु त्रस्त बा. लोग के मन में एह कोरोना वायरस (Corona Virus) के डर एतना हो गइल बा कि बस पूछीं मत. अइसे में आज पढ़ीं एगो कोरोना संक्रमित शख्स के जुबानी उनकर एह बेरामी के प्रति अनुभव...

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ट्रेन में हमरा सामनहीं जेकर बर्थ रहुए ऊ हाले में कोरोना से ग्रस्त होके स्वस्थ भइल रहुअन आ घर के लोगन से भेंट क के कलकत्ता अपना ड्यूटी पर लौटत रहुअन, त ऊ जौन कहुअन ऊहे रउवां सभ के सामने राखतानी। सेना से रिटायर भइला का बाद फेर ऊ सेना के नोकरी में आ गइल बाड़े। त उनुका से सवाल- जबाब के रूप में बातचीत होत रहुए। का जाने एह बातचीत में रउवां के कुछु मिलिए जाउ-

सवाल- जब रउवां कोरोना भइल त कइसन महसूस भइल?

जबाब- पहिले त सूखी खांसी भउवे। त हम जनुईं कि एही तरे ठंडा- गरम हो गइल बा त खांसी होता। हम कुछु दिन त अपने मने दवाई खइनीं। कफ सिरप पियनीं कि का जाने एही से खांसी ठीक हो जाउ। बाकिर खांसी ठीके ना होखे। त डाक्टर से देखवनीं। डाक्टरो के दवाई चलल। बाकिर खांसी ठीके ना होखे आ हल्का- हल्का जर- बोखार होखे लागल रहे। हारि के हम कमांड हास्पीटल में गइनीं। सेना के ऊहे अस्पताल ह। भरती करेके पहिले ओइजा हमार कोरोना के जांच भइल। रिपोर्ट आइल त पता चलल कि हमरा कोरोना भइल बा। तुरंते अस्पताल हमरा के भर्ती क दिहलस। अगिला दिने हमरा लागल कि हम मरि जाइब?

सवाल- का हो गइल? रउवां काहें बुझाइल कि अब मरि जाइब?

जबाब- हमरा से सांसे ना ले जाउ। हमार संसवे रुकि गइल। तब हम ओइजा ड्यूटी करे वाली एगो एगो अस्पताल के कर्मचारी के इशारा क के बोलवलीं। हमरा से जोर से बोलिओ ना जाउ। कर्मचारी आइल त धीरे- धीरे बोलि के आपन तकलीफ बतवनीं आ कहनीं कि जल्दी कुछु कर लोग ना त हम अब मरि जाइब। सांसे ना चली त जीयब कइसे? अस्पताल वाला तुरंते हमरा मुंह आ नांक पर आक्सीजन के मास्क लगा दिहले सन आ हमरा सांस लेबे में आराम हो गइल। अब हमरा जान में जान आइल। लागल कि अब बांचि जाइब। ऊ मास्क एगो आक्सीजन भरल सिलिंडर से जुड़ल रहे। हमरा फेफड़ा में भीतर प्रचुर मात्रा में आक्सीजन जाए लागल। अब हमार दवाई सुरू भइल। रोज हमरा पेट आ बांहि में एकए गो सूई लागो। दवाई के एगो टेबलेटो खात रहनीं। एगो सूई पेट में लागे आ संगहीं संगे एगो सूई बांहि में लागे।

सवाल- त दवाई के कौनो साइड एफेक्ट महसूस होखत रहे? सुनाला कि कोरोना के कुल बड़ा कड़ा- कड़ा दवाई बाड़ी सन।

जबाब- साइड एफेक्ट त दस दिन बाद बुझाइल। हमार पाखाना एतना कड़ा होखे लागल कि लागे कि काठ ह। हगे में बड़ा कष्ट होखे। लैट्रिन होखे के नांव पर बड़ा डर लागे। बस हम खाइल छोड़ि दिहनी। खाली लिक्विड पर रहे लगनी- जइसे दूध, पानी आ भा सूप वगैरह। तबो लैट्रिन कड़े होखे।

सवाल- त हास्पीटल में कतना दिन रहनीं?

जबाब- हास्पीटल में त हम 24 दिन रहनीं। जब तक ले अस्पताल में रहनीं, कुछु डर ना रहे। कमांड हास्पीटल त रउवां जानते बानीं कि बहुत बढ़िया होला। तनिको कौनो परेसानी होखे त डाक्टर भा कर्मचारी तुरंते आ जा सन। खाए- पीए के बड़ा सुविधा रहे। खूब पौष्टिक भोजन मिले। बाकिर हम ढेर अनाज ना खाईं, काहें से कि हमेसा डर बनल रहे कि लैट्रिन में दिक्कत होई। चौबीस दिन बाद जब अस्पताल से छुटनीं त एगो अउरी परेसानी हो गइल।

सवाल- कइसन परेशानी?

जबाब- हमार पूरा सरीरे खजुआए लागल। हरदम शरीर खजुआते रहे। हम बड़ा परेसान। कमांड अस्पताल हमरा ड्यूटी के स्थान से दूर रहे। त हम नजदीके के कई गो डाक्टर लोगन के देखवनीं। बाकिर ठीक ना भइल। त हम अपना घरे बलिया अइनीं। बलिया शहर से थोड़कीए दूर पर पटखौली के पुल बा। सिकंदरपुर जाए वाला रास्ता पर। ओहीजा एगो डाक्टर से देखवनीं। ओकरे दवाई से देहि में जौन लगातारे खुजली होत रहे, ऊ ठीक हो गइल।

सवाल- अउरी कौनो साइड एफेक्ट भइल रहे?

जबाब- साइड एफेक्ट त ना भइल रहे। कमजोरी बहुत आ गइल। लागे कि शरीर में जान नइखे। अब त तनी ठीक लागता। शरीर में जान बुझाता। कोरोना के दवाई बड़ा तगड़ा होली सन। एह बीच एगो अजूबा बात हम महसूस कइनीं हं। जब हमार कोरोना सुरू भइल सूखा खांसी से त हमरा संगे आमने- सामने एगो छोट मेज पर बइठि के शराब पीए वाला के कौनो इनफेक्शन ना भउवे। हमरा से छुआछूत के कारन ओकरो त कोरोना होखे के चाहीं? त हमरा बुझाता कि हमार रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर बा आ ओकर बरियार बा। हम ढेर शराब ना पीहीं। मन बहलावे खातिर एक- दू पैग पी लेनी। आ शराब पीके हमनी का घंटों आमने- सामने होके बतियावत रहीं जा। एने बीच- बीच में हमरा खांसियो होखे। हालांकि खांसी का बेरा हम आपन मुंह घुमा देत रहनी हं। बाकिर ई बात हमरा कबो ना भुलाई। आ अबहियों हमरा डर बनल रहेला कि कोरोना दुबारा मति हो जाउ। लोगन के दुबारा भी कोरोना होखे के समाचार आवते बा। हमनियों का देखतानी जा। एही से हम एक्सट्रा सतर्क हो गइल बानी। हमेसा अपना संगे सेनिटाइजर राखतानी। साफ- सफाई के बहुते ध्यान राखतानी। कोरोना लोगन के बहुत कुछ सिखा देता। हम कोरोना के बहुत हल्का ढंग से लेत रहनीं हं। बाकिर जब हमरा ई बेमारी हो गइल तब हमरा पता चलल कि ई साधारन रोग नइखे। कोरोना के जे हल्का से ली, ओकर जीवन खतरा में परि जाई। ई पक्का बा।

सवाल- कोरोना का बाद जब रउवां अपना घरे गइनीं त ओइजा कुछ सावधानी बरतनीं कि ना?

जबाब- आरे, डर के मारे हम अपना नाती के गोदी में ना लीहीं। हमरा अपना नाती के कोरा में लेबे के मन होखे त हम मन मसोस के रहि जाईं। पंद्रह दिन बाद हमार मन ना मानल। हम अपना नाती के कोरा में लेइए लिहनीं। भगवान के दया बा कि बच्चा के कुछु ना भइल। त ईहे हमार राम कहानी बा। अब हम फेर ड्यूटी पर जातानी। फेर हमरा कमांड हास्पीटल जा के आपन चेकअप करावे के परी। ओइजा से सर्टिफिकेट मिली कि हमरा कोरोना फेर त नइखे हो गइल काहें से कि हम गांवे गइल रहनीं हं। एकरा अलावा भी हमरा 15 दिन क्वारंटीन रहे के परी। तब जाके हम ड्यूटी ज्वाइन क सकेनीं।

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