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B'day spl:फूलन देवी के मजबूरी से मजबूती आ फेर राजनीति तक के सफर, जे पर बनल फिल्म

फूलन देवी पहिले त महिला डाकू रहली आ दूसरा कि खूंखार डाकू. इहे कारण रहे कि फूलन के चर्चा आस पास होखे लागल. फूलन देवी के कहानी बड़ा नाटकीय बा. शेखर कपूर उनका पर फिल्म ‘बैन्डिट क्वीन’ बनवले जवन एगो कल्ट क्लासिक सिनेमा के रूप में आजुओ जानल जाला.

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अनगिनत फिलिम आ उपन्यास में आदमी पढ़ले बा कि डाकू केहू शौख से ना मजबूरी से बनेला. बाद में उहे मजबूरी ओ इंसान के मजबूती बन जाला. बाकिर एह मजबूती के राजनीति में बदले वाला डाकू कमे बाड़ें. ओमें फूलन देवी के नाम सबसे आगे बा.

फूलन देवी पहिले त महिला डाकू रहली आ दूसरा कि खूंखार डाकू. इहे कारण रहे कि फूलन के चर्चा आस पास होखे लागल. बाकिर जब उ 22 गो आदमी के कानपुर देहात के बेहमई गाँव में दिनदहाड़े लाइन में खड़ा करके गोली मार देहली त ओकरा बाद उनके खौफ से पूरा देश दहल गइल. एगो औरत के हेतना डरावना चेहरा पहिले शायद केहू ना देखले रहे. मीडिया फूलन के बैन्डिट क्वीन नाम देहलस.

फूलन देवी के कहानी बड़ा नाटकीय बा. शेखर कपूर उनका पर फिल्म ‘बैन्डिट क्वीन’ बनवले जवन एगो कल्ट क्लासिक सिनेमा के रूप में आजुओ जानल जाला. फूलन देवी के नाम त लोग सुनले रहे बाकिर उनका बारे में बहुत ढेर जानत ना रहे. ई फिल्म 1994 में बनल आ माला सेन के फूलन देवी के अत्याचार, शोषण, संघर्ष, बदला आ हिंसा भरत जिनगी पर लिखल किताब ‘इंडियाज़ बैन्डिट क्वीन – द ट्रू स्टोरी ऑफ फूलन देवी’ पर आधारित रहे. फिल्म में सीमा बिस्वास टाइटल रोल कइली आ एतना रियलिस्टिक अभिनय रहे कि उनका सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार मिलल, ओ साल के फिल्मफेयर भी जितली आ एह फिल्म के सर्वश्रेष्ठ फिल्म के राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिलल. इहे फिलिम रहे जबना से मनोज बाजपेयी डैब्यू कइलें अउरी बाद में हिन्दी फिल्म जगत के शानदार अभिनेता के रूप में प्रसिद्धि पवलें. फिल्म के कई गो सीन के लेके बड़ा विवाद भी भइल. ओ में फूलन देवी के साथे सामूहिक बलात्कार वाला सीन पर तब जीवित फूलन देवी के भी ऐतराज रहे. हालांकि फिल्म बहुत सारा सीन अत्यधिक बोल्ड आ हिंसक रहे अउरी विचलित करे वाला रहे.

वामपंथी लेखिका अरुंधती राय के प्रेरित कइला पर फूलन देवी कोर्ट में केस भी कइली आ फिल्म के बैन करे खातिर गोहार लगवली. बाद में फिल्म के एगो वैश्विक प्रोड्यूसर कंपनी चैनल 4 उनके चालीस हजार पौंड के मानहानि के भुगतान करके मामला सुलटवलस. एकरा तुरंत बाद फूलन देवी फिल्म के समर्थन में खड़ा हो गइली. ई फिल्म विश्व स्तर पर बड़ा कलेक्शन भी कइले रहे आ विवाद भी.

बचपने में दबंग फूलन के रंग चिन्हा गइल रहे

फूलन के जन्म 10 अगस्त 1963 के उत्तरप्रदेश के जालौन जिला में भइल रहे. जब उ दस बरिस के रहली त उनका माई से पता चलल कि उनके चाचा जमीन हड़प लेहले बाड़ें त उ जाके अपना चाचा से अझुरा गइली. उनके ईंटा से मार के कपार फार देहली. बाद में घर के लोग एही खीसि ओहि साल फूलन के बिआह एगो 30-40 साल बड़ आदमी से कर देहलस. फूलन मल्लाह परिवार से रहली, उनके परिवार बहुत दीन हालत में भी रहे. फूलन एगो अधेड़ के साथे ससुरा गइली. उ अधेड़ कई साल तक फूलन के बलात्कार करत रहल. फूलन के तबीयत एतना खराब भइल कि उनका मायके आवे के पड़ल. इहाँ कुछ दिन रहला के बाद फूलन के भाई उनके वापस ससुरा भेजलें तले उनके बूढ़ मर्द दोसर बियाह कर लेलन. फूलन के पति अउरी सवत दुनू उनके बड़ा बेइज्जती कइलें सन जेकरा चलते उ फेर घरे लवट अइली. इहाँ आके उ कुछ नया लोग से मिले लगली.

बचपने से डाकू बने के बारे में सोचत फूलन के जब कुछ डाकूअन से संपर्क भइल त उ ओहि राहे चल दिहली। हालांकि फूलन कबो एह बात पर से पर्दा ना उठवली कि उ अपना मर्जी से डाकू बनली आ कि डाकू उनके उठा के ले गइलs सन। जब फूलन चम्बल के बीहड़ में पहुंचली त उम्र 16 के आस पास रहे। फूलन पर गैंग के सरदार बाबू गुज्जर के दिल आ गइल रहे। आ एने विक्रम मल्लाह फूलन के बहुत चाहे। एही चलते विक्रम बाबू गुज्जर के मार देहलस अउरी खुदे सरदार बन गइल। एकरा बाद फूलन अउरी विक्रम में खूब घनिष्ठता भइल। शेखर कपूर भी अपना फिल्म में ई देखवले बाड़ें। ओहि बेरा एगो गैंग रहे ठाकुर गैंग। उ बाबू गुज्जर के माने। आ जब ओकनी के पता चलल कि एही फूलन के चलते बाबू गुज्जर के हत्या भइल त उ हमला करके विक्रम मल्लाह के मार देहलस अउरी फूलन के साथे लगातार 3 हफ्ता ले सामूहिक बलात्कार कइलs सन। बाद में फूलन एही के बदला 1981 में लेहली आ सगरी जाना के लाइन से खड़ा करा के गोली मार देहली। ई भीषण नरसंहार के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री वीपी सिंह के नैतिक जिम्मेदारी के चलते इस्तीफा दे देबे के पड़ल।

भिंड जिला मध्यप्रदेश के एसपी राजेन्द्र चतुर्वेदी के प्रेरित कइला पर फूलन देवी समर्पण कर देहली आ 11 साल तक सजा कटली। बाद में समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह सरकार फूलन देवी पर से सगरो चार्ज वापस ले लेहलस। फूलन देवी 1994 में जेल से बाहर आ गइली अउरी उम्मेद सिंह से बियाह कर लेहली। उ अब सामान्य जिनगी जिए खातिर उद्यत रहली। उनके सपा मिर्जापुर से सांसद के टिकट देहलस। फूलन देवी उहाँ से दू बार जितली अउरी दिल्ली के संसद भवन तक पहुँच गइली। एगो बीहड़ में रहे वाली दस्यु सुंदरी समय के फेरा से संसद के चमचमात कोठी में आ गइल। वाह री समय आ वाह री तोर खेला।

अपना जिनगी में लौटत फूलन के पिछला जिनगी के कर्म पीछा ना छोड़लस। नागपंचमी के दिने उ उनका पार्टी में शामिल होखे आइल शेर सिंह राणा के अपना घरे खीर खिअवली। बाद में जइसे बंगला से बाहर अइली, उनका पर फायर भइल आ घटना स्थल पर ही उनके इह लीला समाप्त हो गइल। एकर जिम्मेदारी बाद में शेर सिंह राणा ही आत्मसमर्पण करके लेहलस।

( लेखक मनोज भावुक भोजपुरी सिनेमा और साहित्य के जानकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं)

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