Bhojpuri: लालू-राबड़ी राज के पुलिस निमन कि नीतीश राज के?

लालू-राबड़ी राज के पुलिस निमन कि नीतीश राज के?

लालू-राबड़ी राज के पुलिस निमन कि नीतीश राज के?

रघुनंदन के बात जारी रहे। ऊ आगा कहले, देख ! जब सरकार के खिलाफ बिरोधी गतिबिधि तेज हो जाला तब ओकर धेयान सत्ता बचावे में अधिक अउर शासन में कम हो जाला। जुलाई 1994 में जब पटना हाईकोर्ट लालू सरकार के बिधि बेवस्था फेल होखे के बात कहले रहे तs ओघ घरी लालू जादव अउर नीतीश कुमार में घनघोर लड़ाई शुरू हो गइल रहे।

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 31, 2021, 5:10 PM IST
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बिधानसभा कांड के बाद बिहार के राजनीत में खलबली मचल बा। हुल-गड़ापा के आरोप में राजद के 21 नेता पs धारा 307 (हत्या की कोशिश) के मोकदमा भइल बा। तीन संघतिया बइठ के बतियावत रहन। रघुनंदन कहले, फगुआ के बिहान भइला बासी पुआ खाइला में एगो अलगे आनंद मिलेला। भिरगु हंस के कहले, अनघा कढ़ी-बरी बन जाला तs ओकरो के सधावे के पड़ेला। बासी कढ़ी के आंच पs चढ़इबs तो ओकरा में अइसन उबाल आई की बुझाई कि कराही के बहरी उधिया जाई। होली के खुमारी अभी उतरल ना रहे। सहदेव मजाक में कहले, हां ! बासी कढ़ी में तनी बेसिये उबाल आवेला। होली के पहिले बिधानसभा में मारपीट के जवन घटना भइल रहे ऊ बुझाता कि अब फेन ताव धरी। तेजस्वी तs नीतीश कुमार के खिलाफ लड़े खातिर ताल ठोक रहल बाड़े। ई बात सुन के रघुनंदन कहले, आज तेजस्वी रोजगार अउर बिधि-वेवस्था के सवाल उठा रहल बाड़े। लेकिन आज से 27 साल पहिले जब लालू जादव मुखमंतरी रहन तs पटना हाईकोर्ट, बिहार में कानून बेवस्था के बेलकुल फेल बतवले रहे।

बिहार पुलिस पs लागल रहे धृतराष्ट्र होखे के आरोप

रघुनंदन के बात माने खातिर भिरगु तइयार ना भइले। कहले, पुरान बात के दोहरवला से का फैदा ? बिधानसभा में जवन भइल ओकरा के सही कइसे कहल जा सकेला ? रघुनंदन कहले, देखs ! बिधानसभा के भीतर कवनो घटना के जांच करावे के अधिकार स्पीकर भिरी बा। बवाल कइसे शुरू भइल, के एकरा खातिर जिम्मेबार बा, के एकरा में दोषी बा, ई सब सवाल के जबाब स्पीकर के सिवा दोसर केहू ना दे सके। आज तेजस्वी पटना के एसपी के बरखास्त करे के मांग कर रहल बाड़े। लेकिन जब राबड़ी देवी के सरकार में आर आर परसाद डीजीपी रहन तs पटना हाईकोर्ट अतना कठोर बात कहले रहे कि सरकार के लजाए पड़ गइल रहे। राबड़ी देवी जब बिहार के मुख्यमंत्री रही तs 2000-03 के बीच आर आर प्रसाद डीजीपी रहन। पटना में अबैध भवन निरमान के मामला में डीजीपी कोर्ट में हाजिर भइल रहन। तब जज साहेब उनका से कहले रहन, “आप अवैध भवन निर्माण के मामले में कार्रवाई क्यों नहीं करते ? क्या आपके अफसर धृतराष्ट्र की तरह इतने लाचार हो गये हैं कि वे द्रोपदी (बिहार) के वस्त्रहरण को नहीं रोक पा रहे हैं।” मतलब ई कि ओह घरी अदालत के नजर में बिहार सरकार अउर पुलिस के हालत धृतराष्ट्र जइसन रहे जे जान- बूझ के अनेति के बढ़ावा देत रहे।

जब कोर्ट कहले रहे, बिहार में बिधि बेवस्था फेल
रघुनंदन के बात जारी रहे। ऊ आगा कहले, देख ! जब सरकार के खिलाफ बिरोधी गतिबिधि तेज हो जाला तब ओकर धेयान सत्ता बचावे में अधिक अउर शासन में कम हो जाला। जुलाई 1994 में जब पटना हाईकोर्ट लालू सरकार के बिधि बेवस्था फेल होखे के बात कहले रहे तs ओघ घरी लालू जादव अउर नीतीश कुमार में घनघोर लड़ाई शुरू हो गइल रहे। अदालत के ई टिपनी के तीन चार महीना पहिले से नीतीश-लालू में अनबन शुरू हो गइल रहे। जुलाई में जनता दल के विभाजन हो गइल रहे। जार्ज फरनानडिस के अगुआइ में जनता दल जार्ज बन गइल रहे। ओह घरी चर्चा चले लागल कि लालू जादव खेमा के 35 बिधायक नीतीश कुमार देने आवे के तइयारी में बाड़े। लालू सरकार पs खतरा मंडराये लागल। एह दांव-पेंच में लालू जादव के टोटल ताकत सरकार बंचावे में लाग गइल। शासन बेवस्था लुंज-पुंज हो गइल। नीतीश कुमार आरोप लगा देले कि लालू जादव बेक्तिवादी हो गइल बाड़े। ऊ पाटी में आपना बेक्तिपूजा के बढ़ावा दे रहल बाड़े। हमरा कतनो समझवला के बादो लालू जादव ना मनले। तब मजबूरी में उनका से अलगा होखे के पड़ल।

जब बिधायक लोग पुलिस के पीट के कइले घाहिल

सहदेव बहुत देर से रघुनंदन अउर भिरगु के बात सुनत रहन। ऊ कुछ सोंच के कहले, राजनीति के रंग-ढंग भी अजबे बा। आज बिहार में बिधायक लोगन के पुलिस से पिटाये के बात मुद्दा बनल बा। लेकिन आठ साल पहिले महाराष्ट्र में बिधायक लोग ही बिधानसभा में पुलिस अफसर के पीट-कूट के बराबर कर देले रहन। 2013 के बात हs। ओह घरी महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी के सरकार रहे। विधानसभा के सत्र चलत रहे। एक दिन निरदलीय बिधायक क्षितिज ठाकुर हाईस्पीड में कार चला के आवत रहन। ट्रैफिक पुलिस अफसर सचिन सूर्यवंशी ड्यूटी पs रहन। ऊ बिधायक जी के कार रोक के चलान काट देले। बिधायक जी पुलिस अफसर के स्पीकर से शिकायत कइले। सचिन सूर्यवंशी के बिधानसभा में पेशी भइल। जब सचिन सूर्यवंशी बिधानसभा पहुंचले तs अचके में उनके सामने बिधायत क्षीतिज ठाकुर पड़ गइले। उनका साथे चार बिधायक अउरी रहन। एकरा बाद आरोप लागल कि पांचों बिधायक मिल के सचिन सूर्यवंशी के खूब पिटाई कइले। बिधानसभा के बरामदा में फैटा-फैटी, मारा मारी देख के सभे अचरज में पड़ गइल। पुलिस अफसर सचिन घाहिल को के नीचे गिर गइले। बिधानसभा के स्पीकर मामला के जांच करवले। मारपीट करे वला पांचों बिधायक के एक साल खातिर सदन से निलंबित कर देल गइल। सचिन सूर्यवंशी के भी सस्पेंड कर दिहल गइल। मतलब कार्रवाई के लपेटा मैं दूनो पक्ष आइल रहे। अब देखे के बा कि बिहार के घटना के का नतीजा निकले ला। अतने बात पs तीनों संघतिया के बतकही खतम हो गइल।
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