Bhojpuri Spl: बंगाल चुनाव के दुर्गा बनाम राम बनावे क परयास, केकरा मिली सफलता

बंगाल क चुनावी लड़ाई में भाजपा क नेता जाने अनजाने में राम क महातम दुर्गा से अधिका बता के एगो नया वितरना के जनम दे देले ह. देस दुनिया जाने ला कि बंगाल में दुर्गा क महातम का ह. बंगाली हिंदू खातिर दुर्गापूजा से बड़ कउनों परब तयोहार ना ह. अब एकर परिणाम का होई...

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पौराणिक कथा में दरज ह कि लंका पर चढ़ाई करे से पहिले राजा राम समुंदर के किनारा शिवलिंग बनाई के पूजले रहले अउर देवी दुर्गा के पूजा कइले रहलें. एकर माने इ कि हिंदू मान्यता में देवी दुर्गा अउर भगवान राम दूनों क महातम ह. लेकिन बंगाल क चुनावी लड़ाई में भाजपा क नेता जाने अनजाने में राम क महातम दुर्गा से अधिका बता के एगो नया वितरना के जनम दे देले ह. देस दुनिया जाने ला कि बंगाल में दुर्गा क महातम का ह. बंगाली हिंदू खातिर दुर्गापूजा से बड़ कउनों परब तयोहार ना ह. अइसन में जब बंगाल भाजपा क अध्यक्ष दिलीप घोष एगो मीडिया क पोरगराम में भगवान राम के राजनीत क आदर्श बताउलं अउर दुर्गा के बारे में कहलें कि इ कहां से अइलि... त इ वितरना त खड़ा होइबे करी उहो बंगाल क चुनावी मौसम में.

दिलीप घोष के इ कहनाम के चलता बंगाल क सत्ता पर बइठल तृणमूल कांग्रेस पार्टी के लोगन के भाजपा के विरुध परचार क एगो नया हथियार मिल गइल ह. उ लोग अब खूबे जोर लगा के इ परचार में जुट गइल ह कि भाजपा क लोग देवी दुर्गा के ना माने ला. तृणमूल कांग्रेस क इ परचार बंगाल क चुनाव में जय श्रीराम क नारा लगावे वाली भाजपा के भारी पड़ सकेला. अब भले ही बंगाल भाजपा क अध्यक्ष इ सफाई देवत फिर रहल बाड़ें कि उ भगवान राम के राजनीत क आर्दश एसे कहलं कि उ एगो राजा क तौर पर आर्दश राजकाज चलउलं क मर्यादा पुरषोत्तम के रूप जानल गइलें. एकरा अलावे राजा रामो देवी दुर्गा के पूज केही लंका पर विजय पवलें. अब उनकर इ सफाई बंगाल क जनमानस क गला से उतरी कि नाही इ त चुनावी परिणामें बताई. लेकिन इ बात क अंदेसा जरूर ह कि कही बंगाल क चुनाव में तृणमूल कांग्रेस अउर भाजपा क बीच लड़ाई में दुर्गा बनाम राम ही मुख्य मुद्दा ना बन जाए. अगर अइसन होइल त एतना तय ह कि नुकसान भाजपा के ही उठावे क पड़ी.

बंगाल क अधिकतर हिंदू जनमानस शक्ति क उपासना करे वाला ह. देवी दुर्गा अउर देवी काली बंगाल के लोगन क अराध्य देवी हईं. एकरा अलावे शक्ति क उपासक इ परदेस में देवी लक्ष्मी व देवी सरस्वती भी बहुते श्रद्धा से पूजल जालीं. बंगाल में कालीघाट के अलावे दूगो अउर शक्ति ह. शमशान के देवी तारापीठ अउर देवी काली क उपासक रामचंद्र परमहंस के साक्षात दर्शन देवे वाली देवी काली क स्थान दक्षिणेश्वर भी कलकत्ता में ही ह. जहां बारहो मास भक्तन क भीड़ जुटे ला. शारदीया नवरात में मनावे जाय वाला दस दिन क दुर्गापूजा उत्सव क चरचा दुनिया भर में ह. जौन बंगाल क सबसे परब मानल जाला. कहे क माने इ कि देवी दुर्गा बंगाल क जनमानस में अइसन रच बच गइल हईं कि उपर केहू तरह क उंगली उठल भी उनके पसंद ना पड़ी.

बंगाल में थोड़ बहुत वैष्णव संपरदा के माने वाला लोग भी रहे लं. लेकिन वैष्णव संपरदा में भगवान राम से अधिक इहवां कृष्ण भक्ति क मान्यता ह. अइसन में भाजपा क जय श्रीराम के सहारे चुनावी वैतरणी पार क सोच बहुते जोखिम भरल ह. ए बार के चुनाव में भाजपा क जय श्रीराम क मुकबला पहिले से ही तृणमूल कांग्रेस क जय बांगला से ह. उपर से अगर देवी दुर्गा भी चुनावी चरिचा में आ गइलीं त सोचल जा सकेला इ चुनावी लड़ाई के कौना ओर ले जाई अउर ओकर परिणाम का होई. इहां इ बतावल जरूरी ह कि बंगाल उ परदेस ह जहां के लोगन के आपन संस्कृति अउर परंपरा से बहुते चाव अउर लगाव हव. एसे कउनो तरह क समझौता करे के उ कउनों भी स्थिति में तैयार न होलं. चाहे उ धर्म से जुड़ल संस्कृति हो बा चाहे भाषा, साहित्य अउर खानपान, रहनसहन से जुड़ल हो.

इहे कारण ह कि 2019 क लोकसभा चुनाव में भाजपा क एगो जुलूस निकले के दौरान होइल हिंसा जब कलकत्ता क विद्यासागर कालेज में तोड़फोड़ होइल अउर ईश्वरचंद्र विद्यासागर क मूर्ति टूटल पावल गइल त बंगाल क जनमासन भाजपा से बहुते नाराज हो गइल. एहि के चलिते बाद के चरण में होइल मतदान में भाजपा के एक्को सीट न मिलल. इहे घटना के चलते भाजपा क सीटन क संख्या 18 ही रह गइल ना ही त शायद अउर अधिक होत. ईश्वरचंद्र विद्यासागर के बंगाला वर्णमाला क जनक मानल जाला. एही से उनके विद्यासागर क उपाधि भी मिलल. शायद इहे एगो कारण हव कि बंगाल में शिक्षा क परचार परसार शुरू से ही अधिक रहे. बंगाल क शिक्षा अउर साहित्य में उनकर बहुते सम्मानित स्थान ह.

इहे सम्मानित स्थान गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर क भी ह. बीरभूम जिला क शांतिनिकेतन में उनकर बनावल रंवीद्र भारती विश्वविद्यालय में मैदान क घेराबंदी अउर नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन क जमीन के लेकर जब विश्वविद्यालय क कुलपति अउर ममता सरकार में कहासुनी होइल त उ लड़ाई में भाजपा भी कूद पड़ल. उहे विवाद में भाजपा क राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी रवींद्रनाथ टैगौर क जनम स्थान शांतिनिकेतन बता के एगो नया विवाद क जनम दे देलहें. बंगाल क शिक्षित जागरुक जनमानस के पता ह कि कविगुरु गुरुदेव क जनम स्थान कलकत्ता ह, अइसन में उनके आपन आर्दश लोगन के संबंध में गलतबयानी भला कहा पसंद ह. सो एकरा चलिते भी भाजपा क नेता लोगन क खूब लानत मलामत होइल. अब आगे ना हो एकर ख्याल त उहे नेतन के रखे होई काहे से कि इ चुनावी मौसम ह अउर एमे पता नाही कब कौउन बात लेबे के देबे पड़ जाइ. (लेखक सुशील कुमार सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं.)

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