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Bhojpuri में पढ़ें- कहीं पुष्पम प्रिया जइसन हाल मत हो जाए PK के!

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नीलाभ नयन तरहत्थी पs मुक्का मार के कहले, परसांत किशोर के आवे से का बिहार के राजनीत बदल जाई? परसांत निमन कोच हो सकेले लेकिन ऊ मैदान में पैड बांध के खुद्दे ताबड़तोड़ बैटिंग ना कर सकेले. कोचिंग अलग टैलेंट हs अउर बैटिंग अलग टैलेंट. दूनो में घालमेल संभव नइखे.

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परसांत किशोर चुनावी रणनीति में माहिर हो सकेले लेकिन नेतागीरी उनका खातिर आसान नइखे. नेता के रूप में ऊ एक बेर फेल हो चुल बाड़े. बिहार में जनक्रांति तs संभव बा लेकिन फौरन रिटर्न फरमूला से राजनीतिक क्रांति संभव नइखे. 2020 में लंदन रिटर्न पुष्पम प्रिया कॉरपोरेट कल्चर से बिहार के राजनीत बदले आइल रही. उनका साथे बिदेश में पढ़ल-लिखल ज्ञानी लोग के फौज रहे. एगो पूर्व आइआरएस अफसर भी उनकर मास्टर प्लानर रहन. पुष्पम एक बग्गे सीएम बने खातिर चुनावी मैदान में कूद गइल रही. दू जगे से चुनाव लड़ल रही. दूनो जगे जमनात जपत हो गइल. द प्लूरल्स पार्टी बनवले रही. पाटी का रहे एक तरह से कंपनी के ढांचा रहे. ई पाटी के खाता भी ना खुलल. वइसे भी चुनाव अलजबरा के कवनो फरमुला न हs कि खट से समीकरन सेट हो जाई. राजनीति में सफल होखे खातिर कय साल तक तपस्या करे पड़ेला. गांव-गांव के धूर फांके पड़े ला. जनता के हक खातिर लाठी भी खाये पड़ेला. पारासूट से टपकल नेता बिहार में शायदे सफल होइहें. जात जमात के जाल में अझुराइल बिहार के राजनीति फरमुलाबाजी से ना चली. नीलाभ नयन के बात काट के मलय मोहन कहले, हर नया परयोग के पहिले लोग ओकर हंसी उड़ावे ला. लेकिन जब ऊ सफल हो जाला तब लोग-बाग ओकरे बड़ाई करे लागे ले. परसांत किशोर कुछ सोच समझ के ही बिहार से राजनीत शुरू कर रहल बाड़े.

कहले रहन बिहार में गाड़ब खूंटा, चल गइले बांगाल

नीलाभ नयन कहले, परसांत किशोर फरवरी 2020 में आपन राजनीति के नाया खाका पेश कइले रहन. ऊ कहले रहन कि गांव-गांव के लइकन के जोड़ के बिहार में नाया लीडरशिप तइयार कइल जाई. एक सौ दिन तक बिहार के गांव- गांव में घूमे के घोसना भइल रहे. 8800 पंचाइत में से एक हजार जोग्य नौजवान के चुने के बात कहल गइल रहे. जोजना के मोताबिक परसांत किसोर ई लइकन के ट्रेनिंग दे के नाया नेतृत्व खड़ा करे वला रहन. ऊ दावा कइले रहन कि ई नाया राजनीति से बिहार दस साल के अंदर देश के टॉप टेन राज्य बन जाई. ऊ तs इहां तक चाइलेंज कइले रहन अब बिहार में ही खूंटा गाड़ के रहब. मकसद पूरा करे में पांच साल लागे भा दस साल लागे लेकिन अंतिम सांस तक बिहारे में रहब. लेकिन भइल का ? उनकर खूंटा उखड़ के बंगाल चल गइल. बिधानसभा चुनाव के पहिलहीं बिहार से बोरिया सिस्तर समेट ले ले. गांव-गांव से एक हजार नौजवान चुने के बात हवा हवाई रह गइल. हाल में जब उनकर कांग्रेस से डील टूट तs बिहार पहुंच गइले. अब पटना यूनभरसिटी के छात्र नेतन से मोलकात कर रहल बाड़े. दू साल के बाद उनका बिहार इयाद आइल बा. अगर ऊ कांगरेस में सेट हो जदइते तs का बिहार अइते ? खारिज भइला के बाद ऊ बिहार में शरण ले ले बाड़े. अब कवन गारंटी बा कि ऊ बिहार छोड़ के आपन अलेक्शन बिजनेस खातिर कवनो दोसर राज्य में ना जइहें ?

जात-पात के राजनीति में ईमानदारी हवा हो जाला

नीलाभ नयन के बात से मलय मोहन राजी ना रहन. मलय मोहन कहले, राजनीति में नाया प्रयोग भी सफल हो सकेला. ठीक बा कि पुष्पम प्रिया के करारी हार हो गइल. लेकिन असम में प्रफुल्ल कुमार महंत अउर दिल्ली में अरविंद केजरीवाल बिना कवनो राजनीति अनुभव के कमाल कर चुकल बाड़े. 1985 में केहू ना सोचत रहे कि असम में आंदोलन करे वला छात्र एक दिन सत्ता के सिंहसन पs बइठ जइहें . लेकिन अइसन भभइल. ऐही तरे जब अरविंद केजरीवार चुनाव लड़े के बात कइले तब उनकर राजनीतिक गुरु अन्ना हजारे खिसिया गइले. लेकिन ऊ नाया पाटी बना के 2013 में मुखमंतरी बन गइले. आजो मुखमंतरी बाड़े. मलय मोहन के बीच्चे में रोक के नीलाभ नयन कहले, असम अउर दिल्ली के राजनीतिक परिस्थिति से बिहार के तुलना ना कइल जा सके. असम में 126 विधानसभा सीट बा जब कि दिल्ली में महज 70 सीट ही बा. दिल्ली शहरी इलाका हs.

शहर के सोच अलग होला. जे काम करी ओकरे भोट मिली. असम में घुसपैठिया समस्या के बिकराल रूप धरे से ही 1985 में असम गण परिषद के जीत भइल रहे. लेकिन बिहार जइसन बड़ राज्य में दिल्ली मोडल काम ना करी. 243 सीट पs लोग के साधल आसान बात नइखे. इहां के राजनीति में जातीय समीकरण ही निरनायक बा. केहू कतनो बिकास के बात करे लेकिन अंत में ओकरा जात-जमात के शरण में ही जाए के पड़ेला. का परसांत किशोर बिना जात पात के राजनीति में सफल हो सकेले ? डीपी ओझा बिहार के पूर्व डीजीपी रहन. शहाबुद्दीन पs कानूनी शिकंजा कसे से उनकर बहुत नांव भइल रहे. लेकिन 2004 में जब बेगूसराय से लोकसभा के चुनाव लड़ले तब उनकर जमानत जब्त हो गइल रहे. जात पात के राजनीति में ईमानदारी हवा हो जाला. फणीश्वर नाथ रेणु जइसन नामी साहित्यार भी ईहां चुनाव हार गइल रहन. इहां जात ही परधान बा. परसांत किशोर तकनीक पs आधारित नाया पाटी बनावे के बात कर रहल बाड़े. का उनकर सपना बिहार में सफल होई ? बिहार के राजनीत बहुत जटिल बा.

बिहार के राजनीत में कइसे जगह मिली ?

मलय मोहन कहले, प्ररसांत किशोर बिहार के बिकसित राज्य बनावे खातिर राजनीति में आ रहल बाड़े. ऐह बात खातिर तS उनकर सोवागत होखे के चाहीं. लेकिन कुछ लोग उनकर मजाक उड़ा रहल बाड़े. केहू कुछओ कहो, लेकिन उनका आवे से बिहार के राजनीति में खलबली तs मच गइल बा. तब नीलाभ नयन कहले, बिहार के राजनीत तीन खूंट में बंटा गइल बा. भाजपा, राजद अउर जदयू के आपन आपन हिस्सा बा. मोदी जी, नीतीश जी, लालू जी के नांव के बीच परसात किशोर भला केतना जगह बना पाइहें ? परसांत किशोर पहिले जदयू के उपाध्यक्ष रह चुकल बाड़े. 2020 में बिधानसभा चुनाव के पहिले भी ऊ जदयू के बिरोध कइले रहन. लेकिन उनका बात पs केहू धेयान ना देले रहे. अब 2022 में लोग उनकर बात के केतना गंभीरता से लिहें, ई बहुत बड़ सवाल बा. अइसे लोकतंत्र में हर कोई के राजनीत करे के अउर चुनाव लड़े के अधिकार बा. तब मलय मोहन कहले , धीरज धरs! कुछ दिन में सभ किलियर हो जाई.

(अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Article in Bhojpuri, Bhojpuri

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