Bhojpuri: देश भर क चुनाव में आपन डंका बजावत ह भोजपुरिया भाई प्रशांत किशोर

बिहार के भोजपुरी बोले वाला इलाका रोहतास में जनमल अउर बक्सर पलल बढ़ल भोजपुरिया भाई पीके माने प्रशांत किशोर (Prashant Kumar) गुजरात से लेके पंजाब अउर दिल्ली से लेके बिहार अउर आंध्र प्रदेश तक भाजपा, कांग्रेस, जनता दल, आप से लेके वाईएसआर कांग्रेस के चुनाव जितवा चुकल हउअन.

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कहल जाला कि भोजपुरी (Bhojpuri) बहुते दंबग ह बोली ह जेके बोले वाला भाई लोग आपन आसे पासे रहे वालन के भाषा बोली के भी परभावित कर देला. एकर कइगो उदारहण देहल जा सकेला लेकिन इहां चरचा एगो भोजपुरिया भाई क कइल जात ह जे आपन बुद्धि क लोहा समूचा देश के मनवा चुकल ह. अइसे त समाज के हर क्षेत्र में कई गो भोजपुरी भाई लोग आपन डंका बजवा चुकल ह लेकिन चुनाव के क्षेत्र में एगो भोजपुरिया नाम अइसन ह जे बिना नेतागिरी के ही परदा के पीछे से ही आपन बुद्धि से कई दलन के चुनाव जितवा चुकल ह. बिहार के भोजपुरी बोले वाला इलाका रोहतास में जनमल अउर बक्सर पलल बढ़ल भोजपुरिया भाई पीके माने प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) गुजरात (Gujarat) से लेके पंजाब (Punjab) अउर दिल्ली (Delhi) से लेके बिहार (Bihar) अउर आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) तक भाजपा, कांग्रेस, जनता दल, आप से लेके वाईएसआर कांग्रेस के चुनाव जितवा चुकल हउअन.

रोहतास क जिला मुख्यालय सासाराम के पासे एगो गांव में पीके क जनम होइल. बाबूजी श्रीकांत पांडे डॉक्टर रहले जे बाद में भोजपुर जिला के बक्सर में जाइके बस गइलें. इहां इ बतावल जरूरी ह कि यूपी के बनारस अउर गाजीपुर जिला से सटल बिहार क भोजपुरी इलाका पहिले शादाबाद जिला कहलात रहे जेकर मुख्यालय आरा रहे. 1972 में शादाबाद से कट के दूगो जिला बनल रोहतास अउर भोजपुर. 1990 रोहतास के कट के कैमूर ( भभुआ ) बनल अउर भोजपुर से कट के बक्सर जिला बनल. पीके क स्कूली पढ़ाई बक्सरे में होइल. बाद में उ इंजीनियर बने हैदराबाद चल गइलें. कुछ दिन लखऩऊ में नौकरी कइला के बाद पीके विदेश में राष्ट्रसंघ के साथे जुड़ गइलें. राष्ट्रसंघ के साथे लोक स्वास्थ्य पर उ आठ साल तक काम कइलें. एकरा बाद 2011 में वाइब्रेंट गुजरात कार्यक्रम से जुड़ला के चलते उ गुजरात के तब के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ले अउर 2012 में उनके तीसरा बार मुख्यमंत्री बनावे में सहयोग कइलें.

अब तक उनकर नाम अउर काम परदा के पीछे ही रहल. माने पीके नाम क भोजपुरिया भाई के तब तक केहू नाही जानत रहे. लेकिन 2013 में आपन चुनावी प्रचार कंपनी सीएजी ( सिटीजंस एकाउंटेबल ग्रुप) बनाइके उ 2014 क लोकसभा चुनाव में भाजपा उहो विशेषकर नरेंद्र मोदी क परचार क जिम्मा आपन कान्ही पर ले लेलं. मोदी खातिर चाय पर चरचा जइसन कइगो लोकप्रिय कार्यक्रम बनावें के पीछे पीके क ही हाथ बतावल जाला. 2014 में भाजपा क जीत अउर मोदी के परधानमंतरी बनला के बादे से पीके नाम क भोजपुरिया मनई के देश भर में लोग जाने लागल. एकरा बाद उनकर साथ मोदी से छूट गइल बा इहो कहल जा सकेला कि परधानमंतरी बनला के बादे मोदी पीके के भुला देहलं. मोदी से अलग होइला के बाद पीके आईपैक माने आई पीएसी ( इंडियन पोलिटिकल एक्शन कमिटी ) बनवलं. आईपैक पहिला बार 2015 क चुनाव में बिहार क मुख्यमंत्री नीतिश कुमार खातिर काम कइलें अउर उनकर चुनाव परचार क रणनीति पर काम कइलें. उ चुनाव में नीतिश कुमार क जदयू अउर लालू परसाद क राजद क महागंठबंधन भाजपा के पटकनी देके बिहार क सत्ता कबजिया लेलस. उ चुनाव में... बिहार में बहार ह.. नीतिशे कुमार ह ... जइसन चुनावी नारा पीके क बेजोड़ चुनावी रणनीति क ही हिस्सा रहे. कहल जाला कि नीतिश कुमार पीके से एतना परभावित भइलें कि चुनाव बाद उनकरा के बिहार सरकार क सलाहकार बना देलं.



परदा क पीछे काम करे वाला पीके क नाम अउर काम अब परदा से निकल कर बाहर आ गइल रहे. एही के चलिता बिहार सरकार क सलाहकार रहते उनकरा के 2017 के यूपी अउर पंजाब चुनाव में कांग्रेस क भी चुनावी रणनीति बनावें क जिम्मा मिल गइल. समाजवादी पार्टी क साथ गंठबंधन के चलिते यूपी कांग्रेस में उनकर चुनावी रणनीति त दरकिनार कर देहल गइल लेकिन पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह क कांग्रेसी सरकार दस साल बाद सत्ता में वापिस आ गइल. जबकि उ चुनाव से पहिले आइल सबही चुनावी सर्वेक्षण में आम आदमी पार्टी क सरकार बनत नजर आवत रहे. लेकिन पीके क रणनीतिक कौशल से बाजी पलट गइल. फेरो 2019 के आंध्रप्रदेश क चुनाव में वाईएसआर कांग्रेस क मुखिया जगनमोहन रेड्डी पीके के आपन राजनीतिक सलाहकार बनावलें. पीके क चुनावी रणनीति क ही कमाल रहे कि वाईएसआर कांग्रेस 175 में से 151 सीट जीत गइल. एकरा बाद 2020 में दिल्ली क विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी उनकर रणनीति सेवा लेके 70 में से 62 सीट जीत गइल अब त समूचा देश में पीके क बेजोड़ चुनाव रणनीति क डंका बाजे लागल.
एकरा बीचे में पीके 2018 में नीतिश कुमार के चलिते जदयू में शामिल हो गइलें लेकिन नागरिक संसोधन अधिनियम सीएए पर नीतिश कुमार से मतभेद के चलिते जनवरी 2020 में पार्टी से बाहर हो गइलें बा निकाल देहल गइलें. अब ए साल 2021 के चुनाव में उनपर बंगाल में ममता बनर्जी क तृणमूल कांग्रेस अउर तमिलनाडु में डीएमके खातिर चुनावी रणनीति बनावें क जिम्मा ह. दूनों राज्य क चुनावी सर्वेक्षण में तृणमूल कांग्रेस अउर डीएमके क सरकार बने क संभावना ह. बंगाल में ममता के भाजपा की ओर से भारी चुनौती मिलत ह. एकरा चलते पीके एक बार फिर चरचा में हउअन. इ चुनाव के बीचे उनके अगिला साल होवे वाला पंजाब चुनाव खातिर मुख्यमंतरी कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से चुनावी परचार संभारे क न्यौता मिल चुकल ह.

2021 अउर 2022 क चुनाव में पीके के पहिले जइसन सफलता मिली कि नाही इ त समय बताई लेकिन इहा सवाल इ ह कि पीके क अब तक सफलता क पीछे क का राज ह. एकरा बारे में पीके बतावे लं कि उनकर बाबू जी कहत रहे कि हर आदमी में कऔनों न कऔनों गुण छिपल होला ओके पहिचाने क जरूरत होला. इ कारण ह कि हम हर आदमी के ओकर गुण से पहचानें क परयास करिलां ना कि ओकर जाति बा धरम से. बाबू जी क मूलमंत्र के चलिते ही शायद पीके में गुण दोष के आधार पर बेजोड़ रणनीति बनावे क कौशल आइल होई. इ शायद पीके क बुद्धि क ही कमाल ह कि महिना भर पहिले ही उ एगो टीवी चैनल से कहले रहलं कि बंगाल में तृणमूल कांग्रेस क जीत अउर भाजपा क हार क बीच क अंतर बहुते अधिका ह अउर इ अंतर तबिहे कम हो सकेला जदि चुनाव के बीचे देश में कऔनों अप्रिय घटना हो जाए. ( डिसक्लेमर- लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और उनके निजी विचार हैं.)
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