Bhojpuri Spl: सबसे बड़की पंचायत में गूंजल भोजपुरी, पढ़ीं का कहनीं मोदी जी...

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा में चर्चा के जवाब देत खानी प्रधानमंत्री किसान आंदोलन के चर्चा करते-करत आंदोलन के बढ़ावा देबे वाला लोगन के बारे में भोजपुरी के एगो कहाउत के इस्तेमाल कइ दिहले. उ कहावत रहे, ‘ना खेलब, ना खेले देब, खेलवे बिगाड़ब.’

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 11, 2021, 4:13 PM IST
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मिसरी नियर मीठ भोजपुरी बाजार में बरसों से गूंज तिया. सिनेमा आ संगीत के भाषा अइसन बिया कि बॉलीबुड के बड़का से बड़का नांव भोजपुरी सिनेमा कइके नाम आ दाम-दूनों कमाता. लेकिन भोजपुरी के एगो गंभीर दरद बा. करीब पच्चीस करोड़ भारतीयन के भाषा, मारीशस, फिजी, गुयाना, सूरीनाम जइसन देसन में भारत के सांस्कृतिक प्रतिनिधि एह भाषा के बोली आ भाषा के बेवजह के विवाद में लपेटि के संविधान के आठवां अनुसूची से अलगा राखल बा. भोजपुरी के मनई लोग जब-तब आपन एह मीठ भाषा के संविधान के आठवां अनुसूची में राखे के मांग संसद आ संसद के बहरि उठावत रहेला.

अइसन मनई लोगन के उमेद बढ़ि गइल बा. उमेदि के वजह बनल बा प्रधानमंत्री के जुबान से संसद में निकलल भोजपुरी के सात गो शब्द. राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा में चर्चा के जवाब देत खानी प्रधानमंत्री किसान आंदोलन के चर्चा करते-करत आंदोलन के बढ़ावा देबे वाला लोगन के बारे में भोजपुरी के एगो कहाउत के इस्तेमाल कइ दिहले. उ कहावत रहे, ‘ना खेलब, ना खेले देब, खेलवे बिगाड़ब.’ओइसे त प्रधानमंत्री एह कहाउत के जरिए किसान आंदोलन के बढ़ावा देबे वाला लोगन पर जबरदस्त हमला कइलन, बाकिर भोजपुरी के अइसन विशेषता बा कि एह शब्दन के प्रयोग के बावजूद पूरा सदन में हंसी गूंजि गउए. ओइसे त इ पहिलका मौका बा, जब प्रधानमंत्री देश के सबसे बड़की पंचायत में भोजपुरी के शब्दन के प्रयोग करूअन. हालांकि चुनाव प्रचार आ जनसभा करत खानी ऊ कई हालि कबो बिहार में त कबो पूर्वी उत्तर प्रदेश में दू-चार गो भोजपुरी शब्दन के प्रयोग कइले बाड़े. प्रधानमंत्री एह घरी खांटी भोजपुरिया इलाका बनारस के लोकसभा में प्रतिनिधि बाड़े. बनारसो में एक-दू बेर ऊ भोजपुरी में एक-दू लाइन बोलले बाड़े.

देश के सबसे बड़की पंचायत में ई दोसरा मौका बा, जब कवनो महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर बइठल कवनों खास मनई भोजपुरी के ऑन रिकॉर्ड आपना जुबान के जरिया बनवले बाड़े. एकरा पहिले अइसन मोका करीब नौ साल पहिले आइल रहे. ओह दिन तारीख रहे 2012 के 17 मई. साल 2014 से जगदंबिका पाल भारतीय जनता पार्टी के सांसद बाड़े. बाकिर ओह घरी ऊ कांग्रेस के सांसद रहले. भोजपुरी के संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल करे के मांग लेके उ लोकसभा में विशेष ध्यानाकर्षण प्रस्ताव ले आइल रहले. जवना पर लोकसभा में गरमा-गरम चर्चा भइल रहे. जगदंबिका पाल के एह मांग के समर्थन में बिहार, उत्तर प्रदेश आ झारखंड के कई गो सांसद आपन पार्टी लाइन भुला के संगे आ गइल रहले. एही चर्चा पर जवाब देत खानी तब के गृहमंत्री पी चिदंबरम् आपन भाषण के जब भोजपुरी में शुरूआत कइले त जइसे पूरा सदन आ भोजपुरिया समाज चिहा गइल. शायदे कवनो मोका होई, जब चिदंबरम् के हिंदी में बोलत लोग देखले-सुनले होई. ऊ खालिस आ नफीस अंग्रेजी बोले के आदी हउअन. बाकिर ओह दिन ऊ भाषण के शुरूआत कइलन, ‘हम रउंआ सभ के भावना समझतानीं’. उनुका एतना कहला के देर रहे कि लोकसभा के भोजपुरीभाषी सांसद लोग मेज थपथपावे लागल रहे. ओह घरी मीरा कुमार लोकसभा के अध्यक्ष रहली. ठेठ भोजपुरिया इलाका सासाराम के सांसद रहली. उहो चिदंबरम् के मुंह से भोजपुरी के छह गो शब्द सुनि के उनुकर बड़ाई कइले रहली. तब चिदंबरम् कहले रहले कि सीताकांत महापात्र आ यूपीएससी के समिति के रिपोर्ट के बाद एह बारे में फैसला करिहें. ई बात आउर बा कि आजु ले कवनो फैसला ना भइल.

1998-99 के दौरान लालू प्रसाद यादव भोजपुरिया इलाका छपरा से लोकसभा के राष्ट्रीय जनता दल से सांसद रहले. एकरा बाद ऊ राज्यसभा में गइले. एह पंक्तिन के लेखक ओह घरी एगो अखबार के संवाददाता के नाते संसद कवर करत रहे. तब कई बेर लालू आपन परिचित हंसोड़ शैली में भाषण देत खानी एगो-दूगो भोजपुरी शब्द के इस्तेमाल करत रहले, बाकिर भोजपुरी में कबो एह तरी ना बोलले रहले. हं, मौजूदा लोकसभा में एक जुलाई 2019 के दिने शून्यकाल में गोरखपुर से भोजपुरिया सांसद रविकिशन भोजपुरी के आठवीं अनुसूची में डाले के मांग उठवले. चूंकि भोजपुरी संसद के अबहीं ले आधिकारिक भाषा नइखे, लिहाजा आपन एह मांग के लेके उ हिंदी में बोलल शुरू कइले आ फेरू प्रधानमंत्री के चर्चा करत खानी उनुकर बनारस के एगो भाषण के शुरूआत में कहल ‘का हाल बा काशी, गोड़ छूकर प्रणाम’ आ बिहार के एगो भाषण में कहल, ‘नमस्कार करत हईं बिहार के’ के उल्लेख जरूर कइले.एह के बाद ऊ भोजपुरी के पहिलकी फिल्म ‘गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो’ के गाना ‘ए गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो, संइया से करा द मिलनवा हमार’ भी गाइ के सुनवले रहले. हालांकि एह गवनई पर उनुका के लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला टोकि देले रहले.
बहरहाल देश के सबसे बड़की पंचायत में देश के सबसे प्रमुख मनईं के मुंह से निकलल भोजपुरी के शब्द के खास महत्व बा. एह से साबित होता कि पच्चीस करोड़ मनई के भाषा के ना सिर्फ देस के सत्ता तंत्र में पहचान मिले लागल बा, बल्कि ओकरा के स्वीकार भी कईल जा रहल बा. कवनो भाषा के राजनीतिक तंत्र से मान्यता आ स्वीकारोक्ति मिलला के मतलब होला ओह भाषाभाषी के ताकत के स्वीकार. मानल जा सकेला कि भदेस भाषा के रूप में मसहूर भोजपुरी के बोले वालन पर कायरता के जवन ठप्पा एगो क्रांतिकारी कवि के कविता से लागल रहे, ओकरा मिटे के शुरूआत हो गइल बा. (लेखक उमेश चतुर्वेदी जी वरिष्ठ पत्रकार हैं.)
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