Home /News /bhojpuri-news /

raja shiv prasad death anniversary sitare hind of hindi raja shiv prasad life story bhojpuri saroj kumar

Raja Shiv Prasad Death Anniversary: हिंदी क 'सितारे हिंद' राजा शिवप्रसाद

.

.

भारतेंदु हरिश्चंद्र के हिंदी नवजागरण क अग्रदूत मानल जाला, लेकिन भारतेंदु से कई दशक पहिलय बनारस क ही राजा शिवप्रसाद ’सितारे हिंद’ जवन शुद्ध गद्य लिखि देहलन, ओइसन भारतेंदु कभौ नाहीं लिखि पइलन.इहय नाहीं हिंदी के अदालत अउर स्कूली क भाषा बनावय बदे राजा शिवप्रसाद जवन लड़ाई लड़लन, हिंदी समाज अपने अस्तित्व तक ओनकर ऋणी रही.

अधिक पढ़ें ...

शिवप्रसाद क जनम तीन फरवरी, 1820 के बनारस के भूतही इमली महल्ला में भयल रहल.हलांकि सन् के लेइके मतभेद हौ.कहीं 1820, कहीं 1823 त कहीं 1824 मिलयला.पेशा से वकील शिवप्रसाद 1852 में बनारस क मीर मुंशी बनि गइलन.अंगरेज सरकार ओन्हय 1870 में सितारे हिंद अउर 1874 में राजा क उपाधि देइ देहलस.एह तरे उ राजा शिवप्रसाद ’सितारे हिंद’ होइ गइलन.दुइ-दुइ ठे उपाधि मिलले क सीधा मतलब होला कि अंगरेजन के साथे ओनकर बनत रहल.अंगरेज ओह समय अइसन लोगन के तरह-तरह क उपाधि देयं, जे ओनकरे बदे काम करय.शिवप्रसाद भी तीसरे सिख युद्ध में अंगरेजन क खुलि के साथ देहले रहलन.ओकरे बाद सरकार ओन्हय स्कूल निरीक्षक बनाइ देहलस.अंगरेज परस्ती के नाते बनारस क लोग ओनकर निंदा करयं.लेकिन हिंदी बदे उ जवन काम कइलन, उ प्रशंसनीय हौ.

ओह जमाने में देवनागरी लिपि में लिखय जाए वाली हिंदी अपने सबसे बुरे दौर में रहल.अदालत से लेइके स्कूली के पढ़ाई-लिखाई तक, हर जगह उर्दू क बोलबाला रहल.लेकिन शिवप्रसाद दूनों जगहें हिंदी क वकालत कइलन.हिंदी से ओनकर मतलब हिंदी लिपि से रहल.ओनकर मानना रहल कि जवन बात उर्दू लिपि में लिखल जात हौ, उ हिंदी लिपि में लिखल जाए लगय त हिंदी क विकास अपने आप शुरू होइ जाई.शिवप्रसाद हिंदी, उर्दू, फारसी, संस्कृत, अंग्रेजी, बंगला सहित कई भाषा क विद्वान रहलन.ओह समय के परिस्थिति में उ हिंदी अउर उर्दू के अलग-अलग भाषा न मानयं, दूनों में खाली लिपि क अंतर बतावयं.एही नाते उ दूनों भाषा बदे एक व्याकरण क अवधारणा विकसित कइलन, अउर हिंदी व्याकरण क रचना भी कइलन.सन् 1875 में व्याकरण प्रकाशित भयल रहल.लेकिन एही लिपि के अंतर के नाते सरकारी नौकरिन में मध्यवर्गीय कायस्थन अउर मुसलमानन क कब्जा रहल.आम आदमी के सरकारी नौकरी मिलब मुश्किल रहल.1867 में जब प्रांतन में स्थानीय भाषा के कामकाज क भाषा बनावय क निर्णय भयल तब ओह समय हिंदुस्तानी के उर्दू लिपि में लिखय क प्रचलन रहल.राजा शिवप्रसाद हिंदुस्तानी के नागरी लिपि में लिखय क जोरदार आंदोलन चलइलन.उ सरकार के कई ठे ज्ञापन देहलन.अंत में 1881 में हिंदी अउर देवनागरी लिपि कचहरी क भाषा बनि गइल.एकर पूरा श्रेय राजा शिवप्रसाद ’सितारे हिंद’ के जाला.

ओह समय अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय क संस्थापक सर सैयद अहमद खां अदालत में उर्दू भाषा अउर लिपि क मांग करय वाले मुसलमानन क अगुआई करत रहलन.उ अंगरेजन क सबसे प्रिय भी रहलन.सर सैयद अंगरेजन के समझावत रहलन कि हिंदी हिंदू लोगन क जबान हौ, अउर हिंदू बुतपरस्त होलन.जबकि उर्दू मुसलमानन क जबान हौ, जेकरे साथे अंगरेजन क मजहबी रिश्ता हौ.दूनों ही पैगंबरी मत के मानयलन.अइसने में सर सैयद क मुकाबला करब अउर अंगरेजन से उर्दू के बदले हिंदी के जगह देवाइब असान काम नाहीं रहल.लेकिन शिवप्रसाद इ कठिन काम कइ के देखइलन.उ अपने मकसद में कामयाब भइलन.

राजा शिवप्रसाद क असली लड़ाई लिपि के लेइके रहल.राजा शिवप्रसाद चाहत रहलन कि कम से कम हिंदी लिपि में हिंदुस्तानी लिखय-पढ़य क काम शुरू होइ जाय, फिर धीरे-धीरे भाषा परिष्कृत होवत जाई.संस्कृत, फारसी, अंग्रेजी अउर ठेठ हिंदी में प्रचलित आम बोलचाल के शब्दन के लेइके उ एक सर्वमान्य भाषा बनावय क कोशिश कइलन, जवने के उ ’आम फहम और खास पसंद’ भाषा कहलन.’भूगोलहस्तामलक’, ’वामा मनरंजन’, ’राजा भोज का सपना’ जइसन ओनकर कृति एही भाषा में रचल हइन.उ हिंदी के जन-जन तक पहुंचावय बदे अउर हिंदी के लोगन के गौरवान्वित करय बदे 1845 में हिंदी प्रदेश से हिंदी क पहिला साप्ताहिक अखबार निकललन -’बनारस अखबार’.अखबार क संपादक रहलन रघुनाथ थत्ते.अखबार क सिद्धांत कुछ अइसन रहल –
सुबनारस अखबार यह शिवप्रसाद आधार।
सुधि विवेक जन निपुन को चितहित बारंबार।।
गिरिजापति नगरी जहां गंगा अमर जलधार।
नेत शुभाशुभ मुकुर को लाखों विचार-विचार।।

एह तरे राजा शिवप्रसाद के बनारस में हिंदी पत्रकारिता क जनक भी कहल जाला.अखबार क भाषा हिंदी-उर्दू क मिश्रण यानी हिंदुस्तानी रहल.भारतेंदु हरिश्चंद्र राजा शिवप्रसाद के आपन गुरु मानयं, लेकिन हिंदी में उर्दू के इस्तेमाल पर ओनकर आलोचना भी करयं.भारतेंदु मंडल क कुल लेखक राजा शिवप्रसाद के लेखनी क आलोचक रहलन.ओनकर आरोप रहल कि राजा शिवप्रसाद देवनागरी लिपि में खालिस उर्दू लिखयलन.जबकि भारतेंदु से कई दशक पहिलय राजा शिवप्रसाद जवन सरल अउर शुद्ध गद्य लिखि देहलन, भारतेंदु ओइसन कभौ नाहीं लिखि पइलन.राजा शिवप्रसाद क लिखल बाकी किताब हइन -’मानवधर्म सार’, ’योगवशिष्ट के कुछ चुने हुए श्लोक’, ’उपनिषद सार’, ’स्वयंबोध उर्दू’, ’आलसियों का कोड़ा’, ’विद्यांकुर’, ’वर्णमाला’, ’इतिहास तिमिर नाशक’, ’बैताल पच्चीसी’ ’सवानेह-उमरी’(आत्मकथा) अउर ’कबीर का टीका’।

इंग्लैंड के संसद में गोरक्षा क अवाज बुलंद करय बदे 1881-82 में एक ठे प्रतिनिधिमंडल भेजय क निर्णय भयल.काशी नरेश राजा शिवप्रसाद क नाव भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल कइलन.भारतेंदु मंडल क सदस्य बालकृष्ण भट्ट अउर राधाचरण गोस्वामी इ निर्णय क भी खुलि के विरोध कइलन.हिंदी बदे लगातार संघर्ष अउर बदले में साथिन क आलोचना झेलत-झेलत राजा शिवप्रसाद उबियाइ गयल रहलन.उ अकसर कहयं कि काशी क माटी काशी में जल्दी से जल्दी मिलि जाय त अच्छा हौ.ओनकर इ इच्छा 23 मई, 1895 के पूरी होइ गइल.

(सरोज कुमार स्वतंत्र पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Article in Bhojpuri, Bhojpuri

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर