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Bhojpuri: राजेन्द्र बाबू गणतंत्र भारत बनावे में सबसे आगे रहलें, लेकिन अब तक ना ही बनल कवनो फिलिम?

Bhojpuri: राजेन्द्र बाबू गणतंत्र भारत बनावे में सबसे आगे रहलें, लेकिन अब तक ना ही बनल कवनो फिलिम?

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भारत एह साल आपन 73वां गणतंत्रता दिवस मनावsता. गणतंत्रा दिवस के ही भारत के आपन संविधान मिलल, भारत गणतंत्र राष्ट्र बनल अउरी इहाँ नियम आ कानून व्यवस्था के राज भइल. रउआ सभे जानत बानी कि भारत के आजादी से लेके एकर संविधान निर्माण में राजेन्द्र बाबू के महत्वपूर्ण योगदान रहल.

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उहाँ के भारत के प्रथम राष्ट्रपति भी बननी. भारत के अधिकांश महान सपूतन पर अलग अलग भाषा में फिल्म बनल आ बनत रहेला बाकिर राजेन्द्र बाबू के एतना महान जीवन-गाथा पर केहू फिल्मकार के ध्यान ना गइल, हैरान करे वाला बात बा.

गणतंत्र दिवस आ स्वतंत्रता दिवस होखे, देशभक्ति फिल्म देखे के सबसे ढेर मजा एहि दिन आवेला. मन देशभक्ति के जोश अउरी उमंग से भर जाला. हर साल कुछ देशभक्ति भा सामाजिक मुद्दा से जुड़ल फिल्म रिलीज भी होला. एहीसे ई तथ्य पर चर्चा कइल जरूरी बुझात बा कि जवन राजेन्द्र बाबू के बिना एतना महान संविधान के निर्माण अकल्पनीय रहे, जिनका बिना गणतंत्र भारत के परिकल्पना कइल कठिन रहे, ओ आदमी के ऊपर आज ले कवनो भाषा के फिल्म इंडस्ट्री फिल्म बनावे के ना सोचलस, ना एको बायोपिक, ना उनके जीवन के कुछ घटना के लेके कवनो फिल्म.

हालांकि, भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के फिल्म प्रभाग माने फिल्म डिवीजन राजेन्द्र प्रसाद पर एगो फिल्म बनलवे बा, ओकर नाम बा बाबू राजेन्द्र प्रसाद. बाकिर ई फिल्म एक तरह से दस्तावेज बा जवन औपचारिक रूप से बनावल गइल होई साइत. फिल्म प्रभाग के वेबसाईट पर जदि जाएब त रउआ मिली कि 1980 में एगो रंगीन फिल्म बनल जवन 18 मिनट के अवधि के रहे. एह फिल्म के फिल्म प्रभाग के फंड से बनावल गइल अउरी मंजुल प्रभात एकरा के बनवलें. हो सकत बा कि ई फिल्म दूरदर्शन भा ओकर अन्य चैनल पर प्रसारित भी भइल होखे. बाकिर अगर अब रउआ चाहीं कि राजेन्द्र बाबू के ऊपर बनल एह फिल्म के देखीं त रउआ ओ वेबसाईट पर जाके डीवीडी खरीदे के पड़ी. हालांकि फिल्म के बारे में लिखल बा कि उ एगो बायोग्राफी फिल्म ह बाकिर हमरा संशय बा कि 18 मिनट में केहू एतना महान शख्सियत के पूरा जीवन गाथा अउरी उनका जीवन के प्रमुख घटना के प्रेरणादायक बना के नाटकीय चित्रण कइसे कर सकेला. ई अवधि फीचर फिल्म के होखबो ना करेला. हं, शॉर्ट फिल्म कहल जा सकेला.

खैर, कुल जमा बात ई बा कि सरकारी दस्तावेज के रूप में बनल एह शॉर्ट फिल्म भा डॉक्यूमेंट्री के अलावा राजेन्द्र बाबू पर कवनो फिल्म साइत नइखे बनल जेकरा के फीचर फिल्म कहल जा सके. हाँ, कई गो देशभक्ति फिल्मन में, जहां आजाद भारत के शुरुआती दौर के दृश्य आवेला त राजेन्द्र बाबू के चित्रण जरूर होला. बाकिर एतना प्रेरणादायक जीवन गाथा के ऊपर एगो फीचर फिल्म बने के चाहीं, हम त कहेब कि ओटीटी के एह दौर में एगो सीरीज बन सकेला. रउआ सभ भी राजेन्द्र बाबू के जीवन के नाटकीय किस्सा कहानियन के जरूर सुनले होखब. का रउआ नइखे लागत कि हिन्दी भा भोजपुरी फिल्म लेखक, निर्देशक आ निर्माता के एह पर सोचे के चाहीं.

भोजपुरी सिनेमा के शुरुआत में भी राजेन्द्र बाबू के भूमिका रहे

भोजपुरी सिनेमा के जिक्र से एगो बात जुड़ल बा. भोजपुरी सिनेमा के शुरुआत ही राजेन्द्र प्रसाद के प्रेरणा से भइल रहे. बिहार के सिवान के जीरादेई के रहे वाला राजेन्द्र बाबू खाँटी भोजपुरिया भाषी रहनीं. हमरो उहें के जन्मस्थान के निगिचा के पैदाइस ह. हम जब भोजपुरी सिनेमा के जननीं तबे इहो बात पता चलल कि भोजपुरी सिनेमा के पितामह नाजिर हुसैन राजेन्द्र बाबू के प्रेरणा से ही एकर शुरुआत कर पवलें. एक बार कवनो सभा में राजेन्द्र प्रसाद गइल रहलें, उहें नाजिर हुसैन भी आमंत्रित रहलें. ओही जा जब दुनू जाना में परिचय भइल त राजेन्द्र बाबू ई जान के चकित भइलें कि एगो भोजपुरी भाषी हिन्दी सिनेमा के एतना बड़ नाम बा. तब नाजिर हुसैन भारतीय सिनेमा के एगो नामचीन हस्ती रहलें. उनके, विमल रॉय आ देवानंद के तिकड़ी स्क्रीन पर खूब जमे. राजेन्द्र बाबू उनसे चर्चा कइलें कि जब रउआ हिन्दी में एतना प्रभावशाली बानी त भोजपुरी में भी सिनेमा काहें नइखीं बनावत. नाजिर हुसैन पहिले से ही अइसन योजना पर काम करत रहलें. उ तत्कालीन राष्ट्रपति राजेन्द्र बाबू से एकरा बारे में बतवलें. उ बड़ा खुश भइलें अउरी जल्दी से जल्दी एह फिल्म के बनावे के कहलें. उनके प्रेरणा काम आइल आ पहिला फिल्म ‘गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो’ रिलीज भइल आ भोजपुरी सिनेमा के नींव रख देहलस. राजेन्द्र बाबू तब बहुत बीमार रहलें, उनका खातिर ई फिल्म विशेष रूप से देखावल गइल. साइत इहे उनके जीवन के देखल आखिर फिल्म भी होखे.

सोचीं, जेकरा प्रेरणा से भोजपुरी सिनेमा शुरू भइल, उनका पर आज ले एगो फिल्म बनावे के तथाकथित भोजपुरिया स्टार लोग भा निर्माता निर्देशक लोग कबो सोचल ले ना. फीचर फिल्म त छोड़ीं, एगो छोट मोट वीडियो बनावे के भी हिम्मत ना जुटावल लोग. तब हिन्दी सिनेमा भा दोसरा भाषा के सिनेमा से का हीरोह रखल जा सकेला. राजेन्द्र बाबू के भारतीय गणतंत्र के निर्माण में योगदान और महान जीवन गाथा के इयाद कइल बिल्कुल जरूरी बा. आ ई आशा भी कइल जरूरी बा कि शायद केहू रचनात्मक आदमी के मन में उनका के श्रद्धांजलि देबे के मन करी, शायद केहू उनका ऊपर फिल्म बनावे के सोची. अब उ अपना अंतरात्मा के सुन के ई सोच लेव, भा हमार आर्टिकल के रूप अपील सुन के.

(लेखक मनोज भावुक भोजपुरी साहित्य और सिनेमा के जानकार हैं.)

Tags: Article in Bhojpuri, Bhojpuri News

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