भोजपुरी में पढ़ें: बाह रे हरिबंश बाबू! कमाल कइ देहल

विरोधी लोग हो हल्ला कइले, बिल फारि के हरिबंश के ऊपर फेंकले, उनकर माइक तुरि देहले. एह मामला में आठ जाना के राज्यसभा के एह बइठकि से बाहर कई दिहल गइल. ऊ लोग संसद के मैदाने में बइठ गइले. ओहि लोगनि के चाय पियावे हरिबंश बाबू पहुंचि गइले, जवना के प्रशंसा प्रधानमंत्री मोदी भी कइले हा.

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  • Last Updated: September 23, 2020, 10:54 PM IST
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रिबंश बाबू, मतलब भोजपुरिया माटी के पत्रकार-राजनेता हरिबंश नारायण सिंह. चरचा में एसे बाड़े कि पहिले राज्यसभा के उप सभापति के रूप में कुछ मेंबर लोगनि के नाराज कई देहले, फेरि ओहि लोगनि खातिर घर से चाय बनवा के पियावे पहुंचि गइले. बतावल जरूरी बा कि बलिया में सिताब दियारा के रहे वाला हरिबंश नारायण सिंह के समाजवादी असर में खाली हरिबंश नाव से भी जानल जाला. बड़का समाजवादी नेता अउर आपातकाल के खिलाफ लड़ाई के हीरो जयप्रकाश नारायण के गांव में पैदा भईले हरिबंश उनकरा से बहुते प्रभावित हउवन. एह घरी ऊ राज्यसभा के उप सभापति बाड़े. अब संसद के दुनो सदन में कुछ ना कुछ अइसन होते बा, जवना के चरचा दोसरा तरीका से होत बा.

खेती-बारी पर बिल आइल त सरकार के विरोधी दल के लोग विरोध कइले. कहल जाता कि उ लोग बिल पर मतदान चाहत रहे, बाकिर उप सभापति हरिबंश ओकरा के ध्वनि मत से पास बता देहले. इ उप सभापति के अधिकार में बा कि कवना तरीका से मतदान करावत बाड़े. विरोधी लोग हो हल्ला कइले, बिल फारि के हरिबंश के ऊपर फेंकले, उनकर माइक तुरि देहले. एह मामला में आठ जाना के राज्यसभा के एह बइठकि से बाहर कई दिहल गइल. ऊ लोग संसद के मैदाने में बइठ गइले. ओहि लोगनि के चाय पियावे हरिबंश बाबू पहुंचि गइले, जवना के प्रशंसा प्रधानमंत्री मोदी भी कइले हा. ठीके बा, राजनीति में विरोध अउर आपसी संबंध साथे साथे चलेला.

आपन रिश्ता बनवला रखे से राजनीति में तनाव की स्थिति भी संभरा जाला. एकर उदाहरण बहुते बा. नेहरू के  जमाना में का कम विरोध रहे ? बाकिर घरेलू रिश्ता अइसन कि पूछ मति. देश आजादे भइल रहे. डॉ. राममनोहर लोहिया पहिलहिं कांग्रेस छोड़ि देले रहले. साल 1963 में लोहिया जी जेल में रहले. आम के मौसम आइल ते देश के प्रधानमंत्री उनकरा खातिर दिल्ली जेल में आम के पेटी भेजववले. अइसे इ बाति गृहमंत्री बल्लभ भाई पटेल के पसंद ना रहे. बाकिर नेहरू जी कहले कि राजनीति के विरोध अउर व्यक्तिगत रिश्ता अलगा-अलगा रखे के चाहीं. जहां तक राजनीति के बाति बा, लोहिया जी कबो प्रधानमंत्री नेहरू से रियायति ना कइले. एक टाइम के बाति ह. कहीं बलात्कार के घटना भइल रहे.



लोकसभा में ओह पर चरचा होत रहे. एहि बीच में नेहरू जी कवनो काम से चलि गइले. बाद में संसद के लॉबी में नेहरू अउर लोहिया से भेंट हो गइल. नेहरू के बेटी इंदिरा गांधी भी संगही रहली. लोहियी जी धीरे से इंदिरा गांधी के छिऊंकी काटि लेहले. नेहरू जी असहूं बड़ा खिसियाह मानल जात रहले. बेटी के छिऊंकी काटला पर त अइसन खिसिअइले कि पूछ मति. एह पर लोहिया जी बोलले कि बेटी के छिऊंकी काटला पर इ हालि बा, त ओह दिने लोकसभा में बलात्कार पर चरचा के बेरि काहें भागि गइल. लोग बतावेला कि नेहरू जी के ओह बाति के पछतावा भईल रहे.
राजनीतिक विरोध अउरी घरऊ रिश्ता संग संगे चलावे के कहानी बहुते बा. उत्तर प्रदेश के पहिलका मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत अउर क्रांतिकारी लेखक यशपाल के चरचा भी कईल जा सके ला. यशपाल जेल में रहले. मुख्यमंत्री पंत जी अपना विरोधी यशपाल के घरे पहुंचि गइले. उनकरा पत्नी से कहले कि भाभी जी यशपाल जी त जेल में बाड़े. कवनो काम होखे त हमरा से बतइह. लोग त इहो कहेला कि पंत जी यशपाल के घरेलू जरूरत के चिंता करत रहले. एने यशपाल जी भी राजनीति में पंतजी से कवनो समझौता ना कइले.

एगो अउर बाति बा कि पहिले सदन के अंदर के वाद विवाद ओहि जा निपटा दिहलि जात रहे. अभी इंदिरा गांधी के जमाना के बाति ह. कृष्णचंद्र पंत गृह राज्यमंत्री रहले. विपक्ष में फायर ब्रांड कम्युनिस्ट पार्टी के नेता कृष्णा मुखर्जी से विवाद बड़ा घनघोर हो गईल. कृष्णा मुखर्जी अइसन जिम्मेदार सांसद अउर कृष्णचंद्र पंत नियर गंभीर मंत्री के बीच एह अस्तर तक विवाद चिंता के कारन बनि गईल. सांसद लोग परेशान भ गईले. एही बीचे साहित्यकार सांसद बालकवि बैरागी खड़ा भईले. उ कहले कि माननीय सांसद लोगनि! परेशान मति होख. इ गीता (ग्रंथ) आखिर कृष्णे (भगवान) के ह. एह पर पूरा सदन हंसि परल. गीता मुखर्जी अउर केसी पंत भी हंसि के बईठि गईले.

एगो बाति जरूर बा कि हंसी-मजाक खातिर खुला दिमाग चाहीं. अब देख ना कि गोविंद बल्लभ पंत जब मुख्यमंत्री रहले विधानसभा में एगो महिला विधायक ए बात पर बड़ा नाराज भईली कि उनकरा क्षेत्र में सड़क के काम नौ महीना पर भी पूरा ना भईल. एह पर पंत जी कहले कि माननीय सदस्य सब काम नौ महीना पर ना हो जाला. ए बाति पर पूरा सदन के संगे महिला विधायक भी हंसि के रहि गईली. कहे के मतलब ई बा कि खुलि के बात रखे के चाहीं अउर मन में कवनो दुश्मनी ना रहे त बड़ से बड़ समस्या के समाधान निकल जाई. हरिबंश बाबू तो खुला मन देखावे के कोशिश कईले बाड़े. बाकी कुल्ही नेते लोग जाने. हमनी के त उहे जानत बाड़ी जा, जवन बतावल-देखावल जात बा.
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