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Bhojpuri में पढ़ें- काशी में दुइ साल बाद रामलीला क रजगज

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तुलसीदास रामचरित मानस क रचना(1577) काशी में कइलन. रामलीला क शुरुआत काशी में भइल. लेकिन दुइ साल से कोरोना के नाते भगवान ...अधिक पढ़ें

बनारस यानी काशी भगवान शिव क नगरी हौ. लेकिन इहां भगवान राम क लीला होला. भगवान राम क एतना लीला अयोध्या में भी नाहीं होत. कुआर अउर कातिक दुइ महीना बनारस राम के रंग में रंगाइ उठयला. एह समय संझा के शहर में जेहर भी निकलि जा, रामलीला देखय के मिली. काशी के रामलीला क बड़ी खासियत इ हौ कि इहां रामलीला मनोरंजन बदे नाहीं होत. रामलीला क पूरा स्वरूप धार्मिक रहयला. रामलीला में नाटकीयता अउर गीत-संगीत नाहीं रहत. रामचरित मानस क चौपाई रामलीला क मूल आधार रहयला. संवाद भी संक्षिप्त अउर चौपाई पर अधारित रहयला. तिथि अउर नक्षत्र के अधार पर पूरी रामलीला धार्मिक अनुष्ठान के तरह संपन्न होला. दर्शक भी धार्मिक भावना के साथे रामलीला देखय आवयलन. एह नाते रामनगर क रामलीला छोड़ि के बाकी रामलीलन में ओतना भीड़ नाहीं होत. दुइ साल कोरोना के नाते रामलीला नाहीं भयल. एह साल रामलीला होत हौ त बनारस के लोगन में एक अलग उत्साह हौ. लाट भैरव क रामलीला, चित्रकूट क रामलीला, तुलसी घाट क रामलीला अउर मौनी बाबा रामलीला, काशी क इ चारों रामलीला चार सौ साल से अधिक पुरानी हईइ. मौनी बाबा रामलीला समिति क पदाधिकारी डॉ. एस.एस. गांगुली क कहना हौ कि काशी सांस्कृतिक नगरी हौ. काशी में सात वार में नौ तेवहार मनावय क परंपरा हौ. दुइ साल रामलीला नाहीं भइले से लोगन में उदासी रहल. लेकिन एह साल रामलीला होत हौ त काशी वापस अपने रंग में लउटि आयल हौ.

रामलीला के समय काशी क फिजा एकदम से बदिल जाला. पूरा शहर रामचरित मानस के चौपाई अउर रामलीला के संवाद से गूंजय लगयला. रामलीला अपने साथे मेला क माहौल भी लेइ के आवयला. मुखौटा, तीर-कमान, तलवार, तरह-तरह क खेलवना रामलीला मेला क आकर्षण रहयलन. बनारस क प्रसिद्ध मिठाई मगदल एही समय से बनय-बिचाए शुरू होला अउर पूरी ठंढी भर सिलसिला चलयला. बनारस में रामलीला मेला में मगदल क खुमचा जरूर रही. ओइसे चटनी के साथे चिनिया बदाम बनारसिन बदे रामलीला क खास टाइम पास हौ. लेकिन नेमी लोगन बदे रामलीला श्रद्धा क अनुष्ठान होला. नेमी लोग एक हाथे में रामचरित मानस अउर दूसरे हाथे पीढ़ा लेइ के रामलीला स्थल पर पहुंचयलन. रामनगर के रामलीला में नेमी लोगन क भीड़ जादा रहयला.

असल में बनारस क जादातर रामलीला अलग-अलग स्थान पर घूमि-घूमि के नुक्कड़ शैली में होलिन. अलग-अलग दिन बदे अलग-अलग स्थान तय हउअन. रामनगर क रामलीला पांच किलोमीटर के क्षेत्रफल में होला. अलग-अलग जगह अयोध्या, जनकपुर, लंका, पंचवटी, रामेश्वर आदि स्थान निर्धारित कयल गयल हउअन. लाटभैरव अउर चित्रकूट क रामलीला पूरे शहर में घूमयला. जब रामलीला एक जगहे से दूसरे जगहे घूमयला तब दर्शकन के भी रामलीला के साथे अलग-अलग स्थान पर जाए के पड़यला. नेमी लोग एही नाते पीढ़ा लेइ के जालन. जहां रामलीला होला पीढ़ा पर बइठि जालन अउर रामचरित मानस क पाठ शुरू कइ देलन.

काशी क रामलीला 31 अउर 21 दिना क होलिन. रामनगर क रामलीला अपने शैली बदे पूरी दुनिया में मशहूर हौ. आज के आधुनिक जमाना में भी पेट्रोमैक्स के रोशनी में बिना माइक क पूरी रामलीला होला. यूनेस्को रामनगर के रामलीला के हेरिटेज क दर्जा देहले हौ. लेकिन काशी में रामलीला क दुइ ठे आयोजन पूरी दुनिया में मशहूर हउअन. दूनों आयोजन काशी के लक्खा मेला में शुमार हउअन. नाटी इमली क भरत मिलाप अउर चेतगंज क नक्कटैया. नाटी इमली क भरत मिलाप दशहरा के अगले दिना होला. यानी एह साल छह अक्टूबर के नाटी इमली क भरत मिलाप होई. पूरा बनारस दुइ मिनट के भरत मिलाप क दृश्य देखय बदे उमड़ि पड़यला. देश-दुनिया से लोग इ दुइ मिनट क लीला देखय बदे आवयलन. काशी नरेश चांदी के हउदा से सजल हाथी पर बइठि के नाटी इमली क भरत मिलाप देखय आवयलन. ओनकरे अइले के बादय भरत मिलाप क लीला शुरू होला.

चेतगंज क नक्कटैया चेतगंज रामलीला समिति के अधीन होला. एकर नाव भले चेतगंज क नक्कटैया हौ, लेकिन भीड़ एतनी उमड़यला कि पूरा बनारस छोट पड़ि जाला. इ लीला संझा से शुरू होला त पूरी रात चलयला अउर सबेरे जाइ के खतम होला. चेतगंज के नक्कटैया क खासियत इहां निकलय वाली झांकी हइन. तरह-तरह के प्रसंग के जीवंत करय वाली झांकी लीला में शामिल होलिन. झांकी के ’लाग’ भी कहल जाला. कई झांकी बहुत खतरनाक होलिन. झांकी में हिस्सा लेवय वाला कलाकार पूरी रात ओही तरे बनल रहयलन. कलाकार लोग बहुत पहिलय से एकर अभ्यास करयलन. चेतगंज क नक्कटैया कातिक बदी चतुर्थी यानी करवा चउथ के दिना होला. देश-दुनिया से लोग इ लीला देखय आवयलन. भीड़ कई लाख क होला.

काशी क कवनो महल्ला अइसन नाहीं हउअन, जहां रामलीला नाही होत. दारा नगर, काशीपुरा, औरंगाबाद, गायघाट, नदेसर, वरुणापुल, अर्दली बाजार, भोजूवीर, शिवपुर, खोजवां, लहरतारा, लल्लापुरा, आशापुर, लोहता, पांडेयपुर क रामलीला काशी में मशहूर हयन. एकरे अलावा काशी के ग्रामीण इलाकन में भी रामलीला क मंचन होला. कुआर से शुरू होइ के कातिक तक पूरा बनारस शिव-राम रहयला.

(सरोज कुमार स्वतंत्र पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

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