Bhojpuri: नवरातर से राम क नाता- नवमी के जनम अउर दसमी के भइल जीत

चइत के नवरातर में नवमी के दिन भगवान राम क जनम भयल रहल अउर शारदीय नवरातर में पूरे नौ दिन भगवान राम माई क पूजा कइले रहलन अउर माई से शक्ति हासिल कइके दसवें दिना लंका क राजा रावण पर जीत हासिल कइले रहलन.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 21, 2021, 2:07 PM IST
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नवरातर माई दुर्गा क दिन होला. साल में नौ दिन क दुइ ठे नवरातर पड़यला अउर दूनों में माई क पूजा कयल जाला. लेकिन दूनों नवरातर क संबंध देवी के साथ भगवान राम से भी हौ. चइत के नवरातर में नवमी के दिन भगवान राम क जनम भयल रहल अउर शारदीय नवरातर में पूरे नौ दिन भगवान राम माई क पूजा कइले रहलन अउर माई से शक्ति हासिल कइके दसवें दिना लंका क राजा रावण पर जीत हासिल कइले रहलन. एही जीत के खुशी में हर साल दशहरा होला. सनातन धर्म में इ दूनों दिन बहुत महत्वपूर्ण हयन अउर हिंदू लोग इ दूनों दिन यानी रामनवमी अउर दसमी के पूरे आस्था अउर उल्लास के साथ मनावयलन.

हिंदू धर्म में मान्यता हौ कि चइत महीना में शुक्ल पक्ष के नवमी के दिना पुनर्वसु नक्षत्र अउर कर्क लग्न में भगवान विष्णु राम के रूप में धरती पर आपन सतवां अवतार लेहले रहलन. अयोध्या क राजा दशरथ के तीन रानी रहलिन -कौशल्या, कैकयी अउर सुमित्रा. राम कौशल्या के कोख से पैदा भयल रहलन. राम के मर्यादा पुरुषोत्तम कहल जाला अउर उ धरती पर राक्षसन क नाश कइके मानव धर्म क स्थापना करय बदे अवतार लेहले रहलन. एही मानव धर्म के रामराज्य कहल जाला. भगवान राम के जनम के बारे में निर्णयसिंधु में लिखल हौ.

चैत्रे नवम्या प्राक् पक्षे दिवा पुण्ये पुनर्वसौ,

उदये गुरुगौरांश्चोः स्वोच्स्थे ग्रहपंचके..
मेषं पूषणि सम्प्राप्ते लग्ने कर्कटकाह्वये.

आविरसीत्सकलया कौसल्यायां परः पुमान्..

रामनवमी के महानवमी भी कहल जाला. हिंदू लोग पूरे देश में इ त्योहार बहुत श्रद्धा अउर आस्था के साथ मनावयलन, लेकिन राम क जनमस्थली अयोध्या में रामनवमी क विशेष महतव हौ. भगवान शिव क नगरी काशी भी रामनवमी के दिना राममय होइ जाला. लेकिन एह साल कोरोना के नाते रामनवमी के कार्यक्रम पर रोक हौ. अयोध्या में संत समाज भक्तन से आह्वान कइले हौ कि रामनवमी के दिना मंदिर में आवय के बदले घर में ही भगवान राम क पूजा कयल जाय. काशी में भी भगवान राम क सांकेतिक पूजा क प्रबंध हौ.



अयोध्या के बाद काशी में भगवान राम क बहुत मान हौ. भगवान राम लंका क राजा रावण क बध कइले के बाद ब्रह्मदोष से मुक्ति बदे पूरे परिवार के साथ काशी आयल रहलन. गुरु वशिष्ठ के सलाह पर काशी में उ पंचकोसी यात्रा कइलन अउर रामकुंड तथा रामेश्वर में शिवलिंग स्थापित कइके पूरे विधिविधान से पूजा कइलन. तब जाइके ब्रह्महत्या से मुक्ति मिलल. काशी में ही तुलसी दास अस्सी घाट पर रामचरित मानस क रचना कइलन. तुलसी अखाड़ा, संकटमोचन मंदिर, रामकुंड अउर रामेश्वर में रामनवमी पर विशेष दर्शन-पूजन अउर आयोजन होला. भक्तन क भारी भीड़ उमड़यला. शोभायात्रा निकलयला. लेकिन एह साल कुल सूना हौ.

सनातन धर्म में राम विष्णु क अवतार हयन, लेकिन खुद में उ एक मनुष्य के मर्यादा में रहि के आपन पूरा जीवन धरती पर बितउलन. शक्ति क पूजा भी उ मनुष्य के रूप में ही कइले रहलन. पौराणिक कथा के अनुसार, रावण से युद्ध के दौरान राम क सेना सफल नाहीं होइ पावत रहल. कवनो शस्त्र कामय न करय. रावण के पास भगवान शिव क देहल वरदान रहल. राम क सेना उदास भयल जात रहल. रोज युद्ध होय, लेकिन निष्कर्ष क अता-पता नाहीं रहल. अंत में जामवंत राम के देवी क तपस्या कइके महाशक्ति के अपने वश में करय क सलाह देहलन. भगवान राम दुर्गा के नव रूप क पूरे नौ दिन पूजा कइलन अउर अंत में देवी प्रसन्न भइलिन अउर आशीर्वाद देहलिन. तब जाइके दसवें दिन रावण मारल गयल. पुराण के एह कथा पर कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ’राम की शक्ति पूजा’ नाम से एक लंबी कविता लिखले हउअन. इ कविता बहुत शानदार अउर चर्चित हौ.

भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम रहलन. लेकिन उ कुछ घटना अइसन भी कइले हउअन, जवन ओनके मर्यादा पर कलंक लगावयला. अहिल्या उद्धार क घटना भगवान के रूप में ओन्हय जहां चमत्कारिक बनावयला, त ओही दूसरी ओर बाली क बध ओनके ऊपर कलंक लगावयला. बाली क बध उ पेड़े के पीछे छिपि के कइले रहलन. हलांकि इ दूनों कदम ओन्हय मजबूरी में उठावय के पड़ल रहल.

कबीर दास हलांकि भगवान राम के आदि राम के रूप में मानयलन. उ राजा दशरथ के राम क पूजा करय के बदले आदि राम क पूजा करयलन. कबीर दास के अनुसार, इहय आदि राम अविनाशी परमात्मा हयन, सबकर सर्जनहार अउर पालनहार हयन. ओनही के नाते धरती अउर अकाश क अस्तित्व हौ. तैतीस करोड़ देवी-देवता ओनके आगे नतमस्तक हयन. उ लिखले हउअन.

एक राम दशरथ का बेटा,

एक राम घट घट में बैठा.

एक राम का सकल उजियारा,

एक राम जगत से न्यारा.

(लेखक सरोज कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)
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