भोजपुरी में पढ़ें: चलीं एक हाली अउरी गंगासागर नहा आईंजा

भोजपुरिहा समाज के लोगन के बात करीं त एह समाज के कई सौ भाई- बहिन लोग गंगासागर जाला

भोजपुरिहा समाज के लोगन के बात करीं त एह समाज के कई सौ भाई- बहिन लोग गंगासागर जाला

सब तीरथ बार बार गंगा सागर एक बार- खूब मशहूर कहावत है. हो सकेला कि साधन के कठिनाई के कारण इ कहल गइल होखे. लेखक के गंगासाागर अतना बढ़िया लागल कि उ बताावत हवें कि कइसे गंगासागर तक पहुंचल जा सकेला.

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  • Last Updated: September 10, 2020, 6:59 PM IST
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गंगासागर, कोलकाता से करीब 100 किलोमीटर दूर बा गंगासागर. बाकिर जे मन में ठानि लिहल कि एह बेर मकर संक्रांति के दिने गंगासागर में डुबकी लगावेके बा, त फेर केहू रोकि ना सकेला. आ पूरा देस से लाखन लोग एहिजा नहा के पुण्य लाभ करेला. भोजपुरिहा समाज के लोगन के बात करीं त एह समाज के कई सौ भाई- बहिन लोग गंगासागर जाला. ईहे ऊ जगहि ह जहवां गंगा नदी जेकरा के सरधा से हमनी का गंगा मइया जा, समुद्र में समा गइल बाड़ी. ई समुद्र अनंत रूपी भगवान शिव के प्रतीक ह.  गंगा जी के उत्पत्ति गंगोत्री से भइल बा आ अंत एह गंगासागर में. गंगा जी हरिद्वार आ ना जाने कहां- कहां से यात्रा करत, लोगन के नहवावत आ आसिरबाद देत एहिजा विराट समुद्र में समा गइल बाड़ी.

एकरा बारे में एगो रोचक कथा बा कि एक बार सागर नांव वाला राजा अश्वमेघ यज्ञ कइलन. पूरा धरती से घूमि के जब अश्व यानी घोड़ा लौटे लागल त इंद्र भगवान उनुकरा घोड़ा के गायब क दिहले आ छुपा के कपिल मुनि के आश्रम में बान्हि दिहले. कथा में आगे बढ़े से पहिले बता दीं कि गंगासागर में कपिल मुनि के मंदिर बा. कहल जाला कि ओही मंदिर के जगह पर कपिल मुनि के आश्रम रहे. राजा सागर के साठ हजार बेटा रहे लोग. ऊ लोग घोड़ा खोजत- खोजत कपिल मुनि के आश्रम में पहुंचल लोग त देखल कि घोड़ा त एहिजे बा. ओह घरी कपिल मुनि गहिर ध्यान में रहले. नाराज सागर के बेटा लोग उनुकर ध्यान भंग क दिहल लोग आ घोड़ा काहें बन्हले बाड़े पूछे लागल लोग. कपिल मुनि के घोड़ा से का मतलब. बिना मतलब ध्यान भंग भइला से कपिल मुनि खिसिया गइले आ अपना योग बल से राजा सागर के समूचा साठ हजार बेटा लोगन के जरा के राख क दिहले आ ओह लोगन के नरक में भेजि दिहले.

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राजा सागर के एगो नाति रहले, जिन कर नांव रहे भगीरथ. ऊ अपना भस्म हो गइल चाचा लोगन के मुक्ति खातिर गंगा जी के धरती पर आवे खातिर घनघोर तपस्या कइले. गंगा जी प्रकट भइली आ कहली कि हमार वेग बहुत भयंकर बा. ओकरा से एह धरती के सभे लोग बहि जइहें आ सभकर मृत्यु हो जाई. तूं जा भगवान शिव से प्रार्थना कर कि हम जब धरती पर उतरीं त शिव जी अपना जटा में ले लेसु. भगवान शिव अनंत के प्रतीक हउवन. उनुका भीतर दया भी बहुत ह. त भगीरथ जी शिव जी के प्रसन्न होखे खातिर तपस्या कइले. शिव जी प्रसन्न भइले. कहले कि ठीक बा संसार के लोगन खातिर हम गंगा के वेग अपना जटा में अझुरा देब. ऊ शांति से धरती पर अइहन. ऊहे भइल. गंगा जी धरती पर अइली तबसे मनुष्य के तारे खातिर गंगोत्री से गंगासागर तक के लगातार यात्रा करतारी. माने अनंत भगवान से उनुकर संपर्क लगातार बनल बा. भगवान शिव एक हाली संसार के जीव के रक्षा खातिर समुद्र मंथन से निकलल हलाहल बिष पी गइले आ ओकरा के गला के भीतर रोकि लिहले. एही से उनुकर एगो अउरी नांव नीलकंठ भी ह. त भगवान शिव के महिमा अपरंपार बा.
अब देखीं, ढेर लोग ईहे ना जानेला कि गंगासागर जाइल कइसे जाला. त आईं ईहो जानि लिहल जाउ. कोलकाता से जाए के दू गो साधन बा. ट्रेन से जा सकेनीं आ बसो से जा सकेनीं. ट्रेन से जाए खातिर रउवां दुपहरिया ले इंतजार करेके परी. जब ले ट्रेन के इंतजार करब तब ले बस से रउवां गंगासागर पहुंचि जाइब. बस सबेरे पांचे बजे से चले लागेली सन. सब बसे से जाएके चाहेला. बस कहां मिली? बस मिली कोलकाता के आउट्राम बस अड्डा पर. आ ट्रेन कहां मिली? ट्रेन मिली कोलकता के सियालदह रेलवे स्टेशन पर.

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रउवां ट्रेन से जाईं चाहे बस से, नामखाना उतरहीं  के परी. ओहिजा से मूरी गंगा (बा मूड़ी गंगा) पार करे खातिर बाक्खाली फेरी घाट पर जाएके परी. ओहिजा से नदी पार कइके ओह पार जाइब कचुबेड़िया. कचुबेड़िया से फेर एगो बस धरे के परी, जवन रउवां के गंगासागर पहुंचा दी. ई जात्रा पुराना जमाना में एतना कठिन बहुत कठिन रहल ह. ई कुल्हि रास्ता पैदल आ नाव से पार कइके पूरा करेके परत लहल ह. एही से कहाउति बनल- “सब तीरथ बार- बार, गंगासागर एक बार”. बाकिर अब गंगासागर गइल कठिन नइखे. कुल साधन मिल जाई रउवां के. बाकिर रउवां चाहीं कि कोलकाता के बइठल सीधे गंगासागर पहुंचि जाइब, त ई साधन नइखे. रउवां रुकि- रुकि जाएके परी. अब गंगासागर में नहाईं आ सांख्य योग के प्रथम कपिल मुनि के मंदिर में पूजा कइके धन्य होखीं. जहां नहाइब ओहिजे पूजा के सामान बेचे वाली ढेर कुल दोकान बाड़ी सन. नारियल से लेके अनेक पूजा सामग्री रउव के मिलि जाई. ढेर लोगन खातिर ई पर्यटन स्थल ह.

गंगासागर जाए वाला लोग पहिले आउट्राम घाट पर हुगली नदी के किनारे आवेला लोग. एहिजा तमाम समाजसेवी संस्था आपन शिविर लगावेली सन. तीर्थयात्री लोगन के सेवा खातिर. एहिजा चाय, जलपान से लेके भोजन आ रात बितावे खातिर टेंट के इंतजाम रहेला. कई गो बैंक आपन एटीएम खोल देले सन. कुछ समाजसेवी संस्था चिकित्सा सेवा माने छोट- मोट बेमारी के इलाज वाला शिविर भी खोल देली सन. अनगिनत साधु- संत भी थोड़े दूर पर आपन डेरा जमवले रहेला लोग. कुछ भक्त साधुन के दर्शन खातिर जा ला लोग आ प्रणाम क आवेला लोग. गंगासागर में कई गो बुजुर्ग भुलाइओ जाला लोग. पुलिस के मदद से लाउडस्पीकर पर घोषणा कराके घर वालन के खोजि के बुजुर्ग लोगन के परिवार से मिला देबे के इंतजाम बा. तबो कुछ बुजुर्ग अपना परिवार से हमेशा खातिर बिछुड़ि जाला लोग. कहीं मांगत खात ला लोग. सरकार जान जाले त ओह लोगन के कौनो बृद्धाश्रम में पहुंचा देले.

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धार्मिक आस्था वाला लोगन खातिर गंगासागर दिव्य तीरथ ह. जे नइखे गइल ओकर साध रहेला कि एक बार गंगासागर जइतीं. जे नहा आइल बा, ऊ खुस बा. बाकिर अइसनो लोग बा जे बार- बार नहा के भी तृप्त नइखे. कई- कई बार फेर नहाए के चाहता लोग. त चलीं हमनींओ का एक बार फेर गंगासागर नहा आईं जा.
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