भोजपुरी में पढ़ें: अहरा में लिट्टी के कहो पूरा पाकवान बनि जाला ऊहो कुदरती स्मोक ट्रीटमेंट के साथे

भोजपुरी के चर्चा होते मन में लिट्टी फुटे लागेले. लिट्टी बनावेके पारंंपरिक तरीका आ ओकरा प कौन कौन पकवान बनावल जा सकेला यही पर लेख में चर्चा बा. खास बात इ बा कि अहरा पर बनल पकवान में अपने से एगो स्मोकी टेस्ट होला, जवन ये समय बहुत ऊंच अउरी महंगा जगह पर मिलता.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 23, 2020, 11:09 PM IST
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हरा के जनम भी आगिए के साथे भइल होई. ठीक ओसहिं जइसे औलादे के साथे महतारी भी पाएदा होखेले. आजुओ अहरा ओइसहिं सुनुगावल जाला जइसे पहिल बार जारावल गइल होई, फरक अतने आइल बा कि तब एगो पथर दोसारका पथर पर रगड़िके जारावल होई - आ आजु दिसलाई से आगि जारावल जाला.  जब दिसलाई ना मिले त बीड़ी-सिगरेट वाला लोगन के लाइटर भी कामे आ जाला. अगर पहिले से कहीं चूल्हा जरत होखे त ओकरो लूती-लाकाठी से काम बनि जाला.

अहरा अकसर गोइंठा से बनेला. बाकिर जरूरी ना होला. अहरा असल में खुला चूल्हा ह जावना के कहूं बानावल जा सकेला. लकड़ियो के टुकाड़ा से अहरा जोरल जा सकेला. कबो कबो गोइंठा, गोहरी चाहें ऊपला जावना नांव से बोलावल जाउ, मिला के भी अहरा जोरल जाला. अहरा कहूं जोरल जा सकेला बस सारधा चाहीं.  जइसे भागवान के आपरूपी आवतार होखे, जाहां धिआन लागावल गइल ऊहें परगट हो जइहें अगन देव. अहरा में अगन देव के आवतार अइसे त आसानी से हो जाला, बाकिर कबो कबो बारसात में ढेरे तपस्या करेके पड़ेला.

अब त अहरा जादा से जादा लिट्टी बानावे खातिर लागावल जाला, बाकिर पुरान जामाना में अइसन ना रहे. किरासन के स्टोप आ गइल रहे तबो ले अहरा के दाबदाबा बनल रहे. ई गैस आ इंडक्सन आके अहरा के पीछे छोड़ि देले स. ई कुल लाख सुबिधा आ गइल बा त का बाकिर अहरा के सोन्ह सावाद दूलम बा.



अबहियों गांव देहात में लिट्टी चोखा बानावे खातिर सबसे नीमन अहरे मानाला. ओइसे त लिट्टी के लोग काराही में छानिओ देला, बाकिर अहार प के पाकावला के सावाद ना मिले. अब त लिट्टी लोग ओवन आ ओटीजी में भी बाना लेता. जेकारा पाले ई सुबिधा नइखे ऊ तावा से ले के कूकर में तोपि के भी बाना लेता, बाकिर जइसे पाता चले कि अहरा प के लिट्टी खाएके मिली केहू दउरल पहुंचि जाई. सहरन में भी ठेला प कुछ लोग कोइला प पाका के लिट्टी बेचता जावना में कुछु हद तक सोन्हापन मिलि जाता, बाकिर चोखा खातिर आलू, टामाटर आ भांटा ऊहो लोग उबालिए लेता. अब उबालल चोखा कइसन लागी. कसहूं बनो लागी त उदासे, सोन्ह त नाहिंए लागी.
अहरा के फाएदा होखेला कि खाली लिटिए ना, बलुक आलू, टामाटर आ भंटो ओही में पाकि जाला. ईहो ना होखे कि पाकावे खातिर आलागा से अहारा जोरे के परत होखे. चोखा के सामान पर पहलके तेज आगि में पाकि जाला. ऊ आगि जावना में लिट्टी के ना डालल जा सके. अगर ओह आगि में डालि दीहल जाई त ऊपर से जरि जाई आ भीतर से कांचे रहि जाई. मने जवन आगि बेकार चलि जाई ओहिमें चोखा के सामान पाकि जाला.

चोखा के सामान पाकावला के बाद लहरि कम हो जाला बाकिर गरमी बनल रहेला. ओहि प लिट्टी ध के कुछु देर से सेंकाला. उलटि के पलटि के सेंकाला के बाद ओही में गाड़ि दीहल जाला. जावना राख से ढंकल जाला ऊहो आताना गरम रहेला कि पाके में जवन कसर बाकी रहेला पूरा क देला.

अहरा के ईहे रूप ओवन लेखा लागेला. आखिर ओवनो में त अंदरे अंदर गरमी मिलेला आ ऊ चारों तरफ से बन रहेला. ईहे वजह बा कि अहरा लेखा लिट्टी अऊरू कवनो तरीका से ना पाकावल जा सकेला. ई त भोइल लिट्टी के बात, बाकिर पुराना जामाना में अहरा के जीमे काम खाली लिटिए पाकावल ना रहे, बलुक बहुते जिमेदारी रहत रहे.

अहरा के बारे में अगर सोचल जाऊ त ई गांव देहाति के मल्टीपरपज इंतजाम रहे - कभी अहरा तंदूर के रूप में कामे आवे त कभी माइक्रोवेव के रूप में - आ चूल्हा के रूप में मेने काम रहे. जरूरत परे त अहरा अंगीठी भी बनि जा रहे आ हाड़ कांपावत जाड़ में रूम हीटर भी. माटी के बोरसी बाना के पोर्टेबल अहरा बनि जात रहे. जाहां मन करे ऊंहे उठा के ले ले जा आ अहरा आपना काम प लागि जाई.

चूल्हा के रूप में अहरा पर पूरा खाना बानावल जा सकेला. अहरा जोरि के ओ पर चाहे त हंड़िया में चाहे त पतीली चाहे भगवना में भात, दालि से लेके कुल्हि चीजु पाकावल जा सकेला. पहिले के जामाना में जब प्रेसर कूकर ना आइल रहे त आहारा प लोग नीचे वाला बरतन में दालि आ ओकारा ऊपर चाउर चाढ़ा देत रहे. दालि में आलू डालि दीहल जाऊ आ ऊपर चाउर के अदहन. कालांतर में ओही डिजाइन पर प्रेसर कूकर बानावल गइल.

अहरा के खाना में सावाद के भी खास वजह होखेला. असल में सुरू में तेज आंच होखेला बाकिर धीरे धीरे कम होत होत कबो कबो दोसारा काम में आदिमी बाझि जाऊ त बुताइओ जाला. ईहे धीमा आंच जवन जरत जरत बुता जात होखे, अहरा पर बने वाला हर पकवान के अइसन बाना देला कि अगिला बार से नांवे सुनि के लार साम्हारल मुस्किल हो जाला. अहरा के साथे साथे लागल रहे के परेला. जइसे बुताउ ओसहिं ओकारा के पांखा, बेना चाहें दफ्ती के टुकड़ो से हऊंकि के लाहकावल जरूरी होला.

अहरा के भी देवी देवता लोग लेखा कईगो रूप होखेला - कउड़ा भी अहरे के एगो डिजाइन होखेला. ओसहिं पावड़ा भी एक तरीका के अहरा होला बाकिर ऊ बंद होखेला. अहरा घर के आङनो में जोरा सकेला आ दुआर, खेत, बगइचा चाहें राहि पेंड़ा में भी. कहीं जङल में भी अहरा जोरि के खाना बानावल जा सकेला. कउड़ा आमतौर प आगि तापे के कामे आवेला जहां घर के बड़ बुजुर्ग बइठि के देस दुनिया के बारे में फैसला लेला कि ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बने खातिर का करे के चाहीं. चाहें चीन प भारत के पाकिस्तान लेखा सर्जिकल स्ट्राइक करे के चाहीं कि ना.

पावड़ा असल में दूध गरम करे खातिर इस्तेमाल होखेला. पावड़ा अकसर जमीनिए में छोट गाड़हा खोनि दीहल जाला आ ओहि में अहरा जोरि दिआला. बिलकुल ओसहिं जइसे जमीनि प जोरल जाला. जब दूध देर ले आवंटा के लाल हो जाला त जे पीअल चाहे पी सकेला. आ नाही त फेरु जोरन डालि दिआला. पावड़ा में हलुक गरमी बनल रहेला ए से जाड़ा गरमी होखे चाहें बारसात कवनों मउसम में दही जामावला में दीकत ना होला.

पावड़ा में के दहिओ जवन जामेला ओकर छाल्हिए देखि के मन डोलि जाला. जवन दही पावड़ा में तेयार होला ओकर माजा आजु काल्हु के पैकेट आ पाउच वाली दही में काहां मिली. ओ दही के रही से महि के लैनू निकलेला आ ओकरो के अहरे पर काकारा के घीव निकालल जाला. देसी घीव के असली सावाद ओही में मिलेला. जे केहू भी पावड़ा में के अंवटल दूध के दही से बनल घीव एक बार खाले ओकारा जिनिगी में कवनो घीव ना रुचि सकेला.

जमिनि में त आस्थाई पावड़ा बनेला बाकिर मोबाइल पावड़ा माटियो के बानावल जा सकेला. ओइसे ओकारा के बोरसी कहल जाला आ ऊहो लिट्टी बानावे से लेके खाना बानावे, दूध उबाले आ आगि तापे के कामे आ सकेला. दूध दही त अइसन चीजु ह कि भले द्वापर युग में भागवान कृष्ण के नजर रहत होखे, बाकिर कलियुग में बिलारि से बाचावे खातिर खूबे जतन करेके पड़ेला. ओकारा खातिर पावड़ा के ऊपर माटी के ढाकाना बाना दीहल जाला जवना में छेद कके धुआंकस भी बानावे के पड़ेला.

जब अहारा दुआर प जोराइल रहेला त बचवन सब ओमे आलू पिआजु भूंजि के खाले स. मिठका कोन त अहरा में भुंजइला के बाद अइसे लागेला जइसे चासनी में डुबा दीहल गइल होखे. जब गांव के लइका, तुरहा, मालाह भागड़-सोता में मछरी मारे ला लोग त उंहवें अहरा जोरि के ओहि में छोट छोट मझिरियो भूंचि के खात रहे ला लोग.

कबो कबो जब चाना के मौसम होखे त होरहो झोरा जाला. मटर के छेमी भी पाका के सभे केहू बाड़ा चाव से खाला. गेहूं के बालि मिलि जाउ त ऊमि भी पाकि जाला. जनेरा के फसल आवे तो बालि पाका लिहल जाला.

आजु काल्हु खाना बानावे वाला बड़ बड़ सेफ लोग कइगो पाकवान बानावेला त ओकरा में कोइला जारा के स्मोक ट्रीटमेंट देला. अहरा में पाकल त हर पाकवान कुदरती स्मोक ट्रीटमेंट के साथे बाहर निकलेला - असली आ बानवटी के ईहे फरक होखेले जे जाताना जल्दी बुझि लेउ ऊहे बिद्वान बा!
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