भोजपुरी में पढ़ें: बखत बदल गईल कहां से चल के कहां आ गइल आदमी

बात बात में सुने के मिलेला समय बदल गइल बा. आखिर का बदलल बा आ एकर जिम्मेदार का बा. पेशा से प्राध्यापक अउर साहित्यकार रामाशंकर जी एही पर विचार करत हईं –

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  • Last Updated: September 17, 2020, 11:20 PM IST
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नी छुटपन क बात हीय. जब हम स्कूल में पढ़त रहलीं. लइकपना में बुढ़-पुरनिया लोगन की येह बात क बड़ा खिल्ली उड़ावल जाव की ‘बखत बदल जाला. बखत हरमेशा एक जईसन ना रहत.’ लेकिन जब आज कई तरह क घटना सुनल-देखल जाला त उनहन लोगन क बात इयाद आवे ले. एगो बात मन में बहुत बार आवे ले कि ओह समय में कवन कारन रहे की एगो अदमी दूसरे आदमी क एतना कदर करे. अदमी त छोड़ दिहीं, लोग-बाग पेड़-पालो, फूल-फल, चिरई-कउआ, गाय-बकरी, भईस-भाईसा, साढ़ सभकर समान भाव से कदर होखे. हमके इ इयाद ना ह कि कबों मरकहा गोरु छोड़ के कबहू केहू कवनो जीव के मरले होई. घरे में करयित कीरा निकल जाय त लोग ओकरा के मरले क ना सोचे. आग जलावे, हल्ला करे की उ भाग जाव. उ समाज एतना अहिंसक कईसे रहे? ओ समाज में इतना धैर्य कहाँ से आयल रहे? एतनी सहनशीलता ओ लोगन में कईसे समाईल रहे. आपस में तनी-मनी मनमोटाव होखे त लोग आस-पड़ोस में बईठ के सुलझा लेवें. कुछ लोगन के त इहो जरुरत ना रहे. आपस में सुलटा लेत रहलन जा. पंचाईत करे क हालत बहुत कम परे.

आज से वोह समय क तुलना कईले पर तनिको ना लागेला की कबों येह धरती पर एतना शांति रहल हिय. अंगरेजन की समय में अपनिए देश में कईगो जगह अयिसनो रहलीं स जहां पुलिस-थाना, कोरट-कचहरी क कवनो जरुरत ना रहे. एकर दुगो कारन रहे- एगो बात त इ कि केहू गलती ना करे आउर केहू क दे त खुदे सवीकार क ले. दूसर बात इ की लोग गलती करे वाला के सुधरले क मोका जरुर देवें जा. अईसन बखत कबहू रहे, इ आज समझल मुश्किल बा. आप एगो फीलिम देखीं- ‘तीसरी कसम.’ हिंदी क एगो बड़हर साहित्यकार फणीश्वर नाथ रेणु रहलन. इ फिलिम उनही क कहानी पर बनल बा. एकर जीकर इहाँ एसे करत हईं कि अजादी की पहिले आउर बाद में फरक हो गईल बा. कहानी इ ह कि एगो गाड़ीवान नवटंकी वाली बाई के लेके राती क अपनी बयलगाड़ी में चल जात बा. ओकरा पर एतना बिसवास बा की सवारी अपनी “सुरछा” के लेके कुछऊ ना सोचत/पूछत बा. आज त एतनी हालत ख़राब बा की जनाना समस्या सुने खातिर अलग से थाना बनावे के पर गईल ह.

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सनीमा में देखब की सवारी खातिर बात करे वाला मुनीब 30 रुपीया किराय पर बात क के 5 रुपीया पेशगी दे के चल गईल. ओकरा के गाड़ी से जाए के रहल. बईल गाड़ी चालक के बता दिह लस की जनाना सवारी ह. बस हो गयील. चालक ओकरा बतवले की अनुसार चल देत ह. इ देखले क कोशिश ना करत ह कि सवारी जनाना ह की कुछ आउर ह. उ चल देत बा आउर रस्ता में जब ओकरा के तनी शक-सुबहा होखे लागत बा तब देवता से अपनी रक्षा क दुआ करत बा आउर इहो कहत बा की सवारी के सही सलामत मेला पहुंचा देयिब.
सवारी बइठावे वाला, ले जाए वाला त हईये बाड़न स. एगो जनाना सवारी स्टेशन से बीस कोस दूर बईल गाड़ी में बईठ के जाए खातिर तईयार हो गईल बा. ओकरा के तनिको डर ना बा कि एतना दूर जाएके बा. रात बिरात क समय बा. अकेले बाड़ीं. कहीं रस्ता में गाड़ीवान कुछ क दे तब? सनीमा से पता चलेला कि ओकरा के एतना बिसवास ह की ओतना त आजकाल्ह केहू अपना घरे की अदमी पर ना करे पावेला. हिरामन अईसन संत आदमी की बईलगाड़ी में बईठल जनाना की बोलले के बादे ओकर मुह देखलन. इनसान क एतना कदर की का कहे के. आज एतना कदर त लोग माता-पिता क ना करे पावेला. दूसरे से का उमीद बा. एहिसे आज ओह कहानी क बात सपना जईसन लागेले. लेकिन जब अंगरेजी सरकार क गजेटियर तबकी लोगन की ईमानदारी पर लिखके बतावेला त ओकरा बात के मानेके परेला.

अब सवीकार कईले में कवनो हरजा ना ह की बखत बदल गईल. आज क बखत कईसन आ गईल बा की लोग-बाग़ कवनो छोट स्वारथ के चलते पहिले गलत काम करत ह, फिर खुद परशान होत बा आउर अपनी आसपास की लोगनो के परशान करत बाड़न जा. हमहन के इ सोचल जरुरी ह की इ सब काहे होत ह. आप देखी की अदमी के पेट भर खायल आउर नीमन पहिरल काहें बाउर लागत ह? हायधुन मचा के जेल गईले में कवन सुख बा. केहू रुपिया कमायल चाहत ह त ओकरा में कवनों बुरायी ना ह. लेकिन रुपिया कमयिले की पीछे लोग आपन आदमियत कईसे भुला जात ह, इ तनी विचार करे वाली बात ह. इकुल जवन होत बा, इ कहीं से कुछऊ बढ़िया करे क संकेत ना ह.

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एह तरे क जवन समस्या होखत बा, ओकरा पीछे क मूल कारन समझल जरुरी ह. जईसे की पहिले लोग पेड़ की नीचे बोरिया बिछा के पढ़त रहलन. अपनी सहपाठी से प्रेमो करत रहलन, लेकिन केहू पर कवनो तरह क दबाव केहू ना डाले. अईसन उदाहरन ना देखलीं की कवनो लईका अपनी बियाह कईले से मना क दिहले पर प्रेमिका के ऊपर तेजाब फेंक दिहले होखे. आज इ काहे होत बा? आज की पढ़ाई में कवनो खोंट बा का? आ फिर आदमी एतना लालची हो गईल बा की ओकरा के लालच की समने कुछ आउर ना देखात बाटे? कुछ त गलती होत बा. एपर बहुत गहिरा में जाके सोचले क जरुरत हिय. नहीं त धीरे-धीरे अपनों देश क एतना बढ़िया समाज माटी में मिल जाई. आप सब त जानिला की बने में देर लागेले, बिगरत देरी ना लागी.
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