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Bhojpuri: जौनपुर के सिराज-ए-हिंद काहें कहल जात रहल? पढ़ीं पूरी कहानी

Bhojpuri: जौनपुर के सिराज-ए-हिंद काहें कहल जात रहल? पढ़ीं पूरी कहानी

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बनारस से लखनऊ जाए वाले राजमार्ग पर जौनपुर शहर पड़यला. बनारस से लगभग 65 किलोमीटर दूर. जौनपुर भी काशी की नाईं पौराणिक अउर ऐतिहासिक महत्व क शहर हौ, लेकिन एकरे बारे में कम लोग जानयलन. शर्की शासनकाल में त इ नगर भारत में शिक्षा, संस्कृति अउर संगीत क केंद्र बनि गयल रहल.

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दिल्ली क सल्तनत जब युद्ध में उलझल रहल, शिक्षा, संस्कृति, संगीत के तरफ ध्यान नाहीं देइ पावत रहल, तब जौनपुर क शर्की सम्राज्य इ तीनों क्षेत्र में खूब तरक्की कइलस, अउर सिराज-ए-हिंद बनि गयल. सिराज क मतलब होला श्रेष्ठ.

मुहम्मद बिन तुगलक जब 1351 में एक युद्ध के दौरान आज के पाकिस्तान में थट्टा नाव के स्थान पर मारल गयल, तब ओकर चचेरा भाई अउर दिल्ली क बादशाह फिरोजशाह तुगलक 1359 में ओकरे याद में जौनपुर नगर क स्थापना कइलस. मुहम्मद बिन तुगलक क असली नाव जौना खान रहल. नए नगर क नाव एही के नाते जौनपुर रखल गयल. कुछ साल बाद फिरोजशाह क लड़िका सुल्तान महमूद अपने एक मंत्री मलिक सरवर या ख्वाजा जहान के मलिक-उस-शर्क (पूरब क स्वामी) क उपाधि देइ के सन 1388 में जौनपुर क सूबेदार बनाइ देहलस. दिल्ली क सल्तनत जब युद्ध में उलझल रहल तब मौका पाइ के सरवर 1393 में अपुना के स्वतंत्र घोषित कइ देहलस, अउर शर्की सम्राज्य क स्थापना कइलस. सन् 1397 में मलिक सरवर दिल्ली क अधीनता मानय से इनकार कइ देहलस. शर्की सम्राज्य क विस्तार इटावा से बंगाल तक अउर विंध्याचल से नेपाल तक फइलल रहल. सन 1398 में मलिक क मउत होइ गइल. गद्दी पर ओकर गोद लेहल लड़िका सैयद मुबारक शाह बइठल. एकरे बाद सम्राज्य क बागडोर ओकर छोट भाई इब्राहिम शाह शर्की के हाथे आयल.

इब्राहिम शाह बहुत कुशल शासक साबित भयल अउर ओकरे जमाने में जौनपुर तेजी के साथ हर क्षेत्र में तरक्की कइलस. इब्राहिम अपने राज्य में कई शानदार मस्जिद, मकबरा अउर मदरसा क निर्माण करउलस, जवने में से कई आज भी मौजूद हयन. कला, शिक्षा अउर संगीत के क्षेत्र में जौनपुर भारत में नंबर एक होइ गयल रहल. बतावल जाला कि इब्राहिम शाह शर्की ईरान से एक हजार आलिम यानी विद्वानन के अपने राज्य में बोलवइलस. इ सब विद्वान लोग जौनपुर में शिक्षा क मजबूत बुनियाद रखलन. नतीजा इ भयल कि जौनपुर के सिराज-ए-हिंद बोलावल जाए लगल. आज भी प्रशासनिक सेवा में उत्तर प्रदेश से सबसे जादा लोग जौनपुर क ही हयन.

शर्की सम्राज्य क अंतिम शासक हुसैन शाह शर्की रहल. हुसैन शाह संगीत क अतिशय प्रेमी रहल. सन् 1458 में गद्दी संभरले के बाद उ अपने राज्य में संगीत के खूब बढ़ावा देहलस. हुसैन शाह खुद शास्त्रीय संगीत क जानकार रहल, अउर कई राग, ख्याल क रचना कइलस. हुसैन शाह के जमाने में जौनपुर संगीत क सिराज बनि गयल रहल. इ अइसन दौर रहल, जब दिल्ली क सल्तनत युद्ध में फंसले के नाते कला, साहित्य, संगीत, शिक्षा पर ध्यान नाहीं देइ पावत रहल. शर्की सम्राज्य इ कुल विधा के संरक्षण देहलस. इहां समा संगीत के भी बचावय, बढ़ावय क काम भयल. बाद में समा संगीत अमीर खुसरो के समय तक आवत-आवत कव्वाली में बदलि गयल. हुसैन शाह संगीत, नृत्य के एतना महत्व देय कि कई बार दुश्मन क सेना जौनपुर के तरफ बढ़त रहय, लेकिन उ एह खबर क भी अनदेखी कइ देय. कहल जाला कि हुसैन शाह के समय में कवि अउर संगीतकारन क बहुत इज्जत रहल. हर दर-दीवार से संगीत क फौव्वारा हमेशा फूटल करय. नृत्य-संगीत क बड़ा-बड़ा आयोजन होय, देश-विदेश से लोग शामिल होयं.

भारतीय संगीत में भक्ति संगीत के आगे बढ़ावय में भी हुसैन शाह क बहुत बड़ा योगदान हौ. इहय दौर रहल, जब संत नामदेव, रैदास, गुरु नानक, अउर कबीर के बहुत शौक से गावल अउर सुनल जात रहल. हुसैन शाह अनगिनत राग अउर श्याम क आविष्कार कइलस. मुख्य रूप से मल्हार श्याम, गौर श्याम, भोपाल श्याम, मेघ श्याम, वसंत श्याम, कोहनूर श्याम, सोहो श्याम, राम श्याम, बरारी श्याम, श्याम गोदानी, घुंड श्याम अउर पूर्वी श्याम शामिल हयन. एकरे अलावा उ चार तोड़ी क भी आविष्कार कइलस, जवने में आसवरी तोड़ी (जौनपुरी आसवरी), रसुई तोड़ी, बेहमालय तोड़ी, अउर जौनपुरी वसंत शामिल हयन. हुसैन शाह शास्त्रीय संगीत क एतना गिधवा रहल कि कुछ राग अउर तोड़ी मिलाइ के एक अइसन प्रयोग कइलस, जवन बहुत मशहूर भयल.

हुसैन शाह अपने संगीत प्रेम के नाते सम्राज्य के सुरक्षा क ठीक से ध्यान नाहीं देइ पइलस. दिल्ली के सुल्तान बहलोल लोदी से उ कई युद्ध लड़लस, लेकिन हुसैन शाह के हर दइयां हार क सामना करय के पड़ल. अंत में 1484 में बहलोल लोदी शर्की सम्राज्य के दिल्ली सल्तनत में मिलाइ लेहलस. हुसैन शाह बंगाल भागि गयल, जहां सुल्तान अलाउद्दीन ओहके शरण देहलस. जिनिगी क आखिरी समय ओकर ओही ठिअन बीतल.

(सरोज कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Bhojpuri News, गोरखपुर

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