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Bhojpuri: इहे हाल रही त खाली फोटो में नीलकंठ महाराज के दर्शन होई

Bhojpuri: इहे हाल रही त खाली फोटो में नीलकंठ महाराज के दर्शन होई

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दशहरा के दिन बीति गइल.देश के राजधानी में दिल्ली में कोरोना माई के चलते एह साल रावण दहन के लोग ना देखि पावल.दिल्ली में दशहरा के दिन रावण, कुंभकर्ण आ मेघनाद के दहन के कार्यक्रम उत्साह के प्रतीक ह.दिल्ली में रहत दशकन गुजरि गइल.लेकिन हमनीं के गांव ना भुलाइल.

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गांव के दशहरा के त्योहार अबो याद बा..तब बच्चा सब के उत्साह रहत रहे दशहरा के मेला देखे के.बाकिर बुजुर्ग लोगन के दोसरे चिंता रहत रहे.दशहरा के दिने छोटका बाबा पक्का सरेह के ओर निकलि जात रहले..बगइचा के फेंड़न पर.खेत से गुजरत बिजुली के तार पर, खेतन में खाड़ा बिजुली के खांभा पर.फुलवारी में उ टकटकी लगवले बढ़त रहले.सुरू में जब ढेरे छोट रहनीं जा त ना बुझाई कि अजिया, इया, मइया, जयमूर्ति बाबा, नथून बाबा दशहरा के दिने का खोजेला लोग.

बाद में पाता चलल कि ऊ लोग नीलकंठ के देखे खातिर आताना कोशिश करेला..ओह घरी बगइचा में..पिछुआरी के निमि के फेंड़ पर, बंसवारि में.घर से थोड़की दूर रहे सीसो आ बड़हर के फेंड़ पर नीलकंठ रोजे लउके.लेकिन ऐन दशहरा के दिन गायबे हो जात रहे.जइसे ओकरा पता रहत रहे कि आजु हामार दिन ह..आ लोग हमरा के खोजि.

एह खोज-परख में जेकरा नीलकंठ के दर्शन हो जात रहे.ऊ आपाना के बहुते भाग्यशाली मानत रहे.
नीलकंठ पक्षी के दशहरा के दिन देखे के पीछे पौराणिक कहानी बा.कहल जाला कि दस सिर आ बीस हाथ वाला रावण के लंका युद्ध में भगवान राम मारि ना पावत रहले.नाभि के अमृत ओकरा के मुअहिं ना देत रहे..एह से रामजी बहुते चिंता में रहले..जब दशहरा के दिने रामजी युद्ध के मैदान में जाए लगले त उनुका के औघड़दानी भगवान शंकर नीलकंठ रूप में दर्शन दिहले.ओकरा बादे भगवान राम, रावण के बध करे में सफल भइले.कथा बा कि एही वजह से दशहरा के दिने नीलकंठ देखे के सनातन परंपरा में रेवाज बा.
नीलकंठ से जुड़ल एगो अऊरी कथा बा.आ उहो रामेजी से जुड़ल बा..

कथा के मोताबिक, रावण बध के बाद भगवान राम के ब्रह्म हत्या के पाप लागि गइल.एकरा से छुटकारा खातिर रामजी जगि कइले.ओह जगि में भगवान शंकर नीलकंठ रूप में रामजी के दर्शन दिहले.आ ब्रह्महत्या से उनुका मुक्ति भइल.एह वजह से दशहरा के दिन नीलकंठ के दरशन सनातन परंपरा में सौभाग्य के परतीक मानल जाला.

हमनीं के जवना जुग आ समाज में बानी जा.ओह में हमनी के यूरोप-अमेरिका के पशु-पक्षी के लोप भइला के बाड़ा चिंता रहेला.लेकिन आपाना गांव घर के चिरई-चुरूंग आ पशु के लोप भइला के चिंता नइखे.दुनिया के लोगनि संगे हमनियों के ह्वेल के बचावे खातिर बाड़ा चिंतित रहेनी जा..लेकिन काताना लोगन के एह बात के चिंता बा कि नीलकंठो नाम के एगो पक्षी होला.आ ऊ अब कमे लउकत बा..

नीलकंठ के दशहरा पर देखल सुभ होला त हमनी के समाज ओकरा के बचावे खातिर बाड़ा चिंतित रहत हा.
पक्षी विज्ञानी लोगन के मोताबिक, नीलकंठ हमनी के खेती-परंपरा के बड़का सहयोगी पक्षी ह.खेती के नोकसान पहुंचावे वाला किरकिच आ पौधा खाये वाला तमाम कीड़ा ओकर भोजन हवन स.एह कीड़न के खाइ के नीलकंठ ना सिर्फ परिस्थिति तंत्र के संतुलन बनवले राखत रहल हा..बल्कि खेती में किसान के सहयोगो करत रहल हा.

अब चूंकि खेती में कीड़ा नाश करे वाला रसायनन के बहुते इस्तेमाल होता.त जाहिर बा कि ओह के वजह से कीड़वा मुअत बाड़े स.आ उहनि के खाइ के नीलकंठों कम होत जाता..इहे हालि घर के चिरई गौरैया आ गिद्ध के भी हो गइल बा.

गौरैया चिरई खातिर त लोगन के चेतना जागल बा.दिल्ली सरकार ओकरा के आपन राज्य पक्षी घोषित कइ देले बा.तबो गौरैया के संख्या कम से कम दिल्ली में बढ़त त नइखे लउकत.एकर वजह पर शहरी सभ्यता.रोजाना मचत चिल्ल-पों.कार-ट्रक-बस के शोर.कोरोना माइ के चलते जब लॉकडाउन भइल रहल हा.तब चिरई बाड़ा खुश रहलि स.उहनि के लागल कि समाज बदलि गइल.लेकिन अब चिरइन के सपना टूटि गइल..जीडीपी माई के बढ़ावे खातिर एक बार फेरू दुनिया जुटि गइल बिया.अब जीडीपी बिना शोरशराबा, कार-बस दउरल आ हाला कइल कइसे बढ़ी.

बाकिर हर त्योहार आ ओकरा से जुड़ल प्रकृति के कवनो परंपरा हमनी के हर बार इहे यादि दियावेला कि कतनो जीडीपी बढ़ा लीं जा.हमनी के बुनियादी जीवन प्रकृति के संगेसाथ बा.दशहरा के बहाने नीलकंठ के यादि ओहि के परतीक बा.वक्त आ गइल बा कि हमनीं के आपाना तीज-त्योहार के मरम समझिं जा.आ आपन संस्कृति आ प्रकृति के धेयान रखीं जा.

(उमेश चतुर्वेदी वरिष्ठ पत्रकार हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Bhojpuri Articles, Bhojpuri News

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