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Bhojpuri: राजनीति में ‘चप्पल चापलूसी’ के बखान

Bhojpuri: राजनीति में ‘चप्पल चापलूसी’ के बखान

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“साध्वी उमा भारती के कबो धर्म, ज्ञान अउर संस्कार के मूरती मानल जात रहे। ओजस्वी वक्ता रही। भाजपा नेता के रूप में उनकर बहुत मान-सम्मान रहे। लेकिन अब लागत बा कि निराशा के चलते उनकर ज्ञान के गंगा सुख गइल बाड़ी। भला बतावs कि उनका जइसन नेता के अतना अपमानजनक बात बोले के चाहीं।

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  • News18Hindi
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साध्वी उमा भारती कहले बाड़ी, ब्यूरोक्रेसी कुछ नहीं होती, चप्पल उठाने वाली होती है, चप्पल उठाती है हमारी। एक बेर मुखमंतरी अउर 11 साल तक केन्द्र में मंतरी रह वला नेता अइसन गैरजिम्मेदाराना बयान दे सकेला ? का सरकारी अफसर के बहाली नेता के चप्पल-जूता उठावे खातिर होला ?” रंगनाथ बहुत रोष में रहन। ऊ आगा कुछ अउर बोलते कि मनिकांत रोक के कहले, उमा भारती नौकरशाही के काहे कोस रहल बाड़ी ? राजनीति में तs ‘चप्पल चापलूसी’ के अनगिनत कहानी बा। छोटका नेता आपन किस्मत चमकावे खातिर बड़का नेता के जूता-चप्पल उठावे में तनिको शरम महसूस ना करस।

सरकारी मुलाजिम से जूता पेन्हले मंतरीजी

मनिकांत के बात पs रंगनाथ कहले, सवाल बहुत विकट बा। का लोकतंत्र में कवनो मंतरी भा पूर्व मंतरी, सरकारी कर्मचारी के गुलाम समझ सकेले ? जहां जनता के शासन बा उहां केहू सामंतवादी सोच कइसे बर्दाश्त करी ? भाजपा के बहुत नेता के सोच उमा भारती के जइसन बा। दू साल पहिले योग दिवस (21 जून) के बात हs। यूपी के मंतरी लक्ष्मी नारायण चौधरी शाहजहांपुर के कार्जक्रम में शामिल भइल रहन। योग कइला के बाद उनका जूता पहिने के रहे। लेकिन जूता पेन्हे खातिर उनका से निहुरल ना गइल। झुक के जूता के फीता बान्हल उनका खातिर मोसकिल रहे। तब मंतरी जी के एक सरकारी कर्मचारी उनका जूता पेन्हावे लागल। एकर फोटो अखबार टीभी में आइल तs बाबल मच गइल। बाद में मंतरी जी सफाई देवे लगले कि अगर कवनो भाई-भतीजा सम्मान में गोड़ छू के परनाम करे चाहे जूता पेन्हा दे तs एकरा में दिक्कत के बात बा। ई तs उमिर में बड़ के प्रति छोट के लेहाज हs। यूपी के मंतरी लक्ष्मी नारायण चौधरी तs लाज बचावे खातिर अतनो बात कहले रहन लेकिन उमा भारती तs खुल्लमखुल्ला सरकारी अफसरन के बिना औकात वला बता देली।

संजय गांधी के चप्पल उठावे खातिर होड़

मनिकांत कहले, सरकारी कर्मचारी तs मजबूरी में नेता के जूता-चप्पल उठावे ले लेकिन नेता तs राजनीतिक फैदा खातिर ई काम करे ले। इमरजेंसी में जब संजय गांधी के तूती बोलत रहे तs ओह घरी कांग्रेस के बड़का-बड़का नेता उनकर चप्पल उठावे खातिर होड़ कर देत रहन। राजनीति में एकरा के ‘चप्पल चापलूसी’ कहल जाला। संजय गांधी 1976 में लखनऊ गइल रहन। ओह घरी उत्तर प्रदेश के मुखमंतरी रहन नारायण दत्त तिवारी। कांग्रेस में दरी-सफेदा पs बइठ के मीटिंग के परिपाटी रहे। आजो बा। मीटिंग के बाद संजय गांधी आपन कोल्हापुरी चप्पल पेन्हे के खातिर आगा बढ़ले तs नारायण दत्त तिवारी चप्पल उठा के उनका के पन्हावे लगले। ओतना अदिमी के सामने एक मुखमंतरी के चप्पल उठावे में कवनो शरम महसूस ना भइल। संजय गांधी कवनो पद पs ना रहन अउर उमिर में भी बहुत छोट रहन लेकिन नारायण दत्त तिवारी आपन कुर्सी सलामत राखे खातिर ‘चप्पल चापलूसी’ करे से बाज ना अइले। इमरजेंसी में संजय गांधी के चप्पल उठावल कांग्रेस के नेता आपन सौभाग्य समझत रहन। 1976 में ही संजय गांधी बिहार आइल रहन। ओह घरी बिहार कांग्रेस के भी एगो नेता संजय गांधी के चप्पल उठा के आपन किस्मत संवरले रहन। बाद में ऊ कांगरेस के अध्यक्ष भी बनले। कहल जाला कि जब शकंर राव चव्हाण महाराष्ट्र के मुखमंतरी रहन तs उहो संजय गांधी के चप्पल उठवले रहन।

अब राहुल गांधी के खुशामद में ‘चप्पल चापलूसी’

मनिकांत के बात जारी रहे। संजय गांधी के जमाना में शुरू भइल चप्पल चापलूसी आज तक कायम बा। अब राहुल गांधी के चप्पल उठावे खातिर कांग्रेस में होड़ मचल बा। 2010 में संजय गांधी मुम्बई के दौरा पs गइल रहन। घाटकोपर में कार्जक्रम रहे। रमेश बागवे महाराष्ट्र के गृह राज्यमंत्री रहन। रमेश बागवे, राहुल गांधी के खुशामद खातिर सभ सीमा पार कर देले। ऊ राहुल गांधी के जूता उठा के उनकर गोड़ के सामने राख देले ताकि पेन्हे में कवनो दिक्कत ना होखे। 2015 में राहुल गांधी पांडेचेरी के जातरा पs गइल रहन। उनका बाढ़ प्रभावित इलाका के दौरा करे के रहे। उनके साथे कांगरेस के सांसद वी नारायणसामी भी रहन। नारायणसामी मनमोहन सिंह के सरकार में मंतरी रह चुल रहन। बाद में पांडेचेरी के मुखमंतरी भी बनले। जब राहुल गांधी बाढ़ के पानी पार करे खातिर आपन चप्पल उतरले तs नारायणसामी ओकरा के अपना हाथ में उठा लेले। पानी पार कइला के बाद नारायणसामी राहुल गांधी के जब चप्पल देले तs ऊ बिना कवनो झिझक के पेन्ह भी लेले। 68 साल के नारायणसामी 45 साल के राहुल गांधी के चप्पल उठा के खुशी महसूस कइले अउर राहुल गांधी के कवनो पछतावा भी ना भइल। बाद में नारायणसामी बेयान देल रहन, मुझे गर्व है कि मैंने राहुल गांधी की चप्पल उठायी। मनिकांत के बात पS रंगनाथ कहले, राजनीत में कतना लोग मेहनत अउर संघर्ष से आगा बढ़ेला अउर केतना लोग चापलूसी से। चमचा संस्कृति के बढ़ावा मिले से ही आज राजनीति में गिरावट आ रहल बा।

(अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं. आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Bhojpuri News

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