Bhojpuri: बिहार में बिधायक के सवा लाख से बेसी महीना तब्बो संतोख नइखे!

पूर्ब मुखमंतरी जीतन राम मांझी जी (Jeetan Ram Manjhi) अबहूयों बिधायक बाड़े. लेकिन एक लाख के बिजली बिल आ गइल तs छूट खातिर नीतीश जी (Nitish Kumar) के चिट्ठी लिख दिहले. कहे लगले कि हमार तs एतना महिने नइखे कि अतना रोपेया के बिल दे सकीं. उनकर कहनाम बा कि हमरा पांच हजार यूनिट तक ले बिजली फिरी मिले के चाहीं.

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जगदेव लाल के लइका बम्बई में कमात रहे. फेन लौकडाउन लागे के चरचा से उनकर मन बेचैन रहे. पिछला बेर उन कर लइका छव महीना घरे बइठल गइल रहे तs हालत डांवांडोल हो गइल रहे. अबकी काम छूटी तs का होई ? जगदेव लाल के चिंता में डूबल देख के भोलानाथ पूछले, कवना फिकिर में बेहाल बाड़s भाई ? सवाल सुन के जगदेव लाल चिंहुकले, अरे का कहीं ? घर गिरहस्ती के चिंता से माथा खराब बा. कइसे घर चली, कइसे इज्जत-हाल सम्हरी ? समझ में नइखे आवत. अतने में असरफी लाल हाथ में अखबार लेल पहुंच गइले. जगदेव लाल के बात सुन के असरफी लाल कहले, अजब समय आ गइल बा. एक देने तीन -चार बिगहा के गिरहस्त परसान बाड़े तs दोसरा देने बिधायक-मंतरी लोग भी पइसे के रोना रो रहल बाड़े. अब देख लs पूर्ब मुखमंतरी जीतन राम मांझी जी के. अबहूयों बिधायक बाड़े. लेकिन एक लाख के बिजली बिल आ गइल तs छूट खातिर नीतीश जी के चिट्ठी लिख दिहले. कहे लगले कि हमार तs एतना महिने नइखे कि अतना रोपेया के बिल दे सकीं. उनकर कहनाम बा कि हमरा पांच हजार यूनिट तक ले बिजली फिरी मिले के चाहीं. बिहार में बिधायक लोग के सभ जोड़जाड़ के करीब एक लाख तीस हजार रोपेया महीना मिलेला. ऊपर से कइक गो फिरी सुबिधा भी. अगर केहू के 1 लाख 30 हजार रोपेया में पोसाई नइके खात तs गांव में हमनी लेखा गरीबन के जिनगी कइसे चल रहल बा ?

बिधायक लोग के केतना मिले के चाहीं सुविधा ?

अतना बात सुन के भोलानाथ कहले, जनता गरीब अउर कर ओकर परतिनिधि अमीर कइसे हो सकेला ? झूठमूठ के कहल जाला कि लोकतंत्र में जनता मालिक हs. भोट में एक दिन के मालिक, फेन पांच साल तक परजा. नेता लोग के अतना सुख-सुविधा काहे मिले के चाहीं ? भोलानाथ के बात सुन के जगदेव लाल कहले, ई सवाल तs हर अदिमी के मन उठत रहे ला. 2017 में सुपरिम कोर्ट में रिट फाइल कर के मांग कइल गइल रहे कि पूर्व सांसद लोग मिले वला पिनसिन अउर सुविधा खतम कर दिहल जाव. रिट में सवाल उठावल गइल रहे कि जब एक सै में बेरासी सांसद करोड़पति बाड़े तब उनका पिनसिन देला के का मतलब बा ? ई तs देश के गरीब जनता के माथा पs बड़का बोझा बा. लेकिन ऐह मामला में बिचार करे से सुपरिम कोर्ट इनकार कर देलस. जज लोग के कहनाम रहे कि ई बिषय हमनी के अधिकार क्षेत्र से बाहर बा. बिहार में दू साल पहिले ही बिधायक लोग के महीना बढ़ल रहे. अब एहिजा के बिधायक लोग के 1 लाख 30 हजार के महीना भी कम्मे लागत बा.

एक्के नेता के दू-दू पिनसिन
अमीर-गरीब के बात निकल तs जगदेव लाल के मन कुछ हलुक भइल. कहले दुनिया में जे बा से दुखिये बा. असरफी लाल कहले, नेता लोग अमीर-गरीब के बात हमनी जइसन अदिमी के मुरुख बनावे खातिर करे ले. हमनी के लड़ावे खातिर करे ले. लेकिन जब आपन तिजोरी भरे के होला तs सभ लड़ाई-झगरा छोड़ के एक हो जाले. 2004 में केन्द्र सरकार नियम बनवले रहे कि अगर केहू एक दिन के खातिर भी सांसद बन जाई तs ओकरा के पूर्ब सांसद के रूप में पिनसिन अउर तमाम सुविधा मिली. पहिले चार साल सांसद रहला के बादे केहू पिनसिन के हकदार होत रहे. अब बताव कि अगर केहू एक दिन के सांसद हो जाए अउरी 40 साल तक ले जिंदा रहे तs ओकरा जिनगी भर 20 से 25 हजार के पिनसिन मिलत रही. बिहार में कम से कम एक साल बिधायक रहला पs 35 हजार रोपेया के पिनसिन मिलेला. अगर कवनो पूर्व सांसद बिधायक बन जइहें तब उनका बिधायक के रूप में 1 लाख 30 हजार के महीना अउर पूर्ब सांसद के पिनसिन के रूप में 25 हजार रोपेया भी मिली. अगर ऊ बिधयाक चुनाव हार जात बाड़े तब उनका मतलब दूनो पिनसिन (पूर्ब सांसद, पूर्ब बिधायक) मिली. अब सोच लs कि कवनो सरकारी करमचारी के रिटायर भइला पs एक्के पिनसिन मिलेला. अब तs उहो खतम हो गइल. लेकिन अगर कोवनो नेता दू सदन के सदस्य रह चुकल बाड़े तs उनका दूनो के पिनसिन मिली. ई भारत जइसन गरीब देश में कतना ठीक कहल जाई?

बिहार में बिधायक के 2000 यूनिट फिरी बिजली

असरफी लाल कहले, बिहार में बिधायक लोग के 2000 यूनिट बिजली पिरी मिलेला. जीतन राम मांझी के भी ई सुबिधा मिल रहे. लेकिन उनकर कहनाम बा कि उनका पूर्ब मुखमंतरी होखे के नाते बेसी सुविधा मिले के चाहीं. ऊ नीतीश कुमार से मांग कइले बाड़े कि पूर्ब मुखमंतरी के 5000 यूनिट बिजली फिरी अउर 15 साल तक ले फिरी आवास के सुविधा मिले के चाहीं. ई कोरोना के महामारी में जहां आम जनता के पेट भरल मोसकिल बा उहां अइसन मांग के का कहल जा सकेला ? बिहार सरकार पिछिला साल कोरना संकट में छव महीना फ्री राशन देले रहे तs केतना चर्चा भइल रहे. असरफी लाल कुछ सोच के कहले, बिहार में कवनो नेता ई मांग काहे नइखन करत कि अगर परदेस में केहू के नौकरी छूट जाई तs ओकर पांच साल के टोटल खर्ची सरकार उठाई. जनता के देवेघरी सरकार के खजाना में ताला लाग जाला. नेता लोग ना जाने कहिया गरीब जनता खातिर सोंचिहें ? ई बात सुन के जगदेव लाल कहले, अब तs भगवाने बेड़ा पार लगइहें. (डिस्क्लेमर- लेखक अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)
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