Bhojpuri: पारधानी के चुनाव में भउजी के वोट देला प मिली त भइये के!

पारधानी के चुनाव में फगुनहट के ढेर असर भउजी लोगन के मोरचा साम्हारला से हो गइल बा. बाङाल में त बिहारे के बेरि से चुनावी माहौल बने लागल रहे. ऊ त भाजपा के लोग हैदराबाद नगर निगम चुनाव में रोड पर उतरि गइल त लागल कि संसद आ विधानसभा से कम निकाय आ पंचायत चुनाव भी नइखन स.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 10, 2021, 11:58 AM IST
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फगुनहट के हावा अभी बहते बा. ओसहिं बहता जइसे फगुआ से पहिले बहत रहे. चइतो प फगुए लेखा फागुन के पूरा असर बा. आ सबसे जादा असर बुझाता पारधानी के चुनाव में. कहे के त चुनाव जिला पांचाएत सदस्य आ बीडीसी के होत बाटे, बाकिर गांव-गांव नांव त ऊपर पारधानिये के बा. ओसहिं जइसे एमे कइला के बादो बीए कइ लेबे के बड़ बुजर्ग लोग आसीर्बाद देत रहेला.

पारधानी के चुनाव में फगुनहट के ढेर असर भउजी लोगन के मोरचा साम्हारला से हो गइल बा. बाङाल में त बिहारे के बेरि से चुनावी माहौल बने लागल रहे. ऊ त भाजपा के लोग हैदराबाद नगर निगम चुनाव में रोड पर उतरि गइल त लागल कि संसद आ विधानसभा से कम निकाय आ पंचायत चुनाव भी नइखन स.

ओही बीचे पूर्वांचल में भी पांचाएत चुनाव आङाड़ाई लेबे लागल रहे. किसान आंदोलन में राकेस टिकेत के आंसू त जइसे चुनावी आगि के फइलावे में घीव के काम कइलसि - किसान के के कहे, सभे पाटी के नेता लोगन में माहा पांचाएत करेके होड़ि लागि गईल. जांहां देखीं तहवें माहा पांचाएत.

बड़े बड़े लोग त आपना आपना तरीका से तेयारी में लागले रहे, गांव गांव में भी लोग दोकानि-दउरी आ बाकी काम धाम छोड़ि के सामाज सेवा में कूदि पड़ल. पहिले त टाप्पा-टुइयां लोग मदद में कारसेवा सुरू कइले रहे, देखते देखत गांव गांव एकेके टोला में कई कई जाना बिना जरूरतो के मदद में टपकि पड़ले.
केहू टेक्टर पर बइठा के गाङा स्नान करावे खातिर माहाला भरि के लोग के घाटे ले जाए लागल. त ईहो देखे के मिले लागल कि कहीं मुआला-जिआला में जवन लोग झांकहूं ना जात रहे ऊ बड़ बुजर्गनि के अर्थी के कान्हा देत फेसबुक प फोटो डाले लागल रहे. रोज रोज नाया नाया चामचामात फोटो बरसे लागल रहे. गाला में गामछा त कापार पर पगड़ी. आंदोलन राफ्तार पकड़त रहे पच्छिम यूपी में, आ कुकुरमुत्ता लेखा किसान के डरेस में लोग जाहां ताहां लउके लागल पूर्वांचल में - जेकारा जाबान से गांवों में खड़ी बोली के आलावा कवनो बात ना निकलत रहे - ऊहो खांटी भोजपुरी बोले लागल. आ बोलले के के कहो, फेसबुको पर भोजपुरी लिखाए लागल. जइसे अन्हरिये में अंजोरिया आ गइल होखे.

तबे एक दिन पाता चलल कि कई गो सीट आरक्षित आ सुरक्षित हो गइलि स. एके झाटका में सबके सामाज सेवा जवन गाङा के धार लेखा उफान लेत रहे, बाढ़ि लेखा ओहरि के एके हाली पाटा गइल. फेसबुक पोस्ट के भी भासा बदलि गइल. भोजपुरिओ गाएब हो गइल. जवन लोग आपाना के सबसे जोगि पारत्यासी बातावत रहले, अब ऊहो फेसबुक प बाकी लोगन के सामझावे लगले कि सोचि समझि के वोट दीह भाई लोग. सभे भावी पारत्यासी आचानके से भूतपूर्व हो गइले, आ नाया खिलाड़िन खातिर उपदेस के दौर सुरू हो गइल.

जाहां जाति के आधार प सीट आरक्षित हो गइल ऊहां त बहुत लोग के बस ना चलल, बाकिर महिला सीट घोसित होते बहुते लोग के चेहरा खिलखिला गइल - देखते देखत भउजी लोग के आगे कइके भइया लोग पीछे हो गइले. अब भइया लोग फेरू एक्टिव हो गइल बा, बाकिर वोट मांगता भउजी के नाम पर.



जावाना कनिया के घूघ कबो ऊपर ना उठत रहे, उनुको फोटो खिंचा के पोस्टर बाना दीहल गइल. भरि माङ सेनुर लगवले आ हाथ जोड़ले जवन दुलहिन सोहाग के आसीर्बाद मांगति रहली अब घूमि घूमिके वोट माङतारी. का ससुर, आ का भसुर वोट खातिर सब लाज लेहाज पीछे छूटि गइल बा. कहीं कहीं त इहो सुने के मिलता कि जवन दुलहिन भसुर से छुआए से बचत रहली, ऊ वोट खातिर जाके गोड़ लागि लीहली. अब चुनाव बीती त भसुर जी के खीर बाना के खिअइहें.

महिला सीट के एलान के बाद सबसे बड़ नमूना त बलिया जिला में देखे के मिलल हा. मुरली छापारा बालाक के गाराम पांचाएत सिवपुर करनछपरा के रहे वाला जितेंदर सिंह हाथी कई साल से पारधान बने के सापाना साकार करे में जुटल रहले. 2015 के पारधानी के चुनाव में दोसरा नंबर पर रहि गइल रहले. अबकी पूरा उमेदि रहे कि नाइ पार लागि जाई.

जितेंदर सिंह हाथी सामाज सेवा खातिर कबो बिआह ना करे के फैसला कइले रहले. कहत रहले कि ऊ आपन पूरा जिनिगी गांव-गिरावं के लोगन के सेवा में बिता दीहें, लेकिन जइसहीं सिवपुर करन छपरा महिला सीट बाना दीहल गइल, जितेंदर सिंह हाथी के सङकलप एके झाटका में चारचारा के टूटि गइल.

जितेंदर के करीबी लोग सालाह दीहल कि अब सेवा के तरीका बदलि द. अब जल्दी से बिआह कई ल आ भउजी के पारधानी के चुनाव लाड़ाव. मुस्किल ई आइल कि बिआह के लगनो न रहे. फेरु लोग सामझावल कि जइसे प्यार आ जङ में सब जायज होला - ओसहीं इहो त चुनावे के जङ ह. एहू में त सब जाएजे काहाई.

मोका देखते सब नाता रिस्तेदार एक्टिव हो गइले आ बिहार के छापारा के खलपुरा, नेवतरी गांव में दुलहिन भी खोजा गइली - निधि सिंह. फेरु त केहू आव देखल ना ताव देखल सीधे 26 मार्च के छपरे के धरमनाथ मंदिर में जितेंदर आ निधि के बिआह कारा दीहल गइल.

अब निधि सिंह सिवपुर करन छपरा से पारधानी के चुनाव में कूदि पड़ल बाड़ी - भइया के नाव पर लोग भउजी खातिर वोट मांगता. वोट त लोग भऊजी के दीही लोग, बाकिर मिली त भइये के.

जितेंदर सिंह हाथी भले ही घर में पारधानी के राहि खोजि लेले होखसु, बाकिर ए दुनियां में कवनो चीजु आताना आसान होखेला काहां - नवकी भउजी के अब गांव के पुरनकी भउजी आ चचिआसासु लोग से कम्पटीसन मिले लागल बा.

अब जाहां जाहां महिला सीट घोसित हो गइल बा, पारधान के कुर्सी पर काबिज होखे में जुटल सभे लोग आपना आपना मेहरारू के मोरचा पर उतरले जाता. पहिले गांव में जादा से जादा दूगो तीनि गो पारधान के उम्मीदवार होत रहले हा, अबकी बार त एके टोला से चारि चारि गो महिला हाथ जोड़ले वोट मांङे निकलि पड़ल बाड़ी लोग.

गांव के देवालि से लेके फेसबुक के टाइमलाइन आ व्हाट्सऐप तक पोस्टर के बउछारि हो रहल बा. जेकारा चुनाव लड़े के बा ओकर फोटो बाद में, आ उनुका से पहिले उनुका पति बाबू के फोटो लागावल गइल बा. नाव त पोस्टर पर भउजिओ के बा, बाकिर उनुकरो परिचय भइया के पत्निये के रूप में दीहल जाता.

कइगो त अइसनो कीसा सुने के मिलल हा कि भउजी के मालुमे नइखे कि ऊ पारधानी के चुनाव लड़ तारी. भउजी खाली फोटो में बाड़ी आ माएदान में भइया घूमि घूमि के वोट माङ तारे - भोरे भोरे घर से निकलि जाता लोग त आधा राति के घरे लौटता लोग.

भउजी के कहीं आता पाता नइखे, बाकी चुनाव पारचार चरम प बा. मेहरारूनि के टोली अलगे बनल बा. पति बाबू अलगे वोट माङ तारे. लइकनों के बाहारि बा. जोर जोर से नारा लागावत घरे घरे जाके गोड़ छूइ रहल बाड़े स.

मालूम होता कि भउजी त मायके से नामांकन के दिने अइहें. ओकारा बाद ऊहो चुनाव पारचार में जुटिहें, तले गली गली जिंदाबाद त होते बा. अब सोचीं सभे जब भउजी चुनावे अइसे लड़ तारी त जीति के का करिहें. जइसे भउजी के वोट देला प भइया के मिलेके बा - ओइसहीं कुरसी प त भउजी बहिठिहें, बाकिर कलमि त भइया के हाथे में ही रही. (डिस्क्लेमर- लेखक सत्या दुबे वरिष्ठ पत्रकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)
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