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Bhojpuri: जेकर केहू ना होला, ओकरा संगे भोलानाथ रहेले

Bhojpuri: जेकर केहू ना होला, ओकरा संगे भोलानाथ रहेले

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कहल जाना कि भगवान शंकर सभके देवता हउवन अउर उनकरा के पावे के खातिर बहुत योग-साधना के जरूरत ना होखेला. एह तरह के मान्यता पता नाहीं केतना शास्त्र सम्मत बा, लेकिन ध्यान से देखल जाउ त शंकर के अर्थ सबके कल्याण करे वाला होखेला. उनके 108 नाम के ही देखि लिहल जाउ, ओहमे गणनाथ (गण लोग के स्वामी), पशुपति (जानवरन के स्वामी), जटाधरः (जटा रखे वाला), वृषभारूढ़ः (बैल पर सवारी करे वाला), अउर वृषांकः (बैल के चिह्न के ध्वजा रखेवाला) अइसन नाम समाज में ओहि लोगन के करीब बा, जे साधन सम्पन्न नइखे. मतलब भगवान भोलेनाथ एहि लोग के भी प्रिय हउवन.

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ईहे ना, अब आगे देखीं कि शरीर से भी जे सक्षम नइखे चाहें प्रकृति के कारण अजीब शरीर वाला बनि गईल बा, शंकर जी खुदे ओकरा बीच के बाड़े. शास्त्र उनकर जवन नाम बतावे ला, ओहमे विरुपाक्षः (विचित्र अथवा तीन आंखि वाला) अउर ललाटाक्षः (जेकर माथा पर आंखि होखे) भी शामिल बा. अउर आगे घर- समाज में जवन कम महत्व के सामान बा, शिव जी के प्रिय बा. उनकर नाम में खटवांगी (खटिया के एगो पाया रखेवाला) शामिल बा त शूलपाणि के संगे भगवान शंकर के खण्डपरशु (टूटहा फरसा रखे वाला) भी कहल जाला. उनकर शृंगार सभे जानेला कि भभूति यानी भस्म हवे. एही से शिव के एगो नाम ‘भस्मोद्धूलितविग्रह’ भी हवे. ई कुछ उदाहरण हवे भगवान शिव के अइसना लोग के करीब होखला के, जेकरा लगे पूजा-पाठ तक के कवनो सामग्री नइखे.

भोलेनाथ के पूजा खातिर कवनो विशेष तइयारी के जरूरत नइखे, एकर उदाहरण एह कथा से मिल सकेला. एंगो जंगल में आदिवासी शिकारी के शिवमंदिर में फूल, बेलपत्र से शिवलिंग पर पूजा दिखाई दिहल. शिकारी कुछ देर देखत रहि गईल तो रात होखला पर ओकरा शिवमंदिर के सुरक्षा के चिंता होखे लागल. अपना धनुष पर वाण चढ़ा के पहरेदारी करे लागल. सुबह भईल तब अपना संगे शिवजी के भी मांस अर्पित कइके चलि गईल. सबेरे आके पुजारी के लउकल कि इ त अनर्थ हो गईल. पता ना के मंदिर के अपवित्र कइ दिहल. ई कुछ दिन चलत रहल. एक दिन तइयारी कइके पुजारी भोरे में पहुंचले तब शिकारी दिखाई दे गईल. शिकारी के हाथ में धनुष-वाण देखि के डेराइल पुजारी छिपि गइले. बाकिर थोड़े देर में ओकरा के मांस लेके चढ़ावत देखले दब खिसिया गईले. ओने शिकारी के कहनाम रहे कि शिवजी के अकेले छोड़े के अपराध में पुजारी के दंड मिले के चाहीं. भगवान शिव के मामला बिगड़त दिखाई दिहल तब प्रकट होके शिकारी से कहले कि पुजारी के छोड़ि द, हम अपना सुरक्षा के दोसर इंतजाम कइ लेबि. अब पुजारी के चकित होखे के टाइम रहे. शिकायत कइले कि हम त नियम से स्नान-ध्यान के बाद ताजा फल-फूल से पूजा करेंलि, तबो आज के पहिले हमरा के आप दर्शन ना दिहलीं. ऐने तीन-चाप दिन से ई शिकारी मंदिर अपवित्र कइ जात बा अउर आप ओकरा पर प्रसन्न बानीं. ई शिकारी आपके भक्त के मारे चाहत रहल हा, तबो आप चुप बानीं. एह पर शंकर जी के कहनाम रहे कि तूत हमरा से फल पावे के इच्छा से पूजा करत रहल हा. ई शिकारी बिना फल के इच्छा के श्रद्धा भाव से मांस चढ़ावत रहल हा. ऐसे एकरा के हमार जल्दी दर्शन मिल गईल. सांच पूछ त एकरे कारन तोहरे के दर्शन मिलल बा.

कहे के मतलब ईबा कि जवना वर्ग के ओकरा क्रिया कर्म के कारन वंचित मानि लिहल गईलबा, भगवान औघड़ दानी ओकरो ध्यान रखेले. अब देखल जाउ कि तंत्र अइसन साधना में कहल गईल बा कि देवी काली, अष्ट भैरवी, नौ दुर्गा, दस महाविद्या, 64 योगिनी के संगे देवता लोगन में बटुक भैरव, काल भैरव अउर नाग महाराज के त साधना करेके चाहीं, बाकिर यक्षिणी, पिशाचिनी, अप्सरा डाकिनी- शाकिनी अइसन अघोर साधना से बचे के चहीं. परम्परा से बहुत तरह के आदिवासी-जंगलवासी लोग बा. उनकर देवी- देवता भी तरह-तरह के होखेला लोग. अइसना पूजा के लायक डाकिनी-शाकिनी भी भगवान भोलेनाथ के सेवक बाड़ी लोग. एह रूप में शिवजी के प्रार्थना भी कइल गईल बा-
यं डाकिनीशाकिनिकासमाजे निषेव्यमाणं पिशिताशनैश्च.
सदैव भीमादिपदप्रसिद्धं तं शंकरं भक्तहितं नमामि..
अर्थ ईबा कि डाकिनी- शाकिनी अइसन वर्ग अउर भूत- प्रेत भी अगर भक्ति करे, तब भोलेनाथ कृपालु हो सकेले. अब ई तंत्र के कथा बड़ा गंभीर होखेला. इहवां त खाली ई कहे खातिर सहारा लिहल गईल बा कि औघड़ दानी ओह सबपर ज्यादा कृपालु रहेले, जेकरा पर दोसरा के ध्यान कम जाला. अब देखीं सबे कि उनका बियाह में भी बराती के बनल. देवता लोग त दर्शन करत रहे, दूल्हा के संगे त भूते- प्रेत रहले. एहूजा भूत-प्रेत के आध्यात्मिक अर्थ सूक्ष्म शरीर कहल जा सकेला. बाकिर हम ते कहे के चाहत बानीं कि जे सबसे उपेक्षित बा, ऊहो शिव के हासिल कइसकेला. आखिर कहलेबा-
न जानामि योगं जपं नैव पूजां. नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यं.
जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं. प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो..

(डॉ. प्रभात ओझा स्वतंत्र लेखक हैं, आलेख में लिखे विचार उनके निजी हैं.)

Tags: Article in Bhojpuri, Bhojpuri

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